जानवरों के लिए ईश्वर जन्म-मरण स्वर्ग-नर्क की क्या महत्वता है ?

पशु योनि भोग योनि है | पशु योनि में प्रभु, स्वर्ग नरक की कोई कल्पना नहीं | हां जन्म मरण तो वह भी देखते हैं और भुगतते हैं लेकिन उनके पास और चारा भी क्या है | जैसे ही आत्मा पशु योनि छोड़ मनुष्य योनि में आती है तो ईश्वर, जन्म मृत्यु का चक्र और स्वर्ग नरक की कल्पना, सब […]


योग वसिष्ठ में महाप्रलय में सबका मोक्ष बिना यतन हो जाता है – रामसुखदास कहते है अगर कारण शरीर से मोह न छूटे तो नहीं होता ?

योग वशिष्ठ एक प्रामाणिक ग्रंथ है जबकि रामसुखदास जी को तत्वज्ञान प्राप्त नहीं हुआ, उनके रामकृष्ण परमहंस के level पर पहुंचने में अभी वक्त है, शायद अगले जन्म में अपना आध्यात्मिक सफर पूरा कर महर्षि रमण के level पर पहुंच जाएं | उनकी गीता के ऊपर टीका स्पष्ट संकेत देती है | जो योग वशिष्ठ में लिखा है पूर्ण सत्य […]


ध्यान का प्रथम स्तर क्या है ?

अगर आप ध्यान की सही प्रक्रिया को जानते हैं तो यह समझते देर नहीं लगेगी कि ध्यान में कोई स्तर नहीं होते | ध्यान की आवश्यकता होती है जब हम अध्यात्म के रास्ते पर चलकर ब्रह्म तक पहुंचना चाहते हैं, उससे आत्मसाक्षात्कार करना चाहते हैं |   ध्यान यानि अपने अंदर आते हजारों लाखों विचारों को जड़ से खत्म कर […]


चाहे कितना भी सच से दूर भाग लें – एक दिन सच का सामना करना ही पड़ेगा

ऐसा इसलिए होता है कि असलियत में हम कुछ हैं ही नहीं, मात्र एक साधन आत्मा के लिए, जिसने हमें, इस शरीर को धारण किया है स्वयं को शुद्ध अवस्था में लाने के लिए |   इंसान जब अध्यात्म की राह नहीं पकड़ता और टालता रहता है तो अंततः आत्मा हस्तक्षेप करती है और हमें असलियत से आगाह करवाती है […]


ध्यान के बाद उत्तर मिल गया कि कौन हूँ लेकिन धरती पर क्यों भेजा गया – नहीं मिला ?

चौरासी लाख योनियों के फेर को अगर आप भलीभांति समझ लें तो समझ आयेगा कि हमें नहीं बल्कि हमारी आत्मा ने धरती पर शरीर इसलिए धारण किया है कि वह पूर्ण शुद्धि पा सके |   स्वयं से आत्मा दृष्टा की तरह काम करती है | खुद शुद्ध नहीं हो सकती | उसे आवश्यकता पड़ती है एक शरीर धारण करने […]


क्या आत्मा किसी के शरीर में प्रवेश कर अपनी इच्छाओं की पूर्ति करती है ?

आत्मा शरीर में प्रवेश नहीं करती | वह तो शरीर को धारण करती है | जब हम कोट पैंट पहनते हैं हम उसमे प्रवेश नहीं करते बल्कि पहनते हैं | वह हमारे लिए एक आवरण है | उपनिषद् कहते हैं सौर मंडल से जुड़ी सारी आत्माएं सूर्य के गर्भ में या सतह पर रहती हैं | वहीं से वे remote […]


हमारे शरीर में कितनी आत्मा है ?

उपनिषद कहते हैं मनुष्य को चलाने वाली आत्मा सूर्य के गर्भ या सतह पर स्थित है | वहीं से वह रिमोट कंट्रोल से सबकुछ govern करती है | Remote switch से मानव शरीर में operate होने वाला पार्ट है हमारा दिल (हृदय) | Remote switch off, दिल धड़कना बंद कर देगा और मानव शरीर की मृत्यु हो जायेगी |   […]


पुराना शरीर छोड़ने और नया शरीर धारण करने के मध्य आत्मा के साथ क्या होता हैं ?

पुराना शरीर त्यागने के बाद अगर आत्मा को कार्मिक इंडेक्स से मैचिंग माता पिता मिल जाते हैं तो एक भी शण गवाएं बिना आत्मा दूसरा शरीर धारण कर लेती है | अगर मैचिंग parents नहीं available (उपलब्ध) हैं पूरी धरती पर, ८०० करोड़ लोगों में तो आत्मा विश्राम करती है, hibernate करती है स्वर्ग या नरक में | दोनों स्वर्ग […]


क्या किसी ने आत्मा देखा है ?

आत्मा को भौतिक आंखों से देखा तो नहीं जा सकता लेकिन आध्यात्मिक जीवन में महसूस किया जा सकता है | मैंने ५ वर्ष की आयु से हृदय से आती आत्मा की आवाज को इस तरह से सुना है जैसे आप और हम आपस में बात करते हैं |   हृदयस्थल से आती इस आवाज की वज़ह से मेरी अपनी आध्यात्मिक […]


आजकल झूठे लोगों की खूब पोल खुल रही है – क्या अभी कलयुग चल रहा है या खत्म होने लगा है ?

हम फिलहाल संधिकाल से गुजर रहे हैं यानि घोर कलयुग की स्थिति | घोर कलयुग का अंत chattam chatta से होता है, जैन धर्म के अनुसार एक ऐसा समय जब एक महाभारत होनी आवश्यक है | बिना महाभारत (वर्ल्ड वार ३) हुए संसार में व्याप्त बुरे कर्म और बुरे लोगों की छटाई संभव नहीं | मेरे अनुमान से २०२६ में […]


अध्यात्मिक उपलब्धि किसे कहते हैं ?

जब हम सत्य के मार्ग पर चलते हुए कर्मों की निर्जरा करते रहते हैं तो कहा जा सकता है कि अमुक साधक की आध्यात्मिक उन्नति हो रही है | कर्मों की पूर्ण निर्जरा का मतलब हुआ रामकृष्ण परमहंस बन जाना, उस स्थिति में पहुंच जाना जब हम एक शुद्ध आत्मा बन जन्म और मृत्यु के चक्र से हमेशा के लिए […]


जीवन में आध्यात्म को जानने की रुचि कब बढ़ती है ?

आध्यात्मिक जिज्ञासा की उत्पत्ति के पीछे एक ही कारण है, हमारी सत्य के मार्ग पर शुरुआत | भौतिक जीवन में जब जब हमारे अंदर सत्य के मार्ग पर चलने की प्रवत्ति बढ़ने लगती है तो हमारी अध्यात्म के प्रति जागरूकता बेहद बढ़ जाती है | यह सत्य ही है जो हमें सीधा ब्रह्म की तरफ मोड़ देता है |   […]


क्या बिना चक्र जागृत किए मुक्ति पाई जा सकती है ?

पानी को गर्म किए बिना क्या भांप बनाई जा सकती है | हां या नहीं ? पहाड़ों पर चढ़े बिना क्या माउंट एवरेस्ट पहुंचा जा सकता है ? मुक्ति के द्वार तक पहुंचने के लिए ब्रह्म ने मनुष्य योनि में १ करोड़ साल का जीवन दिया है, ११ लाख योनियों का लंबा सफर ! मेहनत तो करनी ही होगी | […]


भगवान शिव को नील कंठ क्यों कहते है ?

रामकृष्ण परमहंस की मृत्यु का कारण था अपने कंठ में रोके हुए विष को गले में खुला छोड़ देना, नतीजा – विष के शरीर में फैल जाने के कारण अकाल मृत्यु | रामकृष्ण परमहंस चाहते तो और समय के लिए नीलकंठी बने रह सकते थे लेकिन कोई भी तत्वज्ञानी ऐसा क्यों करेगा, वह तो जल्द से जल्द ब्रह्म से मिलना […]


भगवान् शिव को भोलेनाथ क्यों कहा जाता है ?

भोलापन क्या जाहिर करता है कि उस इंसान के अंदर छल कपट नदारद है, वह धोखा देने की नीयत नहीं रखता | अगर हम समुद्र मंथन की गाथा का सार देखेंगे तो समझ आयेगा कि तत्वज्ञानी और अंततः शिव वही साधक बनता है जो भोला है, मानव कल्याण में लगा है, छल कपट से दूर है | जो साधक दूसरों […]


क्या सच में भगवान शिव भांग पीते हैं – कोई प्रमाण है ?

भारतीय दर्शन में शिव किसे represent करते हैं | शिव यानि एक तत्वज्ञानी, एक साधक जो अध्यात्म में ध्यान के रास्ते उतर आखिरकार ८४ लाखवी योनि में पहुंचने में सफल हो गया | शिव यानि जन्म मृत्यु के चक्रव्यूह से हमेशा के लिए छुटकारा | पुराणों में वर्णित कोई भी कहानी या पात्र क्या सच है ? नहीं | वह […]


मालदीव बायकाट करे या बांग्लादेश या फिर पाकिस्तान – एक दिन इन सभी को अखंड भारत में शामिल होना ही पड़ेगा ?

अखंड भारत तभी संभव है जब कल्कि अवतार का अवतरण हो | ऐसा क्यों ?   क्या आपको ज्ञात है भारत सोने की चिड़िया कब कहलाता था ? राजा विक्रमादित्य के समय में, वो विक्रमादित्य जो सच के सिंहासन पर आरूढ़ था, जिसने एक बार भी झूठ का सहारा नहीं लिया | राजा विक्रमादित्य ने विक्रम संवत चालू किया और […]


किसी संत की वाणी से वातावरण शुद्ध हो सकता है क्या ?

किसी भी तत्वज्ञान प्राप्त संत की वाणी से पूरे वातावरण को ऊर्जा मिलती है | क्यों ? हर तत्वज्ञानी जैसे रामकृष्ण परमहंस या महर्षि रमण हमेशा मानवता के लिए काम करते आए हैं और बिना मांगे या पूछे करते रहेंगे | उन्हें किसी की इजाज़त की जरूरत नहीं | वह हमेशा से औरों के लिए जिए हैं और आगे भी […]


महाभारत ग्रंथ से हमें क्या सीख मिलती है ?

महर्षि वेदव्यास ने महाभारत महाकाव्य की रचना की, उससे हमें क्या ज्ञात होता है –   १. आध्यात्मिक ज्ञान पुस्तकों की भांति न पढ़ा जा सकता है न ही समझा | इस आध्यात्मिक ज्ञान से परिचय कराने के लिए उन्होंने भगवान कृष्ण का भगवद उवाच लिखा |   २. जब अपने धोखा देने पर उतारू हो जाएं तो उनके विरूद्ध […]


कैसे पता चलेगा आत्मज्ञान की प्राप्ति हो गई है ?

शायद खुद कभी भी मालूम नहीं चले लेकिन ब्रह्म खुद आकर बताएंगे यह निश्चित है | जब किसी भी साधक को आत्मज्ञान, ब्रह्मज्ञान प्राप्त हो जाता है तो ब्रह्म का साक्षात्कार १००% निश्चित है | ब्रह्म खुद आकर पहली योनि से ८४ लाखवी योनि का सफर दिव्य दृष्टि से दिखाएंगे और बताएंगे हमने क्या प्राप्त किया है |   ब्रह्म […]


हमें एक भगवान को मानना चाहिए या अनेक को ?

भारतीय दर्शन शास्त्रों जैसे वेद, उपनिषद और भगवद गीता के अनुसार ब्रह्मांड की रचना ब्रह्म के द्वारा हुई | जब ब्रह्मांड उत्पन्न होता है तो ब्रह्म के अलावा ब्रह्मांड में और कोई नहीं था | अगर हम पिछले ब्रह्मांड के समय हुई प्रलय की गतिविधि को देखेंगे तो सब समझ आयेगा |   भगवद गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं […]


भगवान ने ठोस सबूत क्यों नहीं छोड़ा जो साबित करे कि भगवान वास्तविक है ?

भगवान यानि ब्रह्म को जानने के लिए खुद ब्रह्म ने १ करोड़ वर्ष की अवधि तय की है | तब जाकर एक साधक का ब्रह्म से साक्षात्कार हो पाता है | भारतीय दर्शन शास्त्रों के अनुसार ११ लाख योनियों का आध्यात्मिक सफर चिंतन के माध्यम से ध्यान में उतरकर किया जा सकता है | यह एक लम्बी प्रक्रिया है | […]


भगवान को जान जाने से क्या होता है ?

भगवान को जान लेना यानि जीवन के आखिरी छोर पर पहुंच जाना | ब्रह्म के साथ साक्षात्कार यानि जन्म और मृत्यु के चक्रव्यूह से हमेशा के लिए छुटकारा | हम वापस एक शुद्ध आत्मा बन जाते हैं और दोबारा शरीर धारण करने की जरूरत नहीं रह जाती |   भगवान को जानने के लिए ब्रह्म ने खुद ११ लाख योनियां […]


आत्मज्ञान कैसे प्राप्त किया जा सकता है ?

आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए हमें भरतवंशियों के ऐतिहासिक आत्मज्ञानियों के जीवन को खंगालना चाहिए | एक समय था जब भक्तियोग के मार्ग पर चलकर आत्मज्ञान प्राप्त किया जा सकता था लेकिन रामकृष्ण परमहंस को इसमें कठिनाई महसूस हुई | उन्होंने अपना मार्ग बदल लिया – भक्तियोग से ज्ञान योग | ऐसा क्यों ?   आज के कलयुग में सिर्फ […]


हमेशा जवान बने रहने की संजीवनी बूटी कौन सी है जो 80 की उम्र में भी कायम रखेगी मर्दानगी ?

अखंड ब्रह्मचर्य (अमृतपान) का पालन कर कोई भी इंसान पूरे जीवन एक नई ऊर्जा, व्यक्तित्व का संचालन अपने भीतर कर सकता है | ब्रह्मचर्य की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ३२ वर्ष की छोटी आयु में ब्रह्मसूत्रों की रचना कर आदि शंकराचार्य हमेशा के लिए ब्रह्म में लीन हो गए |   ब्रह्मचर्य का […]


क्या यौन ऊर्जा एक दिव्य शक्ति है ?

पुरुषों में जो वीर्य होता है उसे ही भारतीय शास्त्रों में अमृत का नाम दिया गया है | यह ध्यान रहे अमृतपान उस तरह से नहीं किया जाता जैसे हम किसी भी तरल पदार्थ को ग्रहण करते हैं | अमृतपान सिर्फ और सिर्फ कुण्डलिनी के द्वारा होता है और अमृत कुण्डलिनी में ऊपर की ओर उठाया जाता है | यह […]


क्या ईश्वर सिर्फ दृष्टा है ?

ब्रह्म जिसका आकार सिर्फ अस्थ अंगुष्ठ (आधे अंगूठे) के बराबर है, आप उससे क्या चाहते हैं ? इतना अद्वितीय ब्रह्माण्ड बना दिया, क्या यह काफी नहीं | ब्रह्म ब्रह्माण्ड रचने के बाद धर्म और कर्म के द्वारा ब्रह्माण्ड को चलने के लिए छोड़ देता है |   ब्रह्म का स्वरूप हमेशा से दृष्टा का है, इसी कारण ब्रह्म ने मनुष्यों […]


भगवन किस के आगे झुक जाता है ?

भगवान ब्रह्म सिर्फ और सिर्फ उन्हीं साधकों को अपनी day-to-day counseling देने के लिए चुनता है जिन पर उसे भरोसा होता है कि वे अपना आध्यात्मिक सफर पूरा कर रामकृष्ण परमहंस या महर्षि रमण बनने में कामयाब होंगे | ऐसा क्यों ? ऐसा सिर्फ इसलिए होता है क्योंकि ब्रह्म ने आध्यात्मिक सफर पूरा करने की छूट ८०० करोड़ लोगों में […]


ध्यान की परम सीमा तक जाने के लिए गुरु कितने जरूरी हैं – अगर गुरू नहीं मिल पा रहे तो क्या करे ?

अध्यात्म के क्षेत्र में गुरु की कोई आवश्यकता नहीं | भगवद गीता में कृष्ण कितना स्पष्ट बताते हैं कि गुरु किया तो आध्यात्मिक उन्नति वहीं रुक जाएगी | क्यों ? गुरु बनाने के बाद हमारा ध्यान गुरु की बातों पर होगा न कि खुद के आध्यात्मिक सफर पर | आखिरकार गुरु तत्वदर्शी होना चाहिए अन्यथा क्या पढ़ाएगा ?   किस […]


संसार में ईश्वर है तो दिखाई क्यों नहीं देता – हम उसे महसूस क्यों नहीं कर पाते ?

हमें तो ब्रह्म को पाना है उसमे हमेशा के लिए लीन हो जाना है, तो ब्रह्म को साक्षात देखने या महसूस करने की इच्छा किसलिए ? जब एक बीज से पौधा उगता है तो क्या इस क्रिया में हमें भगवान का अदृश्य हाथ नजर नहीं आता | हमारा हृदय २४*७*३६५ धड़कता रहता है कभी rest नहीं मांगता या लेता, फिर […]