Monthly Archives: May 2024


कोई दूधमुहे बच्चे को छोड़ मर कर स्वर्ग पहुंचा तो क्या उसकी आत्मा को शांति मिलेगी ?

हर इंसान एक जीवन के लिए आता है और मृत्यु के बाद हमेशा के लिए गायब | कौन बच्चा, किसका बच्चा, जो रिश्ता था वह तभी तक था जब तक शरीर है | शरीर छूटा, रिश्ता खत्म | आत्मा को मनुष्य के रोने धोने से क्या लेना – आत्मा एक दिव्य शक्ति है जिसका खुद का ताप 1 करोड़ degrees […]


लोगों का ध्यान अध्यात्म की तरफ कब जाता है ?

लोगों का ध्यान अध्यात्म की तरफ कभी नहीं जाता | क्यों ? अध्यात्म का मार्ग इंसान, वर्तमान जीवन के कर्मों के कारण नहीं पकड़ता – सब पीछे से आता है, पिछले जन्म के मृत्यु के समय के कार्मिक फल से | महावीर, बुद्ध, आदि शंकराचार्य, रामकृष्ण परमहंस और महर्षि रमण ने आध्यात्मिक शुरुआत जल्दी शुरू कर दी थी | क्या […]


भगवद गीता में परम गोपनीय ज्ञान क्या है ?

भगवद गीता में परम तो छोड़िए गोपनीय ज्ञान कुछ भी नहीं – सब खुली किताब है | सब से छोटी टीका गीताप्रेस, गोरखपुर की Rs. 5/= में, जिसमें 700 मूल श्लोक हैं मिलती है | कितने लोग ज्ञान पा गए ? जो साधक सत्य का मार्ग पकड़ ले – गीता सार उसके सामने ख़ुद-ब-ख़ुद आ जाएगा | हम हृदय से […]


कर्म कितने प्रकार के होते हैं उनमें श्रेष्ठ कर्म कौन सा है ?

हमे शाब्दिक अर्थों या प्रकार पर कभी नहीं जाना चाहिए ? जो कर्म आध्यात्मिक journey में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है वह है निष्काम कर्मयोग | अपनी मैं (अहंकार) को नस्ट करने के लिए, अपने मोह को खत्म करने के लिए हमें कर्म निष्काम भाव से करने होंगे | फल क्योंकि हमेशा आत्मा का होता है न कि शरीर (मनुष्य) का, […]


कलियुग की वर्तमान आयु कितनी है ?

धरती पर समय का जो मापदंड है वह निर्धारित होता है कर्म से | जैसा 800 करोड़ लोगों का कर्म होगा उसी अनुसार कालचक्र घूमेगा | किसी भी युग की आयु पूरी धरती पर रह रहे लोगों के कर्म तय करते हैं | अगर हम बारीकी से आंखें खोल कर देखें, तो कलियुग का अंत समय निकट है | वैसे […]


कलियुग के अंत में क्या होगा ?

कलियुग का अंत यानि महाभारत और फिर सतयुग का आरंभ | अभी हम संधिकाल/ घोर कलियुग से गुजर रहे हैं और chattam chatta (वर्तमान की महाभारत) का समय नजदीक है शायद 2026 में WW3 की शुरुआत | जब अराजकता अपने चरम पर हो और अधर्म का बोलबाला तो भारतीय दर्शन शास्त्र एक अवतार के आने की दस्तक देता है | […]


हमारा जन्म और मृत्यु कौन निर्धारित करता है ?

जन्म है तो मृत्यु है और मृत्यु होगी तो जन्म भी होगा – यह शाश्वत नियम है | आत्मा शरीर धारण करती है तो जीव का जन्म होता है | मनुष्य एक जीव है यानि उसमे चेतन है | हम पिछले जन्म में मनुष्य थे | मृत्यु के समय जो हमारा karmic balance था उसके आधार पर आत्मा को नया […]


जीव और आत्मा की उत्पत्ति कौन करता है मोक्ष होने पर दोनों का विलीन कहां होता है ?

जब आत्मा जो एक चेतन तत्व है शरीर धारण करती है उसे जीव कहते है | अगर पशु योनि है तो शरीर पशु पक्षी का और मनुष्य योनि है तो हम मनुष्य पैदा होते हैं | आत्मा शाश्वत है ब्रह्म का अंश है, अनादि है | आत्मा स्वयं दृष्टा की भांति काम करती है तो शुद्धि प्राप्त करने के लिए, […]


ब्रह्मचर्य नाश से मस्तिष्क कमजोर हो गया है ब्रह्मचर्य पालन करता हूँ कौनसी आयुर्वेदिक दवा लेनी चाहिए ?

Masturbation ( हस्तमैथुन), porn देखने से, या स्वप्नदोष (nightfall) से कितनी भी हानि शरीर को हो जाए, सही ब्रह्मचर्य के पालन से हम न सिर्फ अपने शरीर को दोबारा हष्ट पुष्ट बना सकते हैं बल्कि पहले स्वामी विवेकानंद और फिर रामकृष्ण परमहंस बन हमेशा के लिए जीवन और मृत्यु के चक्रव्यूह से मुक्त हो सकते हैं |   Experience से […]


हम अवचेतन मन से काम कैसे करवा सकते हैं ?

रात को सोते समय बिस्तर पर लेटे हुए जब हम शवासन की मुद्रा में ध्यान/ चिंतन में उतरते हैं तो शुरु शुरू में नींद घेर लेती है और सो जाते हैं | धीरे धीरे अभ्यास के बाद हम चिंतन में उतरने लगते हैं | एक समय ऐसा भी आ जाता है जब हम सुप्तावस्था में पहुंच जाते हैं | हमें […]


सामान्य गृहस्थ जीवन जीते हुए मोक्ष की प्राप्ति कैसे की जा सकती है ?

आध्यात्मिक जीवन बेहद कठिनाई भरा होता है – पूरा हरा भरा परिवार टूट जाएगा/ बिखर जाएगा | महावीर के साथ यही हुआ और रामकृष्ण परमहंस के साथ भी | रामकृष्ण परमहंस से शादी के बाद मां शारदा हमेशा बेहद परेशान रहीं | अध्यात्म की राह गृहस्थ को बहुत सोच समझकर पकड़नी चाहिए | कुछ भी कर लें, जब मोह निरस्त […]


श्रद्धा और विश्वास एक जैसे भाव लगते हैं फिर एक दूसरे से भिन्न कैसे हैं ?

श्रद्धा या कहें आस्था एक दिन में नहीं आती/ बनती | छोटे से बच्चे का मां के ऊपर विश्वास से कहीं ऊपर आस्था होती है | उसे पूर्ण विश्वास होता है कुछ भी हो जाए, कैसे भी आपदा आए, मां उसे बचा लेगी | यही एक सच्चे साधक का ब्रह्म में पूर्ण विश्वास (आस्था) होता है कि वे उसका साथ […]


नर्क में आत्मा को गर्म तेल की कढ़ाई में डाला जाता है यातनाएं दी जाती है लेकिन गीता अनुसार आत्मा को ना ही काटा या जलाया जा सकता है ?

पुराणों में/ धार्मिक पुस्तकों में न जाने क्या क्या पढ़ने को मिलेगा | इसीलिए अध्यात्म की राह पर चलते साधक को एक भी पुराण एक बार भी नहीं पढ़ना चाहिए | जब तक 37 वर्ष की आयु में ब्रह्म से साक्षात्कार हुआ, मैंने एक भी पुराण को हाथ भी नहीं लगाया | घर में सभी पुराण गीताप्रेस, गोरखपुर के रखे […]


यदि भगवान सर्वव्यापी है तो क्या नरक में भी है ?

भगवान कण कण में व्याप्त हैं, भगवान सर्वव्यापी हैं से हमारा तात्पर्य क्या है – ब्रह्म (परमात्मा) ब्रह्माण्ड में उपस्थित सभी आत्माओं के शुद्ध रूप में संगठित स्वरूप को कहते हैं | ब्रह्माण्ड उत्पन्न होते समय सारी आत्माएं पूरे ब्रह्माण्ड में बिखर गई तो कहावत बन गई – भगवान कण कण में व्याप्त हैं | ब्रह्माण्ड फैलता जा रहा है […]


महाभारत महाकाव्य वास्तविक है या काल्पनिक ?

महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाकाव्य महाभारत भारतीय दर्शन शास्त्रों का एक मूल ग्रंथ है | इस ग्रंथ के प्रतिपादन के पीछे गूढ़ रहस्य है |   जब वेदों और उपनिषदों का ज्ञान आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा था तो महर्षि वेदव्यास ने महाभारत महाकाव्य की रचना के द्वारा कृष्ण अर्जुन संवाद के रूप में (भगवद गीता के रूप […]


सुखी जीवन यानि ज़रूरतमंद लोगों की मदद करना या अपने बारे में सोचना ?

सुखी जीवन के मायने क्या हैं यह महावीर से बेहतर कोई नहीं जानता | महावीर कहा करते थे – प्रवचन बाद में देना पहले कैवल्य ज्ञान तो प्राप्त कर लो | आज 800 करोड़ लोगों में एक भी कैवल्य ज्ञानी नहीं लेकिन ज्ञान बाटने वाले लाखों नहीं करोड़ों |   इस बात का मतलब क्या हुआ – जरूरतमंद लोगों की […]


क्या आपको कोई किताब अथवा कुछ भी पढ़कर संपूर्ण आत्मज्ञान हुआ ?

अगर किताबी ज्ञान से आत्मज्ञान मिल जाता तो प्रभु को 11 लाख मनुष्य योनियां बनाने की जरूरत ही क्या थी ? फिर तो बच्चा पैदा होता बड़े होकर अ आ इ ई सीखता और सीधे भगवद गीता के 700 श्लोकों की पढ़ाई | 25 की उम्र आने तक काम पूरा और मोक्ष हो जाता |   यह बात 100% तय […]


क्या आध्यात्मिकता हारे हुए लोगों के लिए है ?

अध्यात्म हारे हुए नहीं, मन से जीते हुए लोगों की कहानी है | मन से जीता हुआ यानि – जिसे ब्रह्म पर 100% आस्था (श्रद्धा) है और खुद पर भी 100% विश्वास कि मैं अध्यात्म के रास्ते पर चलकर एक दिन ब्रह्म को पा लूंगा – ब्रह्मलीन हो जाऊंगा |   Right Age to start a Spiritual Journey | आध्यात्मिक […]


मानव जीवन का मूल उद्देश्य क्या होना चाहिए ?

मानव जीवन का मूल उद्देश्य मानव नहीं तय करता, वह तो बस एक कपड़े के समान है जो आत्मा ने धारण किया है | अपने ब्रह्मांडीय सफर में आत्मा maximum 11 lakh मनुष्य शरीर धारण करेगी | इस बीच कभी भी मनुष्य अध्यात्म की राह पकड़, ध्यान में उतर – खुद को 84 लाखवी योनि में ला सकता है | […]