इम्युनिटी पावर बढ़ाने का सरल उपाय क्या है ?

आप आध्यात्मिक हों या आम इंसान, ब्रह्मचर्य के सही पालन से अपने शरीर की immunity infinite (अनंत) कर सकते हैं | खुद के experience से कह रहा हूं | अनंत यानि – 22 वर्षों तक बुखार तो क्या जुखाम खांसी ने भी तंग नहीं किया | एक दिन परेशान होकर मां से कहा, मुझे कहीं कुछ problem तो नहीं, 22 […]


ओशो के संभोग से समाधि की ओर विचार से हम समाधि की ओर जा सकते हैं ?

अगर बाल्टी में मोटा छेद कर देंगे तो बाल्टी पूरी भरेगी कैसे ? मूलाधार में एकत्रित वीर्य/ अमृत अगर यूं ही व्यर्थ की शारीरिक क्रियाओं में व्यर्थ कर देंगे तो कुण्डलिनी को ऊर्ध्व करने के लिए ऊर्जा कब इकट्ठी होगी \ कहां से आयेगी ?   संभोग से समाधि की ओर, एक mentally corrupt स्टेटमेंट है | ब्रह्मचर्य के रास्ते […]


आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़ने की सही उम्र क्या है ?

अगर बारीकी से सभी तथ्यों का अवलोकन करें तो हम पाएंगे कि अध्यात्म से साधक इस जन्म के कर्मों से नहीं जुड़ता ? मृत्यु के समय जो पिछले जन्म का karmic balance था, मूलतः वह decide करता है हम इस जन्म में अपना आध्यात्मिक सफर कब शुरू करेंगे, करेंगे भी या नहीं |   सोचिए अगर भिखारी पैदा हुए तो […]


अध्यात्म में रहकर शान्ति मिलती है क्या सच में ?

शांति तो इतनी मिलेगी की खुशी से फूले नहीं समाओगे, लेकिन उस अशांति का क्या जो जीवन में एक मिनट भी चैन से बैठने नहीं देगी (आपकी पत्नी) |   गृहस्थ में रहकर अध्यात्म की साधना करना एक relative term है | हमें balance बनाकर चलना होता है भौतिक और आध्यात्मिक life में | मुश्किल है असंभव नहीं | अगर […]


आध्यात्मिक यात्रा में चिंतन का कोई अंत है या नहीं या समर्पण ही हर यात्रा का अंत है ? 4

आध्यात्मिक सफर में चिंतन क्यों किया जाता है ? ध्यान में चिंतन के माध्यम से हम self enquiry भी करते है (जैसे महर्षि रमण कहते हैं) और अपने अंदर आते हजारों प्रश्नों के उत्तर ढूंढ़ते हैं जिससे वे प्रश्न जड़ से समूल नष्ट हो जाएं | शनै शनै जब कर्मों की निर्जरा होने लगती है और प्रश्न कम होने शुरू […]


सिर्फ़ किताबों को पढ़ कर आध्यात्म को जाना जा सकता है क्या ?

हम सभी ने पढ़ा – अर्जुन का बेटा अभिमन्यु महाभारत के युद्ध में चक्रव्यूह में फंस कर कौरवों द्वारा मारा गया | हुआ यों कि जब अर्जुन अपनी पत्नी सुभद्रा को चक्रव्यूह से बाहर निकलने की विधि समझा रहे थे तो सुभद्रा को नींद आ गई | अभिमन्यु उस समय मां के गर्भ में था | चक्रव्यूह में कैसे घुसते […]


विज्ञान से लगाव ईश्वर से दूर ले जा सकता है क्या ?

जब से हम पैदा होते हैं हम दो जीवन जीते हैं | एक रास्ता हमें स्कूल ले जाता है जहां हमें विद्या दी जाती है | और विज्ञान की शिक्षा विद्या के तहत आती है | जैसे हम बड़ी क्लास में पहुंच जाते हैं हमें विज्ञान (science) की शिक्षा दी जाती है | और जब मंदिर जाते हैं तो मन […]


अध्यात्मिक पथ पर चलने में कठिनाइयां क्यों आती हैं ?

सबसे बड़ा भ्रम जो समाज में फैला हुआ है वह है – अध्यात्म के रास्ते पर चलने वाले बुद्ध की तरह घरबार से दूर हो जाते हैं/ या घर छोड़ हरिद्वार, ऋषिकेश, वाराणसी या उज्जैन, नासिक इत्यादि धार्मिक स्थलों में जा बस्ते हैं | अगर आप गृहस्थ हैं और भरे पूरे परिवार को बीच धार में छोड़ घर से कहीं […]


ध्यान में सोच क्या होनी चाहिए ?

ध्यान प्रक्रिया में सोच का कोई स्थान नहीं | ध्यान प्रक्रिया तो दृष्टा की भांति जी जाती है | पहले हमें ध्यान की परिभाषा समझनी चाहिए – अपने अंदर उमड़ते हर प्रश्न को जड़ से खत्म करना होता है | जैसे जैसे हमारे अंदर कम प्रश्न आएंगे – हमें स्वयं महसूस होगा कि कर्मो की निर्जरा हो रही है | […]


कलियुग को आने से रोका जा सकता है क्या ?

जिस प्रकार घड़ी की सुई लगातार चलती/ घूमती रहती है उसी प्रकार विभिन्न युगों का उदय होता है | दिन के 12 बजे का वक़्त है, सूर्य पूरी तेजी के साथ चमक रहा है यानी हम सतयुग के अंतिम दौर से गुजर रहे हैं | जैसे ही सूरज ढलने लगता है, त्रेता युग शुरू हो चुका है | शाम के […]


कैसे पता करें हमारी किस्मत अच्छी है या बुरी ?

किस्मत कैसी भी हो, पूरा ब्रह्माण्ड कर्म theory पर टिका है, जैसा करोगे वैसा फल मिलेगा | काफी लोग इस बात से भगवान से नाराज़ हैं कि फल तुरंत क्यों नहीं मिलता | सोचिए अगर हमें मालूम हो ऐसा करने से ये मिलेगा, तो जरूरत से ज्यादा होशियार मानव भगवान को भी गच्चा दे जाए – कर्म theory को interpolate […]


अधिकांश बुद्धिजीवी अध्यात्म में गोता क्यों लगाते हैं ?

बुद्धिजीवी जो होशियार हैं तभी तो कारोबार में सफल हैं – समय आने पर अक्सर अध्यात्म की ओर झुक जाते हैं | झुक तो जाते हैं पर सफल एक भी नहीं होता | क्यों ?   लगभग हर successful बुद्धिजीवी 65 ~ 70 वर्ष की आयु में अध्यात्म की ओर मुड़ना चाहता है | जीवन में जो करना चाहते थे […]


आध्यामिकता कितनी आवश्यक है – यह जीवन को किस प्रकार प्रभावित करती है ?

हम इस जीवन में कब आध्यात्मिक होंगे यह पिछले जन्म के कर्मफल पर आधारित है | आध्यात्मिकता तो जीवन का कारण है | आत्मा ने यह मनुष्य शरीर धारण ही शुद्धि प्राप्त करने के लिए लिया है लेकिन अबोध मनुष्य हमेशा अनजान बनकर धार्मिक क्रियाओं/ अनुष्ठानों में व्यस्त रहता है – जानते हुए कि धार्मिक क्रियाकलापों से आत्मा को शुद्धि […]


अध्यात्म मार्ग पर अकेले चलना बेहतर है या साथी के साथ ?

क्या हम अध्यात्म में अपनी इच्छामात्र से जा सकते हैं ? क्या यह संभव है ? क्या हम अपने साथी को आध्यात्मिक सफर के लिए तैयार कर सकते हैं ? बिल्कुल नहीं |   सब कुछ पहले से तय होता है – हमारे पिछले जन्मों का कर्मफल तय करता है हम इस जन्म में आध्यात्मिक होंगे भी या नहीं | […]


परमात्मा को पाने के लिए साधना ज़रूरी है क्या ?

परमात्मा को कैसे पाना चाहते हो – हे परमात्मा, मैं तो तेरे घर आ गया, तू कबूल कर या नहीं |   जिस परमात्मा को हम जानते नहीं, जिसको किसी ने देखा नहीं, जिसको प्राप्त करने के लिए शास्त्र कहते हैं हमारी आत्मा 11 लाख मनुष्य योनियों के चक्रव्यूह से गुजरती है – वह बिना किसी साधना के क्या मिल […]


अध्यात्म की दृष्टि में सारे दुनिया जहान की खबर रखना गलत है ?

द्रौपदी के स्वयंवर में अर्जुन को मछली कि आंख क्यों नहीं दिखाई दी ? उन्हें सिर्फ दिखाई दिया मछली कि आंख का वो core जहां तीर मारना था | अर्जुन जैसी एकाग्रता जब तक साधक में नहीं होगी, अध्यात्म की सीढ़ी पर कुछ हासिल नहीं होगा |   भारतीय दर्शन शास्त्र इतने विराट, विस्तृत हैं कि विवेक का सही इस्तेमाल […]


अगर मैं आत्मज्ञान प्राप्त करना चाहूं तो कितना समय लगेगा ?

ब्रह्म ने मनुष्य रूप में 11 लाख योनियों का सफर (1 करोड़ वर्ष की अवधि) निमित्त की है आत्मज्ञान पाने के लिए | भारतीय परिवेश में आत्मज्ञान, कैवल्य ज्ञान, तत्वज्ञान, ब्रह्मज्ञानी होना, तीसरा नेत्र खुलना, सहस्त्रार activate होना, छठी इंद्री जागृत होना, 84 लाखवी योनि पर पहुंचना – सब एक ही बात के सूचक हैं |   कोई भी साधक […]


क्या ध्यान में कुंडलिनी का दर्शन काले नाग के रूप में होता है ?

जब मैं ध्यान की शुरुआती stage में था (लगभग 15 वर्ष की उम्र) तो अचानक 3 काले सर्प खड़ी मुद्रा में आंखों के सामने हर समय रहने लगे – सोते जागते | देख कर बड़ा डर लगता लेकिन एक दिन मैं उनसे डरा नहीं और उनकी तरफ घूर कर देखने लगा | काफी देर देखने के बाद दो सर्प बाएं […]


किसी आध्यात्मिक व्यक्ति का व्यवसाय करना सही है क्या ?

अध्यात्म कभी किसी व्यावहारिक क्रिया में आड़े हाथों नहीं आता | अगर आप तैयार हैं तो business खुल कर करें | मेरा goal ब्रह्म तक पहुंचना था इसलिए ब्रह्म ने किताब लिखने की इजाज़त नहीं दी | लेकिन मैं अपने business में managing director था, एक ऑफिस कोचीन में और एक मद्रास में |   पिताजी और भाई के साथ […]


परमात्मा केवल अनुभव की चीज है या उसे देखा जा सकता है ?

परमात्मा (ब्रह्म) को हम कभी देख नहीं पाएंगे लेकिन जब भी उन्हें मेरे साथ बात करनी होती है तो कभी पीठ पर या कंधे पर जोर से थप थप करते हैं 3 ~ 4 बार | कितनी बार ऐसे हो चुका है | जब ब्रह्म आते हैं मेरे लिए कितना खुशी का समय होता है | last जब आए थे […]


भारत में आध्यात्मिक गुरु कहाँ मिल सकते हैं ?

भारत में क्या पूरे विश्व में एक भी आध्यात्मिक गुरु नहीं मिलेगा जो आपको अध्यात्म में guide कर सके | क्यों ? महावीर कहते थे पहले तत्वज्ञान हासिल करो, फिर प्रवचन देना | आज तो सभी ज्ञान बांट रहे हैं बिना खुद महर्षि रमण या रामकृष्ण परमहंस के level पर पहुंचे | अगर हम आत्मज्ञान पाने के लिए बेहद serious […]


क्या एक शूद्र वेद और हिन्दू ग्रंथो के अनुसार ब्राह्मण बन सकता है ?

भारतीय दर्शन में 4 वर्ण दर्शाए गए हैं – ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र | सब कुछ कर्म theory पर आधारित है | अगर शूद्र वेद और भारतीय दर्शन शास्त्रों को पढ़ने और समझने में समर्थ है तो वह ब्राह्मण कहलाएगा | आज आप चेन्नई में जाएं | आपको ब्राह्मण परिवार के सदस्य जूते के शोरूम खोले दिख जाएंगे | […]


वेद या भगवद गीता में कौन श्रेष्ठ है ?

पिता और पुत्र में किसे श्रेष्ठ कहेंगे ? पिता जो पहले आया या पुत्र जो बाद में आया ?   वेदों की उत्पत्ति उन ऋषियों द्वारा की गई जो खुद तत्वज्ञानी हो चुके थे | उन्होंने श्रुतिज्ञान के द्वारा ब्रह्म का आह्वान किया तो वेदों का ज्ञान ऊपर से उतरा | वेदों में निहित ज्ञान सीधे ब्रह्म की वाणी है, […]


वेदों का ज्ञान ईश्वर ने ऋषियों को कैसे दिया ?

जब मानव सभ्यता ने धरती पर अपने पैर जमा लिए, तो प्राकृतिक आपदाएं समय समय पर अपना उग्र रूप दिखाने लगी | जब मानव मस्तिष्क परिपक्व हो गया तो कुछ ऋषियों ने देवी देवताओं को उजागर किया | अगर बाढ़ आ गई तो वरुण देवता अस्तित्व में आ गए, उनकी पूजा, उपासना हो रही है जिससे मानव को राहत प्रदान […]


वेदों को श्रुति भी क्यों कहा जाता है ?

वेद श्रुति के द्वारा धरती पर अस्तित्व में आए हैं | कुछ तत्वज्ञानी ऋषियों ने श्रुति के द्वारा वैदिक ज्ञान को सीधे ब्रह्म से उद्धृत किया | वेद धरती पर ब्रह्म द्वारा दिए गए सबसे पहले शब्द/ ब्रह्मवाक्य/ ज्ञान हैं इसीलिए वेदों को श्रुतिज्ञान भी कहा जाता है |   श्रुति (universal means of communication), ब्रह्म से जुड़ने, बात करने […]


महर्षि वेदव्यास के अनमोल विचार क्या हैं ?

महर्षि वेदव्यास भारतीय ऋषि परंपरा के एकमात्र ऐसे ऋषि हैं जिन्हें पूरी मानवता, सभ्यता और भारतीय दर्शन का सूत्रधार कहा जा सकता है | महर्षि वेदव्यास नहीं होते तो हमे संग्रहित चारों वेद नहीं मिलते, उनसे पहले सब बिखरा हुआ था |   महर्षि वेदव्यास नहीं होते तो महाभारत महाकाव्य अस्तित्व में नहीं होता और न होता कृष्ण और अर्जुन […]


आदि शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन का सार क्या है ?

भारतीय दर्शन में आदि शंकराचार्य का अद्वैत सिद्धांत कहता है ब्रह्म के अलावा पूरे ब्रह्माण्ड में और किसी विभूति का अस्तित्व नहीं है | प्रलय के बाद रह जाते हैं ब्रह्म और सिर्फ ब्रह्म, बाकी सब कुछ समाविष्ट हो जाता है ब्रह्म में |   इसी कारण अद्वैतवाद को doctrine of maya भी कहते हैं | Doctrine of Maya के […]


क्या आध्यात्मिक न होना बेकार होना है ?

आध्यात्मिक सफर के लिए ब्रह्म ने 11 लाख मनुष्य योनियों का चक्रव्यूह और 1 करोड़ वर्ष की अवधि दी है | चाहे हम अध्यात्म में इस जन्म में उतर जाए या फिर आत्मा पर छोड़ दें कि वह किस योनि में फिर से अध्यात्म में प्रवेश करेगी |   यह ध्यान रहे हमारा यह पहला और आखिरी जन्म है | […]


सप्त चक्रों को जाग्रत किये बिना स्वतः कुण्डलिनी जागरण हो सकता है क्या ?

क्या हम UKG से सीधे 8 वी कक्षा में पहुंच सकते हैं ? असम्भव, क्रमवार चलना होगा | progress stages में होगी | इसी तरह जब कुण्डलिनी ऊर्ध्व होगी तो पहला, दूसरा और आखिर में सातवां चक्र एक्टिवेट होगा |   किसी भी चक्र को जागृत करने के लिए जितने अमृत की जरूरत होगी वह कुण्डलिनी के द्वारा जब तक […]


जन्म-मृत्यु का चक्र कौन समाप्त कर सकता है ?

जन्म मृत्यु के चक्रव्यूह से हमेशा के लिए निकलने के लिए, महर्षि रमण के लेवल पर पहुंचने के लिए, मोक्ष लेने के लिए एक इंसान को अध्यात्म में उतरना होगा | अध्यात्म यानी भगवान से योग करने की चेष्टा, ब्रह्मलीन होने का प्रयास |   कोई भी इंसान, छोटा हो या बड़ा, अमीर या गरीब, जीवन के किसी भी phase […]