जिंदगी जीने का सबसे अच्छा तरीका क्या हो सकता है ?

ज़िन्दगी जीने के लिए (पास करने के लिए नहीं) २ बाते जरूरी हैं –   १. हमारा जीवन का लक्ष्य कच्ची उम्र से ही fixed होना चाहिए | ज्यादातर लोगों का यह मानना है कि छोटी उम्र में goal कैसे स्थापित करें | वह तो मां बाप करेंगे और करते भी हैं | छोटे बच्चे को क्या मालूम कि बड़े […]


पूर्व जन्म के कर्म इस जन्म में क्यों मिलते है – क्या पूर्व के अच्छे फल इस जन्म में मिलते है ?

कर्म बाकी हैं तभी तो आत्मा को एक और शरीर धारण करना पड़ता है | अगर इंसान आध्यात्मिक होकर कर्मों की पूर्ण निर्जरा कर ले तो आत्मा पूर्ण शुद्धि प्राप्त कर लेगी | एक शुद्ध हुई आत्मा को शरीर की कोई आवश्यकता नहीं | आत्मा तो शरीर धारण ही तब तक करती है जब तक उसे अशुद्धियों ने जकड़ रखा […]


आत्मा और अंहकार में क्या अंतर है ?

आत्मा ने शरीर धारण किया लेकिन खुद दृष्टा भाव में स्थित रहती है | तो शरीर यानि जीव काम क्यों करेगा ? इसलिए ब्रह्म ने शरीर को अहं (अहंकार) से युक्त किया | अहंकार में डूबा इंसान न जाने कहां कहां भागता रहता है, स्थिर नहीं रहता | अध्यात्म के रास्ते पर चलने के लिए सबसे जरूरी है हम अपने […]


आत्मा किस प्रकार जीव को जीवित रखती है ?

हर आत्मा सूर्य के गर्भ में रहकर मनुष्य को वहीं से remote control से चलाती है | जब बच्चा गर्भ में आता है तो remote switch ON कर देती है और बच्चे का दिल धड़कने लगता है | उसके बाद कर्म theory हमारी जिंदगी govern करती है | जैसा कर्म करेंगे उतने दिन जिएंगे | नशे की लत पड़ जाए […]


क्या एक आत्मा दूसरी आत्मा से बात कर सकती है ?

एक आत्मा को दूसरी आत्मा से बात करने की इजाजत नहीं दी ब्रह्म ने | क्यों ? जब आत्मा दृष्टा की भांति काम करती है तो interaction कैसा और किसलिए ? Interaction करने की वजह भी तो होनी चाहिए | जब आत्मा एक शरीर manifest करती है तो कारण अपने आप उत्पन्न हो जाता है | मूलतः देखा जाए आवाज़ […]


क्या वास्तविक जीवन में आपने कभी आलौकिक शक्तियों का अनुभव किया है?

क्या आप निम्नलिखित शक्तियों को अलौकिक मानते हैं –   १. गुडाकेश हो जाना – ८ घंटे की नींद ३ मिनट में पूरी   २. भगवद गीता और उपनिषदों में निहित ज्ञान ABCD हो जाना   ३. ८४ लाखवी योनि में स्थापित हो जाना हमेशा के लिए   ४. भूख पर असीमित control पा लेना (महीने में २ रोटी)   […]


आप जिन्दगी के मज़े ले रहे हैं या जिन्दगी काट रहे हैं ?

जिस इंसान ने जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित कर लिया और तन्मयता से उसके पीछे जाता है वह जीवन जीता है | जिसका जीवन में कोई goal ही नहीं, वह तो बस time pass कर रहा है | बहुत कम लोग हैं जो जीवन में लक्ष्य बनाते हैं (शायद ५% भी नहीं) | अगर हम जीवन में लक्ष्य नहीं बनाएंगे […]


अपने प्रभु को कैसे प्राप्त करें ?

प्रभु जिन्हें अध्यात्म ब्रह्म (ब्रह्मा नहीं) के नाम से पुकारता है को अगर हम इसी जन्म में पाना चाहते हैं तो हमे सिर्फ और सिर्फ अध्यात्म की राह पकड़नी होगी | ब्रह्म को पा लेना या प्रभु में लीन हो जाना (योग के द्वारा) ही हमारे जीवन का आखिरी और अंतिम उद्देश्य है |   प्रभु को इन संसाधनों से […]


जीवन का सबसे अच्छा मंत्र क्या है ?

जब हम हर बात, हरकत में निहित positive को ढूंढेंगे और negative नज़र ही नहीं आएगा तो हमारी आदत पड़ जाएगी जीवन में हर बात को positive angle से देखने की | धीरे धीरे यह आदत बन जाएगी कि हमें negative कभी नज़र ही नहीं आएगा |   जीवन का सबसे बड़ा मंत्र बस यही है जो JRD Tata को […]


आदमी को ज़िन्दगी भर दुखों से गुजरना पड़ता है – क्या दुःख ही नसीहत में लिखा हैं ?

लाचार ? पूरे ब्रह्मांड के सूर्य खंड में स्थित धरती मां की सबसे उच्च योनि में स्थापित मनुष्य अगर खुद को असहाय, गरीब या लाचार महसूस करे तो – हमें उस प्यारी सी लड़की को देखना चाहिए जिसके दोनों पांव कुछ दरिंदो के कारण ट्रेन के नीचे आने से कट गए और फिर उस धैर्यवान लड़की ने सोचा – बच […]


रावण ने सीता का हरण क्यों किया ?

रावण एक विद्वान ब्राह्मण था | उसकी सबसे बड़ी व्यथा थी उसका घमंड | वह अपने को राम से भी ज्यादा बड़ा योद्धा समझता था लेकिन दुनिया को साबित कैसे करे ? इसी कारण उसने सीता का हरण किया कि छुड़ाने राम आयेगा तो द्वंद युद्ध होगा और मैं अपनी राम के ऊपर जीत दुनिया की नज़रों में साबित कर […]


१३ लाख हिंदू चीन में भगवान की पूजा के बाद कोकरच की चटणी मेंढक की कढी का नेवेध प्रदान करते है ?

चीन को बने कितना समय हुआ है ? Prof Kusumlata Kedia जो एक सीनियर लेखक व यूनिवर्सिटी प्रोफेसर हैं ने अपने YouTube विडियोज में संकलित व्याख्यानों से यह साबित कर दिया है कि चीनी मुख्यतः भरतवंशी हैं | जैसी व्यवस्था, जैसा परिधान या रहने का स्थान – इंसान खुद को वैसे ही ढाल लेता है | बर्फ से ढकी कंदराओं […]


जिंदगी को आसानी से कैसे जिएं ?

जब किसी ने एक पहाड़ों पर परेशानियों के मध्य रह रहे स्वामी जी से पूछा – आप इतना आनंदमय व प्रफुल्लित कैसे रहते हैं तो सीधा सा जवाब था – मेरी आवश्यकताएं लगभग नगण्य, zero हैं | मेरा किसी से competition नहीं, न्यूनतम requirements हैं | जीने के लिए खाता हूं, खाने के लिए नहीं जीता | इस कारण जिंदगी […]


सामाजिक रंजिश और खुन्नस कैसे दूर करें ?

द्वेष, मनमुटाव किसलिए ? अगर हमारा उद्देश्य इसी जीवन में भगवान को पाना है तो वक़्त कहां है ? जो चीज हमें ११ लाख योनियों के सफर में मिलनी है अगर हम उसे इसी जन्म में प्राप्त करना चाहते हैं तो मेहनत करनी होगी | रंजिश के पीछे दूसरे का वैरभाव भी हो सकता है और हमारी खुद की छोटी […]


क्या हम अमर हैं तो किस रूप में ?

मनुष्य रूप सिर्फ एक योनि है, अस्थाई स्वरूप जो हमारी आत्मा ने एक जीवन के लिए धारण किया है | अमरत्व तो आत्मा की property है | हमारी आत्मा चेतन होते हुए भी अशुद्धियों से घिरी है | इन्हीं अशुद्धियों को दूर करने के लिए आत्मा ने हमें धारण किया है | अध्यात्म के रास्ते पर चल कर जब हम […]


स्वस्थ जीवन जीने के बारे में आपका विचार क्या है ?

स्वस्थ रहने के लिए सबसे जरूरी चीज जिसकी आवश्यकता है वह है positivity | हमें हर हालत में हमेशा positive विचार ग्रहण करने चाहिए | जो लोग हमेशा negative बातें करते हैं, अगर हम गौर करेंगे तो पाएंगे कि वह अक्सर बीमार रहते हैं |   हर समय हजारों positive और negative विचार हम invoke करते हैं | यह सिर्फ […]


स्वयं को भटकने से बचाकर अपने लक्ष्य की तरफ कैसे केंद्रित होएं ?

मेरा ५ वर्ष की आयु से लक्ष्य भगवान की खोज था | भटकने का प्रश्न ही कहां उठता है | हां, समय समय पर अपने विवेक को इस्तेमाल करना पड़ता था अन्यथा बिन चाबुक का घोड़ा तो किसी भी direction में दौड़ जाएगा | आजकल देखता हूं, शादीशुदा मर्द बगल से सुंदर लड़की गुजरी नहीं कि मुड़ कर देखने लगते […]


कुछ लोगों के धोखा देने से एक अच्छा व्यक्ति अच्छे लोगों से भी डरा रहता है ?

आज के कलियुग में हम अपनों पर भी भरोसा नहीं कर सकते | इन्हीं बातों के मद्देनजर महर्षि वेदव्यास ने महाभारत महाकाव्य की रचना की, कि अपनों से कैसे लड़ा जाए और जरूरी हो तो अपने नाना भीष्म पितामह और गुरु द्रोणाचार्य के विरूद्ध भी हथियार उठा लेना चाहिए | पूरी भगवद गीता सिर्फ और सिर्फ अपनों से लड़ना सीखाती […]


क्या आप सहमत हैं कि दिखावा करने वाले वास्तव में सुखी नहीं हैं ?

कोई भी इंसान जो सही मायने में अंदर से सुखी है (आनंदित रहता है) वह कभी दिखावे में विश्वास नहीं करता | सो लोगों में यह मान्यता घर कर गई कि जो दिखावा कर रहा है, वास्तव में अंदर से दुखी होगा | यह बात सच भी है क्योंकि ऐसे इंसान के पास सभी भौतिक सुख तो होंगे लेकिन अंदर […]


बरसात की सबसे अच्छी व बुरी यादें क्या हैं – किन चुनौतियों का आपने सामना किया था ?

बरसात आते ही जैन धर्म की चौमासे की प्रथा याद आती है | कितनी रूढ़िवादिता है इस प्रथा में |   पुराने समय में जब सड़कें तो छोड़िए, पगडंडियां भी नहीं होती थी | बरसात के मौसम में जब खेतों व पगडंडियों पर ३ ~ ४ फुट पानी भरा होता था तो जैन मुनियों का चलना मुश्किल हो जाता था […]


आपके पसंदीदा पुस्तकों के नाम क्या हैं ?

दो पुस्तकों को मैं आज भी बहुत value दूंगा क्योंकि अगर ये दोनों किताबें मुझे बचपन में नहीं मिलती तो पता नहीं मेरी आध्यात्मिक उन्नति का क्या होता ?   Napoleon Hill द्वारा लिखित –   १. Think and Grow Rich २. Law of Success   इन दोनों पुस्तकों से मुझे ब्रह्मचर्य क्या होता है और उसका पालन कैसे करना […]


आपने मृत्यु के भय पर कैसे विजय पायी ?

अध्यात्म के रास्ते पर चलते हुए जब यह बात मस्तिष्क में अच्छी तरह जम गई कि हम एक आत्मा हैं न कि एक शरीर तो मृत्यु का भय जड़ से खत्म हो गया | समय जरूर लगा लेकिन मृत्यु का भय फिर लौटकर नहीं आया |   ब्रह्म से साक्षात्कार के बाद तो स्थिति बिल्कुल दृढ़ हो गई | ब्रह्म […]


खुद को motivate रखने के लिये क्या करे ?

जिस दिन हम जीवन में एक लक्ष्य बना लेंगे, हमें motivation की जरूरत महसूस नहीं होगी | क्यों ? मेरा जीवन का लक्ष्य ५ साल की आयु में तय हो गया था | पिछले जन्म की कृपा थी | लक्ष्य था भगवान को जानना | जिस लिए ब्रह्म ने मनुष्य रूप में ११ लाख योनियों का सफर निमित किया है, […]


जीवन का आखिरी लक्ष्य क्या होना चाहिए ?

जीवन का आखिरी लक्ष्य हमारा तो हो ही नहीं सकता | यह मनुष्य जीवन हमारी आत्मा ने लिया है तो लक्ष्य भी उसी का होगा और देखा जाए आत्मा भी नहीं, जीवन का आखिरी लक्ष्य ब्रह्म ने पहले से तय किया हुआ है | हर आत्मा का आखिरी लक्ष्य, ultimate goal of life है अध्यात्म में उतर ब्रह्म को पा […]


प्राचीन भारत में शिक्षा की व्यवस्था क्या थी ?

भारतीय शिक्षा पद्धति हमेशा से अद्वितीय रही है जिसे गुरुकुल या गुरु – शिष्य परंपरा के नाम से जाना जाता है | इस शिक्षा पद्धति के तहत ५ वर्ष की आयु से बच्चे की पढ़ाई/शिक्षा की जिम्मेदारी स्टेट/गुरुकुल की होती थी (स्टेट यानि वह राज्य जहां गुरुकुल स्थापित है) |   यहां पर पढ़ाई और शिक्षा का फर्क समझने की […]


मर्दाना शक्ति को बढ़ाने का सबसे सस्ता और आसान देशी नुस्खा ?

अगर हम ब्रह्मचर्य क्या है, इस शब्द का मतलब समझ सकें तो हम अपनी शरीर की शारीरिक ऊर्जा को शीर्ष पर ले जा सकते हैं | इतना कि आपकी टक्कर का मर्द पूरे गांव, शहर में एक भी नहीं होगा | यह बात की ब्रह्मचर्य का पालन मतलब sexual क्रियाओं से दूर रहना सर्वथा गलत understanding का नतीजा है | […]


ज्यादा सोचने से कैसे बचें ?

जब हम ऐसे काम में लगे/उलझे रहते हैं जो मन माफिक नहीं तो मन भटकता रहता है उलजलूल बातों की तरफ | हम मनुष्य सबसे उच्च योनि में स्थापित हैं | जीवन में हमें एक लक्ष्य अवश्य निर्धारित करना चाहिए | अगर लक्ष्य हमारी पसंद का होगा तो सिर्फ मन लगा कर काम ही नहीं करेंगे बल्कि वक़्त कब गुजर […]


शिक्षा फ्री होना चाहिए या नहीं ?

प्राचीन समय में, राम के समय में भारत में शिक्षा का माध्यम गुरुकुल था जिसे गुरु – शिष्य परंपरा भी कहते थे | ५ वर्ष की कच्ची उम्र में बच्चा गुरुकुल के सुपुर्द कर दिया जाता था १० से १५ वर्षों के लिए | गुरुकुल के आचार्यों के सानिध्य में बच्चा शिक्षा ग्रहण करता था | पूरी शिक्षा की जिम्मेदारी […]


आपके जीने का उद्देश्य क्या है ?

५ वर्ष की आयु में भगवान की खोज में निकल गया | ३१ वर्ष की तपस्या और ३ अगस्त १९९३ को ब्रह्म से २ १/२ घंटे का साक्षात्कार हुआ | ब्रह्म बोले मंत्र देता हूं ३ घंटे में शरीर त्याग कर हमेशा के लिए जन्म मृत्य के चक्र से मुक्त हो जाएगा | मैंने कहा नहीं, कोई और रास्ता नहीं […]


मोह माया किसे कहा है – माया का संसार कैसा है ?

मोह हम अपनो से करते हैं | अगर मोह नहीं होता तो मां बच्चा पैदा कर सड़क पर छोड़ देती | पिता घर के घरचों के लिए पैसों का इंतजाम क्यों करते | मोह अपनों को परिवार से जोड़ता है | यह मोह ही है कोई महिला सड़क के किनारे रोते हुए बच्चे को देख उसका कुशलक्षेम पूछने पहुंच जाती […]