हिन्दू कहते हैं प्रारब्ध की वजह से दुःख भोगने पड़ते हैं – क्या प्रारब्ध काटने की शक्ति किसी के पास नहीं ?

प्रारब्ध कर्म कर्मों का वह हिस्सा है जो अभी फलित होना बाकी हैं | जब बच्चा पैदा होता है तो ज्यादातर संचित कर्म फलित हो जाते हैं और बच्चे को उसी अनुसार जन्म मिलता है कुम्हार के घर में या राजा के इत्यादि | प्रारब्ध ब्रह्म द्वारा रोका हुआ वो कर्मफल हैं जो कभी भी फलित हो सकता है, इस […]


किसी ने भगवान कृष्ण के दर्शन किए हैं ?

मैंने अपना आध्यात्मिक सफर ६ १/२ वर्ष की आयु में शुरू किया | मेरी बड़ी तीव्र इच्छा थी कि भगवान कृष्ण मिल जाएं तो अपने प्रश्नों के उत्तर पूंछ लूं | एक दिन अहसास हुआ कृष्ण तो बहुत पहले आए थे और उनका ज्ञान भगवद गीता में उपलब्ध है |   जब गीता प्रेस, ऋषिकेश जाना हुआ तो देखा एक […]


भगवान विष्णु के कुछ चौंकाने वाले तथ्य क्या हैं ?

अगर हम समुद्र मंथन की गाथा का अवलोकन करें तो पाएंगे कि आध्यात्मिक साधक जब अपने विचारों पर पूर्ण control स्थापित कर जब निर्विकल्प समाधि की अवस्था में पहुंचता है तो वह शिव कहलाता है | शिव यानि नीलकंठी, जिसने विष अपने गले में धारण किया हुआ है और गले में पड़े सर्प यानि जिसकी कुण्डलिनी पूरी जागृत हो गई […]


महाभारत के युद्ध में श्री कृष्ण ने गीता उपदेश अर्जुन को कितने समय में दिया था ?

महाभारत महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित एक बहुमूल्य भारतीय ग्रंथ महाकाव्य है और कृष्ण इस महाकाव्य के एक पात्र | कृष्ण के द्वारा महर्षि वेदव्यास कहना चाहते हैं कि जब अपने ही अधर्म का साथ देने लगें, तो धर्मयुद्ध करना ही होगा | कलियुग में आप ब्राह्म शक्तियों से तो लड़ सकते हैं लेकिन तब क्या जब अपने ही वार करने […]


अर्जुन का दिव्य रथ किसने दिया ?

अगर आप आध्यात्मिक हैं और भगवान की खोज में आगे बढ़ना चाहते हैं तो कभी ठहर कर सोचिए –   १. अर्जुन वाकई में कौन है ?   २. कृष्ण अर्जुन के सारथी क्यों ?   ३. कृष्ण तो महाभारत महाकाव्य के पात्र हैं, इससे ज्यादा कुछ नहीं |   ४. महर्षि वेदव्यास ने महाभारत महाकाव्य की रचना की क्यों […]


ध्यान करने के बाद सिरदर्द क्यों होता है ?

आम साधक जब आध्यात्मिक मार्ग में आगे बढ़ता है तो अक्सर सिरदर्द का शिकार हो जाता है | इसका कारण है – आम इंसान अपना मस्तिष्क २ ~ ३% इस्तेमाल करता है | बाकी ९७ ~ ९८% जन्म से बंद है | बंद पड़ा मस्तिष्क का हिस्सा सिर्फ और सिर्फ कुण्डलिनी के जागरण और चक्रों के खुलने से directly connected […]


मुझे कौन सी भगवद गीता पढ़नी चाहिए ?

अगर हम इस जीवन में अध्यात्म के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहते हैं तो हमें सत्य का मार्ग लेना होगा | झूठ का सहारा लेकर हम आध्यात्मिक उन्नति की उम्मीद नहीं रख सकते | आखिरी तत्वज्ञानी इस धरती पर महर्षि रमण थे जो १९५० में अपना शरीर त्याग गए | उसके बाद कोई तत्वज्ञानी धरती पर मौजूद नहीं | क्यों […]


इस कलियुग में आत्मज्ञानी कैसे बन सकता हूँ ?

वर्तमान योनि में आत्मज्ञान, ब्रह्मज्ञान, तत्वज्ञान या कैवल्य ज्ञान प्राप्त करने के लिए हमें निम्न करना होगा –   १. सत्य के मार्ग पर चलना (१००%)   २. भगवान में पूर्ण श्रद्धा (१००%)   ३. ध्यान में उतर कर्मों की पूर्ण निर्जरा (१००%)   ४. ज्ञान योग के द्वारा भगवद गीता के मर्म को समझना   ५. ज्ञान योग के […]


कलयुग का अंत आ रहा है दुनिया की जनसंख्या भी घट जाएगी – क्या हिंदू समाज जिसकी आस्था ईश्वर में है बच जाएगा ?

अभी हम संधिकाल से गुजर रहे हैं | आने वाले तृतीय विश्व युद्ध में पूरी धरती की २०% आबादी निबट जाएगी | कौन बचेगा कौन नहीं, यह निर्धारित करेगा हमारा कर्म | अगर हमारा karmic index पुण्य (positive) है तो जिंदा रहने के पूरे chances हैं | अगर negative (पाप से भरपूर) तो भगवान ही बचाए | हर मनुष्य का […]


क्या किसी के द्वारा दी गयी दुआ या बद्दुआ फलती है ?

आध्यात्मिक दृष्टि से हम एक आत्मा हैं | एक शरीर के अंदर काबलियत नहीं कि वह किसी दूसरे शरीर को कोस सके लेकिन हर आत्मा दूसरी आत्मा का बुरा भला चाह सकती है | यह हकीकत है |   हर दुआ या बद्दुआ फलती है | हमारे आध्यात्मिक शास्त्र कहते हैं किसी को बद्दुआ देने से बचना चाहिए क्योंकि किसी […]


श्रद्धा और आदर में क्या अंतर है ?

जिसे हम देख नहीं सकते, जो अदृश्य है जैसे भगवान – उस के प्रति हम श्रृद्धा रखते हैं | हम उसे जानते नहीं, कभी देखा नहीं, फिर भी उसके होने में पूर्ण विश्वास है – इसी को श्रृद्धा कहते हैं | वह है – यह मानकर उसे समर्पित रहते हैं, उसकी पूजा करते हैं |   आदर हम भौतिक जगत […]


क्या 2028 तक वाकई में दुनियां खत्म हो जाएगी ?

बोलचाल की भाषा में लोग जिसे दुनिया का अंत कहते हैं वह आने वाले समय की विभीषिका के बारे में बात कर रहे होते हैं | कलियुग का अंत निकट है और सतयुग आने को है | इस बीच में होगी chattam chatta (जैन धर्म के हिसाब से), एक ऐसा भीषण युद्ध जिसे महा महाभारत की उपाधि दे दी जाएगी […]


जीवन का क्या अर्थ है – हमारे अस्तित्व का अंतिम उद्देश्य क्या है ?

जीवन के गूढ़ रहस्य सिर्फ और सिर्फ अध्यात्म में छिपे हैं | भारतीय दर्शन शास्त्र कहते हैं यह जीवन हमारी आत्मा ने लिया है जो अजर अमर है | आत्मा स्वयं की शुद्धि स्वयं नहीं कर सकती, इसलिए वह एक के बाद एक शरीर धारण करती है जिससे कर्मों की पूर्ण निर्जरा हो सके और आत्मा अपने शुद्ध स्वरूप में […]


हम इस धरती पर क्यों आए – उद्देश्य क्या है ?

ब्रह्म प्रस्फुटित हुए Big Bang के द्वारा और नया ब्रह्माण्ड अस्तित्व में आ गया | सभी आत्माएं पूरे ब्रह्माण्ड में फैलती जा रही हैं | इसी ब्रह्मांडीय सफर में आत्माएं अशुद्धियां अपने अंदर ले लेती हैं | इन अशुद्धियां से निवृत होने के लिए आत्माएं धरती मां जैसे planet ढूंढती हैं जहां वें ८४ लाख योनियों के सफर पर जा […]


ध्यान करने के परिणामों को महसूस करने में कितना समय लगता है?

ध्यान में उतरने का सही तरीका चिंतन का माध्यम है | हम ध्यान २४ घंटे, हफ्ते के सात दिन और साल के ३६५ दिन लगातार एक पल भी रुके बिना कर सकते हैं | अगर ध्यान की सही विधि आ जाए तो स्वामी विवेकानंद बनने में १२ वर्ष ही लगेंगे |   ध्यान का कोई परिणाम नहीं होता, बस आप […]


काम को अधिक महत्व देना चाहिए कि पूजा पाठ को ?

हम जीवन के किसी भी पड़ाव में हों, काम अथवा कर्म करना हमारी नियति है क्योंकि कर्म के बिना गुजारा नहीं | सांस लेना भी एक प्रकार का कर्म ही है | अकर्मण्यता कोई बचने का रास्ता नहीं, कर्म तो करना ही पड़ेगा | Student हैं तो पढ़ना पड़ेगा, और गृहस्थ हैं तो रोटी रोज़ी की व्यवस्था तो करनी ही […]


अगर ईश्वर की नज़र हर वक्त हर जगह पर है तो इंसान जुर्म क्यों करता है ?

नास्तिक होना पाप कर्म की category में नहीं आता | जब आपने कोई पाप किया ही नहीं तो आपको कर्मों की दुनियां में negative marking क्यों मिलेगी ? आप आस्तिक हैं भगवान के होने में विश्वास रखते हैं अच्छी बात है | लेकिन अगर आप भगवान के होने में इसलिए विश्वास नहीं रखते क्योंकि वह साकार नहीं, दिखाई नहीं देता, […]


कर्मो का जिम्मेदार कौन है आप या परमात्मा ?

ब्रह्म एक दृष्टा की भांति कार्य करते हैं | ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के बाद पूरी सृष्टि को छोड़ देते हैं धर्म और कर्म के सहारे | धर्म हर जीव के साथ जन्म से विद्यमान है | तभी हम पशुओं से भिन्न हैं | जीवन का हर पल, धर्म हमें govern (control) करता है |   कर्म ब्रह्माण्ड का मूल सिद्धांत […]


छट्ठी इंद्री जगाने के लिए क्या करना जरूरी है ?

छठी इंद्री, पूर्ण कुण्डलिनी जागरण, सातों चक्रों का खुलना, तत्वज्ञान प्राप्त होना, ब्रह्मज्ञानी बनना – सभी एक ही बात कहते हैं कि मनुष्य रूप में जन्म मृत्यु का भ्रमण अब समाप्त हो गया और ८४ लाखवी योनि में पहुंच आत्मा अपने शुद्ध रूप में वापस आ गई |   यह संभव हो पाता है जब साधक अध्यात्म के रास्ते पर […]


क्या ब्रह्मचर्य से हाइट बढ़ती है ?

अखंड ब्रह्मचर्य के पालन से ब्रह्मांड की सबसे ताकतवर शक्ति, sexual energy ( जिसमें बच्चा पैदा करने की क्षमता है) हमारे मूलाधार में इकट्ठा होती रहती है | आध्यात्मिक साधक इसे कुण्डलिनी जागरण की ओर channelize कर देता है | अगर हमारा goal आध्यात्मिक नहीं तो इसे हम जिस ओर मोड़ेंगे, redirect करेंगे वैसा फल मिलेगा |   स्कूल में […]


ईश्वरीय संदेश किस प्रकार मिलते हैं ?

आध्यात्मिक सफर में मेरी ५ वर्ष की आयु से ही ब्रह्म से वार्तालाप चालू हो गई | मेरे साथ कुछ घटा जिसके कारण ५ वर्ष की उम्र में ही मेरी भगवान में पूर्ण श्रद्धा (१००%) हो गई | सच के रास्ते पर मैं चलता ही था कोई झूठ बोले तो बर्दाश्त नहीं, चाहे वो मेरे पिता या दादा ही क्यों […]


अर्जुन से पहले गीता ज्ञान किसे मिला था ?

यह बात सोलह आने सच है कि अर्जुन से पहले गीता ज्ञान सूर्य को मिला था | मैं सोचा करता था यह कैसे संभव है – सूर्य एक तपता हुआ छोटा तारा है, मनुष्य रूप तो है नहीं जो ज्ञान दिया जाए | आत्मसाक्षात्कार के बाद जब गीताप्रेस, ऋषिकेश में उपनिषदों के पन्ने पलट कर देखे, जो सात वर्ष की […]


क्या हमें भारत के वेद पुराण भाष्य आयुर्वेदिक ग्रंथों पर विश्वास करना चाहिए ?

विश्वास !!! पूरी धरती पर सम्पूर्ण मानवता अगर जी पा रही है तो सिर्फ भारतीय दर्शन शास्त्रों के कारण – जैसे चारो वेद, ११ principal उपनिषद और भगवद गीता | अन्यथा अज्ञानियों और अधर्मियों ने दुनियां खत्म ही कर दी थी |   कलियुग के बावजूद अगर इंसानियत जिंदा है तो सिर्फ और सिर्फ भगवद गीता और उपनिषदों में निहित […]


हिंदू धर्म में वेदों और उपनिषदों का क्या महत्व है ?

धरती पर जब मानवता पनपी तो पहले ऋषियों ने वेदों का ज्ञान सीधे ब्रह्म से ग्रहण किया | वेदों में निहित ज्ञान इतना विस्तृत था कि साधक तो दूर, बड़े बड़े scholars भी उसे समझने में असमर्थता दिखा रहे थे | तब कुछ तो करना ही था |   महर्षि वेदव्यास ने महाभारत महाकाव्य की रचना की और जो वेदों […]


एक दिन हम सबको नष्ट होना है तो जन्म ही क्यों हुआ ?

सोच में त्रुटि है | मरें हमारे दुश्मन | भगवद गीता में कृष्ण स्पष्ट कहते हैं – हम शरीर नहीं आत्मा हैं | जब मौत आएगी शरीर नष्ट हो जाएगा | इसलिए हिन्दू धर्म में मरे हुए शरीर को जला देते हैं, गाड़ते नहीं | अब हम आत्मा हैं तो हैं, इसमें हमारा क्या दोष | भगवान ने बनाया तो […]


मोक्ष और स्वर्ग प्राप्त करना – दोनों में अंतर क्या है ?

हम आत्मा हैं तो अध्यात्म में कदम बढ़ाकर, मोक्ष प्राप्त करना हमारे जीवन का आखिरी लक्ष्य है | मनुष्य रूप में ११ लाख योनियां हैं, किसी भी योनि में यह कर सकते हैं | ब्रह्म की तरफ से खुली छूट | इसके विपरीत स्वर्ग की कल्पना अध्यात्म में नहीं | स्वर्ग कोई जाने की जगह नहीं | जानते हो स्वर्ग […]


ईश्वर संसार का मालिक है तो सारे अवतार भारत में ही क्यों होते है ?

भारत की विरासत १०८०० वर्ष पुरानी है, UK की ३११ वर्ष और US की २४६ वर्ष | है कोई विरासत जो भारत को टक्कर दे सके | भारतीय सभ्यता की खूबी उसके आध्यात्मिक ग्रंथों में छिपी है | इस धरती पर हर १०० ~ १५० साल के भीतर भारतीय शास्त्रों के माध्यम से कोई ना कोई साधक भगवान तक पहुंचने […]


दुनिया स्वर्ग तुल्य कब और कैसे बन सकती है ?

कल्कि अवतार के अवतरण के लगभग ५ वर्ष बाद धरती स्वर्ग रूपी हो जाएगी | स्वर्ग यानि सतयुग, स्वर्ण काल की कल्पना, एक ऐसा समय जब भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था | २०२८ में कल्कि अवतार के आने की आहट शायद हमें महसूस हो | संधिकाल का अंत निकट है | राजा विक्रमादित्य जिनके समय को स्वर्ण […]


स्वर्ग लोक की भव्यता किस प्रकार की होती है ?

स्वर्गलोक की कल्पना भ्रांति नहीं, स्वर्ग में हमारा स्वयं का मूल स्थित है | सूर्य के गर्भ में जिसे स्वर्ग कहते हैं स्थित है हम सभी की आत्मा | सारी आत्माएं स्वर्गलोक यानी सूर्य के गर्भ से remote control से हमारे हृदय को चलाती हैं | पुण्य से उद्वेलित आत्मा शरीर के मृत होने पर स्वर्ग में वास करती है […]


वृद्धावस्था में आध्यात्मिकता क्यों आती है ?

जब इंसान जीवन की अंतिम घड़ियां गिन रहा होता है, जब सत्य हम पर हावी हो जाता है, तो आत्मा पूरे गुजरे हुए वक़्त का अवलोकन कराती है | लेकिन आंसुओं के अलावा कुछ नहीं मिलता | जीवन तो मौज मस्ती में गुजार दिया, अब जाते वक़्त अध्यात्म क्या करेगा | आत्मा दोबारा शरीर लेकर लौटेगी | अच्छे कर्म किए […]