Yearly Archives: 2024


कैसे पता करें हम अगले जन्म में क्या बनेंगे ?

इस जन्म के कर्म तय करेंगे कि आत्मा अगला शरीर कहां लेगी, कैसा लेगी ? हम तो बस एक जन्म के लिए हैं | मृत्यु को प्राप्त होते ही खेल खत्म | अगर हमारी आत्मा अगला शरीर यूरोप के किसी Christian परिवार में लेती है तो हमें क्या ? जानकर हमें क्या मिलेगा ?   इस जन्म में जो हमें […]


क्या जन्म के समय मृत्यु का समय पूर्व निश्चित होता है ?

जब हम पैदा होते हैं तो मृत्यु कब होगी यह fixed है | जैसे जैसे हम जीवन में आगे बढ़ते हैं और कर्म करते हैं तो net कर्मफल change होता है | उस आधार पर मृत्यु का समय भी थोड़ा चेंज होगा ही – शायद कुछ seconds या minutes | जिस तरह accounts की balance sheet आगे बढ़ती है उसी […]


इंसान मरने के बाद कहां जाता है ?

जैसे ही इंसान की मृत्यु हुई खेल खत्म – एक ही जीवन मिला था मृत्यु के साथ खत्म हो गया | अगला जीवन तो आत्मा धरेगी – किस जगह लेगी, किस घर में लेगी वह निर्भर होगा मृत्यु के समय के कर्मफल पर | हमारा उस नए शरीर से कुछ लेना देना नहीं |   हमे यह बात ध्यान रखनी […]


आत्मा का वजन कितना होता है ?

पूरे ब्रह्मांड की सभी आत्माएं प्रलय के बाद अस्थ अंगुष्ठ (आधे अंगूठे के आकार) में आ जाती हैं | लेकिन आत्माओं की तादाद इतनी है कि उनका वज़न ज़ीरो ही मानना पड़ेगा |   पूरे ब्रह्मांड में आत्माएं कई महशंख के बराबर हैं | 1 महाशंख = 100,00,00,00,00,00,00,00,00 | तो सोचिए आत्मा का वजन कितना होगा ?   Difference between […]


कोई भी व्यक्ति जन्म से अंधा जन्म से लंगड़ा जन्म से बहरा क्यों होता है ?

हर इंसान के हर पल के कर्मों का हिसाब karmic index के बहिखाते में अंकित हो जाता है | अगर कोई इंसान जन्म से अंधा है तो शास्त्रानुसार उसने पिछले जन्मों में अपनी आंखों का गलत इस्तेमाल किया होगा कि इस जन्म में उसे बुरे कर्मों का सिला मिला | यहां कोई भ्रांति नहीं है – ऐसा ही होता है […]


मरने के बाद दिमाग राख हो जाता है फिर पिछले जन्म का अगले जन्म में याद कैसे रहता है ?

हम जो भी बोलते हैं कहते हैं वह मानसिक तरंगों में परिवर्तित हो ब्रह्माण्ड में घूमता रहता है | एक भी विचार – एक भी वाणी स्वतः नष्ट नहीं होती | इसलिए कहा जाता है अच्छा बोले क्योंकि वह शब्द तरंगे बन वातावरण में हमेशा मौजूद रहते हैं | हमारे मुंह से निकला एक भी अपशब्द खत्म नहीं होता – […]


क्या पिछले जन्म के बारे में जाना जा सकता है ?

अगर पिछले जन्म के रिश्तों का इस जन्म से कुछ गहरा नाता है जो सभी के लिए जानना आवश्यक है तो भगवान ऐसे हालात खुद ही पैदा कर देते हैं कि हमें सब कुछ स्वतः ही मालूम चल जाए |   मैं जब 5 वर्ष का था तो एक घटना घटी | 7 वर्ष की आयु तक भगवान ने मुझे […]


क्या जीवन में ज्ञान मार्ग पर चलना जरूरी है ?

भौतिक जीवन में रोटीरोजी कमाने के लिए ज्ञान उतना जरूरी नहीं – बिना ज्ञान के भी इंसान अपना और परिवार का गुजारा चला सकता है – अनुभव के आधार पर | लेकिन अगर हम जानना चाहें जीवन के छिपे रहस्यों के बारे में – तो ज्ञानमार्ग पर चलना ही होगा | ऐसा क्यों ?   आम इंसान का मस्तिस्क सिर्फ […]


क्या आप पुनर्जन्म या स्वर्ग नरक को मानते हैं ?

पुनर्जन्म, स्वर्ग और नरक आध्यात्मिक जीवन के विभिन्न पहलू हैं | अध्यात्म का मूल है कि आत्मा बार बार कर्मों की निर्जरा के लिए मानव शरीर धारण करती है – इसी को हम पुनर्जन्म कहते हैं जबकि पुनर्जन्म किसी का भी नहीं होता |   इंसान की मृत्यु के बाद आत्मा तुरंत नया शरीर धारण करती है | अगर पूरे […]


क्या पिछले जन्म के कर्मों का भुगतान इस जन्म में भी करना पड़ता है ?

अपने वर्तमान जीवन में अभी तक जो भी मिला, जिस भी इंसान से मुलाक़ात हुई – उसके पीछे पिछले जन्मों का कर्मबंधन है | रिश्ता जड़ से तभी खत्म होता है जब कर्म की निर्जरा हो जाए – अन्यथा वह रिश्ता आगे भी चलता रहेगा, न जाने कितने जीवन तक ?   रही कर्मों की बात – संचित कर्मफल किसी […]


क्या कर्म का फल अगले जन्म में भी मिलता है ?

हमारा मृत्यु के समय कार्मिक balance अगर +29 है तो हमारी आत्मा जो नया शरीर लेगी उसका पैदा होने के वक़्त से ही कार्मिक balance +29 रहेगा | वर्तमान जीवन में हमने कुछ कार्य किए और +2 कर्मफल अर्जित किया तो हमारा वर्तमान में कार्मिक balance हो गया +31 |   जीवन में जो भी कर्मफल अर्जित करेंगे (+) या […]


ब्रह्मांड शुरू होने से पहले आत्माएं कहाँ थीं ?

नया ब्रह्माण्ड शुरू होने से कुछ समय पहले सारी आत्माएं पुराने ब्रह्माण्ड में व्याप्त थी | नया ब्रह्माण्ड शुरू होने का मतलब है पुराने ब्रह्माण्ड की समाप्ति | और यह समाप्ति होती है प्रलय के द्वारा | जब प्रलय आ जाती है तो पूरा ब्रह्माण्ड सिमटने लगता है और अंततः अस्थ अंगुष्ठ (आधे अंगूठे) के आकार में आ जाता है […]


क्या मरने के बाद फिर कहीं और मिलेंगे ?

नहीं, यह हमारा पहला और आखिरी जन्म है | हम मनुष्य एक ही जीवन के लिए आते हैं | अगला शरीर तो हमारी आत्मा धारण करेगी, हम नहीं | इस जन्म में दो इंसान पति पत्नी हैं लेकिन अगले किसी जन्म में जब उन्हीं दोनों आत्माओं की मुलाकात होती है तो हो सकता है एक दादा हो और दूसरा एक […]


सिद्ध गुरु तक कैसे पहुंचें ?

आज भगवान कृष्ण आकर हमारे साथ घर में रहने लगें और साल भर रहें – तो जानते हैं क्या होगा ? प्रभो धन्य भाग हमारे जो आप हमारे घर पधारे – प्रभु हम तो धन्य हो गए – प्रभु न जाने किस जन्म में कौन से अच्छे कर्म किए होंगे जो आप हमारे घर पधारे इत्यादि | ज्ञान की एक […]


कर्म के जाल को कैसे तोड़ें ?

भगवद गीता में कृष्णानुसार कर्म को कर्म के द्वारा ही नष्ट किया जा सकता है | जब हम किसी भी कर्म को निष्काम भाव से करेंगे और कर्मफल की चिंता नहीं करेंगे तो कर्मों की निर्जरा शुरू हो जायेगी और कर्म हमें बांधेंगे नहीं | धीरे धीरे कर्मबंधन कम होने शुरू हो जायेंगे |लेकिन क्या इतना ही काफी होगा ? […]


निष्काम कर्म आज के दौर में कितना सम्भव है ?

निष्काम कर्म यानि कर्म तो करेंगे लेकिन कर्मफल के पीछे नहीं भागेंगे | कोई भी युग हो, कैसा भी समय – निष्काम भाव से काम तो हमेशा ही किया जा सकता है – बस जुनून होना जरूरी है | अगर ठान लिया इसी जीवन में तत्वज्ञान प्राप्त करना है तो कोई है/ या कोई कारण है जो हमें ऐसा करने […]


आज के समय आत्मज्ञान कैसे प्राप्त करें ?

आत्मज्ञान किसी भी समय, किसी भी युग में प्राप्त किया जा सकता है बस अपने अंदर सामर्थ होना चाहिए | भारत में 99.99% लोग जो आत्मज्ञान पाना चाहते हैं, लगभग सभी ने कोई न कोई गुरु बना रखा है | उनकी आत्मज्ञान पाने की आस तो वैसे ही zero हो गई | आत्मज्ञान के रास्ते पर गुरु का क्या काम […]


आत्मबोध कैसे करें श्रीमद्भगवद्गीता के संदर्भ में ?

महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाकाव्य महाभारत में कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया गीतोपदेश एक बहुत ही सार्थक बात से हमारा परिचय कराता है | कृष्ण कहते हैं – अगर तत्वज्ञानी बनना चाहते हो/ अगर मुझ तक पहुंचना चाहते हो तो सत्य का मार्ग पकड़ अपने हृदय से आती आवाज़ को सुनो – यह आवाज़ और किसी की नहीं बल्कि […]


रोज उठना तैयार होना कमाने जाना खाना और सो जाना | क्या यही असली जिंदगी है ?

जब मैं 5 वर्ष का था और भगवान ने मेरी जिंदगी बख्श दी तो मेरे अंदर ये प्रश्न उठा कि यह जीना मरना क्या होता है | लगभग 6 वर्ष की उम्र में बेहद जिज्ञासा उत्पन्न हो गई भगवान को जानने की – सोचा उन्हीं से पूछ लूंगा | अब न जाने भगवान कब मिलेंगे तो घर के सभी बुजुर्गो […]


क्या भारत 2047 से पहले विकसित देश बन सकता है ?

विकसित होने की परिभाषा क्या है ? गगनचुंबी इमारतें, अपनी हैसियत से 20 गुना ज्यादा छापे गए dollars, हर स्त्री के दसियों boyfriend और हर मर्द की बीसियों girlfriend – क्या यही सबूत है विकसित होने का ? यह धन दौलत किस काम की जब आपके देश में संस्कार नहीं ? काफी विदेशी स्त्रियां और मर्द भारतीयों की तरह पवित्र […]


मोक्ष के बाद हम कहां जाते हैं ?

मोक्ष की स्थिति तब आती है जब हमें आत्मसाक्षात्कार हो जाता है |   What comes after Self Realization? आत्मसाक्षात्कार के बाद आत्मा कहां जाती है | Vijay Kumar


मोक्ष का अर्थ और हिन्दू शास्त्रों के अनुसार इसे प्राप्त करने का उपाय ?

मोक्ष यानी जन्म मृत्यु के चक्रव्यूह से हमेशा के लिए छुटकारा | मोक्ष प्राप्ति के लिए अध्यात्म का रास्ता लेना पड़ेगा |   What is Moksha in simple terms? मोक्ष क्या है? Vijay Kumar Atma Jnani


प्रलय के वक्त भगवान हर जीवात्मा को मुक्त करता है फिर मोक्ष के लिए इतनी मेहनत क्यों ?

मुक्ति नहीं चाहिए तो घूमते रहिए ११ लाख मनुष्य योनियों के फेर में | हर जन्म में वही नर्सरी से शुरुआत, बड़े होकर शादी और हर तरह की कलह में उलझते रहिए | प्रलय आने में ५०० करोड़ साल से ज्यादा का समय बाकी है |   ११ लाख योनियों का सफर यानी 1 करोड़ वर्ष की अवधि | धरती […]


क्या मानव जीवन में मोक्ष के लिए गुरु बनाना आवश्यक है ?

भारतीय दर्शन शास्त्रों भगवद गीता और उपनिषदों में यह बात बड़े स्पष्ट ढंग से समझाई गई है कि आध्यात्मिक सफर ध्यान के द्वारा किया जाता है | ध्यान में उतरने का एक ही रास्ता है चिंतन के द्वारा | आध्यात्मिक सफर एक अंदरूनी सफर है | ध्यान में जब साधक चिंतन के मार्ग से उतरेगा, उसमे किसी ब्राह्म व्यक्तित्व का […]


क्या काशी में प्राण त्यागने से मोक्ष प्राप्त होता है ?

काशी में जाकर शरीर त्यागने से अगर मनुष्य जीवन की आखिरी दहलीज पर पहुंच जाता यानी मोक्ष प्राप्त कर लेता तो इस धरती पर क्या यह संभव है कोई भी इंसान और कहीं क्यों मरता | अध्यात्म की दुनिया अगर मगर के परे है |   धार्मिक क्रियाओं में संलग्न किसी भी इंसान को शुरू से आज तक क्या मोक्ष […]


मोक्ष की अवधारणा हिंदू धर्म में संसार चक्र से कैसे संबंधित है ?

संसार चक्र यानि ८४ लाख योनियों का फेर | हर जीव (हर मनुष्य) का धरती पर एक ही गोल होता है – जल्द से जल्द ८४ लाखवी योनि में खुद को स्थापित कर लेना | क्योंकि मनुष्य ब्रह्माण्ड की सबसे उच्च योनि में स्थापित है तो जाहिर है यह काम मनुष्य ही कर पाएंगे |   मोक्ष यानि मायावी नगरी […]


क्या हरे कृष्णा हरे रामा मंत्र से मोक्ष मिल सकता है ?

अगर हम मंत्र शब्द का मतलब समझने की कोशिश करें तो अहसास होगा कि किसी भी चीज़ को बार बार कहने, सुनने से अंततः हम उसके भीतर छिपे मर्म तक पहुंच ही जाते हैं | किसी भी आध्यात्मिक शब्दावली को उसके अर्थ के साथ समझ कर जब हम मनन करते हैं, तो इसी को मंत्र कहते हैं |   तो […]


कलियुग में मोक्ष कैसे प्राप्त कर सकते हैं ?

वर्तमान कलियुग में मोक्ष प्राप्ति के लिए हमें मूलतः दो कार्य करने होंगे –   १. १२ वर्ष की अखंड ब्रह्मचर्य की तपस्या जो कठिन तो है असंभव नहीं   २. १२ वर्ष का अखंड ध्यान चिंतन के माध्यम से – इसमें हमें अपने अंदर उमड़ते हजारों प्रश्नों के उत्तर ढूंढ उन्हें जड़ से खत्म करना होगा | एक स्थिति […]


क्या कलियुग में मोक्ष की प्राप्ति होती है ?

महावीर, बुद्ध, आदि शंकराचार्य, रामकृष्ण परमहंस और महर्षि रमण – सभी मानव भगवान कलियुग में आए | कलियुग में मोक्ष प्राप्ति कठिन तो है – असंभव नहीं | आने वाला निष्कलंक कल्कि अवतार भी कलियुग के संधिकाल में दर्शन देगा |   मोक्ष प्राप्त करने के लिए साधक को अध्यात्म का रास्ता पकड़ 12 वर्ष की ध्यान और अखंड ब्रह्मचर्य […]


जिस प्रकार मनुष्य को मोक्ष प्राप्त करने का अधिकार है अन्य जीवों को क्यों नहीं ?

84 लाख योनियों के फेर में 73 लाख योनियां कीट पतंगों, पेड़ पौधों और पशु पक्षी की योनियां में गुजर जाते हैं | मनुष्य रूप में 11 लाख योनियां होती हैं | मनुष्य सूर्यमंडल में सबसे उच्च योनि में स्थापित है | मोक्ष मनुष्य योनि में ही संभव है |   ब्रह्माण्ड में सब कुछ क्रमवार होता है |   […]