गीता सार की प्रमुख शिक्षाएं कौन सी हैं ?

धरती पर आत्मा 84 लाख योनियों के चक्रव्यूह से गुजरती है | 73 लाख योनियां का लंबा सफर करके पहली बार मनुष्य का रूप धारण करती है | मनुष्य रूप में 11 लाख योनियां होती हैं | पहली योनि से आखिरी योनि तक, आत्मा का एक ही लक्ष्य है – जल्द से जल्द अपने शुद्ध रूप को वापस प्राप्त कर […]


भगवद गीता का सबसे महत्वपूर्ण उपदेश क्या है ?

भगवदगीता का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है मोह कैसे कटे | अपने सगे संबंधियों का मोह, गुरु का मोह, नाना का मोह | मोह का कटना अध्यात्म की राह का आखिरी रोड़ा है | मोह खत्म और हमें तत्वज्ञानी बनने से कोई नहीं रोक सकता |   मोह की महत्ता इस बात से समझ आयेगी कि पूरे भारतवर्ष में अभी तक […]


क्या योग और ध्यान से सब कुछ संभव है ?

योग मूलतः सिद्धांत है जो हमें ब्रह्म से मिलने के लिए प्रेरित करता है | हिंदी में 2 योग 2 = 4 , या कहें 2 जमा 2 बराबर 4 | आत्मा की ब्रह्म से मिलने की चेष्टा को योग कहते हैं | आत्मा हमेशा से ब्रह्म से योग करना चाहती है, जहां से चली थी वहां शीघ्रताशीघ्र वापस पहुंचना […]


जीव में ईश्वर किस प्रकार समाविष्ट है ?

इस प्रकरण को अद्वैत वेदांत की दृष्टि से देखें | जब ब्रह्माण्ड की रचना/उत्पत्ति नहीं हुई थी उस समय सिर्फ और सिर्फ ब्रह्म exist करते थे | ब्रह्माण्ड बना और धीरे धीरे सूर्य और धरती प्रकट हो गए | जो आत्माएं ब्रह्माण्ड में विचरण कर रही थी, जैसे ही उन्हें जीवन के योग्य धरती मिली उन्होंने शरीर धारण करना शुरू […]


गहरी निद्रा की अवस्था में हमारी आत्मा की स्थित क्या होती है ?

जब से मनुष्य ने होश संभाला है आत्मा दृष्टा की भांति सूर्य के गर्भ में मग्न रहती है | Remote control से हमारे हृदय को चलाती है | वह भी जन्म के समय स्विच ON और आयु पूरी होने पर स्विच OFF | बीच में कोई छेड़खानी नहीं |   सब कुछ यथावत चलता रहता है बिना किसी व्यवधान के […]


मृत परिजन की आत्मा से कैसे बात करें ?

भगवान के दरबार में कोई ऐसा साधन नहीं जहां एक आत्मा दूसरी आत्मा से बात कर सके | इस जन्म में वो तुम्हारे पिता थे | मृत्यु के साथ रिश्ता खत्म | क्यों ? पता नहीं मृत्यु के बाद तुम्हारे पिता की आत्मा कहां और किस घर में दूसरा शरीर लेगी |   नया जीवन नया परिवार | पिछले रिश्ते […]


आत्मज्ञान क्या होता है ?

आत्मज्ञान का शाब्दिक अर्थ है आत्म ज्ञान, यानि खुद का ज्ञान और क्योंकि हम मूलतः एक आत्मा हैं तो आत्मज्ञान का मतलब हुआ आत्मस्वरूपी खुद का ज्ञान | आध्यात्मिक परिपेक्ष में जब एक साधक 12 वर्ष की तपस्या के बाद स्वयं को तत्व रूप में जान लेता है वह आत्मज्ञानी कहलाता है |   आत्मज्ञानी, कैवल्यज्ञानी, तत्वज्ञानी और ब्रह्मज्ञानी सभी […]


सेक्सुअल स्टैमिना बढ़ाने के कारगर उपाय क्या हैं ?

कितना sexual stamina बढ़ाना चाहते हैं – 5 गुना, 10 गुना, 20 गुना ? यह संभव ही नहीं 100% possible भी है, experience के basis पर कह रहा हूं | लेकिन एक शर्त है आप बड़े इत्मीनान के साथ नीचे लिखा सिर्फ पढ़ेंगे ही नहीं, पालन भी करेंगे | मैं आध्यात्मिक इंसान 5 वर्ष की आयु से प्रभु की खोज […]


एक मनुष्य की आयु कितनी होती है ?

मनु स्मृति के अनुसार शास्त्रों में मनुष्यों की आयु 100 वर्ष मानी गई है | 25 वर्ष ब्रह्मचर्य के, 25 गृहस्थ आश्रम, 25 वानप्रस्थ और 25 संन्यास | आध्यात्मिक पुरुष चाहे तो अपनी आयु ज्यादा से ज्यादा 225 तक ले जा सकता है | कैसे ? हमारा हृदय average एक मिनट में 72 बार धड़कता है |आध्यात्मिक प्रक्रियाओं से अगर […]


योग और अध्यात्म में क्या संबंध है ?

आत्मा परमात्मा से मिलन, योग करना चाहती है और मनुष्य अध्यात्म के रास्ते पर चलकर ब्रह्म को पाना चाहता है, तो दोनो बातों में सामंजस्य कहां ? आत्मा परमात्मा का अभिन्न अंग है, एक गेहूं का दाना आत्मा और पूरी ढेरी परमात्मा | ब्रह्माण्ड में व्याप्त सभी आत्माएं प्रलय के समय जब अपने शुद्ध रूप में आ जाती हैं तो […]


धर्म का अर्थ क्या हैं शासन अनुशासन या कर्म ?

धर्म की सही परिभाषा मुझे ब्रह्म ने स्वयं दी थी साक्षात्कार के समय – ‘‘your right to do what is just and right and not what was destined‘‘, जिसका हिंदी रूपांतरण बनता है – सब कुछ सही करने की प्रवत्ति हमारे अंदर जन्म से विद्यमान हैं और हम किस्मत के गुलाम नहीं | विवेक का इस्तेमाल कर इंसान जीवन में […]


क्या पूरे मन से भगवान का ध्यान लगाने पर उनके दर्शन हो सकते हैं ?

ब्रह्म के दर्शन नहीं सिर्फ और सिर्फ साक्षात्कार ही होता है | हम जो वास्तव में एक आत्मा हैं, और जब ध्यान के माध्यम से शुद्ध आत्मा बन जाते हैं तो हमारे मनुष्य जीवन का अंत हो जाता है | एक शुद्ध आत्मा का शरीर धारण करने में फिर कोई प्रयोजन नहीं रह जाता | भगवान के दर्शन करने के […]


क्या मनुष्य की अंतरात्मा से बड़ा भी कोई गुरु है ?

हमारी जो अंतरात्मा है वह महर्षि वेदव्यास और गीताप्रेस, गोरखपुर की दृष्टि में हमारे हृदय में विद्यमान सारथी, खुद कृष्ण हैं | आम इंसान हृदय से आती भगवान कृष्ण (हमारी अपनी आत्मा) की आवाज़ को हमेशा दबा देता है, सुनता ही नहीं, क्यों ? आम इंसान का मैं (अहम, अहंकार) बड़ा प्रबल होता है, वह किसी और आवाज़ को सुनने […]


मनुष्य के जीवन में मानसिक शक्ति का क्या महत्व है ?

मानसिक शक्ति ब्रह्माण्ड की सबसे ताकतवर शक्ति/ऊर्जा है, इससे ऊपर कुछ भी नहीं | ऐसा क्यों ? एक आम मजदूर और Ratan Tata में क्या फर्क है ? सिर्फ सोच का | इंसान कभी पैसों से गरीब नहीं होता, गरीब की सोच छोटी होती है | यह गरीब का तिरस्कार या उसके लिए गाली नहीं |   बाप रे बाप […]


किस व्यक्ति की सलाह हमें जीवन में आगे बढ़ने में मदद करती है ?

जो व्यक्ति हर समय positivity (सकारात्मक सोच) में व्याप्त हो, जो हर समय सकारात्मक (पॉजिटिव) कार्यों में संलग्न रहता हो, ऐसे व्यक्ति का साथ और सलाह normally गलत नहीं होती | जीवन के किसी भी मोड़ पर देख लें, अच्छे लोगों की जीवनियां पढ़ कर देख लें कभी अफसोस नहीं होगा | मुझे ब्रह्मचर्य की सबसे बेहतर शिक्षा Napoleon Hill […]


क्या शादीशुदा व्यक्ति संसार में रहते हुए अध्यात्म में आगे बढ़ सकता है ?

गृहस्थ जीवन में अध्यात्म की राह पर चलना आसान तो नहीं, लेकिन असंभव भी नहीं | अध्यात्म में दो चीजों की आवश्यकता होती है –   1. 12 वर्ष की अखंड ब्रह्मचर्य की तपस्या – अगर पत्नी तैयार नहीं तो कैसे होगी तपस्या ? 2. 12 वर्ष का ध्यान (चिंतन के माध्यम से अपने अंदर उमड़ते विचारों की पूर्ण निर्जरा) […]


क्या अध्यात्म में परिवार छोड़ना पड़ता है ?

आज के कलियुग में अध्यात्म किसी भी साधक को मजबूर नहीं करता घर छोड़ कर तपस्या में उतरने के लिए | ऐसा क्यों ? पुराने समय में joint परिवार होते थे और एक घेर में रहते थे | किसी घेर में 50, 70 या 120 – सोचिए इतने लोगों के बीच कैसे तपस्या करेंगे आप ? आप तपस्या में लीन […]


महाभारत में अभिमन्यु के चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकल पाने का क्या कारण था ?

महाभारत में ही क्यों, धरती पर मौजूद 800 करोड़ लोगों में एक भी इंसान को चक्रव्यूह से बाहर निकलना नहीं आता | अभिमन्यु और चक्रव्यूह का episode मात्र symbolic है अंदर छिपे गूढ़ तत्व को समझने के लिए |   अभिमन्यु की तरह हम सब भी इस चक्रव्यूह रूपी धरती के मायाजाल में आ तो जाते है, पैदा हो जाते […]


महाभारत में अभिमन्यु चक्रव्युह तोड़ने की पूरी प्रक्रिया क्यों नहीं जान सका ?

Quora पर अभिमन्यु से related दो प्रश्नों के उत्तर देने के बाद अचानक हृदय से आवाज़ आई, अभिमन्यु ही क्यों, पांडवों की सेना में तो कई योद्धा थे ? अरे, इस पहलू पर तो मेने आज तक गौर नहीं किया | अर्जुन को गीता का उपदेश मिलने के बाद वो तत्वज्ञानी हो गए | और उन्हें मोक्ष प्राप्त होगा | […]


क्या निर्गुण ईश्वर भक्ति से ही मुक्ति सम्भव है – सगुण से क्यों नहीं ?

आज के कलियुग में भक्ति मार्ग के द्वारा (निर्गुण या सगुण) मुक्ति के द्वार तक पहुंचना संभव नहीं | इसी कारण काली के उपासक रामकृष्ण परमहंस ने अंत समय में ज्ञानयोग का रास्ता अपनाया | वह समझ चुके थे कि कर्मों की पूर्ण निर्जरा करने के लिए (कर्मों को जड़ से भस्म करने के लिए) ज्ञान के प्रकाश का सहारा […]


बिना गुरु के कमियां कैसे पता चले ?

हमारे दोष, हमारे क्लेश, हमारी इच्छाएं, हम जीवन के पड़ाव में कहां स्थित हैं – हमसे बेहतर और कौन जान सकता है ? मां सबसे नजदीक होती है – काफी बातें भांप लेती है लेकिन सम्पूर्ण वह भी नहीं | जिन क्लेशों को जड़ से खत्म करने के लिए एक आध्यात्मिक साधक अपने अंदर ध्यान के सफर में उतरता है […]


क्या सीमित संसाधनों में व्यक्ति अपना जीवन शांतिपूर्ण जी सकता है ?

एक छोटी सी कुटिया में रह रहे साधु से जब किसी ने पूछा, इतनी छोटी कुटिया में आपको तकलीफ नहीं होती ? तो वह अत्यंत परिपक्व साधु बोला, सोच रहा हूं कुछ सामान काम कर दूं, जरूरत से ज्यादा प्रतीत हो रहा है | जितनी हमारी इच्छाएं उतनी बड़ी हमारी तकलीफें | अगर इच्छाएं ही नहीं होंगी तो कमी काहे […]


अगर ईश्वर है तो उनको हमारा दुःख दिखाई सुनाई क्यों नहीं देता ?

जब हमारा पैर चींटीयों पर पड़ जाता है, तो क्या हम दुख मानते हैं ? चींटियों पर क्या गुजरती होगी – क्या हमने सोचा है ? उनमें एक चींटी तो दादी थी – पूरा घर परिवार बिखर गया | यहां खुद भगवान हमारे हृदय में बैठे हैं सारथी के रूप में, हमें हर पल गाइड करने के लिए, लेकिन हम […]


हिंदुस्तान का संपन्न हिंदू समाज गरीब लोगों की मदद क्यों नहीं करता ?

गरीब कौन ? अहंकार में डूबा वो इंसान जो खुद के अलावा किसी की नहीं सुनता | जिसे हम गरीब कह रहे हैं, जरा उससे free में काम करवा कर देखिए ? दुनियां भर की बातें सुनने को न मिल जाएं | 250 साल पहले के गरीब और आज के गरीब में फ़र्क है | अंग्रेजों की गुलामी ने इन […]


बिग बैंग सिद्धान्त क्या है ?

वेदों और उपनिषदों में प्रतिपादित ब्रह्माण्ड की रचना का सम्पूर्ण विवरण इतना clear, इतना गहरा है कि पाश्चात्य जगत के scientists big bang theory को आज तक नहीं समझ पाए | एक भी आविष्कार, एक भी प्रतिभाशाली काम आज तक पाश्चात्य जगत के scientists ने नहीं किया, जो किया वह भारत से चुराया |   Big Bang Theory का सटीक […]


पूर्ण परमात्मा कौन है – उसे कैसे प्राप्त किया जा सकता है ?

पूर्ण परमात्मा को परमात्मा भी कह सकते हैं | एक आत्मा और ब्रह्मांड में व्याप्त सारी आत्माओं का गुच्छा परम आत्मा = परमात्मा | ईश्वर इष्ट धातु से जुड़ा है, देने के संबंध में, सो पूर्ण परमात्मा नहीं, न ही परमेश्वर | सनातन पुरुष – यह सही है | जो सनातन है हमेशा से exist करता है, अनादि है | […]


क्या आत्मा सच में होता है ?

आत्मा होती है इस बात को इस तरह से समझें – जब ब्रह्माण्ड उत्पन्न होता है तो वेद/उपनिषद कहते है कि ब्रह्म स्वयं को big bang से फोड़ते हैं | अब यह ब्रह्म जिन्हें हम भगवान कहते हैं, ये हैं क्या ? ब्रह्माण्ड में मौजूद सभी आत्माएं प्रलय के समय शुद्ध रूप पा जाती हैं | अगर कोई आत्मा कीट […]


मृत्यु और जन्म के बीच आत्मा की क्या अवस्था है ?

शरीर छुट जाने के बाद अगर आत्मा को धरती पर मैचिंग parents नहीं मिलते, तो नए parents के available होने तक आत्मा स्वर्ग या नरक में वास करती है hibernation (सीतनिद्रा, शीतनिष्क्रियता) की स्थिति में |   आत्मा स्वर्ग में वास करती है अगर मृत्यु के समय karmic balance positive (पुण्य) है और नरक में अगर karmic balance negative (पाप) […]


भगवान शिव के अनजाने रहस्य क्या हैं ?

शिव का यथार्थ क्या है और दुनिया उन्हें किस दृष्टि से देखती है | अध्यात्म की दृष्टि में तीनों ब्रह्मा, विष्णु और शिव केवल विभूतियां है | वैदिक काल में जब ब्रह्म के विराट स्वरूप को समझ पाना मुश्किल था, तो तीन धार्मिक विभूतियों को create किया गया | जो ब्रह्म का creative स्वरूप है उसे ब्रह्मा कहेंगे | जो […]


मैं कुंडलिनी जागृत करना चाहती हूँ – मुझे गुरु की जरूरत है पर समझ नहीं आ रहा गुरु किसको बनाऊं ?

आखिरी साधक जिसने खुद की कुण्डलिनी पूरी जागृत की और तत्वज्ञान प्राप्त कर ब्रह्म में लीन हो गए वह थे महर्षि रमण जो 1950 में शरीर त्याग गए | अगर वो आज होते भी, तो गुरु बनना स्वीकार्य होता या नहीं doubtful है | अगर साधक खुद को सत्य के मार्ग पर स्थापित कर ले तो मार्गदर्शन के लिए उचित […]