चाहे कितना भी सच से दूर भाग लें – एक दिन सच का सामना करना ही पड़ेगा


ऐसा इसलिए होता है कि असलियत में हम कुछ हैं ही नहीं, मात्र एक साधन आत्मा के लिए, जिसने हमें, इस शरीर को धारण किया है स्वयं को शुद्ध अवस्था में लाने के लिए |

 

इंसान जब अध्यात्म की राह नहीं पकड़ता और टालता रहता है तो अंततः आत्मा हस्तक्षेप करती है और हमें असलियत से आगाह करवाती है | सत्य यानि अध्यात्म, ब्रह्म का रास्ता | आत्मा हमेशा स्वप्न के माध्यम से अपने संदेश हम तक पहुंचाती है | अगर हम सत्य की राह पर हैं तो वह संदेश हम decipher कर पायेंगे अन्यथा नहीं |

 

सत्य की राह पर चलना हमारी मजबूरी ही सही लेकिन है तो खूबसूरत | उनसे पूछ कर देखें जिन्हें ब्रह्म का साक्षात्कार हो गया | अगर पूरी दुनिया भी उनके नाम कर देंगे तो भी फर्क नहीं पड़ेगा |

 

हर इंसान को जीवन में एक बार झांककर जरूर देखना चाहिए | हम अध्यात्म की राह पर इस जन्म में चले या नहीं, फर्क नहीं पड़ता | क्यों ? ब्रह्म ने मोक्ष की स्थिति तक पहुंचने के लिए मनुष्य रूप में ११ लाख योनियों का सफर दिया है | इस जन्म में नहीं तो अगले में देखेंगे |

 

Right Age to start a Spiritual Journey | आध्यात्मिक ज्ञान लेने की सही उम्र | Vijay Kumar Atma Jnani

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