क्या आत्मज्ञान का बोध होने के बाद जीवन में कुछ शेष रह जाता है ?
आत्मज्ञान प्राप्त करना, कैवल्यज्ञान प्राप्त करना, पूर्ण कुण्डलिनी जागरण, सहस्त्रार का खुलना, ब्रह्मज्ञानी होना, 84 लाखवी योनि में स्थापित होना, तत्वज्ञान प्राप्त करना, तीसरा नेत्र खुलना, छट्ठी ज्ञानेंद्री जागृत होना – सभी एक बात की ओर इशारा करते हैं कि आप ब्रह्म से साक्षात्कार बस करने ही वाले हैं | ऊपर लिखी सभी बातों का मतलब है कर्मों की […]
