एक दिन हम सबको नष्ट होना है तो जन्म ही क्यों हुआ ?

सोच में त्रुटि है | मरें हमारे दुश्मन | भगवद गीता में कृष्ण स्पष्ट कहते हैं – हम शरीर नहीं आत्मा हैं | जब मौत आएगी शरीर नष्ट हो जाएगा | इसलिए हिन्दू धर्म में मरे हुए शरीर को जला देते हैं, गाड़ते नहीं | अब हम आत्मा हैं तो हैं, इसमें हमारा क्या दोष | भगवान ने बनाया तो […]


मोक्ष और स्वर्ग प्राप्त करना – दोनों में अंतर क्या है ?

हम आत्मा हैं तो अध्यात्म में कदम बढ़ाकर, मोक्ष प्राप्त करना हमारे जीवन का आखिरी लक्ष्य है | मनुष्य रूप में ११ लाख योनियां हैं, किसी भी योनि में यह कर सकते हैं | ब्रह्म की तरफ से खुली छूट | इसके विपरीत स्वर्ग की कल्पना अध्यात्म में नहीं | स्वर्ग कोई जाने की जगह नहीं | जानते हो स्वर्ग […]


ईश्वर संसार का मालिक है तो सारे अवतार भारत में ही क्यों होते है ?

भारत की विरासत १०८०० वर्ष पुरानी है, UK की ३११ वर्ष और US की २४६ वर्ष | है कोई विरासत जो भारत को टक्कर दे सके | भारतीय सभ्यता की खूबी उसके आध्यात्मिक ग्रंथों में छिपी है | इस धरती पर हर १०० ~ १५० साल के भीतर भारतीय शास्त्रों के माध्यम से कोई ना कोई साधक भगवान तक पहुंचने […]


दुनिया स्वर्ग तुल्य कब और कैसे बन सकती है ?

कल्कि अवतार के अवतरण के लगभग ५ वर्ष बाद धरती स्वर्ग रूपी हो जाएगी | स्वर्ग यानि सतयुग, स्वर्ण काल की कल्पना, एक ऐसा समय जब भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था | २०२८ में कल्कि अवतार के आने की आहट शायद हमें महसूस हो | संधिकाल का अंत निकट है | राजा विक्रमादित्य जिनके समय को स्वर्ण […]


स्वर्ग लोक की भव्यता किस प्रकार की होती है ?

स्वर्गलोक की कल्पना भ्रांति नहीं, स्वर्ग में हमारा स्वयं का मूल स्थित है | सूर्य के गर्भ में जिसे स्वर्ग कहते हैं स्थित है हम सभी की आत्मा | सारी आत्माएं स्वर्गलोक यानी सूर्य के गर्भ से remote control से हमारे हृदय को चलाती हैं | पुण्य से उद्वेलित आत्मा शरीर के मृत होने पर स्वर्ग में वास करती है […]


वृद्धावस्था में आध्यात्मिकता क्यों आती है ?

जब इंसान जीवन की अंतिम घड़ियां गिन रहा होता है, जब सत्य हम पर हावी हो जाता है, तो आत्मा पूरे गुजरे हुए वक़्त का अवलोकन कराती है | लेकिन आंसुओं के अलावा कुछ नहीं मिलता | जीवन तो मौज मस्ती में गुजार दिया, अब जाते वक़्त अध्यात्म क्या करेगा | आत्मा दोबारा शरीर लेकर लौटेगी | अच्छे कर्म किए […]


आत्मा और प्राण क्या एक ही है ?

आत्मा वह चेतन तत्व है जो अजर अमर है, सृष्टि के खत्म होने पर भी रहता है | अपने ब्रह्मांडीय सफर में आत्मा जब शरीर धारण करती है तो पंच महाभूतों से बने शरीर में प्राण फूंकती है | कैसे ? आत्मा तो सूर्य के गर्भ में विद्यमान है | धरती पर मां के शरीर में जब शिशु आता है […]


कल्कि अवतार कब होगा – इस अवतार के बाद दुनिया में क्या बदलेगा ?

कल्कि अवतार का पदार्पण २०२८ तक अपेक्षित है | घोर कलयुग, संधिकाल की जिस अवस्था से हम गुजर रहे हैं, उसका अंत अब निकट ही है | क्यों ? अधर्म इस समय लगभग चरमसीमा पर है | धर्म की पुनर्स्थापना का समय हो चला है |   जो लोग किताबी ज्ञान के मद्देनजर कहते हैं कलियुग खत्म होने में लाखों […]


आत्मा सो जाने के बाद कहां जाती है ?

धरती पर जितना भी जीवन है, हर जीव (मनुष्यों समेत) की आत्मा सूर्य के गर्भ में स्थित है | इस बात का उपनिषदों में भलीभांति उल्लेख मिलता है | सभी आत्माएं remote control से धरती पर शरीर को संचालित करती हैं | मनुष्य जागा हो या सोया हुआ, आत्मा सूर्य से ही अपना काम करती रहती हैं |   कभी […]


आत्मा की मृत्यु क्यों नहीं होती ?

आत्मा वो चेतन तत्व है जो ब्रह्माण्ड के रहने या प्रलय के समय खत्म हो जाने पर भी रहती है | जब प्रलय होती है तो पूरा ब्रह्माण्ड सिमट कर आधे अंगूठे (अस्थ अंगुष्ठ) के आकार में आ जाता है | यह अस्थ अंगुष्ठ है क्या ?   Scientists इसे singularity कहते हैं, आध्यात्मिक दृष्टि से हम इसे ब्रह्म पुकारते […]


अंतरात्मा की आवाज़ से क्या आशय है ?

बचपन में जब से हम होश संभालते हैं, अगर हम सत्यवादी हैं तो हृदय से आती आत्मा की आवाज को बखूबी सुन सकते हैं | मै ५ वर्ष की आयु से इस आवाज को बिल्कुल स्पष्ट सुन सकता था | शुरू में मालूम नहीं था कौन बोल रहा है, मैं इसे भगवान की आवाज समझता था | जैसे जैसे मैं […]


क्या कोई प्रत्यक्ष में आत्मा का स्वरूप देख सकता है ? किस प्रकार ?

क्या हम सूर्य ग्रहण के समय कभी सूर्य की ओर भौतिक नज़रों से देख पाए | क्या यह संभव है ? कुछ क्षणों के लिए तो संभव है ज्यादा देर नहीं | आत्मा जो अपने नैतिक स्वरूप में करोड़ degree तापमान से ज्यादा पैदा करती है, क्या हम उसे कभी देख पाएंगे ?   यही कारण है सारी आत्माएं सूर्य […]


मृत्यु के बाद अगला जन्म कैसे कहां होगा – ये कौन तय करता है ?

जब एक accountant company की balance sheet फाइनल करता है तो अगले साल की शुरआत में balance sheet में क्या लिखता है | अगर balance sheet का closing balance १०,०९८/= रुपए था तो नए वर्ष का ओपनिंग balance भी १०,०९८/= रुपए ही होगा | ये value change नहीं की जा सकती |   इसी प्रकार मृत्यु के समय हमारा जो […]


पुनर्जन्म के होने या न होने से क्या – न तो हमें पिछला जन्म का याद रहता है न ही अगले जन्म का

हमें फ़र्क नहीं पड़ता (क्योंकि हम अपनी अहम, मैं से बंधे हैं), लेकिन हमारी आत्मा जिसने यह शरीर धारण किया है, उसे बहुत फ़र्क पड़ता है | क्यों ? आत्मा चाहती है जन्म और मृत्यु के बंधन से छुटकारा | खुद आत्मा दृष्टा की भांति काम करती है और जिम्मेदारी शरीर की होती है कि मनुष्य अध्यात्म की राह पकड़ […]


मृत्यु के बाद पुनर्जन्म कैसे होता है ?

धरती मां से जुड़ी हर आत्मा सूर्य के गर्भ में स्थित है | वहां से वे रिमोट कंट्रोल द्वारा हमारे हृदय को संचालित करती हैं | जब धरती पर मृत्यु होती है मतलब शरीर मर गया तो सूर्य में आत्मा ने remote switch OFF कर दिया होता है | अब आत्मा को नया शरीर चाहिए | मरे शरीर का जो […]


विज्ञान के युग में कल्कि अवतार को घोड़ा और तलवार के साथ अवतरित क्यों दिखातें है ?

कल्कि अवतार को घोड़े पर सवार और हाथ में तलवार लिए क्यों दिखाते हैं –   १. घोड़ा किस बात का प्रतीक है – द्रुतगति का | अध्यात्म में लगभग सभी कुछ symbolic, छिपा हुआ है | कल्कि अवतार का अवतरण कब होगा, किसी को नहीं मालूम | लेकिन जब होगा उसके बाद सब कुछ इतनी तीव्र गति से होगा […]


ध्यान ओर उपासना में क्या अंतर है ?

ध्यान अध्यात्म की वो पद्वति है जिसके द्वारा ब्रह्म तक पहुंचा जा सकता है | अगर हम इस जीवन में भगवान से साक्षात्कार करना चाहते हैं तो हमें ध्यान में चिंतन के द्वारा उतरना चाहिए | यह वही रास्ता है जो महर्षि रमण ने प्रतिपादित किया था – शवासन की मुद्रा में self enquiry में खो जाना | इसी मार्ग […]


जब हम ध्यान करते है तो मन को शांति कैसे प्राप्त होती हैं ?

जैसे जैसे हम भगवान की ओर बढ़ते हैं तो अत्यंत आंतरिक सुख/आनंद महसूस करते हैं | ऐसा प्रायः सभी साधकों ने कभी न कभी महसूस किया होगा | भगवान को जानने की क्रिया चाहे कोई भी हो – भक्तियोग, ज्ञानयोग, निष्काम कर्मयोग, भजन कीर्तन, पूजा इत्यादि | ऐसा क्यों होता है ?   मनुष्य अपने मस्तिष्क का 1 ~ 3% […]


सभी भगवान भारत में ही पैदा हुए – किसी अन्य देश में क्यों नहीं ?

पूरी दुनिया में अगर किसी इंसान को भगवान की खोज करनी है तो उसे भारत आना ही होगा या भारतीय दर्शन शास्त्रों में उलझना होगा | क्योंकि शास्त्रों का मूल संस्कृत में है तो भारत आना ही पड़ेगा | जहां 140 करोड़ भारतीय बसते हों, जिसकी जैसी श्रृद्धा, उतने भगवानों में विश्वास | समय के साथ अनगिनत देवी देवता अस्तित्व […]


ईश्वर का निवास कहाँ नहीं है ?

ईश्वर (ब्रह्म) का वास हर अचेतन वस्तु में नहीं है | धरती पर हर जड़ चीज में ब्रह्म चेतन तत्व नहीं है | पहाड़ में भगवान हैं, नहीं | पत्थर के ढेले में भगवान हैं, नहीं | हां, पहाड़ों पर उगती वनस्पति में भगवान हैं, चेतन तत्व के रूप में | जो इंसान चिंतन में नहीं उतरता, वह सब चीज़ों […]


ईश्वर हमसे कितना दूर है ?

ब्रह्म स्वयं एक अस्थ अंगुष्ठ के आकार का चेतन तत्व है जो सभी आत्माओं के द्वारा पूरे ब्रह्मांड में फैला हुआ है | जहां आत्माएं वहां ईश्वर (ब्रह्म) | धरती पर व्याप्त हर जीव की आत्मा सूर्य के गर्भ में वास करती है | क्योंकि आत्मा का स्वयं का तापमान करोड़ degrees centigrade से ज्यादा होता है वे सूर्य में […]


भगवान को यह संसार बनाने की जरूरत क्या पड़ गई ?

वह एक प्रश्न जिसको पूछने के लिए शास्त्र भी मना करते हैं और खुद ब्रह्म ने भी निषिद्ध किया है वह क्या है, ‘भगवान ने यह दुनियां क्यों बनाई‘ ? शायद भगवान भी इस बात से अनभिज्ञ हैं | क्या वाकई में ? शायद ?   ब्रह्माण्ड कैसे बनता है ? जब पिछले ब्रह्माण्ड में प्रलय आती है तो ब्रह्माण्ड […]


ईश्वर साक्षात्कार में क्या होता है ?

जब साधक को ब्रह्म का साक्षात्कार होता है तो उस समय असमंजस की स्थिति होती है, समझ नहीं आता क्या हो रहा है | अंदर ही अंदर खुशी, नहीं आनंद की ऐसी अनुभूति हो रही होती है, robot बने हम जैसा ब्रह्म कहते हैं करते जाते हैं |   1993 3 अगस्त, सुबह के 1.45 AM ब्रह्म ने कंधे पर […]


हमें भगवान की जरूरत क्यों है ?

हमे भगवान की जरूरत तब महसूस होती है जब डर सताता है | अपने कुशलक्षेम की खातिर हम भगवान को समय समय पर याद करते रहते हैं | मंदिर जाते हैं, पूजापाठ में लगे रहते हैं, भजन कीर्तन करते हैं | आध्यात्मिक साधक को भगवान की जरूरत तब महसूस होती है जब वो भगवान को जानना चाहता है, पाना चाहता […]


ईश्वर और इंसान का क्या संबंध है ?

ब्रह्म ने पूरा संसार रचाया | खुद वह दृष्टा की भांति काम करता है तो जरूरत हुई ऐसी दुनियां की जिसमे कर्म के आधार पर काम करने वाले जीव जंतु हों | पूरा संसार स्वयं संचालित – धर्म और कर्म के आधार पर टिका और चलता संसार |   और आत्माओं का 84 लाख योनियों का भ्रमण शुरू हो गया […]


ईश्वर की ओर से निश्चित आयु मिली हुई है या फेरबदल की गुंजाइश है ?

भगवान दृष्टा की भांति काम करते हैं – पूरी दुनिया धर्म और कर्म के आधार पर चलती है | जैसा कर्म करोगे वैसा फल मिलेगा | अब तक मनुष्य रूप में हमने जितनी जिंदगी जी हैं, उसके आधार पर हमारी आयु तय होती है | एक जीवन में किए कर्मो के द्वारा आयु में कितना फेरबदल कर सकेंगे हम ? […]


भगवान या भक्त के बीच गुरु को रखना चाहिए या डायरेक्ट भगवान की शरण में जाना चाहिए?

अगर हम आध्यात्मिक मार्ग पकड़ कर आत्मज्ञान पाना चाहते हैं या ब्रह्म का साक्षात्कार करना चाहते हैं तो गुरु के कोई मायने नहीं | अध्यात्म में ध्यान करने के लिए हमें स्वयं ही चिंतन में उतरना होगा | ऐसे में गुरु क्या करेगा ?   ध्यान में हमें अपने अंदर समाहित प्रश्नों के उत्तर ढूंढने हैं | अगर हम अटक […]


अगर इस दुनिया को भगवान ने बनाया तो भगवान को किसने बनाया ?

भगवान (ब्रह्म) अनादि हैं और रहेंगे चिरकाल तक | कभी न खत्म होने वाला चेतन तत्व हमेशा से हर जीव का मूल भी है | जब प्रलय होती है यानि पिछला ब्रह्माण्ड खत्म होने के कगार पर है तो वह सिमट कर आधे अंगूठे के आकार में आ जाता है |   यह अस्थ अंगुष्ठ के आकार का गुच्छा जिसे […]


मुझे तीसरा नेत्र जागृत करना है ?

तीसरा नेत्र जागृत करना, आत्मज्ञान प्राप्त करना, ब्रह्म का साक्षात्कार एक ही बात के सूचक हैं | जब आध्यात्मिक साधक पूर्ण कुण्डलिनी जागृत कर सहस्त्रार खोलने में कामयाब हो जाता है तो कहा जाता है तीसरा नेत्र जागृत हो गया | तीसरा नेत्र शिवजी के लिए इस्तेमाल होता है | और शिवजी कौन हैं ? शिवजी के गले में सर्प […]


छठ्ठी ज्ञानेन्द्रि को जागृत कैसे करें ?

आम मनुष्य 5 इन्द्रियों का इस्तेमाल करते हुए अपने मस्तिष्क का सिर्फ 1 ~ 3% इस्तेमाल करता है | बचा हुआ और बंद पड़ा 97 ~ 99% मस्तिष्क तब खुलता है जब हम अध्यात्म में उतरते हैं | Albert Einstein के बारे में कहा जाता है वे अपना मस्तिष्क 4% के लगभग इस्तेमाल करते थे | तो छठी इंद्री क्या […]