100 साल तक जीने का रहस्य क्या है ?


जो इंसान positivity (सिर्फ और सिर्फ positive विचारों के अवलोकन) में हर समय व्याप्त है, ऐसा इंसान 100 वर्ष क्या, ज्यादा भी जी सकता है | Negativity इंसान को अंदर से खोखला कर देती है |

 

जीवन का मूल मंत्र है सबके साथ सम व्यवहार करना, औरों के लिए जीना | जब हम निष्काम भाव से दुनिया के लिए जीना शुरू कर देते हैं तो हमारे अंदर का मैं (अहंकार) धीरे धीरे क्षीण पड़ने लगता है | नतीजा – एक स्वस्थ शरीर | अक्सर लोग कह देते हैं भगवान ने जिंदगी औरो के लिए जीने के लिए थोड़े ही दी है | एक बार औरों के लिए जी कर तो देखें, जिंदगी जीने का नजरिया ही बदल जाएगा | 5 वर्ष की आयु से मैं एक दिन भी खुद के लिए नहीं जीया |

 

महावीर, बुद्ध, रामकृष्ण परमहंस और महर्षि रमण कोई स्वार्थी साधक थोड़े ही थे | सब खुद के लिए स्वाध्याय में लीन रहते थे | साथ साथ औरों का भला कैसे होगा उसका भी खयाल रखते थे | अध्यात्म का मतलब ही है औरों के लिए जीना | मैं को जड़ से खत्म करने का यही सबसे बेहतर तरीका है कि हम औरों के लिए जीना सीख जाएं | औरों में घर परिवार भी आ गया | औरों के लिए जीने का मतलब होता है हम जो भी काम करें उसमें किसी का अहित न हो |

 

मान लीजिए आप ऑफिस में पदोन्नति चाहते हैं और इसके लिए आप अपने competitor साथी की (ऑफिस में साथ काम करने वाले) की चुगली/ बुराई हमेशा बॉस से करना शुरू कर दें (इस डर से कहीं आपकी जगह साथी की पदोन्नति न हो जाए) तो यह स्वार्थ भरा कदम सिर्फ आपकी सेहत ही खराब नहीं करेगा, आप negativity की वजह से अंदर से टूटने लगेंगे और यह आपकी घटती उम्र के लक्षण हैं |

 

आध्यात्मिक साधक अपनी positivity और निष्काम भाव को बरकरार रखते हुए, अगर अपनी हृदय की धड़कन को लगभग 48 beats per minute maintain कर लेता है तो वह आराम से अपनी उम्र 150 वर्ष तक ले जा सकता है | सभी भारतीय शास्त्र जीवन को सम भाव से जीने पर जोर देते हैं | क्यों ? शास्त्रानुसार जीवन 100 वर्ष का तो होना ही चाहिए |

 

इसके विपरीत लगभग सभी लोग आज के कलियुग में स्वार्थपूर्णं जीवन जी रहे हैं और कामना करते रहते हैं कि उम्र 100 तक तो पहुंच ही जाए | Hypertension, diabetes जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं लेकिन अपना काम और चाल नहीं सुधारेंगे | रोज थोड़ा व्यायाम करें, gym इत्यादि नहीं, सिर्फ सुबह की jogging या walk ही काफी है | अपने विचारों को शुद्ध रखें और निस्वार्थ भाव से जीवन में आगे बढ़ते जाएं | कोई वजह नहीं आप 100 साल नहीं जियें |

 

ब्रह्म से साक्षात्कार के बाद कितनी आयु शेष? Vijay Kumar Atma Jnani

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