Monthly Archives: May 2024


आध्यात्मिक व्यक्ति विशेष कैसे है ?

जब से धरती बनी और मानव अस्तित्व में आए – कितने महावीर, बुद्ध या महर्षि रमण आए और गए | 800 करोड़ में ऐसे लोगों को अंगुलियों पर भी गिनने की जरूरत नहीं | जितने भी साधक अध्यात्म के रास्ते पर seriously चल रहे हैं – वह विशेष नहीं हुए तो क्या ?   अध्यात्म का सफर कमर तोड़ देता […]


अध्यात्मिकता के विषय को इंसान रुचि से क्यों नहीं लेता या समझता है ?

आत्मा आनंदमय है एक मिथ्या है | क्यों ? जिस आत्मा का खुद का temperature 1 करोड़ degrees Celsius हो और जो सूर्य के गर्भ में स्थित हो वह अशुद्धि की अवस्था में आनंदमय हो ही नहीं सकती | अशुद्ध है तभी तो 84 लाख योनियों के फेर से गुजरती है |   आनंद की स्थिति तो मनुष्य की होती […]


आध्यात्मिक व्यक्ति और आम व्यक्ति में क्या अंतर है ?

हम मनुष्य न अपनी मर्ज़ी से आए न मनुष्य अपनी इच्छा से बने | जब पैदा हो ही गए तो एक दिन बुजुर्गों से मालूम पड़ा कि यह मनुष्य शरीर आत्मा ने धारण किया है और जब तक आत्मा शुद्ध नहीं हो जाती वह बार बार मनुष्य शरीर धारण करती रहेगी और मनुष्य रूप में 11 लाख योनियां हैं | […]


मोह का सही अर्थ क्या होता है – आध्यात्मिक दृष्टि से इसे गलत क्यों कहा जाता है ?

आध्यात्मिक सफर में जब हम अपनी मैं को खत्म करने की कोशिश करेंगे तो अपनों का मोह आड़े हाथों आएगा | करीब करीब सभी इन्द्रियों पर control स्थापित हो जाएगा लेकिन मोह का क्या ?   अपने बड़े होते बच्चों के लिए निर्मोही हो गए लेकिन पोते पोतियों, धेवते धेवतियों का क्या ? स्कूल से आते ही नाना, दादा कहकर […]


पूर्ण समाधि की अवस्था में क्या होता है ?

पूर्ण समाधि निर्विकल्प समाधि की अवस्था को कहते हैं जब हमारे अंदर एक भी विचार नहीं आता है और न ही अंदर से बाहर जाता है और शून्य की स्थिति आ जाती है | यह अवस्था तब आती है जब कर्मों की पूर्ण निर्जरा हो जाए |   कर्म हमेशा के लिए भस्म तो आत्मा अपने शुद्ध रूप में वापस […]


आध्यात्मिक ज्ञान में सब कुछ मिलने पर भी अधूरापन क्यों लगता है ?

आध्यात्मिक सफर की सबसे बड़ी गलती, या कहें सबसे बड़ा भ्रम क्या है – कि हमें वेदों से, उपनिषदों से और भगवद गीता से आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करना है | प्राप्त करना उसी sense में जैसे किताबी ज्ञान प्राप्त किया जाता है |   जब हम भौतिक जगत के ज्ञान/ विज्ञान को पढ़ते है तो कोशिश करते हैं उसे अपनी […]


आत्मा का लक्ष्य क्या होता है ?

ब्रह्मांडीय सफर में जब आत्मा परमात्मा (ब्रह्म) के घर से निकलती है तो अशुद्धियां उसे घेर लेती हैं | आकाशीय सफर में जैसे ही आत्मा को पृथ्वी जैसा ग्रह मिलता है जहां वह शरीर धारण कर सके तो आत्मा का ब्रह्मांडीय सफर हमेशा के लिए अस्त हो जाता है | हमेशा के लिए – क्योंकि आत्मा सूर्य के चंगुल से […]


मृत्यु के बाद शरीर ही नहीं – नरक में यातनाएं किसे दी जाती हैं ?

स्वर्ग और नर्क की धारणा एक धार्मिक मान्यता है | लेकिन अध्यात्म की दृष्टि में भी मृत्यु के समय अगर karmic balance negative (-) है और धरती पर मैचिंग पैरेंट्स नहीं हैं तो आत्मा नरक में वास करती है |   आत्मा का खुद का temperature 1 करोड़ degrees Celsius से अधिक है और अगर उसे नरक यानी सूर्य की […]


विष्णु जी सागर में शेष शैया पर रहते हैं – क्या सागर ही विष्णु लोक हैं ?

अध्यात्म की दृष्टि में विष्णु का शेषनाग की शैय्या पर लेटना यह दर्शाता है कि आत्मतत्व प्राप्त करने के बाद, जन्म और मृत्यु के चक्रव्यूह से मुक्त हुई आत्मा free होकर पूरे ब्रह्माण्ड में विचरण कर सकती है | क्षीरसागर पूरे ब्रह्मांड को दर्शाता है | शेषनाग दर्शाता है पूरा कुण्डलिनी जागरण हो चुका है |   एक बार धरती […]


क्या ब्रह्मा विष्णु महेश वास्तविक भगवान है ?

ब्रह्मा विष्णु और महेश, भगवान (ब्रह्म) की विभूतियों को दिए नाम हैं | जैसे एक ही महिला मां, पत्नी, पुत्री, बहन इत्यादि आभा से सुशोभित है, उपासकों ने अपनी कामना अनुसार ब्रह्म के creative स्वरूप को ब्रह्मा कहा, जो पृथ्वी को चलाता है उसे विष्णु और जो पूरे सिस्टम को संतुलित किए रखता है वह महेश (जिसके पास जन्म और […]


मरने के बाद आत्मा स्वर्ग जाती है या नरक कैसे मालूम चलेगा – जिंदा जा नहीं सकता मरा बता नहीं सकता ?

उपनिषदों में clear वर्णन आता है कि शरीर मृत हो जाने पर अगर आत्मा को तुरंत नया शरीर नहीं मिलता (धरती पर matching parents उपलब्ध ही नहीं हैं) तो वह सीतनिद्रा, शीतनिष्क्रियता (hibernation) की स्थिति में स्वर्ग या नरक में वास करती है – जब तक धरती पर मैचिंग पैरेंट्स उपलब्ध नहीं हो |   मानव शरीर तो मात्र एक […]


पत्नियों को ऊपर जाकर स्वर्ग मिलता है या नर्क ?

जितने भी संबंध धरती पर बनते हैं वे सिर्फ और सिर्फ एक ही जीवन से ताल्लुक रखते हैं | इस समय जो हमारी पत्नी है मृत्यु के बाद उसकी आत्मा न जाने कौन सा शरीर धारण करेगी – महिला या पुरुष का, भारत में करेगी या स्विट्जरलैंड में किसको मालूम है ?   फिर स्वर्ग या नर्क में सिर्फ और […]


जो ज्ञान कृष्ण ने अर्जुन को दिया वही भगवद गीता में लिखा है – क्या कोई कुरुक्षेत्र में नोट कर रहा था ?

प्रश्न क्या इशारा करता है ? कि कृष्ण और अर्जुन महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाकाव्य महाभारत के पात्र हैं | और महर्षि वेदव्यास को महाभारत महाकाव्य लिखने की जरूरत ही क्यों पड़ी ?   वेद आए लेकिन वेदों का संकलन इतना विस्तृत था कि आम इंसान तो क्या, पढ़े लिखे scholars भी वेदों में छिपे रहस्य तक पहुंचने में कठिनाई […]


एक व्यक्ति ने धन कमाना सीखाया, फिर मांस मद्य खाने पीने लगा हथियार रखने लगा – जिसने उसे सिखाया क्या उसे पाप लगेगा ?

भारतीय शास्त्रानुसार अगर हम किसी का अहित सोचते हैं या किसी को गलत सलाह देते हैं तो उस मानव के किए कर्मों का आधा फल हमें भी मिलता है | अगर हमने सीख सही दी लेकिन पाने वाले ने गलत इस्तेमाल किया तो हमे कोई पाप नहीं लगेगा |   ध्यान रहे इसी कारण भगवद गीता में कृष्ण कहते हैं […]


आध्यात्मिक मार्ग में वासनायें किस प्रकार बाधक सिद्ध हो सकती हैं ?

आध्यात्मिक मार्ग पर हमें ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है (फिजिकल + मानसिक ब्रह्मचर्य) | अगर बाल्टी में छेद होगा तो मूलाधार में अमृत इकठ्ठा कैसे होगा ? हम वासनाओं में डूबकर अगर मूलाधार खाली करते रहेंगे तो कुण्डलिनी ऊर्ध्व कैसे होगी ?   अमृतपान सिर्फ कुण्डलिनी के द्वारा हो सकता है | आध्यात्मिक प्रगति के लिए यह बेहद आवश्यक […]


आत्मा अगर नर्क में सजा भुगत चुकी है तो अगले जन्म में पाप की सजा किसलिए ?

मृत्यु के बाद अगर आत्मा को सीतनिद्रा/ शीतनिष्क्रियता (hibernation) की स्थिति में नर्क में स्थान मिलता है तो वह समय कर्मफल भुगतने का नहीं | आत्मा कैसे कर्मफल भुगतेगी ? कर्म तो सिर्फ शरीर ही कर सकता है, आत्मा तो दृष्टा की भांति कार्य करती है |   मृत्यु के समय अगर karmic balance -47 है (पापकर्मों के कारण) जिस […]


कितनी संभावना है राष्ट्रीय पर्व जैसे स्वतंत्रता दिवस लुप्त हो जायेंगे ?

इस बात की संभावना 100% है कि 2034 के बाद स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस नहीं मनाए जाएंगे | वजह साफ है – 10,800 वर्ष के भारतीय इतिहास में ब्रिटिश ने 89 साल भारत पर राज किया |   अगर 100 साल की ज़िंदगी में कोई हमारे घर पर 10 महीने कब्ज़ा कर ले और फिर डर कर भाग जाए […]


अध्यात्म के अनुसार जीवन मोह माया के सिवाय कुछ भी नहीं – जैसे बड़ी हो रही हूँ रिश्तों में दिलचस्पी आने लगी है क्या यह सही है ?

जब से बच्चा होश संभालता है (लगभग 3 ~ 5 की उम्र) तो 2 बातें बच्चा observe करता है | एक माता पिता हैं जो काम करते हैं और सब ठीक ठाक चलता रहता है | कभी कभार मां मंदिर लेकर जाती है और कहती है भगवान को हाथ जोड़ो | बस यहीं से confusion शुरू होता है | ये […]


आत्मा अपने लिए शरीर का चयन कैसे करती है ?

यह automated process है, किसी को कुछ नहीं करना होता | धरती पर मृत्यु होती है, free हुई आत्मा को मृत्यु के समय के karmic balance के आधार पर नया शरीर मिल जाता है | परेशानी तब होती है जब matching parents पूरी धरती पर उपलब्ध नहीं हों | ऐसे में आत्मा स्वर्ग या नर्क में वास करती है उस […]


काम पे ध्यान लगाने के लिये क्या करे ?

जब मैं छोटा था और स्कूल जाता था तो मैंने एक बात notice की | मैं जब जब ब्रह्मचर्य (physical – मानसिक नहीं) का सही से पालन करता था तो मेरी एकाग्रता कई गुना बढ़ जाती थी और पढ़ने में ज्यादा मन लगता था | जब बड़ा होकर अपने business में लग गया तब भी ब्रह्मचर्य का physical स्वरूप गजब […]


आध्यात्मिक होने की प्रक्रिया क्या है ?

आध्यात्मिक हुआ नहीं जाता, सब कुछ पीछे से आता है, पिछले जन्म से | अगर इस जन्म में हम अध्यात्म की राह पकड़ेंगे भी तो किसी के कहने पर नहीं | कोई कितनी भी कोशिश कर ले किसी अन्य को अध्यात्म की राह पर मोड़ ही नहीं सकता, शायद भगवान भी नहीं |   अगर हम पीछे से आध्यात्मिक नहीं […]


स्त्रियों में ऐसे कौन से स्वभाव हैं जो अध्यात्म में उच्च स्तर की तरफ जाने से रोकते हैं ?

अध्यात्म की राह पर नारियों के लिए सबसे बड़ा रोड़ा है मोह | कुछ भी कर लो मोह नहीं छूटेगा | भगवान ने नारियों में मोह इसलिए कूट कूट कर भरा है कि वे घरबार ठीक से संभाल सकें | अगर सड़क पर किसी छोटे बच्चे को रोते देख लें तो ज्यादातर नारियां एक बार जाकर पूछेंगी जरूर – बेटा […]


अध्यात्म तथा अष्टांगयोग अनुसार पुरुष के शरीर में सात चक्र होते हैं – क्या स्त्री के अंदर भी सात चक्र होते हैं ?

अध्यात्म की राह पर भगवान ने पुरुषों और नारियों में कोई भेद नहीं किया | फ़र्क केवल इस बात का है की नारियों में मोह की भावना कूट कूट कर भरी है | यह मोह ही है जिस कारण नारियां घर से बंधी रहती हैं और बच्चों को बखूबी पालने/बड़ा करने में सक्षम हैं |   इसी अड़चन के कारण […]


ध्यान में इश्वर दिखाई दे तो क्या मांगेंगे – जब तक मांग है वह दिखाई भी नहीं देता ?

ईश्वर में ईश धातु – मांगने के उपक्रम को दर्शाती है | तो अध्यात्म में अर्पण,पूजा इत्यादि हमेशा ब्रह्म को होना चाहिए | मनुष्य योनि मिल गई, और ज्यादा क्या चाहिए – कोशिश करें तो मोक्ष भी मिल सकता है |   ब्रह्म निराकार, निर्गुण हैं – दिखेंगे क्या ? ध्यान हमेशा चिंतन के द्वारा होता है – कर्मों की […]


अध्यात्म में चमत्कार क्या होता है?

अध्यात्म में चमत्कार की कोई जगह नहीं – नाममात्र को भी नहीं |   जब महावीर के पास एक बुजुर्ग हाथ में कुछ संभाले, चादर में लपेटे आने को हुए – महावीर ने हाथ के इशारे से दूर से ही रोक दिया | महावीर अवधिज्ञान के द्वारा जान चुके थे कि मृत बालक में जान फूंकवाना चाहता है – महावीर […]


सांसारिक जीवन में रहते हुए कुंडलिनी जागरण करना क्या सही है ?

ब्रह्म ने 11 लाख मनुष्य योनियां दी हैं और साथ में दिया है will power और विवेक, जिसका इस्तेमाल कर मनुष्य जीवन की किसी भी अवस्था में कुण्डलिनी जागरण शुरू कर सकता है |   हम चाहे 5 वर्ष के बालक हों, 25 वर्ष के ब्रह्मचारी या शादीशुदा या 80 वर्ष के बुजुर्ग – कुण्डलिनी जागरण की क्रिया में सभी […]


कुंडलिनी जागरण के दुष्प्रभाव क्या हैं – ऐसा क्यों होता है ?

अगर हम dam को लबालब ऊपर तक भर दें और पावर चैनल्स न खोलें (IITR से civil engineer होने के नाते) मैं दृढ़तापूर्वक कह सकता हूं कि dam टूट/ topple हो सकता है | जब dam बनाया है तो सही ढंग से इस्तेमाल भी करना होगा | इतना ज्यादा इकठ्ठा पानी और उसे रास्ता न दें/channelize न करें तो हानि […]


विवेकानन्द की मृत्यु कम उम्र में क्यों हो गई ?

स्वामी विवेकानंद जब अध्यात्म के गहरे सागर में उतरे तो भारत का अपार गौरवशाली आध्यात्मिक वैभव देख बेहद प्रसन्न हुए | धीरे धीरे उनके अंदर यह बात घर कर गई कि इस विशाल ज्ञान को दुनिया में फैलाना चाहिए | जब 1893 में विश्व धर्म संसद, Chicago में जाने का मौका मिला तो जहाज से जाने के पैसे नहीं थे […]


महावीर गौतम बुद्ध और साईं बाबा कलियुग के भगवान हैं क्या ?

पूरे जगत का करता, बनाने वाला जो सनातन पुरुष है वह साक्षात ब्रह्म है | लेकिन धरती पर भी कुछ ऐसे मानव समय समय पर आते रहते हैं जो अध्यात्म में डूब तत्वज्ञानी बन ही जाते हैं और शरीर छोड़ते ही मोक्ष हो जाता है | महाभारत का धर्मयुद्ध द्वापर और कलियुग के संधि काल के समय हुआ था | […]


घोर कलियुग के आने पर क्या होगा ?

हम फिलहाल घोर कलयुग की अवस्था से गुजर रहे हैं, जिसे संधिकाल भी कह सकते हैं – जाने वाले कलियुग और आने वाले सतयुग का संधिकाल | घोर कलियुग या कहें संधिकाल का अंत महाभारत से होता है जिसे हम आज के समय में तृतीय विश्व युद्ध के नाम से पुकारेंगे |   अगर मैं गलत नहीं तो इस युद्ध […]