कलियुग को सतयुग में बदला जा सकता है क्या ?

क्या हम चुटकी बजाकर एक मंजे हुए डाकू को तपस्वी बना सकते हैं ? नहीं | कलियुग क्या ? जब लगभग 99% लोग negative (गलत) सोचते हैं | और यह बात 1 दिन में नहीं बदली जा सकती | सतयुग क्या ? जब 99% लोग positive (अच्छा) सोचते हैं |   फेर बस सोचने का ही है | आम इंसान […]


अध्यात्म भी कभी तनावपूर्ण हो सकता है क्या ?

अध्यात्म का सफर तनावपूर्ण कम परेशानी भरा ज्यादा कह सकते हैं | अगर साधक तनाव में रहेगा तो आध्यात्मिक उन्नति न के बराबर होगी | तनाव की स्थिति में ध्यान/ चिंतन हो ही नही सकता |   हां अगर आप गृहस्थ हैं तो पूरा जीवन परेशानियों से जूझने में गुजरेगा | कभी पैसे की चिंता, कभी पत्नी के साथ चिक […]


भारतीय नारी हर तरह से पूजनीय क्यों है ?

हम भारतवासी धरती को धरती मां क्यों कहते हैं ? गाय को गाय माता क्यों कहते हैं ? स्त्रियों को मान देना विशुद्ध भारतीय परंपरा है | कोई भी मानव जन्म बिना मां के संभव नहीं | भगवान के बाद दूसरा नाम मां का है जो 9 महीने बच्चे को गर्भ में रखती है |   भगवान और साधक के […]


मनुष्य को अच्छे बुरे कर्म का फल स्वर्ग नरक में भोगने के बाद पृथ्वी लोक पर भी भोगना पड़ता है क्या ?

कर्मफल तो सदा से आत्मा का होता है | धरती पर मृत्यु के बाद मनुष्य का जीवन खत्म – वह एक ही जन्म के लिए था | मृत्यु के बाद हमारी आत्मा नया शरीर कहां (किस देश में) और किसके घर लेगी यह किसी को भी मालूम नहीं |   मृत्यु के समय अगर karmic balance negative है और धरती […]


अध्यात्म में जाने से परिवार क्यों रोकता है ?

अध्यात्म यानि – वह अध्ययन जिसके द्वारा आत्मा को, खुद के तत्व स्वरूप को जाना जा सके | अगर हम अपने अंदर के सफर में (तप में) व्यस्त हो गए तो भारत में आम धारणा है कि व्यक्ति अपनी भौतिक जगत की जिम्मेदारियों से दूर भागने लगता है और अंततः वैराग्य में स्थापित हो सन्यासी बन जाता है |   […]


मूर्ति पूजा ग़लत क्यों है ?

अगर हम अध्यात्म की राह पकड़ इसी जन्म में ब्रह्मप्राप्ती के इच्छुक हैं और मूर्तिपूजा करते हैं तो कीमती समय नष्ट कर रहे हैं | अध्यात्म में ब्रह्म तक पहुंचने के लिए किसी माध्यम की जरूरत नहीं होती | ब्रह्म निराकार हैं, हृदय में स्थापित हैं, उन्हें ढूंढने बाहर क्या जाना, या मंदिरों में जाकर पूजा इत्यादि क्यों करना ? […]


अध्यात्म जीवन से दूर ले जाता है क्या ?

अध्यात्म का आखरी लक्ष्य क्या है – मोक्ष प्राप्त करना, आत्मा का अपने शुद्ध रूप में वापस आ जाना | यह संभव हो पाता है जब मनुष्य पांचों इंद्रियों पर कंट्रोल स्थापित कर ले | पांचों इंद्रियों पर कंट्रोल स्थापित करने के लिए हमें अपनी मैं (यानि अहंकार) को निरस्त करना होता है | इसके लिए मोह पर control स्थापित […]


शास्त्रों को गुरु या तत्व को जानने वाले से ही पढ़ना चाहिए क्या ?

क्या आप समझते हैं ऐसा करना practically संभव है ? आज के समय में अच्छा ज्ञानी पुरुष/ तत्वज्ञानी मिल जाएगा ? अगर मिल भी गया तो 800 करोड़ लोगों में एक – आपको कितना समय दे पाएगा ?   अगर हमें भारतीय दर्शन शास्त्रों का अध्ययन करना है तो इसमें गुरु की कोई आवश्यकता नहीं और तत्ववेत्ता मिलेगा नहीं | […]


अध्यात्म ज्ञान के लिये सन्यास लेना जरुरी है ?

पहले समय में यही प्रथा ज्यादा प्रचलित थी कि तत्वज्ञान पाने के लिए सांसारिक बंधन हमेशा के लिए काट दिए जाएं | आज यह सब जरूरी नहीं | घर में/ गृहस्थ आश्रम में ब्रह्मचर्य का सकुशल पालन किया जा सकता है | दिक्कतें तो आएंगी लेकिन आध्यात्मिक होकर हिम्मत कैसे हार सकते हैं ?   अध्यात्म में कूदने से पहले […]


क्या जिन असली में होते हैं ?

जैन धर्म में जिन उसे कहा जाता है जिसने खुद को जीत लिया है | जिन यानि एक तपस्वी जो अपनी आध्यात्मिक journey पूरी कर एक तत्वज्ञानी बन चुका है | यह हम सभी जानते हैं कि ब्रह्म से साक्षात्कार होते ही काफी सिद्धियों के हम मालिक हो जाते हैं | बस इस तत्वज्ञानी को जिन इसीलिए कहा जाता है […]


क्या आत्माओं की संख्या निर्धारित अथवा सीमित नहीं है जो बढ़ती आबादी के साथ आत्माओं की संख्या बढ़ जाती है ?

800 करोड़ लोग धरती पर रहते हैं यानी 800 करोड़ आत्माएं | मनुष्य योनि पशु पक्षियों की योनि के बाद मिलती है | यानि जितने भी पशु पक्षी इस समय धरती पर मौजूद हैं वह एक दिन मनुष्य योनि में आएंगे | जितने भी पेड़ पौधे धरती पर मौजूद हैं वह एक दिन पशु पक्षियों की योनि और फिर मनुष्य […]


आत्मा अजर अमर है तो इतनी सारी नई आत्माएं कहाँ से आ रही हैं ?

धरती पर मात्र 800 करोड़ मनुष्य रहते हैं | असंख्य पशु पक्षी, असंख्य प्रजातियां पेड़ पौधों की और असंख्यों तरह के कीट पतंगे | सभी में आत्माएं मौजूद हैं |   हिंदी में गिनती के अनुसार – पहले सौ, हज़ार, दस हज़ार, लाख, दस लाख, करोड़, दस करोड़, अरब, दस अरब, खरब, 10 खरब, नील, दस नील, पद्म, दस पद्म, […]


क्या सबकी आत्मा अलग-अलग होती है ?

तत्व सभी आत्माओं का एक होता है, बस structure भिन्न | अगर हम बाज़ार से 1000 pieces की puzzle लाते हैं तो पजल का हर individual टुकड़ा अलग होता है लेकिन उसका composition same | सभी टुकड़े लकड़ी से बने हैं, सिर्फ शक्ल में भिन्न |   प्रलय के बाद भी आत्माएं अपनी individual identity maintain रखती हैं | आत्माएं […]


तत्वदर्शी संत के अनुसार शास्त्रों का गुप्त ज्ञान क्या है ?

मनुष्यों को 84 लाखवी योनि में स्थापित होने के लिए, मोक्ष लेने के लिए जिस ज्ञान की आवश्यकता पड़ेगी – वह सब भारतीय दर्शन शास्त्रों जैसे वेदों, उपनिषदों और भगवद गीता में मौजूद है |   शास्त्र कहते हैं हम मूलतः एक आत्मा हैं, ब्रह्मांडीय सफर में अशुद्धियों से लिप्त हो गए और इन्हीं अशुद्धियों से छुटकारा पाने के लिए […]


उपनिषदों और भगवद गीता का अध्ययन क्यों जरूरी है ?

भारतीय दर्शन शास्त्र कहते हैं हम मूलतः एक आत्मा हैं जो अपने अंदर समाहित अशुद्धि को समूल नष्ट करने के लिए 84 लाख योनियों के लंबे भंवर से गुजरते हैं | 84 लाख योनियों में आत्मा आखिरी 11 लाख योनियां मनुष्य रूप में धारण करती है |   तो धरती पर मनुष्य की मूल जिम्मेदारी क्या है ? आत्मा को […]


उपनिषदों की विषयवस्तु क्या है ?

सबसे पहले वेद इस धरा पर आए – सीधे ब्रह्म से | सभी वेद इतने voluminous थे कि उनका सार आम जनता तक पहुंच नहीं पा रहा था | इस समस्या का समाधान ऋषियों के एक समूह ने निकाला |   जिसकी जैसे रुचि थी उसी विषय को विस्तार दिया | किसी उपनिषद में आत्मा के ऊपर जानने योग्य लगभग […]


जीवन में किस वेद और पुराण को जरूर पढ़ना चाहिए ?

मनुष्य अगर इसी जीवन में मोक्ष पाना चाहता है तो निम्नलिखित टीकाएं गीताप्रेस, गोरखपुर के किसी भी स्टॉल या डिपो से प्राप्त कर ले |   1. श्रीमद्भगवद्गीता – पदच्छेद, अन्वय और साधारण भाषाटीकासहित (17) 2. ईशादि नौ उपनिषद् (66)   आज के समय में किसी भी वेद और पुराण को पढ़ने की आवश्यकता नहीं – एक भी | धार्मिक […]


उपनिषदों को दार्शनिक ज्यादा महत्वपूर्ण क्यों मानते हैं ?

आज के समय में धार्मिक कर्मकांडो, अनुष्ठानों का कोई महत्व नहीं तो वेदों को पढ़ने की जरूरत नहीं | अज्ञान के अन्धकार को काटने के लिए जिस ज्ञान के प्रकाश की जरूरत है वह उपनिषदों में मौजूद है |   उपनिषदों में हर subject जैसे आत्मा, परमात्मा और मोक्ष इत्यादि पर बहुत detailed विवेचना, व्याख्या मिल जाएगी | इसके अलावा […]


उपनिषदों की मूल प्रति कहां से मिल सकती है ?

आज के समय में 9 principal उपनिषद ही काफी हैं जो गीताप्रेस, गोरखपुर के किसी भी बुकस्टॉल या डिपो से मिल जाएंगे – ईशादि नौ उपनिषद् (66) | इस संस्करण में सभी 9 उपनिषदों का मूल टीका सहित उपलब्ध है |   इसके अलावा इस जन्म में मोक्ष प्राप्त करने के लिए – छान्दोग्य उपनिषद् और बृहदारण्यक उपनिषद् के ऊपर […]


कौरवों और पांडवों के युद्ध में श्री कृष्ण किस पक्ष में थे ?

महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाकाव्य महाभारत का अंग है कृष्ण और अर्जुन उवाच | कृष्ण अर्जुन के ही सारथी क्यों बने पूरी महाभारत में किसी और के क्यों नहीं ? उसका एक ही कारण है | अर्जुन सत्य का साथ देते थे |   कृष्ण, यानि हमारी अपनी आत्मा की हृदय से आती आवाज़ को सिर्फ वही सुन सकता है […]


पूरे ब्रह्मांड के मालिक ईश्वर स्त्री हैं या पुरुष ?

पूरे ब्रह्मांड के रचयिता ब्रह्म एक energy source हैं – ऐसा एनर्जी source जिसकी कल्पना मनुष्य के लिए संभव नहीं | ब्रह्म को सिर्फ दिव्य नेत्रों द्वारा महसूस किया जा सकता है | ब्रह्म से साक्षात्कार के बाद में उनसे हर पल बात कर सकता हूं | है न विचित्र बात !   ब्रह्म को हम सनातन पुरुष भी कहते […]


ज्ञान का क्या महत्व है ?

एक ज्ञान होता है जिसे हम शास्त्रों से जोड़ते हैं और दूसरी विद्या जिसे हम किताबों से, शिक्षा से जोड़ते हैं | दोनों में मूलभूत फ़र्क क्या है ?   विद्या (bookish knowledge) हम शिक्षा के माध्यम से ग्रहण करते हैं | विद्या ग्रहण करने के लिए पुस्तकों या अध्यापक की जरूरत होती है | मूलतः विद्या ग्रहण रोटी रोज़ी […]


माता सरस्वती का ज्ञान से क्य़ा संबंध है ?

अध्यात्म में किसी भी देवी देवता के लिए कोई स्थान नहीं | देवी देवताओं का साम्राज्य उनके लिए है जो धार्मिक हैं | अध्यात्म कहता है अगर हम पूर्णतया सत्यवादी हो जाएं तो हृदय से आती कृष्ण (सारथी) की आवाज़ बिल्कुल साफ सुन सकेंगे और पूरे ब्रह्मांड में निहित ज्ञान हमारे क़दमों में होगा |   भगवद गीता में कृष्ण […]


वेद गीता पुराण उपनिषद मनुष्य के लिए बने हैं या मनुष्य इन सब के लिए ?

पहले सृष्टि बनी और आत्माओं ने ब्रह्मांडीय सफर में अशुद्धियां ग्रहण कर लीं और धरती मां के अस्तित्व में आते ही आत्माओं का 84 लाख योनियों का सफर शुरू हो गया | पहली 73 लाख योनियां तो कीट पतंगों, पेड़ पौधों और पशु पक्षियों की योनियों में गुजर गईं |   मनुष्य रूप में 11 लाख योनियां होती हैं और […]


इस जमाने की युवा पीढ़ी को वेद पुराण पढ़ने में रुचि नहीं ?

जो पीछे से आएगा वही तो हम सीखेंगे/ करेंगे | जो संस्कार माता पिता ने दिए वह हमारा आधार बनते हैं | लेकिन अगर ब्रिटिश Macauley जैसे लोग हमारी गुरुकुल (गुरु शिष्य) परंपरा को तहस नहस कर दें तो क्या ? एक ही दिन में लगभग 7,50,000 गुरुकुल बंद किए गए | और भ्रष्ट इंग्लिश एजुकेशनल प्रणाली भारतवर्ष पर थोप […]


हिन्दू धर्म के ग्रंथो पुराणों वेदों उपनिषदों को पढ़ने के लिए समय मिल सकेगा ?

हम किसी भी पुस्तकालय या बुकस्टॉल पर जातें हैं तो क्या सभी पुस्तकों को पढ़ने की सोचते हैं ? क्या यह practically संभव है ?आध्यात्मिक शास्त्रों और पुस्तकों के भंडार में कदम रखने से पहले हमें अपने इस जीवन का लक्ष्य तय करना होगा | अगर जीवन का कोई लक्ष्य नहीं तो एक भी शास्त्र पढ़ने का क्या फायदा होगा […]


मुख्य उपनिषदों की संख्या कितनी है ?

भारतीय शास्त्रों में उलझने से पहले हमें अपना गंतव्य/ मंतव्य तय करना होगा | वेद/ उपनिषद कितने हैं – जानकर क्या होगा |   Librarian तो बनना नहीं है, जो हर समय असीमित ज्ञान से घिरा रहता है लेकिन खुद का ज्ञान लगभग zero !   अगर मोक्ष की स्थिति तक पहुंचना है तो निम्नलिखित 3 टीकाएं गीताप्रेस, गोरखपुर के […]


वैराग्य क्या है ?

एक आध्यात्मिक साधक जब निष्काम कर्मयोग की भावना से जग में कार्य करता है तो कर्म उसे बांधने की कोशिश करते हैं | भला फल की चिंता क्यों न हो या फल से चिंतामुक्त एकदम कैसे हों ? तो साधक वैरागी होने की कोशिश करता है |   वैराग्य यानि सांसारिक बंधनों से विरक्त होने की चेष्टा | मुश्किल तो […]


आत्मा के क्या गुण दोष होते हैं ?

आत्मा में स्वयं के गुण दोष नहीं होते लेकिन जब वह ब्रह्मांडीय सफर में निकलती है तो अशुद्धियां उसे घेर लेती हैं | इन्हीं अशुद्धियां को दूर करने के लिए आत्मा ऐसे ग्रह की खोज में रहती हैं जो जीवन के लिए उपयुक्त हो | और धरती मां पर 84 लाख योनियों का सफर शुरू हो जाता है |   […]


आत्मा और परमात्मा में क्या फर्क है – आत्मा परमात्मा का अंश है तो हम भी परमात्मा ही हुए

आत्मा परमात्मा का अंश है लेकिन अपने ब्रह्मांडीय सफर के दौरान अशुद्धियों से घिर जाता है | हम खुद आत्मा नहीं | हमारी आत्मा तो सूर्य के गर्भ में विद्यमान है और वही से remote control से हमें चलाती है | हम तो मात्र एक जीवन के लिए हैं | मृत्यु के बाद हमारी आत्मा अगले जीवन में क्या शरीर […]