निरामय स्वस्थ जीवन के सूत्र क्या हैं – जीवन में आयुर्वेद की भूमिका क्या है ?

निरामय जीवन का सबसे बड़ा सूत्र है अपने को हर समय positivity में व्याप्त रखना | प्रभु ने मनुष्य शरीर की संरचना इस तरह की है कि यह self healing है | अगर हम हर समय पॉजिटिव विचारों का आह्वान (invoke) करते हैं तो हमारे शरीर की immunity बढ़ती चली जाएगी | अध्यात्म के रास्ते पर चलते हुए बुखार तो […]


क्या आदर्शों के बिना जीवन संभव है ?

अगर हम जीवन में अपने आदर्श स्थापित नहीं करेंगे तो जीवन जिएंगे नहीं, सिर्फ और सिर्फ pass करेंगे, जैसे दुनिया के लगभग 95% लोग कर रहे हैं | जीवन में कोई लक्ष्य या आदर्श नहीं, जिंदगी बस गुजारे जा रहे हैं | कभी रुक कर नहीं सोचेंगे प्रभु ने यह मानव जीवन दिया क्यों ?   महर्षि रमण मूर्ख/अज्ञानी नहीं […]


लोग क्या कहेंगे – इसका कितना असर आप जीवन में लेकर चलते हैं ?

लोग क्या सोचेंगे/कहतें हैं इस बात कि फिक्र मैंने जिंदगी में 0% भी नहीं की | शुरू से स्वछंद जिंदगी जीया | 7 वर्ष की आयु में दादाजी से कुछ प्रश्न पूछे, सही उत्तर न मिलने पर, और दादाजी के स्वयं कहने पर, पप्पू – तेरे प्रश्नों का मेरे पास जवाब नहीं, मैं अपने रास्ते हो लिया | अध्यात्म में […]


कर्म के फलों को कैसे त्यागे ?

यह संभव हो पाता है जब हम सत्य के मार्ग पर चलते हुए खुद के लिए नहीं सारी दुनिया के लिए जीते हैं | ऐसा करने से धीरे धीरे हमें यह अहसास होने लगता है कि मनुष्य शरीर आत्मा ने धारण किया है, शरीर की मालिक तो वह है और हम मनुष्यों को कर्म, निष्काम भाव से करते हुए जीवन […]


जज – आखिरी बार किससे मिलना चाहता है ?

अगर यह प्रश्न जज, अपराध में गलत ढंग से फंसाए गए आध्यात्मिक साधक से पूछेगा तो जानते हो वह क्या कहेगा – मुझे खुद के स्वयं (मैं – आत्मा) से मिलवा दो – सिर्फ एक बार | क्या जज में है सामर्थ ऐसा करने की ?   What is the real meaning of spirituality? अध्यात्म का वास्तविक अर्थ क्या है […]


जब इंसान की मृत्यु तय है तो असीमित धन क्यों कमाना है ?

आज के समय में इंसान आपसी होड़ में फंसा है | हर बिजनेसमैन मुकेश अंबानी बनना चाहता है | एक ऐसा बिजनेसमैन जिसकी companies का काफी समय पहले turnover 700 करोड़ था मेरा अनुयाई हो गया, अध्यात्म पर बैठकर 2~2 घंटे चर्चा करता |   मैं उस समय बिजनेस में था, अपनी company का managing director | कौतूहलवश मैंने गुप्ताजी […]


हमलोग पूरी तरह निष्पक्ष क्यों नहीं हो सकते?

भीष्म पितामह जैसा कद्दावर ब्रह्मचारी, द्रोणाचार्य जैसा दिग्गज आचार्य अगर द्वापर युग में निष्पक्ष नहीं हो सके, तो आज के कलियुग में आम आदमी से कैसी अपेक्षा ? द्रौपदी का चीरहरण होता रहा और सभी बैठे देखते रहे, हमने तो दुर्योधन का नमक खाया है ?   निष्पक्ष होने के लिए सुभाष चन्द्र बोस जैसा सेनानी, सरदार पटेल जैसा लौहपुरूष […]


हम ईश्वर के अंश हैं और अंत में उसमें मिल जाना है फिर जन्म मृत्यु सुख दुख संसार मोह आदि क्यों ?

शुरू से पूरे क्रम को देखिए – 1. प्रलय हुई और पिछला ब्रह्माण्ड सिमट रहा है | ब्रह्माण्ड सिमट कर अस्थ अंगुष्ठ (आधे अंगूठे) के आकार में आ जाता है यानी ब्रह्म अपना original स्वरूप प्राप्त कर लेते हैं | ब्रह्म यानि पूरे ब्रह्माण्ड में स्थित हर आत्मा जब प्रलय के समय automatically 84 लाखवी योनि में स्थापित हो जाती […]


100 साल तक जीने का रहस्य क्या है ?

जो इंसान positivity (सिर्फ और सिर्फ positive विचारों के अवलोकन) में हर समय व्याप्त है, ऐसा इंसान 100 वर्ष क्या, ज्यादा भी जी सकता है | Negativity इंसान को अंदर से खोखला कर देती है |   जीवन का मूल मंत्र है सबके साथ सम व्यवहार करना, औरों के लिए जीना | जब हम निष्काम भाव से दुनिया के लिए […]


मृत्यु के बाद आत्मा किसी दूसरी मृत आत्मा से बात कर सकती है क्या ?

भारतीय शास्त्रानुसार एक आत्मा का मरने से पहले या बाद में किसी दूसरी आत्मा के साथ किसी भी तरह का contact वर्जित है | आत्मा ब्रह्म का ही एक छोटा स्वरूप है | एक गेहूं का दाना एक आत्मा और पूरे ब्रह्माण्ड में जितना भी गेहूं है, उसकी ढेरी परमात्मा |   जैसे परमात्मा हमेशा दृष्टा की भांति काम करता […]


सच्चा गुरु कौन होता है और कैसे प्राप्त करे ?

जो जीवन में कुछ भी सीख दे, वह सच्चा गुरु है | हमारे इंग्लिश मीडियम स्कूल में हिंदी के नए अध्यापक आए, सिर्फ 6 महीने रहे लेकिन उन से नाता 50 साल बाद भी वैसा ही है, आदर और प्रेम का | सातवीं कक्षा में कुछ ऐसा हुआ, उनकी बताई बातों का मुझ पर बहुत गहरा असर पड़ा और मेरे […]


स्वयं के वास्तविक स्वरूप को समझने की ध्यान प्रक्रिया में त्याग का क्या स्थान है ?

स्वयं को प्राप्त करने के लिए (शुद्ध आत्मा बनने के लिए) अध्यात्म की राह पर हमें निम्नलिखित चीज़ों का त्याग करना ही होगा –   1. मैं (अहंकार) जो अध्यात्म की राह में सबसे बड़ा बाधक है | मैं पर कंट्रोल पाने के लिए हमें सम भाव में रहना होगा | हमें कर्म निष्काम भाव से करने होंगे | यह […]


ध्यान की सरलतम और सटीक विधि बात सकते है ?

मुझे माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना है, कोई सरल उपाय बताओ – गांव का चौधरी जो पीछे खड़ा था बोला, गांव के पीछे जो टीला है उस पे चढ़ जा, हो गया माउंट एवरेस्ट |   जिस विधि को पूर्ण करने के लिए ब्रह्म (विधाता) ने 1 करोड़ वर्ष की अवधि दी है (11 लाख योनियों का फेर) उसे हम शीघ्रातिशीघ्र […]


जितेंद्रिय होने के लाभ क्या होते हैं ?

जितेंद्रिय वह कहलाता है जिसने सभी इन्द्रियों पर जीत हासिल कर ली | भगवद गीता में कृष्ण कहते है जब इन्द्रियों पर जीत हासिल कर लोगे तो मन पर जीत automatically हो जाएगी | मन की जीत के ऊपर कुछ नहीं | मन के ऊपर जीत से आशय है कि विचारों पर कंट्रोल स्थापित हो गया | ऐसा होने पर […]


विज्ञान जहां खत्म होता है वहाँ आध्यात्म चालू होता है – यह सही है ?

जहां विज्ञान खत्म होता है अध्यात्म वहां शुरू होता है – कारण एक ही है | विज्ञान प्रूफ पर आधारित है – दिखाओगे तो मान लूंगा | अध्यात्म अनुभूति और आस्था पर आधारित है | हम भगवान के होने के चिन्ह हर भौतिक और आध्यात्मिक क्रियाओं में रोजाना देखते हैं | इतना ही नहीं, आध्यात्मिक साधक ब्रह्म में पूर्ण आस्था […]


आध्यात्म और दर्शन दोनों एक-दूसरे के पर्याय हैं क्या ?

भारतीय दर्शन शास्त्र वह ज्ञान है जो वेदों, उपनिषदों और भगवद गीता में प्रतिपादित है, जिसका मूल स्वयं ब्रह्म से ग्रहण किया गया है | अध्यात्म दर्शन की वह शाखा है जिस पर चलकर एक साधक ब्रह्म तक पहुंच सकता है |   दर्शन principle है और अध्यात्म उस प्रिंसिपल के गूढ़ तत्व (यानी ब्रह्म) तक पहुंचने का रास्ता | […]


अंतरात्मा का सहारा पकड़ने के क्या लाभ है ?

अगर साधक अंतरात्मा का सहारा लेना सीख ले जैसा अर्जुन ने किया तो आध्यात्मिक सफर आसान ही नहीं हो जाएगा, हम बिना किसी अड़चन अपने गंतव्य ब्रह्म तक पहुंचने में कामयाब हो जाएंगे यानी ब्रह्म का साक्षात्कार हो जाएगा | ऐसा कैसे ?   पूरी भगवद गीता महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाकाव्य महाभारत ग्रंथ का एक अंग है | अर्जुन […]


भविष्य में मनुष्य अध्यात्म की ओर लौटेगा या नहीं ?

कलियुग में इंसान मैं पर आधारित है – ये भी मेरा हो जाए और वह भी | होड़ ही होड़ – जहां देखो वहां होड़, रुकने का नाम ही नहीं ले रही | भौतिकवाद चरम पर है – दुनिया के सारे comforts चाहिए और आध्यात्मिक होने का ढोंग | हर इंसान धार्मिक रूढ़िवादिता, अनुष्ठानों में उलझा हुआ और पूछो तो […]


अध्यात्म की अनुभूति की पात्रता है या नहीं कैसे जानें ?

जब बालक पैदा होता है और थोड़ा बड़ा होकर play school जाने लायक होता है, और पहली बार स्कूल में कदम रखता है तो क्या हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि उसमें स्कूल जाने की पात्रता है या नहीं ?   धरती पर उपस्थित हर मनुष्य को एक न एक दिन अध्यात्म के रास्ते पर चल मोक्ष पाना […]


इंसान ज्यादा क्या पसंद करता है सैक्स या अध्यात्म ?

मेरा यह personal experience भी है और मानना भी कि एक सच्चा आध्यात्मिक साधक वही होता है जिसके अंदर असामान्य शारीरिक क्षमता (सेक्सुअल एनर्जी) हो | ऐसा क्यों ? वेग नहीं होगा तो dam में बिजली बनेगी कैसे ? जितना ज्यादा पानी का वेग उतनी ज्यादा तेजी से turbines घूमेंगी और बिजली पैदा करेंगी |   Dam पानी से लबालब […]


क्या पेशेवर व्यक्ति आध्यात्मिक हो सकता है ?

अंगुलिमाल एक पेशेवर हत्यारा, जिसको भी मारता, एक अंगुली काट गले में माला में डाल लेता | बुद्ध के दर्शन क्या हुए, कुछ प्रश्नोत्तर और सब छोड़ बुद्ध का शिष्य बन गया | बुद्ध ने सिर्फ इतना कहा था थम्म | अंगुलिमाल ने सोचा मुझे थम्म कहने वाला कौन आ गया, आज तक तो मैंने ही लोगों को रोक कर […]


आध्यात्मिक विकास का क्या मतलब है ?

भौतिक जगत में जैसे विकास होता है, आध्यात्मिक जगत में सब कुछ बिल्कुल भिन्न है | क्यों ? इसकी मूल वजह है कि यह शरीर आत्मा ने धारण किया है तो जो आध्यात्मिक क्षेत्र में होगा वहीं permanent होगा अन्यथा नहीं | सोच कर देखें ?   मनुष्य रूप में 11 लाख विभिन्न योनियां हैं, फिर भी हर बार हमें […]


पुराने ज़माने के साधु सालों ध्यान में बिता देते थे लेकिन आजकल के लोग दस मिनिट भी नहीं बैठ पाते ?

पिछले समय में जो भी इंसान साधु बनता था उसका एक ही ध्येय होता था – अध्यात्म में प्रगति | गुरु बनाते भी थे तो सिर्फ शंकाएं दूर करने के लिए | आज का साधु मंडली में रहता है, समाज से जुड़ा रहता है, और कुछ को मौका मिले तो गुरु की गद्दी हथियाने को तैयार |   समय के […]


पूर्व और पश्चिम में बहुत सारे गुरु ज्ञान के लिए अपना रास्ता बताते हैं – कैसे जानें वह सच बोल रहे हैं ?

ब्रह्म का साक्षात्कार हुए 30 वर्ष हो गए | इंटरनेट पर 6500 के लगभग articles हैं English में (काफी websites हैं) | दुनियाभर में 10 लाख से ज्यादा silent साधक हैं जो नियमित रूप से मेरे द्वारा लिखित articles पढ़ते रहते हैं | तो क्या मैं अपना ही आध्यात्मिक केंद्र, अपनी ही आध्यात्मिक शिक्षा प्रणाली शुरू कर दूं ?   […]


उच्च शिक्षित व्यक्ति अध्यात्म में गहरी रुचि क्यों लेते हैं ?

उच्च शिक्षा ग्रहण कर कुछ सच्चे इंसानों को जब यह अहसास होता है मरने के बाद साथ कुछ नहीं जाएगा, अगले जन्म में फिर nursery class से सब कुछ दोबारा हांसिल करना होगा, तो अन्दर से उत्पन्न घबराहट और हृदय से आती कृष्ण की आवाज़ उन्हें अध्यात्म में उतरने के लिए प्रेरित करती है | वह अलग बात है successful […]


आध्यात्मिक ऊँचाई नापने का कोई उचित तरीक़ा बता सकते हैं ?

अगर कर्मफल की इतनी ही चिंता है तो अध्यात्म त्याग किसी commercial enterprise में लग जाओ | फिर आराम से profit गिनते रहना | कृष्ण ने भगवद गीता में कितने साफ शब्दों में कहा, कर्म करो निष्काम भाव से, कर्मफल की चिंता किए बिना | लेकिन हमारी मैं के सामने कृष्ण भी कुछ नहीं | कर्म कर रहे हैं तो […]


अध्यात्म में क्या ऐसी स्थिति आती है जब बाहर से ग्रंथ संत गुरु आदि की आवश्यकता न हो ?

अध्यात्म में सत्य की राह पर चलते चलते आखिर में ऐसी स्थिति आ ही जाती है जब वह स्वयं से बात करने लगता है | स्वयं से बात करने से मतलब है – अपने हृदय में स्थित कृष्ण (सारथी), यानि हमारी अपनी आत्मा की आवाज़ हमें स्पष्ट सुनाई देती है | जब ऐसा होगा तो सम्पूर्ण भगवद गीता में निहित […]


आपने अपने आपको कैसे पहचाना ?

जीवन में 5 वर्ष की आयु से अध्यात्म का दामन थाम लिया | साथ में सत्य का चोला भी | ऐसा करने से हृदय से आती कृष्ण (सारथी) की आवाज़ बिल्कुल साफ सुन सकता था |   फिर शुरुआत हुई ब्रह्मचर्य के पालन की और ध्यान तो हर समय चलता रहता था | ध्यान वो नहीं जिसमें आज की दुनिया […]


इस जगत में ब्रह्मचर्य से नशीला कुछ है ही नहीं ?

नशीला – अगर किसी इंसान में सामर्थ्य हो 100 शराब की बोतलें एक साथ पीने की, तो भी अखंड ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए जो अनुभूति होती है उसे शब्दों में बयान किया ही नहीं जा सकता | जब हम ब्रह्म के निकट होते हैं तो ऐसा लगता है हम सातवे आसमान पर विराजमान हैं | बस हम और हमारी […]


आध्यात्मिक जागरण के बाद सबसे कठिन चरण क्या है ?

अगर साधक ने ब्रह्मचारी रहकर आध्यात्मिक जागरण किया तो शायद परेशानी ज्यादा न आएं | सब कुछ निर्भर करता है आप पर परिवार में कितने आश्रित हैं | स्वामी विवेकानंद पर शायद कोई आश्रित नहीं था फिर भी कम उम्र में (39 वर्ष) उनकी मृत्यु हो गई |   महर्षि रमण पर उनकी मां आश्रित थी | वह पहले 11 […]