क्या आत्मज्ञान का बोध होने के बाद जीवन में कुछ शेष रह जाता है ?

आत्मज्ञान प्राप्त करना, कैवल्यज्ञान प्राप्त करना, पूर्ण कुण्डलिनी जागरण, सहस्त्रार का खुलना, ब्रह्मज्ञानी होना, 84 लाखवी योनि में स्थापित होना, तत्वज्ञान प्राप्त करना, तीसरा नेत्र खुलना, छट्ठी ज्ञानेंद्री जागृत होना – सभी एक बात की ओर इशारा करते हैं कि आप ब्रह्म से साक्षात्कार बस करने ही वाले हैं |   ऊपर लिखी सभी बातों का मतलब है कर्मों की […]


श्रीमद्भगवद्गीता गीता का अध्ययन के लिए कोई अच्छी विधि है ? मैंने इसे पढ़ने समझने की कई बार कोशिश की लेकिन असफल रहा

अगर आप सत्य (सिर्फ सच नहीं) के रास्ते पर चलने के लिए सक्षम हैं पूर्णतया 100%, तो आपको श्रीमद्भगवद्गीता के 700 श्लोकों को एक बार भी पढ़ने या समझने की जरूरत नहीं | मैंने 5 वर्ष की आयु में आध्यात्मिक सफर शुरू किया और 37 वर्ष की आयु में ब्रह्म से 2 1/2 घंटे का साक्षात्कार | इस बीच एक […]


मैं भगवद गीता पढ़ना चाहता हूं इसके दर्शन को समझना चाहता हूं – मुझे कौन सा संस्करण पढ़ना चाहिए गीताप्रेस गोरखपुर या भगवद गीता यथारूप ?

गीताप्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित श्रीमद्भगवद्गीता की टीका – श्रीमद्भगवद्गीता – पदच्छेद, अन्वय और साधारण भाषाटीकासहित (17) (मूल्य Rs 60/=) से बेहतर और शानदार टीका पूरे विश्व में कहीं नहीं | अगर आपको संस्कृत का ज्ञान नहीं, तो हिंदी में दिया explanation सही समझ आएगा |   अगर इंग्लिश टीका चाहिए तो वह भी उपलब्ध है | यहां मेरा कहना है, […]


भगवद गीता जैसी कुछ अन्य पुस्तकें क्या हैं जिन्हें हमें पढ़ना चाहिए ?

श्रीमद्भगवद्गीता की पदच्छेद, अन्वय और साधारण भाषाटीकासहित (17) नामक टीका (मूल्य 60/=) जो गीताप्रेस, गोरखपुर में available है, इसके अलावा हर सच्चे साधक को ईशादि नौ उपनिषद् (66) नामक 9 principal उपनिषदों के ऊपर टीका (मूल्य 100/=) अपने पास रखनी चाहिए |   इन दोनों टीकाओं में पूरे ब्रह्मांड का ज्ञान समाया हुआ है | ब्रह्म का साक्षात्कार करने के […]


कौनसी पब्लिकेशन की भगवद गीता पढ़नी चाहिए ?

अगर हम भारतीय दर्शन शास्त्रों जैसे श्रीमद्भगवद्गीता और principal उपनिषदों को पढ़ना और समझना चाहते हैं तो गीताप्रेस, गोरखपुर की निम्लिखित टीकाएं देखें –   1. श्रीमद्भगवद्गीता – पदच्छेद, अन्वय और साधारण भाषाटीकासहित (17) 2. ईशादि नौ उपनिषद् (66)   गीताप्रेस, गोरखपुर के अलावा किसी भी publication house से मुद्रित पुस्तकें खुद पढ़कर, सोच समझकर लें | वैसे ऊपर लिखी […]


महाभारत में वीर अभिमन्यु चक्रव्यूह से बाहर क्यों नहीं निकल सका ?

महाभारत में अभिमन्यु का चक्रव्यूह में घुसना और फिर बाहर न निकल पाना और मारे जाना पूर्णतया symbolic है, रूपक (metaphor) है | हम सभी इंसान इस माया रूपी धरती पर आ तो जाते हैं (पैदा हो जाते हैं) | लेकिन बाहर निकलने का रास्ता किसी को भी नहीं मालूम (हमें जन्म और मृत्यु के चक्रव्यूह से मुक्ति कब मिलेगी, […]


गीता सार की प्रमुख शिक्षाएं कौन सी हैं ?

धरती पर आत्मा 84 लाख योनियों के चक्रव्यूह से गुजरती है | 73 लाख योनियां का लंबा सफर करके पहली बार मनुष्य का रूप धारण करती है | मनुष्य रूप में 11 लाख योनियां होती हैं | पहली योनि से आखिरी योनि तक, आत्मा का एक ही लक्ष्य है – जल्द से जल्द अपने शुद्ध रूप को वापस प्राप्त कर […]


भगवद गीता का सबसे महत्वपूर्ण उपदेश क्या है ?

भगवदगीता का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है मोह कैसे कटे | अपने सगे संबंधियों का मोह, गुरु का मोह, नाना का मोह | मोह का कटना अध्यात्म की राह का आखिरी रोड़ा है | मोह खत्म और हमें तत्वज्ञानी बनने से कोई नहीं रोक सकता |   मोह की महत्ता इस बात से समझ आयेगी कि पूरे भारतवर्ष में अभी तक […]


क्या योग और ध्यान से सब कुछ संभव है ?

योग मूलतः सिद्धांत है जो हमें ब्रह्म से मिलने के लिए प्रेरित करता है | हिंदी में 2 योग 2 = 4 , या कहें 2 जमा 2 बराबर 4 | आत्मा की ब्रह्म से मिलने की चेष्टा को योग कहते हैं | आत्मा हमेशा से ब्रह्म से योग करना चाहती है, जहां से चली थी वहां शीघ्रताशीघ्र वापस पहुंचना […]


जीव में ईश्वर किस प्रकार समाविष्ट है ?

इस प्रकरण को अद्वैत वेदांत की दृष्टि से देखें | जब ब्रह्माण्ड की रचना/उत्पत्ति नहीं हुई थी उस समय सिर्फ और सिर्फ ब्रह्म exist करते थे | ब्रह्माण्ड बना और धीरे धीरे सूर्य और धरती प्रकट हो गए | जो आत्माएं ब्रह्माण्ड में विचरण कर रही थी, जैसे ही उन्हें जीवन के योग्य धरती मिली उन्होंने शरीर धारण करना शुरू […]


गहरी निद्रा की अवस्था में हमारी आत्मा की स्थित क्या होती है ?

जब से मनुष्य ने होश संभाला है आत्मा दृष्टा की भांति सूर्य के गर्भ में मग्न रहती है | Remote control से हमारे हृदय को चलाती है | वह भी जन्म के समय स्विच ON और आयु पूरी होने पर स्विच OFF | बीच में कोई छेड़खानी नहीं |   सब कुछ यथावत चलता रहता है बिना किसी व्यवधान के […]


मृत परिजन की आत्मा से कैसे बात करें ?

भगवान के दरबार में कोई ऐसा साधन नहीं जहां एक आत्मा दूसरी आत्मा से बात कर सके | इस जन्म में वो तुम्हारे पिता थे | मृत्यु के साथ रिश्ता खत्म | क्यों ? पता नहीं मृत्यु के बाद तुम्हारे पिता की आत्मा कहां और किस घर में दूसरा शरीर लेगी |   नया जीवन नया परिवार | पिछले रिश्ते […]


आत्मज्ञान क्या होता है ?

आत्मज्ञान का शाब्दिक अर्थ है आत्म ज्ञान, यानि खुद का ज्ञान और क्योंकि हम मूलतः एक आत्मा हैं तो आत्मज्ञान का मतलब हुआ आत्मस्वरूपी खुद का ज्ञान | आध्यात्मिक परिपेक्ष में जब एक साधक 12 वर्ष की तपस्या के बाद स्वयं को तत्व रूप में जान लेता है वह आत्मज्ञानी कहलाता है |   आत्मज्ञानी, कैवल्यज्ञानी, तत्वज्ञानी और ब्रह्मज्ञानी सभी […]


सेक्सुअल स्टैमिना बढ़ाने के कारगर उपाय क्या हैं ?

कितना sexual stamina बढ़ाना चाहते हैं – 5 गुना, 10 गुना, 20 गुना ? यह संभव ही नहीं 100% possible भी है, experience के basis पर कह रहा हूं | लेकिन एक शर्त है आप बड़े इत्मीनान के साथ नीचे लिखा सिर्फ पढ़ेंगे ही नहीं, पालन भी करेंगे | मैं आध्यात्मिक इंसान 5 वर्ष की आयु से प्रभु की खोज […]


एक मनुष्य की आयु कितनी होती है ?

मनु स्मृति के अनुसार शास्त्रों में मनुष्यों की आयु 100 वर्ष मानी गई है | 25 वर्ष ब्रह्मचर्य के, 25 गृहस्थ आश्रम, 25 वानप्रस्थ और 25 संन्यास | आध्यात्मिक पुरुष चाहे तो अपनी आयु ज्यादा से ज्यादा 225 तक ले जा सकता है | कैसे ? हमारा हृदय average एक मिनट में 72 बार धड़कता है |आध्यात्मिक प्रक्रियाओं से अगर […]


योग और अध्यात्म में क्या संबंध है ?

आत्मा परमात्मा से मिलन, योग करना चाहती है और मनुष्य अध्यात्म के रास्ते पर चलकर ब्रह्म को पाना चाहता है, तो दोनो बातों में सामंजस्य कहां ? आत्मा परमात्मा का अभिन्न अंग है, एक गेहूं का दाना आत्मा और पूरी ढेरी परमात्मा | ब्रह्माण्ड में व्याप्त सभी आत्माएं प्रलय के समय जब अपने शुद्ध रूप में आ जाती हैं तो […]


धर्म का अर्थ क्या हैं शासन अनुशासन या कर्म ?

धर्म की सही परिभाषा मुझे ब्रह्म ने स्वयं दी थी साक्षात्कार के समय – ‘‘your right to do what is just and right and not what was destined‘‘, जिसका हिंदी रूपांतरण बनता है – सब कुछ सही करने की प्रवत्ति हमारे अंदर जन्म से विद्यमान हैं और हम किस्मत के गुलाम नहीं | विवेक का इस्तेमाल कर इंसान जीवन में […]


क्या पूरे मन से भगवान का ध्यान लगाने पर उनके दर्शन हो सकते हैं ?

ब्रह्म के दर्शन नहीं सिर्फ और सिर्फ साक्षात्कार ही होता है | हम जो वास्तव में एक आत्मा हैं, और जब ध्यान के माध्यम से शुद्ध आत्मा बन जाते हैं तो हमारे मनुष्य जीवन का अंत हो जाता है | एक शुद्ध आत्मा का शरीर धारण करने में फिर कोई प्रयोजन नहीं रह जाता | भगवान के दर्शन करने के […]


क्या मनुष्य की अंतरात्मा से बड़ा भी कोई गुरु है ?

हमारी जो अंतरात्मा है वह महर्षि वेदव्यास और गीताप्रेस, गोरखपुर की दृष्टि में हमारे हृदय में विद्यमान सारथी, खुद कृष्ण हैं | आम इंसान हृदय से आती भगवान कृष्ण (हमारी अपनी आत्मा) की आवाज़ को हमेशा दबा देता है, सुनता ही नहीं, क्यों ? आम इंसान का मैं (अहम, अहंकार) बड़ा प्रबल होता है, वह किसी और आवाज़ को सुनने […]


मनुष्य के जीवन में मानसिक शक्ति का क्या महत्व है ?

मानसिक शक्ति ब्रह्माण्ड की सबसे ताकतवर शक्ति/ऊर्जा है, इससे ऊपर कुछ भी नहीं | ऐसा क्यों ? एक आम मजदूर और Ratan Tata में क्या फर्क है ? सिर्फ सोच का | इंसान कभी पैसों से गरीब नहीं होता, गरीब की सोच छोटी होती है | यह गरीब का तिरस्कार या उसके लिए गाली नहीं |   बाप रे बाप […]


किस व्यक्ति की सलाह हमें जीवन में आगे बढ़ने में मदद करती है ?

जो व्यक्ति हर समय positivity (सकारात्मक सोच) में व्याप्त हो, जो हर समय सकारात्मक (पॉजिटिव) कार्यों में संलग्न रहता हो, ऐसे व्यक्ति का साथ और सलाह normally गलत नहीं होती | जीवन के किसी भी मोड़ पर देख लें, अच्छे लोगों की जीवनियां पढ़ कर देख लें कभी अफसोस नहीं होगा | मुझे ब्रह्मचर्य की सबसे बेहतर शिक्षा Napoleon Hill […]


क्या शादीशुदा व्यक्ति संसार में रहते हुए अध्यात्म में आगे बढ़ सकता है ?

गृहस्थ जीवन में अध्यात्म की राह पर चलना आसान तो नहीं, लेकिन असंभव भी नहीं | अध्यात्म में दो चीजों की आवश्यकता होती है –   1. 12 वर्ष की अखंड ब्रह्मचर्य की तपस्या – अगर पत्नी तैयार नहीं तो कैसे होगी तपस्या ? 2. 12 वर्ष का ध्यान (चिंतन के माध्यम से अपने अंदर उमड़ते विचारों की पूर्ण निर्जरा) […]


क्या अध्यात्म में परिवार छोड़ना पड़ता है ?

आज के कलियुग में अध्यात्म किसी भी साधक को मजबूर नहीं करता घर छोड़ कर तपस्या में उतरने के लिए | ऐसा क्यों ? पुराने समय में joint परिवार होते थे और एक घेर में रहते थे | किसी घेर में 50, 70 या 120 – सोचिए इतने लोगों के बीच कैसे तपस्या करेंगे आप ? आप तपस्या में लीन […]


महाभारत में अभिमन्यु के चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकल पाने का क्या कारण था ?

महाभारत में ही क्यों, धरती पर मौजूद 800 करोड़ लोगों में एक भी इंसान को चक्रव्यूह से बाहर निकलना नहीं आता | अभिमन्यु और चक्रव्यूह का episode मात्र symbolic है अंदर छिपे गूढ़ तत्व को समझने के लिए |   अभिमन्यु की तरह हम सब भी इस चक्रव्यूह रूपी धरती के मायाजाल में आ तो जाते है, पैदा हो जाते […]


महाभारत में अभिमन्यु चक्रव्युह तोड़ने की पूरी प्रक्रिया क्यों नहीं जान सका ?

Quora पर अभिमन्यु से related दो प्रश्नों के उत्तर देने के बाद अचानक हृदय से आवाज़ आई, अभिमन्यु ही क्यों, पांडवों की सेना में तो कई योद्धा थे ? अरे, इस पहलू पर तो मेने आज तक गौर नहीं किया | अर्जुन को गीता का उपदेश मिलने के बाद वो तत्वज्ञानी हो गए | और उन्हें मोक्ष प्राप्त होगा | […]


क्या निर्गुण ईश्वर भक्ति से ही मुक्ति सम्भव है – सगुण से क्यों नहीं ?

आज के कलियुग में भक्ति मार्ग के द्वारा (निर्गुण या सगुण) मुक्ति के द्वार तक पहुंचना संभव नहीं | इसी कारण काली के उपासक रामकृष्ण परमहंस ने अंत समय में ज्ञानयोग का रास्ता अपनाया | वह समझ चुके थे कि कर्मों की पूर्ण निर्जरा करने के लिए (कर्मों को जड़ से भस्म करने के लिए) ज्ञान के प्रकाश का सहारा […]


बिना गुरु के कमियां कैसे पता चले ?

हमारे दोष, हमारे क्लेश, हमारी इच्छाएं, हम जीवन के पड़ाव में कहां स्थित हैं – हमसे बेहतर और कौन जान सकता है ? मां सबसे नजदीक होती है – काफी बातें भांप लेती है लेकिन सम्पूर्ण वह भी नहीं | जिन क्लेशों को जड़ से खत्म करने के लिए एक आध्यात्मिक साधक अपने अंदर ध्यान के सफर में उतरता है […]


क्या सीमित संसाधनों में व्यक्ति अपना जीवन शांतिपूर्ण जी सकता है ?

एक छोटी सी कुटिया में रह रहे साधु से जब किसी ने पूछा, इतनी छोटी कुटिया में आपको तकलीफ नहीं होती ? तो वह अत्यंत परिपक्व साधु बोला, सोच रहा हूं कुछ सामान काम कर दूं, जरूरत से ज्यादा प्रतीत हो रहा है | जितनी हमारी इच्छाएं उतनी बड़ी हमारी तकलीफें | अगर इच्छाएं ही नहीं होंगी तो कमी काहे […]


अगर ईश्वर है तो उनको हमारा दुःख दिखाई सुनाई क्यों नहीं देता ?

जब हमारा पैर चींटीयों पर पड़ जाता है, तो क्या हम दुख मानते हैं ? चींटियों पर क्या गुजरती होगी – क्या हमने सोचा है ? उनमें एक चींटी तो दादी थी – पूरा घर परिवार बिखर गया | यहां खुद भगवान हमारे हृदय में बैठे हैं सारथी के रूप में, हमें हर पल गाइड करने के लिए, लेकिन हम […]


हिंदुस्तान का संपन्न हिंदू समाज गरीब लोगों की मदद क्यों नहीं करता ?

गरीब कौन ? अहंकार में डूबा वो इंसान जो खुद के अलावा किसी की नहीं सुनता | जिसे हम गरीब कह रहे हैं, जरा उससे free में काम करवा कर देखिए ? दुनियां भर की बातें सुनने को न मिल जाएं | 250 साल पहले के गरीब और आज के गरीब में फ़र्क है | अंग्रेजों की गुलामी ने इन […]