Yearly Archives: 2024


ब्रह्मचर्य पालन करने से क्या शक्ति संचय होना संभव है ?

ब्रह्मचर्य पालन के दो रूप हैं – 1. physical ब्रह्मचर्य – शारीरिक संसर्ग से दूर रहना | मन या अन्तःकरण में भी शारीरिक संबंधों का ख्याल नहीं आना चाहिए अन्यथा स्वप्नदोष (nightfall) हो जाएगा | ऐसा करने से वीर्य की शक्ति जिसे अमृत भी कहते हैं मूलाधार में इकट्ठा होने लगेगा, उसी तरह जैसे dam में पानी store किया जाता […]


35 साल के बाद ब्रह्मचर्य शुरू करें तो कितने साल बाद लाभ मिलता है ?

5 वर्ष की उम्र हो या 90 साल की आयु के बुजुर्ग, ब्रह्मचर्य का पालन आपकी शारीरिक क्षमता कई गुना बढ़ा देगा | ब्रह्मचर्य का लाभ लगभग 15 दिन बाद महसूस होने लगेगा | एक नई स्फूर्ति, जोश पूरे शरीर में फ़ैल जाएगा |   साथ ही स्मरण शक्ति और एकाग्रता भी कई गुना बढ़ जाएगी | सब कुछ निर्भर […]


10 साल तक ब्रह्मचर्य का पालन मेमोरी और ज्ञान में कितना परिवर्तन कर सकता है ?

अगर ब्रह्मचर्य का पालन उस तरह से किया जाए जैसा ब्रह्मचर्य के विडियोज में समझाया है तो कोई वजह नहीं जो मुकाम आप पाना चाहते हैं अवश्य पा लेंगे | 10 साल में लगभग highest level की मेंटल पॉवर हमें मिलेगी | हम पढ़ेंगे बाद में, जान पहले जाएंगे |   सही ब्रह्मचर्य का पालन करने से हम समय के […]


ब्रह्मचर्य पालन के दौरान जब वासना बहुत बढ़ जाए तो कैसे शांत करें ?

Physical ब्रह्मचर्य के द्वारा जब हम अपनी सेक्सुअल ऊर्जा को मूलाधार में एकत्रित करना शुरू कर देते हैं तो क्या होगा ? आप के अंदर वासना हिलोरे मारने लगेगी, इतनी की कंट्रोल नहीं होगी | ब्रह्मचर्य के पालन से तो वासना दबनी चाहिए ?   आपने कभी dam में पानी भरते हुए देखा है ? मुझे एक मौका मिला | […]


बिना शादी किये पूरी जिंदगी ब्रह्मचर्य में बिताने के क्या लाभ हो सकते हैं ?

ज़िन्दगी बिताने के लिए नहीं, जीने के लिए दी है ब्रह्म ने | ब्रह्म/आत्मा चाहते हैं हम अध्यात्म की राह पकड़ जल्द से जल्द शुद्ध आत्मा हो जाएं अर्थात मोक्ष ले लें | मनुष्य योनि ब्रह्माण्ड के सूर्य क्षेत्र की सबसे उच्च योनि है, जिस योनि में आत्मा शुद्ध रूप में वापस आ सकती है, किसी निचली योनि में नहीं […]


लड़कियों के लिए ब्रह्मचर्य के क्या नियम हैं ?

अध्यात्म में लिंगभेद की कोई जगह नही | आध्यात्मिक दृष्टि से मोक्ष तक पहुंचने के लिए नारियों को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है | इसलिए धार्मिक पुस्तकों में इस बात का जिक्र आता है कि नारी को पुरुष योनि में आना होगा अध्यात्म के सफर को पूरा करने के लिए | ऐसा क्यों ?   नारियों में मोह पुरुषों के […]


अध्यात्मिक और धार्मिक गुरु की पहचान कैसे करे ?

आध्यात्मिक गुरु (एक ऐसा तत्वज्ञानी जो 84 लाखवी योनि में स्थापित हो) तो मिलेगा नहीं | महावीर बुद्ध चले गए, आदि शंकराचार्य, रामकृष्ण परमहंस और महर्षि रमण भी physically available नहीं | लेकिन सब के कहे वचन तो शास्त्रों, पुस्तकों में उपलब्ध हैं | सत्य के मार्ग पर चलकर कोई भी साधक इतने विशाल शास्त्र भंडार से तत्व के मोती […]


आत्म जागरूकता और आत्म चेतना में अंतर क्या है ?

जब हम बड़े होते हैं तो सुनने में आता है कि हम सिर्फ एक शरीर नहीं, बल्कि एक चेतना हैं, चेतन तत्व जिसे दुनिया आत्मा के नाम से पुकारती है | शुरू में बच्चे को कुछ समझ नहीं आता कि मेरे अंदर कौन हो सकता है और मैं एक साथ दो कैसे हो सकता हूं ?   धीरे धीरे हमें […]


मानव जन्म लेता है – सशरीर से या आत्मा से ?

मानव अपने आप तो पैदा हो नहीं जाता | सूर्य के गर्भ में बैठी आत्मा को जब धरती पर मैचिंग parents मिल जाते हैं तो शिशु मां के गर्भ में आ जाता है लेकिन उसका दिल धड़कना उस समय शुरू होता है जब आत्मा remote control से हृदयगति चालू कर देती है |   आत्मा अपने 84 लाख योनियों के […]


व्यक्ति आजीवन ब्रह्मचारी रह सकता है क्या ?

जब एक साधक निश्चित कर लेता है कि वह अध्यात्म के मार्ग पर बेरोकटोक जाएगा तो 12 वर्ष के अखंड ब्रह्मचर्य का पालन तो उसकी मजबूरी है | और 12 साल के अखंड ब्रह्मचर्य उपरांत अगर वह तत्वज्ञानी बन जाता है तो ब्रह्म से साक्षात्कार के बाद वह ब्रह्मचारी रहेगा या नहीं यह सिर्फ उस केवल्यज्ञानी पर निर्भर करता है […]


भारत में सबसे ज्यादा ज्ञान कहाँ है ?

अगर पुस्तक रूप में देखें तो भारत के मूल शास्त्रों, ग्रंथों का मूल और टीकाएं गीताप्रेस, गोरखपुर के पास संग्रहित हैं | भारतीय दर्शन शास्त्रों जैसे भगवद गीता और 11 Principal उपनिषदों का मूल और टिकाएं, दोनों गीताप्रेस में उपलब्ध हैं | किसी भी साधक को आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए गीताप्रेस के बाहर कहीं नहीं जाना पड़ेगा | जो […]


प्रथ्वी पर सबसे बड़ा ज्ञानी कौन है ?

पृथ्वी पर सबसे बड़ा ज्ञानी महर्षि वेदव्यास हैं जिन्होंने पहले वेदों के ज्ञान को 4 वेदों में संग्रहीत किया | फिर महाभारत महाकाव्य की रचना की जिसका भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन के साथ संवाद, भगवद गीता एक भाग है | कृष्ण महाभारत काव्य के एक पात्र हैं |   जो अनूठा ज्ञान महर्षि वेदव्यास ने पहले ब्रह्म से ग्रहण किया […]


कुंडलिनी शक्ति जागरण के बाद हमेशा जागृत रहती है या खत्म हो जाती है ?

कुण्डलिनी शक्ति एक पुष्प की भांति काम करती है | जब एक कली एक बार पुष्प बन गई उसे दोबारा कली नहीं बनाया जा सकता | यह काम ब्रह्म भी नहीं कर सकते ? क्यों ? Evolution process एक तरफा रास्ता है जो एक बार हो गया सो हो गया, लौटने के सभी रास्ते बंद | इसी लिए कहा गया […]


कुंडलिनी कैसे चैतन्य करें ?

कुंडलिनी को पूरा activate करने के लिए हमें अध्यात्म के रास्ते पर 12 साल का अखंड ब्रह्मचर्य और 12 वर्ष की गहन तपस्या में उतरना होगा | 12 वर्ष की तपस्या यानि ध्यान में चिंतन के माध्यम से निर्विकल्प समाधि की अवस्था में पहुंचना | 12 वर्ष का अखंड ब्रह्मचर्य और ध्यान कैसे करते हैं – दोनों विडियोज आप मेरे […]


क्या पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन सम्भव हैं आज के युग में ?

आज के समय में अखंड ब्रह्मचर्य का पालन बेहद मुश्किल है लेकिन असंभव नहीं | कोई भी आध्यात्मिक साधक जो पूर्ण सत्य की राह पर चलने के लिए तैयार है वह सफलतापूर्वक इस सफर को पूरा कर सकता है | पूर्ण सत्य यानि मौत का भी डर नहीं |   मैं 5 वर्ष की आयु में सत्य की राह पर […]


मृत्यु के पश्चात आत्मा अस्तित्व में है अथवा उसका पुनर्जन्म हो चुका है कैसे पता लगाया जा सकता है ?

ब्रह्म ने ऐसा कोई प्रावधान, साधन नहीं निमित्त किया है जिससे यह मालूम चल सके कि मरने के बाद आत्मा नया शरीर कब और कहां धारण करेगी | ऐसा क्यों ? मृत्यु को प्राप्त मनुष्य के मृत्यु के समय का karmic balance तय करेगा अगला जन्म कहां और कब होगा |   अगर karmic balance के आधार पर धरती पर […]


स्वयं की आंतरिक शक्तियां कैसे जाग्रत करे ?

आध्यात्मिक साधक को आध्यात्मिक सफर में एक बार भी आंतरिक शक्तियों के बारे में नहीं सोचना चाहिए | क्यों ? भगवद गीता में कृष्ण क्या कहते हैं – फल की चिंता न करो | मनुष्य का काम है कर्म करना, क्योंकि फल तो हमेशा मालिक का होता है और शरीर का मालिक कौन है – हमारी आत्मा |   आध्यात्मिक […]


दुनिया में कोई ऐसा आदमी है जिसे पूरी सृष्टि का ज्ञान हो ?

पूरी सृष्टि का ज्ञान तभी संभव है जब इंसान अध्यात्म की राह पर चलकर तत्वज्ञानी, केवल्यज्ञानी हो जाए | जब तक ब्रह्म का साक्षात्कार नहीं होगा सृष्टि बनने और बिगड़ने का क्रम समझ नहीं आयेगा | जैसे ही हम कर्मों की पूर्ण निर्जरा कर देंगे, हम एक शुद्ध आत्मा बन ब्रह्म से हमेशा के लिए जुड़ जाएंगे |   ब्रह्म […]


क्या ज्ञान के माध्यम से कलियुग के प्रभाव से बच सकते हैं ?

कलियुग में कलियुग के प्रभाव से बचने का सिर्फ और सिर्फ एक उपाय है – सत्य के मार्ग पर चलते हुए विवेक का इस्तेमाल | सारी दुनिया (मुख्यत: भारत के लोग) भौतिकवाद (materialism) में ज्यादा फंसे हैं |   जब तक हम अपनी इच्छाओं को लगाम नहीं देंगे, ज्ञान क्या करेगा ? शुद्ध ज्ञान, जिसे प्राप्त कर मनुष्य ब्रह्म तक […]


वर्तमान में सबसे उत्तम ज्ञान कौन दे रहा है ?

सबसे उत्तम आध्यात्मिक ज्ञान गीताप्रेस, गोरखपुर की मात्र दो टीकाओं में उपलब्ध है –   1. श्रीमद्भगवद्गीता – पदच्छेद, अन्वय और साधारण भाषाटीकासहित (17) 2. ईशादि नौ उपनिषद् (66)   दोनों टिकाएं मात्र Rs 160/= में मिल जाएंगी |   मेरा 100% दावा है कि जो साधक इन टीकाओं का ज्ञान अपने अंदर उतार लेगा वह ब्रह्म तक पहुंचने की […]


क्या आत्मज्ञान का बोध होने के बाद जीवन में कुछ शेष रह जाता है ?

आत्मज्ञान प्राप्त करना, कैवल्यज्ञान प्राप्त करना, पूर्ण कुण्डलिनी जागरण, सहस्त्रार का खुलना, ब्रह्मज्ञानी होना, 84 लाखवी योनि में स्थापित होना, तत्वज्ञान प्राप्त करना, तीसरा नेत्र खुलना, छट्ठी ज्ञानेंद्री जागृत होना – सभी एक बात की ओर इशारा करते हैं कि आप ब्रह्म से साक्षात्कार बस करने ही वाले हैं |   ऊपर लिखी सभी बातों का मतलब है कर्मों की […]


श्रीमद्भगवद्गीता गीता का अध्ययन के लिए कोई अच्छी विधि है ? मैंने इसे पढ़ने समझने की कई बार कोशिश की लेकिन असफल रहा

अगर आप सत्य (सिर्फ सच नहीं) के रास्ते पर चलने के लिए सक्षम हैं पूर्णतया 100%, तो आपको श्रीमद्भगवद्गीता के 700 श्लोकों को एक बार भी पढ़ने या समझने की जरूरत नहीं | मैंने 5 वर्ष की आयु में आध्यात्मिक सफर शुरू किया और 37 वर्ष की आयु में ब्रह्म से 2 1/2 घंटे का साक्षात्कार | इस बीच एक […]


मैं भगवद गीता पढ़ना चाहता हूं इसके दर्शन को समझना चाहता हूं – मुझे कौन सा संस्करण पढ़ना चाहिए गीताप्रेस गोरखपुर या भगवद गीता यथारूप ?

गीताप्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित श्रीमद्भगवद्गीता की टीका – श्रीमद्भगवद्गीता – पदच्छेद, अन्वय और साधारण भाषाटीकासहित (17) (मूल्य Rs 60/=) से बेहतर और शानदार टीका पूरे विश्व में कहीं नहीं | अगर आपको संस्कृत का ज्ञान नहीं, तो हिंदी में दिया explanation सही समझ आएगा |   अगर इंग्लिश टीका चाहिए तो वह भी उपलब्ध है | यहां मेरा कहना है, […]


भगवद गीता जैसी कुछ अन्य पुस्तकें क्या हैं जिन्हें हमें पढ़ना चाहिए ?

श्रीमद्भगवद्गीता की पदच्छेद, अन्वय और साधारण भाषाटीकासहित (17) नामक टीका (मूल्य 60/=) जो गीताप्रेस, गोरखपुर में available है, इसके अलावा हर सच्चे साधक को ईशादि नौ उपनिषद् (66) नामक 9 principal उपनिषदों के ऊपर टीका (मूल्य 100/=) अपने पास रखनी चाहिए |   इन दोनों टीकाओं में पूरे ब्रह्मांड का ज्ञान समाया हुआ है | ब्रह्म का साक्षात्कार करने के […]


कौनसी पब्लिकेशन की भगवद गीता पढ़नी चाहिए ?

अगर हम भारतीय दर्शन शास्त्रों जैसे श्रीमद्भगवद्गीता और principal उपनिषदों को पढ़ना और समझना चाहते हैं तो गीताप्रेस, गोरखपुर की निम्लिखित टीकाएं देखें –   1. श्रीमद्भगवद्गीता – पदच्छेद, अन्वय और साधारण भाषाटीकासहित (17) 2. ईशादि नौ उपनिषद् (66)   गीताप्रेस, गोरखपुर के अलावा किसी भी publication house से मुद्रित पुस्तकें खुद पढ़कर, सोच समझकर लें | वैसे ऊपर लिखी […]


महाभारत में वीर अभिमन्यु चक्रव्यूह से बाहर क्यों नहीं निकल सका ?

महाभारत में अभिमन्यु का चक्रव्यूह में घुसना और फिर बाहर न निकल पाना और मारे जाना पूर्णतया symbolic है, रूपक (metaphor) है | हम सभी इंसान इस माया रूपी धरती पर आ तो जाते हैं (पैदा हो जाते हैं) | लेकिन बाहर निकलने का रास्ता किसी को भी नहीं मालूम (हमें जन्म और मृत्यु के चक्रव्यूह से मुक्ति कब मिलेगी, […]


गीता सार की प्रमुख शिक्षाएं कौन सी हैं ?

धरती पर आत्मा 84 लाख योनियों के चक्रव्यूह से गुजरती है | 73 लाख योनियां का लंबा सफर करके पहली बार मनुष्य का रूप धारण करती है | मनुष्य रूप में 11 लाख योनियां होती हैं | पहली योनि से आखिरी योनि तक, आत्मा का एक ही लक्ष्य है – जल्द से जल्द अपने शुद्ध रूप को वापस प्राप्त कर […]


भगवद गीता का सबसे महत्वपूर्ण उपदेश क्या है ?

भगवदगीता का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है मोह कैसे कटे | अपने सगे संबंधियों का मोह, गुरु का मोह, नाना का मोह | मोह का कटना अध्यात्म की राह का आखिरी रोड़ा है | मोह खत्म और हमें तत्वज्ञानी बनने से कोई नहीं रोक सकता |   मोह की महत्ता इस बात से समझ आयेगी कि पूरे भारतवर्ष में अभी तक […]


क्या योग और ध्यान से सब कुछ संभव है ?

योग मूलतः सिद्धांत है जो हमें ब्रह्म से मिलने के लिए प्रेरित करता है | हिंदी में 2 योग 2 = 4 , या कहें 2 जमा 2 बराबर 4 | आत्मा की ब्रह्म से मिलने की चेष्टा को योग कहते हैं | आत्मा हमेशा से ब्रह्म से योग करना चाहती है, जहां से चली थी वहां शीघ्रताशीघ्र वापस पहुंचना […]


जीव में ईश्वर किस प्रकार समाविष्ट है ?

इस प्रकरण को अद्वैत वेदांत की दृष्टि से देखें | जब ब्रह्माण्ड की रचना/उत्पत्ति नहीं हुई थी उस समय सिर्फ और सिर्फ ब्रह्म exist करते थे | ब्रह्माण्ड बना और धीरे धीरे सूर्य और धरती प्रकट हो गए | जो आत्माएं ब्रह्माण्ड में विचरण कर रही थी, जैसे ही उन्हें जीवन के योग्य धरती मिली उन्होंने शरीर धारण करना शुरू […]