मस्तिष्क चेतना को उत्पन्न करता है या चेतना का स्वतंत्र अस्तित्व है ?

हमारा मस्तिष्क सिर्फ और सिर्फ एक एंटीना की तरह काम करता है | ब्रह्मांडीय mind से हमेशा से जुड़ा हुआ है | हमारा मस्तिष्क हर पल हजारों विचार ग्रहण करता है | विचारों का transmission भी मस्तिस्क के द्वारा होता है |   चेतना, यानि हमारी आत्मा सूर्य के गर्भ में है | वह हमारे हृदय से जुड़ी है | […]


स्वर्ग और नर्क का विचार मानव जीवन के उद्देश्य अस्तित्व से कैसे जुड़ा है ?

स्वर्ग और नर्क ब्रह्म की स्थापित विधियां हैं | इंसान की मृत्यु के बाद जब matching parents धरती पर उपलब्ध नहीं हों तो आत्मा कहां जाए ? इसी बात को मद्देनजर रखते हुए ब्रह्म ने स्वर्ग और नर्क की रचना की |   Matching parents उपलब्ध न होने की स्थिति में आत्मा स्वर्ग या नर्क में सीतनिद्रा या शीतनिष्क्रियता (hibernation) […]


जीवन का उद्देश्य केवल जन्म मृत्यु और भोग तक सीमित है या कुछ अधिक ?

मनुष्य जीवन का उद्देश्य मनुष्य का बनाया हो ही नही सकता | क्यों ? कारण है मनुष्य की ब्रह्म और आत्माओं के साम्राज्य में कोई सत्ता नहीं | मानव शरीर तो आत्मा ने धारण किया है तो जीवन का उद्देश्य भी आत्मा का हुआ |   अपने भीतर की अशुद्धियों को जल्दी से जल्दी निरस्त करने के लिए आत्मा चाहती […]


मनुष्य जीवन दिनों दिन कठिन क्यों होता जा रहा है ?

जैसे जैसे कलियुग अंतिम चरण से गुजर रहा है, स्थिति दिन पर दिन और भयावह होती जा रही है | अधर्मिता अपने चरम पर है | सुबह के 5 बजने को हैं – गहन काली अंधेरी रात | संधिकाल से गुजर रहे हैं |   कुछ ही दिनों में आज के समय की महाभारत (ww3) और उसके उपरांत सतयुग की […]


भगवद गीता क्यों पढ़नी चाहिए – भगवद गीता पढ़ने के लाभ ?

आध्यात्मिक जीवन जीने के नाते धरती पर मैं किसी भी इंसान को भगवद गीता पढ़ने की सलाह नहीं दूंगा | अगर आपके जीवन का लक्ष्य आध्यात्मिक उन्नति नहीं, तो भगवद गीता में बिल्कुल न उलझें |   JRD Tata के बारे में आपकी क्या राय है ? क्या वे जीवन में failure थे ? JRD Tata से बेहतर कर्मयोगी आपको […]


भक्ति भाव और अध्यात्म निम्न स्तर पर पहुंच जाएं तो पुनर्स्थापित कैसे करें ?

जब भी कोई साधक या आम इंसान हतोत्साहित महसूस करता है तो इसके मुख्यतः दो कारण होते हें –   1. Negative विचारों का अतिक्रमण 2. ब्रह्मचर्य का पालन न करना   अगर हम ब्रह्मचर्य (फिजिकल) का पालन करेंगे तो बिखरी हुई शारीरिक ऊर्जा फिर से मूलाधार में एकत्रित हो आपको पुनः अपने पैरों पर खड़ा कर देगी | ब्रह्मचर्य […]


गुरु की आवश्यकता क्यों होती है जबकि समस्त ज्ञान किताबों में मौजूद है ?

जब मैं छोटा था तो धार्मिक / आध्यात्मिक कहानियों में बेहद दिलचस्पी थी | उस समय अध्यात्म का मतलब न मालूम था न ही ये शब्द सुना था | हां, धार्मिक होना अच्छी बात है यह सुन रखा था | तो जो भी बुजुर्ग (बुजुर्ग मैं उसको मानता था जो उम्र में बड़ा हो और ज्ञानवान हो) कहानियां सुनाने में […]


क्या आध्यात्मिक व्यक्ति स्वार्थी और चापलूस हो सकता है ?

कलियुग में हो सकता है अन्यथा नहीं | आजकल हर इंसान धार्मिक अनुष्ठानों में लगे रहने के बावजूद अगर पूछो तो कहेगा, अध्यात्म में लगा हूं | अध्यात्म का शाब्दिक अर्थ भी शायद समझा न पाए लेकिन सभी की तरह होड़ में पीछे क्यों रहे ?   मुझे अपने 63 वर्ष के आध्यात्मिक जीवन में पूरी दुनियां में अभी तक […]


भगवद गीता अनुसार तत्वदर्शी संत कौन होता है ?

तत्व से मतलब है अंदर छिपा मर्म, सत्य | सत्य हमेशा एक ही होगा | विषय कोई भी हो, परिस्थिति कैसी भी – सच सिर्फ एक होगा | अध्यात्म में तत्व से मतलब है अंदर छिपे आत्म तत्व तक पहुंचना |   जब प्रलय होती है तो पूरे ब्रह्माण्ड में क्या बचता है – सिर्फ ब्रह्म | और ये ब्रह्म […]


परमात्मा मनुष्य तन कब धारण करता है ?

कभी नहीं – एक बार भी नहीं | ब्रह्म हमेशा दृष्टा की भांति काम करते हैं, उन्हें मनुष्य रूप किसलिए धारण करना है ? अवतार भी मनुष्य ही होते हैं जिन्होंने समाज के उत्थान के लिए, धर्म को दोबारा स्थापित करने के लिए कुछ अद्वितीय शक्तियां प्रभु से प्राप्त की जिससे वे अधर्म के ऊपर धर्म की जीत हासिल कर, […]


क्या सिर्फ पुस्तक पढ़ने से परमात्मा को पाया जा सकता है ?

अगर परमात्मा पुस्तकों में मिल जाते तो लाखों नहीं करोड़ों भगवान को पा गए होते | ब्रह्म तक सिर्फ और सिर्फ ध्यान/ चिंतन में उतरकर पहुंचा जा सकता है | 12 वर्ष की अखंड ध्यान तपस्या जो महावीर ने 12 वर्ष टीले पर खड़े होकर की और बुद्ध ने 12 वर्ष बोधि वृक्ष के नीचे बैठकर |   12 वर्ष […]


मनुष्य जीवन आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए है ?

आत्माएं जब से ब्रह्म के घर से निकली हैं – उनका एक ही उद्देश्य है – ब्रह्मलीन होना, वापस ब्रह्म से मिल जाना | सूर्य मंडल में धरती बनी, आत्माओं ने 84 लाख योनियों का सफर शुरू किया | 73 लाख योनियां पार कर पहली बार मनुष्य योनि में आयी |   मनुष्य रूप में आत्मा चाहती है कि मनुष्य […]


आध्यात्मिकता का जीवन जीने के लिए प्रत्येक को प्रयास करना पड़ता है ?

बिना प्रयास करे तो रोटी भी नहीं मिलती – फिर ब्रह्म को पाना, वह भी एक ही जीवन में, जबकि ब्रह्म ने मनुष्यों को 11 लाख योनियों का लंबा चक्र दिया है खुद तक पहुंचने के लिए | कोशिश तो करनी ही होगी – सिर्फ कोशिश नहीं गहन चिंतन में उतरना होगा |   भगवद गीता और उपनिषदों में छिपा […]


आध्यात्मिकता के बिना जीवन मिथ्या अर्थहीन बेतुका है ?

मनुष्य के जीवन का आखिरी goal क्या है – ब्रह्मलीन होना | ब्रह्मलीन होने से हमारा मतलब क्या है ? क्या मनुष्य ब्रह्म से मिल जाएगा ?   ब्रह्मलीन यानि मनुष्य की कोशिश के कारण साधक 84 लाखवी योनि में पहुंच गया | अब आत्मा अपने शुद्ध रूप में वापस आ गई | शुद्ध आत्मा का आगे मनुष्य रूप धारण […]


भौतिकवादिता या आध्यात्मिकता – असली आनंद कहां है ?

आज के समय में हम महावीर, बुद्ध या महर्षि रमण को किस दृष्टि से देखते हैं – कौतूहल से या आनंदमय वाली स्थिति में ?   जो साधक आध्यात्मिक हैं, वह अच्छी तरह से समझते हैं आनंदमय होना कैसा लगता होगा | जब मुझे 1993 में ब्रह्म का 2 1/2 घंटे का साक्षात्कार हुआ, उस स्थिति को क्या में कभी […]


बुजुर्गों का अंतिम समय कहाँ गुजारना बेहतर होगा – ICCU या घर में ?

जब मृत्यु का समय नजदीक हो तो मेरा मानना है कि पहली प्राथमिकता मरीज़ की इच्छा की होती है, वह समय कहां व्यतीत करना चाहता है, अपनों के बीच या hospital supervision में | दूसरी इच्छा उन की जो अपने हैं, अपना परिवार |   जाना तो है ही एक दिन – शाश्वत नियम है – जबरदस्ती करना ठीक नहीं […]


ज्ञान और पैसा किसको ज्यादा पूजा जाता है ?

जिसका पेट भरा है वह ज्ञान और पैसों – दोनों के पीछे भागता है | ऐसा इंसान जो अंदर से संतुष्ट है आध्यात्मिक सफर में उतर सकता है | उसका क्या जिसके घर में दो वक़्त की रोटी का इंतजाम नहीं ? छोटे छोटे बच्चे भूख से बिलबिला रहे हैं – ऐसा इंसान ज्ञान के पीछे भला क्या और क्यों […]


एक आध्यात्मिक व्यक्ति का समाज से क्या लेना देना ?

एक आध्यात्मिक साधक समाज से उतना ही बंधा है जितना कि कमल कीचड़ से लबालब तालाब से |   एक आध्यात्मिक साधक को समझना समाज की सामर्थ्य नहीं | बंधे न होने के बावजूद आध्यात्मिक साधक सब का भला चाहता है | बस यही खूबी है अध्यात्म की | साधक समाज को कुछ देकर ही जाएगा | एक तरफा रास्ता […]


क्या पूर्वजन्म में किए कर्मो का भुगतान इस जन्म में करना पड़ता है ?

  पिछले सभी जन्मों के karmic balance के आधार पर आत्मा एक घर में जन्म लेती है | लेकिन कर्मफल का एक अंश संचित प्रारब्ध कर्मफल के रूप में प्रभु रोक लेते हैं | वह कभी भी फलित हो सकता है, अगले जन्म में या 4 जन्म बाद |   हमने किस घर में जन्म लिया, यह तय किया पिछले […]


जड़ और चेतन में क्या क्या आता है क्रम से बताएं ?

चेतन यानी जिसके अंदर जीवन है – जैसे कीट पतंगे, पेड़ पौधे, पशु पक्षी इत्यादि | धरती पर पहला जीवन अमीबा के रूप में होता है, यानि अमीबा भी एक चेतन जीव है | पहाड़, पत्थर इत्यादि सब जड़ पदार्थ हैं जिनमें जीवन नहीं |   जो यह मानते है कण कण में भगवान व्याप्त हैं वे शाब्दिक अर्थ को […]


मैं मरने के बाद भी जीना चाहता हूँ क्या सम्भव है ?

महावीर चले गए लेकिन हकीकत में वह ज्यादातर जैनियों के दिलों में आज भी जिंदा है | तत्वज्ञानी कभी नहीं मरता | वह समाज को दिए ज्ञान के सहारे हमेशा जिंदा रहते हैं | जब छोटा था खेतों में कृष्ण को ढूंढने निकला, कैसे मिलते – वह तो हजारों साल पहले जा चुके थे | फिर मालूम पड़ा महावीर, बुद्ध […]


क्या पिछले जन्मों की पढ़ाई अगले जन्म में काम आती है ?

आध्यात्मिक जगत में जो भी प्रगति हमारी इस जन्म में होगी वह बिना किसी loss के अगले जन्म में उपलब्ध होगी | भौतिक जगत में Bill Gates को अगले जीवन में दोबारा नर्सरी से जीवन शुरू करना होगा | कोई relief नहीं |   कितनी खूबसूरत बात है जो ब्रह्म के पीछे चला, सारी progress अगले जन्म में ट्रांसफर हो […]


अंतरात्मा की आवाज हमारी कल्पना है या हमारा अंतर्मन ?

5 वर्ष की आयु से हृदय से साफ आवाज़ आती थी | Guidance भी सही देती थी, कभी झूठ नहीं | फिर भी न जाने क्यों मैंने test करने की ठानी | एक दिन मां ने कहा कुछ लड्डू बनाए हैं, तेरे मामा आएंगे, खाना मत | जब कोई देख नहीं रहा था मैं रसोई में घुसा – लड्डू के […]


भगवान से बात कैसे करें ?

भगवान से बात करने की सबसे पहली requirement है – पूर्ण सत्य की राह पर चलना | एक भी असत्य, झूठ आपको भगवान से दूर ले जाएगा | भगवान में आपकी आस्था (विश्वास नहीं – मेरा भगवान में विश्वास पूरा है, से काम नहीं चलेगा) पूर्णतया 100% होनी चाहिए |   कितने लोग होंगे धरती पर जिनकी आस्था पूर्ण है […]


इतनी भक्ति करने के बाद भी हम दुखी क्यों हैं ?

भक्ति में लीन हर व्यक्ति फल की इच्छा करता/ रखता है | भगवद गीता में कृष्ण कहते हैं कर्म करता जा, फल की इच्छा मत कर | जब इच्छा करोगे और वांछित फल नहीं मिलेगा तो दुख होता है | क्यों ? कृष्ण की बात सुननी नहीं और निष्काम कर्मयोग में उतरना नहीं – तो खुश कैसे रहोगे | फल […]


अभी तक किसी को भगवान मिला है क्या ?

भगवान के होने का सबूत मांगते हो | ब्रह्म आस्था का विषय है विश्वास या विज्ञान का नहीं | विज्ञान बिना सबूत आगे नहीं बढ़ता और साधक ब्रह्म में पूर्ण आस्था रख कुत्ते के पीछे घी का कड़छा लिए भागता है क्योंकि उसे कुत्ते में भगवान नजर आ रहे हैं ( कुत्ता सूखी रोटियां उठाकर भाग गया था) | यह […]


क्या सच इतना जटिल है उसे समझने के लिए वेद उपनिषद भगवद गीता की जरूरत है ?

सच को समझना अपने आप में इतना जटिल नहीं लेकिन सत्य की राह पर चलना बेहद कठिन है | मनुष्यों को सही राह दिखाने के लिए ब्रह्म ने पहले श्रुति के द्वारा वेदों का ज्ञान प्रेषित किया | वेद बहुत voluminous थे, साधक तो क्या, बड़े बड़े scholars भी उनके मर्म तक पहुंचने में दुविधा महसूस कर रहे थे | […]


ईश्वर मानव जाति से क्या चाहता है ?

जब से ब्रह्मांड अस्तित्व में आया है और सारी आत्माएं पूरे ब्रह्मांड में फ़ैल गई हैं, ब्रह्म (परमात्मा) चाहते हैं कि सभी आत्माएं वापस उनमें लीन हो जाएं | यह तभी संभव है जब मनुष्य आध्यात्मिक साधक बन कर्मों की पूर्ण निर्जरा करे जिसने आत्मा अपने पूर्ण शुद्ध रूप में वापस आ जाए |   सत्य के मार्ग पर चलते […]


भगवान राम को किस कारण वनवास जाना पड़ा ?

राम के पिता राजा दशरथ और सीता के पिता राजा जनक अच्छे मित्र थे | तय किया जब बच्चे बड़े होंगे (राम और सीता) तो उनका आपस में विवाह कर देंगे | राजा जनक को राम इसलिए भी प्यारे थे कि उनमें आध्यात्मिकता झलकती थी |   राजा जनक सोचते थे सीता से स्वयंवर के बाद जब दशरथ राम को […]


वैदिक श्लोक और मंत्र में क्या अंतर है ?

श्लोक वैधानिक सत्य/ तत्व को पेश करते हैं जिनका पालन कर साधक आध्यात्मिक/ धार्मिक प्रगति करता है | मंत्र किसी भी आध्यात्मिक तत्व का repetition है जिसके द्वारा साधक किसी भी तत्व को जहन में बैठाता/ उसका पालन करता है |   Example के तौर पर – ब्रह्मचर्य मंत्र के द्वारा साधक प्रभु से बार बार याचना करता है कि […]