आत्मा


एक आत्मा अपने माता-पिता का चयन कैसे करती है ?

आत्मा ने जो शरीर धारण कर रखा है, मृत्यु के समय उस शरीर का जो भी karmic balance होता है, उस आधार पर आत्मा matching parents ढूंढती है | अगर मैचिंग माता पिता उपलब्ध हैं तो आत्मा तुरंत नया शरीर धारण कर लेती है | अगर नहीं तो आत्मा स्वर्ग या नरक में वास करती है सिर्फ उतने समय के […]


आत्मा अमर है तो लोग मरने से क्यों डरते हैं ?

जब तक जीव को आत्मज्ञान नहीं हो जाता, वह दोनों जन्म और मृत्यु को कौतूहल से देखता है | मौत का डर जीव को हर पल इसलिए सताता है कि मेहनत कर जो इकट्ठा किया वह सब छूट जाएगा | सिर्फ धन संपदा ही नहीं, अपनों का साथ भी |   आत्मा अजर अमर है, शरीर नहीं | शरीर तो […]


जीव में ईश्वर किस प्रकार समाविष्ट है ?

इस प्रकरण को अद्वैत वेदांत की दृष्टि से देखें | जब ब्रह्माण्ड की रचना/उत्पत्ति नहीं हुई थी उस समय सिर्फ और सिर्फ ब्रह्म exist करते थे | ब्रह्माण्ड बना और धीरे धीरे सूर्य और धरती प्रकट हो गए | जो आत्माएं ब्रह्माण्ड में विचरण कर रही थी, जैसे ही उन्हें जीवन के योग्य धरती मिली उन्होंने शरीर धारण करना शुरू […]


गहरी निद्रा की अवस्था में हमारी आत्मा की स्थित क्या होती है ?

जब से मनुष्य ने होश संभाला है आत्मा दृष्टा की भांति सूर्य के गर्भ में मग्न रहती है | Remote control से हमारे हृदय को चलाती है | वह भी जन्म के समय स्विच ON और आयु पूरी होने पर स्विच OFF | बीच में कोई छेड़खानी नहीं |   सब कुछ यथावत चलता रहता है बिना किसी व्यवधान के […]


मृत परिजन की आत्मा से कैसे बात करें ?

भगवान के दरबार में कोई ऐसा साधन नहीं जहां एक आत्मा दूसरी आत्मा से बात कर सके | इस जन्म में वो तुम्हारे पिता थे | मृत्यु के साथ रिश्ता खत्म | क्यों ? पता नहीं मृत्यु के बाद तुम्हारे पिता की आत्मा कहां और किस घर में दूसरा शरीर लेगी |   नया जीवन नया परिवार | पिछले रिश्ते […]


क्या आत्मा सच में होता है ?

आत्मा होती है इस बात को इस तरह से समझें – जब ब्रह्माण्ड उत्पन्न होता है तो वेद/उपनिषद कहते है कि ब्रह्म स्वयं को big bang से फोड़ते हैं | अब यह ब्रह्म जिन्हें हम भगवान कहते हैं, ये हैं क्या ? ब्रह्माण्ड में मौजूद सभी आत्माएं प्रलय के समय शुद्ध रूप पा जाती हैं | अगर कोई आत्मा कीट […]


आत्मा का लक्ष्य क्या होता है ?

ब्रह्मांडीय सफर में जब आत्मा परमात्मा (ब्रह्म) के घर से निकलती है तो अशुद्धियां उसे घेर लेती हैं | आकाशीय सफर में जैसे ही आत्मा को पृथ्वी जैसा ग्रह मिलता है जहां वह शरीर धारण कर सके तो आत्मा का ब्रह्मांडीय सफर हमेशा के लिए अस्त हो जाता है | हमेशा के लिए – क्योंकि आत्मा सूर्य के चंगुल से […]


क्या आत्माओं की संख्या निर्धारित अथवा सीमित नहीं है जो बढ़ती आबादी के साथ आत्माओं की संख्या बढ़ जाती है ?

800 करोड़ लोग धरती पर रहते हैं यानी 800 करोड़ आत्माएं | मनुष्य योनि पशु पक्षियों की योनि के बाद मिलती है | यानि जितने भी पशु पक्षी इस समय धरती पर मौजूद हैं वह एक दिन मनुष्य योनि में आएंगे | जितने भी पेड़ पौधे धरती पर मौजूद हैं वह एक दिन पशु पक्षियों की योनि और फिर मनुष्य […]


आत्मा अजर अमर है तो इतनी सारी नई आत्माएं कहाँ से आ रही हैं ?

धरती पर मात्र 800 करोड़ मनुष्य रहते हैं | असंख्य पशु पक्षी, असंख्य प्रजातियां पेड़ पौधों की और असंख्यों तरह के कीट पतंगे | सभी में आत्माएं मौजूद हैं |   हिंदी में गिनती के अनुसार – पहले सौ, हज़ार, दस हज़ार, लाख, दस लाख, करोड़, दस करोड़, अरब, दस अरब, खरब, 10 खरब, नील, दस नील, पद्म, दस पद्म, […]


क्या सबकी आत्मा अलग-अलग होती है ?

तत्व सभी आत्माओं का एक होता है, बस structure भिन्न | अगर हम बाज़ार से 1000 pieces की puzzle लाते हैं तो पजल का हर individual टुकड़ा अलग होता है लेकिन उसका composition same | सभी टुकड़े लकड़ी से बने हैं, सिर्फ शक्ल में भिन्न |   प्रलय के बाद भी आत्माएं अपनी individual identity maintain रखती हैं | आत्माएं […]


आत्मा के क्या गुण दोष होते हैं ?

आत्मा में स्वयं के गुण दोष नहीं होते लेकिन जब वह ब्रह्मांडीय सफर में निकलती है तो अशुद्धियां उसे घेर लेती हैं | इन्हीं अशुद्धियां को दूर करने के लिए आत्मा ऐसे ग्रह की खोज में रहती हैं जो जीवन के लिए उपयुक्त हो | और धरती मां पर 84 लाख योनियों का सफर शुरू हो जाता है |   […]


आत्मा और परमात्मा में क्या फर्क है – आत्मा परमात्मा का अंश है तो हम भी परमात्मा ही हुए

आत्मा परमात्मा का अंश है लेकिन अपने ब्रह्मांडीय सफर के दौरान अशुद्धियों से घिर जाता है | हम खुद आत्मा नहीं | हमारी आत्मा तो सूर्य के गर्भ में विद्यमान है और वही से remote control से हमें चलाती है | हम तो मात्र एक जीवन के लिए हैं | मृत्यु के बाद हमारी आत्मा अगले जीवन में क्या शरीर […]


क्या आत्मा हमें देख सकती है ?

मैं एक मनुष्य अपने लिए बाज़ार से एक वस्त्र लाया, पहना – क्या मैं उस वस्त्र को देख पा रहा हूं ? अरे जो वस्त्र मैंने खरीदा और पहना – में उसे देख ना पाऊं, भला ऐसा हो सकता है क्या ?   आत्मा जिसने यह शरीर धारण किया और जो अपने आप में दिव्य शक्ति है, ब्रह्म का एक […]


क्या आत्मा सच में भटकती है ?

सारी आत्माएं सूर्य के गर्भ में रहती हैं | इसका कारण है आत्मा का खुद का temperature 1 करोड़ degrees Celsius से ज्यादा होता है | चांद की दूरी तक भी अगर एक आत्मा पहुंच जाए तो धरती seconds में जल कर राख हो जाएगी | और हम भटकती आत्माओं की बात करते हैं ?   उपनिषदों में आत्माओं के […]


मनुष्य की तरह पशु-पक्षी कीट-पतंगों पेड़-पौधों को मोक्ष प्राप्त करने का अधिकार क्यों नहीं ?

84 लाख योनियों के फेर में 73 लाख योनियां कीट पतंगों, पेड़ पौधों और पशु पक्षी की योनियां में गुजर जाते हैं | मनुष्य रूप में 11 लाख योनियां होती हैं | मनुष्य सूर्यमंडल में सबसे उच्च योनि में स्थापित है | मोक्ष मनुष्य योनि में ही संभव है |   ब्रह्माण्ड में सब कुछ क्रमवार होता है |   […]


क्या स्वार्थपरता आत्मा का हनन करती है ?

जब से आत्मा ब्रह्म से अलग हुई वह दोबारा से जल्दी से जल्दी ब्रह्म से योग करना चाहती है | इसी क्रम में जब उसे धरती मिलती है तो वह शुद्ध होने के लिए 84 लाख योनियों का सफर शुरू कर देती है | मनुष्य योनि में आते ही वह मनुष्य को प्रेरित करती है अध्यात्म के सफर पर जाने […]


क्या बुरी आत्मा होती है ?

आत्मा, ब्रह्म का अंश, एक दिव्य शक्ति और बुरी ? आत्माएं शुद्ध या अशुद्ध तो हो सकती हैं – लेकिन बुरी, कभी नहीं | क्यों ?   आत्माएं जब से ब्रह्म के घर से निकली हैं अशुद्ध हो गई हैं | ब्रह्मांडीय सफर में अनगिनत अशुद्धियां अपने अंदर ले लीं हैं | इन्हीं अशुद्धियां से पीछा छुड़ाने के लिए आत्माएं […]


आत्मा किस प्रकार धिक्कारती है ?

मनुष्य शरीर आत्मा ने धारण किया है अपनी शुद्धि के लिए | हृदय में विद्यमान कृष्ण (हमारी आत्मा), जब भी हम पापकर्म करते हैं तो अन्दर से prompt करते हैं कि ऐसा करना गलत है लेकिन कृष्ण की, आत्मा की आवाज़ को सुनता कौन है ?   अपनी bloated मैं (अहंकार) के कारण हम उस अंदर से आती आवाज को […]


आत्मा और जीव में क्या अंतर है – दोनों की उत्पत्ति कैसे होती है ?

आत्माएं अपने ब्रह्मांडीय सफर में अशुद्धियां ग्रहण कर लेती हैं | जब धरती जीवन ग्रहण करने योग्य हो जाती है तो आत्माएं एक के बाद एक शरीर धारण करना शुरू कर देती हैं |   आत्माएं धरती पर जो शरीर धारण करती हैं – चाहे वह कीट पतंगे का हो, पेड़ पौधों का हो, या पशु पक्षियों का या मनुष्य […]


आत्मा कितनी बार जन्म लेती है ?

आत्मा एक बार भी जन्म नहीं लेती | आत्मा सिर्फ manifest करती है / शरीर धारण करती है | अपना शुद्ध रूप छोड़ जब ब्रह्म से अलग होती है तो धरती ग्रह के मिलते ही 84 लाख योनियों के सफर में उतर जाती है | निचली योनियां पार करते 73 लाख योनियों के फेर से गुजर जाती है और फिर […]


हम जिसे आत्मा कहते हैं क्या वह ऊर्जा है ?

आत्मा एक अद्वितीय एवम् दिव्य ऊर्जा है जो ब्रह्म का अंश भी है | एक ऐसी ऊर्जा जिसका वर्तमान ब्रह्माण्ड को बनाने में महत्वपूर्ण योगदान है | आत्मा ऐसा ऊर्जा स्त्रोत है जिसका खुद का तापमान 1 करोड़ degrees Celsius से ज्यादा है |   सभी तारों के गर्भ में आत्माओं के गुच्छे हैं जो उसे ताप देते हैं | […]


आत्मा अजर अमर है तो क्या अपने सभी जन्म याद रहते हैं ?

आत्मा क्योंकि सनातन, from the beginning of time है, उसे जब से ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति होती है और जब तक प्रलय होती है, सब कुछ ज्ञात है | ब्रह्म की तरह आत्मा भी omnipotent, omnipresent और omniscient है |   ब्रह्माण्ड में हर घटना सुपर massive computer में record होती रहती है जिसे हम कर्म theory कहते हैं | कर्म […]


क्या आत्मा में स्त्री पुरुष का लिंगभेद होता है ?

आत्मा, वह दिव्य ऊर्जा जिसका खुद का temperature 1 करोड़ degrees Celsius है, उसका लिंगभेद ? आत्मा अगर धरती के नजदीक भी आ जाए तो सब कुछ जला कर राख कर देगी | धरती भी नहीं बचेगी |   उपनिषदों की गहराइयों में उतर कर देखो, सब कुछ साफ़ साफ़ नजर आएगा | आत्मा ब्रह्म का अंश है जिसके big […]


क्या इस संसार की सभी आत्माएं परमात्मा का अंश है ?

इस ब्रह्माण्ड में व्याप्त सभी आत्माएं अपने शुद्ध रूप में आधा अंगूठे (अस्थ अंगुष्ठ) का आकार लेती हैं | इसी अस्थ अंगुष्ठ आकार के दिव्य पुंज को हम ब्रह्म (परमात्मा) कहते हैं | एक गेहूं का दाना, एक आत्मा – और ब्रह्माण्ड में व्याप्त पूरे गेहूं की ढेरी परमात्मा |   आत्मा सिर्फ परमात्मा का अंश ही नहीं, हम खुद […]


क्या वृक्ष वनस्पति अनाज के पौधे में जीवात्मा होती है ?

हर आत्मा अपने जीवनकाल में ज्यादा से ज्यादा 84 लाख योनियों के सफर से गुजरती है | आखिरी 11 लाख योनियां मनुष्य रूप में हैं | 73 लाख निचली योनियों में सबसे पहले कीट पतंगों की योनि आती है | जब आत्मा हर तरह के कीट पतंगों का रूप धारण कर लेती है तो पेड़ पौधों की योनि में आती […]


आत्मा और प्राण मेँ क्या सम्बन्ध है दोनोँ ही चेतना हैँ ?

आत्मा प्राण का कारक होती है | आत्मा ने धरती पर शरीर धारण किया | लेकिन उसमें जान कौन फूंकेगा ? जब मां के गर्भ में बच्चा आता है तो उसका ह्रदय कुछ दिनों बाद धड़कना शुरू होता है | सही समय पर आत्मा जो सूर्य के गर्भ में विद्यमान है remote control से हृदय को ON कर देती है […]


आत्मा का वजन कितना होता है ?

पूरे ब्रह्मांड की सभी आत्माएं प्रलय के बाद अस्थ अंगुष्ठ (आधे अंगूठे के आकार) में आ जाती हैं | लेकिन आत्माओं की तादाद इतनी है कि उनका वज़न ज़ीरो ही मानना पड़ेगा |   पूरे ब्रह्मांड में आत्माएं कई महशंख के बराबर हैं | 1 महाशंख = 100,00,00,00,00,00,00,00,00 | तो सोचिए आत्मा का वजन कितना होगा ?   Difference between […]