जिंदगी का सबसे कठिन निर्णय क्या होता है ?

जिंदगी में सबसे कठिन मोड़ तब आता है जब अध्यात्म की राह पर हमें मोह काटना होता है | महाभारत की लड़ाई में अपनों को दुश्मन सेना में देख अर्जुन विचलित हो गया – कृष्ण से कहने लगा मुझे कायर बनना स्वीकार है लेकिन भीष्म पितामह (नाना), गुरु द्रोणाचार्य के विरुद्ध हथियार उठाना बिल्कुल मंजूर नहीं |   तब कृष्ण […]


बहुत लोग नाचने को भी अश्लीलता क्यों मानते हैं ?

ढाक के तीन पात – जो लो समय के साथ खुद को नहीं बदलते/ ढालते, वे गुजरे समय का रोना ही रोते रहते हैं | जैसे आजकल लोग इंतज़ार कर रहे हैं सफेद घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार लिए कल्कि अवतार का | तलवार represent करती है तुरंत justice को और घोड़ा – तीव्र गति को | कल्कि का […]


जो कार्य इस जन्म में अधूरा छोड़ जाते हैं क्या उन्हें अगले जन्म में पूरा करना होता है ?

जो छूट गया वह हमेशा के लिए छूट गया | न जाने मृत्यु के बाद हमारी आत्मा किस जगह (देश में) और किस घर में शरीर धारण करे | हां, इस जन्म के सभी कर्म बंधन अगले जन्म तक जरूर जाएंगे |   वर्तमान जीवन में 800 करोड़ लोगों में हम जिनसे भी मिलते हैं उसका एक ही कारण होता […]


कैंसर का सबसे सफल इलाज क्या है ?

आध्यात्मिक दृष्टि में जब हमारे विचारों में अशुद्धि आ जाती है तो कैंसर होने का खतरा रहता है | अगर कोई cancer पीड़ित अपने अंदर आते और बाहर जाते विचारों को पूर्णतया शुद्ध कर ले तो कैंसर जड़ से खत्म होने की पूर्ण संभावना है |   What is the real meaning of spirituality? अध्यात्म का वास्तविक अर्थ क्या है […]


दुनिया में हिंदुओ की दशा क्या है ?

भारत में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में भारतीयों का वर्चस्व शीर्ष पर है | इसी कारण इस समय US भारत की बढ़ती साख से बेहद चिढ़ा हुआ, डरा हुआ है और यह घबराहट US से कुछ भी ग़लत काम करवा सकती है |   लेकिन ब्रह्म का रचाया संसार है | होगा वही जो ब्रह्म द्वारा निमित्त है | […]


आध्यात्मिक गुरुओं के ज्ञान का स्रोत क्या है ?

तत्वज्ञानी गुरुओं का ज्ञान आता है ब्रह्माण्ड के उस छोर से जहां स्थित है reservoir of mind plus (अच्छे विचारों का तालाब) | दुनियां में आते, लोगों के अंदर उमड़ते सारे विचार यही से आते हैं | कर्मों की निर्जरा होते ही दिमाग तो पूर्णतया खाली हो गया लेकिन फिर तत्वज्ञानी उस reservoir से हमेशा के लिए जुड़ भी जाता […]


कर्म से मुक्ति का आध्यात्मिक मार्ग क्या है ?

कर्मों से मुक्ति का एक ही रास्ता है – कर्म को निष्काम भाव से करना | जब हम कर्म निष्काम भाव से करते हैं तो कर्म हमें बांधते नहीं और कर्मों की निर्जरा, कर्मों का क्षय होने लगता है | धीरे धीरे सारे कर्म जड़ से खत्म होते चले जाते हैं | नए कर्म बंधते नहीं, पुरानो का क्षय होता […]


साधना से आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है क्या ?

कौन सी साधना – 12 साल की ध्यान की तपस्या वह साधना है जिसके पालन से किसी भी साधक को आत्मज्ञान प्राप्त हो सकता है | सिर्फ ध्यान से काम नहीं होगा, 12 साल की ब्रह्मचर्य की अखंड तपस्या भी साथ साथ करनी होगी | तब जाकर कर्मों की पूर्ण निर्जरा होगी और कुंडली पूर्ण जागृत होगी और चक्र खुलेंगे […]


पैसा शक्ति छोड़ अध्यात्म के रास्ते पर क्यों जाना चाहिए ?

यह बात दिवंगत राकेश झुनझुनवाला से कोई कहता तो शायद वह सुनते नहीं | शायद पैसे और शौहरत का नशा ही ऐसा होता है | आज bill gates से कोई यह बात कह कर देखे – सुनेगा नहीं |   राकेश झुनझुनवाला जब मृत्यु को प्राप्त हुए तो 48,000 करोड़ की संपत्ति छोड़ कर गए | लेकिन साथ कुछ नहीं […]


आत्मज्ञान जन्म और मृत्यु से मुक्ति है क्या ?

आत्मज्ञान अर्थात आपने खुद को जान लिया या कहें, कर्मों की पूर्ण निर्जरा कर आप अपने पुराने शाश्वत शुद्ध रूप में आ गए | बिना शुद्ध हुए आत्मज्ञान नहीं हो सकता | बिना कुण्डलिनी जागृत हुए, बिना सहस्त्रार खुले आपका brain 100% active हो ही नही सकता | जब आत्मा शुद्ध रूप में वापस आ गई तब उसे मनुष्य शरीर […]


क्या दान कर्म का फल अगले जन्म में मिलेगा ?

दान करना धार्मिक कर्मकांडो के तहत आता है | धर्म (आजकल लोग religion को ही धर्म मानते हैं जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है) के रास्ते पर चलकर आध्यात्मिक उन्नति zero रहती है | फिर भी लगभग सारी दुनिया धार्मिक अनुष्ठानों में लगी रहती है इस उम्मीद में कि शायद मोक्ष हो जाए | मोक्ष तो छोड़िए अगर मनुष्य जन्म […]


सबसे बड़ा कर्म क्या है ?

अगर हम कर्म की निष्काम भावना को भलीभांति समझ लें तो जीवन में किया छोटे से छोटा कर्म भी बड़ा हो जाएगा | निष्काम भावना से किया कोई भी कर्म अगर हमें बांध नहीं रहा तो आध्यात्मिक उन्नति में हमें और क्या चाहिए ? निष्काम भाव से कर्मों में उतरना ही आध्यात्मिक जीवन की सबसे बड़ी जीत है |   […]


जिंदगी को खूबसूरत बनाता है कर्म या अध्यात्म ?

भौतिक जीवन हो या आध्यात्मिक, पुण्य कर्म करना ही हमारी नियति होनी चाहिए | कर्म तो पूरे ब्रह्मांड का accountant general की तरह काम करता है, हर पल का लेखा जोखा | जैसा बोएंगे वैसा ही तो काटेंगे |   अध्यात्म वह सीढ़ी है जिसपर चढ़कर साधक आत्मज्ञानी बनता है | अध्यात्म मतलब महावीर, बुद्ध, आदि शंकराचार्य, रामकृष्ण परमहंस या […]


रात के समय सबसे अच्छी आदतें क्या हैं ?

अगर हम आध्यात्मिक हैं, सोते समय हमें शवासन की मुद्रा में लेटकर चिंतन में उतर जाना चाहिए | ध्यान/ चिंतन करने के लिए इससे अच्छा समय नहीं | शुरू शुरू में नींद आएगी लेकिन बाद में काफी समय तक चिंतन हो सकेगा |   एक समय ऐसा आएगा आपका चिंतन सुप्तावस्था में भी चलता रहेगा | जब सुबह उठेंगे तो […]


मनुष्य जीवन में आध्यात्मिकता क्यों ज़रुरी है ?

ब्रह्म ने मनुष्यों को 11 लाख योनियों का सफर दिया है कि वे अध्यात्म के सफर में उतर एक शुद्ध आत्मा बन सकें | लेकिन एक बात ध्यान रहे – हम एक ही जीवन से बंधे हैं | मृत्यु के बाद हमारी आत्मा क्या शरीर लेगी, कहां लेगी, हमें नहीं मालूम |   अगर हम अध्यात्म की राह पर 12 […]


शरीर में आत्मा निवास करती है फिर प्रारब्ध कैसे प्रभावित करता है ?

आत्मा चेतन तत्व है | जैसा कर्म शरीर (मनुष्य) ने किया वैसा कर्मफल उत्पन्न हुआ | जो कर्मफल उत्पन्न हुआ उसमें से ज्यादातर तुरंत नए कर्मों को उत्पन्न करने की ओर प्रेषित हो जाता है और कुछ अंश प्रारब्ध बन जाता है जो कभी भविष्य में फलित होगा |   आत्मा का कर्म करने या न करने में कोई दखल […]


आत्मा अच्छी होती है या बुरी बुरे कर्म कौन करता है ?

स्वयं को शुद्ध करने के लिए आत्मा एक के बाद एक शरीर धारण करती रहती है | आत्मा तो एक मूक दृष्टा की भांति रहती है, खुद कुछ नहीं करती, शरीर को काम करने के लिए प्रेरित करती रहती है |   कर्म मनुष्य करता है – अच्छा या बुरा | ब्रह्म ने मनुष्य को will power और विवेक दिया […]


विवेक और बुद्धि में क्या अंतर हैं ?

विवेक इंसान को अच्छे बुरे में पहचान करने की क्षमता प्रदान करता है | विवेक का इस्तेमाल कर इंसान जीवन में किसी भी ऊंचाई तक जा सकता है | सत्य के मार्ग पर चलने के लिए पग पग पर विवेक की आवश्यकता पड़ती है | बुद्धि वो विद्या (knowledge) है जो हमारी memory में स्टोर हो जाती है |   […]


अपने कर्मो से क्या हम अपना भाग्य बदल सकते है ?

यह निर्भर करता है हमारे संचित प्रारब्ध पर | अगर हमारा संचित प्रारब्ध का karmic balance -20 है और हर समय अच्छे कर्मों में लिप्त रहने के बावजूद हमने +2 अर्जित किए | तो अगर आज संचित प्रारब्ध फलित हों जाएं तो हमे -18 की मार पड़ेगी | हो सकता है हमारी कमर टूट जाएं – दुखों के पहाड़ को […]


आध्यात्मिकता को विश्वास पर आधारित होना चाहिए या ज्ञान पर ?

अध्यात्म न तो विश्वास पर आधारित है न ज्ञान पर | अध्यात्म सीधे ब्रह्म से ताल्लुक रखता है इसलिए आस्था पर आधारित है | जिस इंसान की ब्रह्म में पूर्ण शतप्रतिशत आस्था नहीं वह अध्यात्म का सफर सफलतापूर्वक कर ही नहीं सकता | आस्था कोई छोटी चीज नहीं | भगवान में पूर्ण आस्था वहीं रख सकता है जो सत्य मार्ग […]


किसीके बारे में गलत सोचना क्या हमारे बुरे कर्म में गिना जाएगा ?

गलत सोचना भाव कर्म के अन्तर्गत आता है | अगर किसी का physical अहित करने पर हमें karmic scale पर -1000 मिलते हैं, तो सपनों या ख्यालों में उसी काम को करने पर -1 यानी 1000 गुना कम दंड | लेकिन दंड मिलेगा जरूर, चाहे अंशमात्र ही |   जैन धर्म में भाव कर्म की theory को बड़ी मान्यता प्राप्त […]


खुशी क्या है हम कैसे खुश रह सकते हैं ?

जिस दिन इंसान अपने अन्दर उमड़ती चाहतों को लगाम/ विराम खुद स्वयं की इच्छा से दे देगा, उसी दिन से वह अपने अंदर चिर शांति महसूस करने लगेगा | सारा द्वंद तो जड़ से खत्म हो गया | किसी के साथ competition नहीं | जितनी चादर उतने ही पैर पसारने हैं | जितना है वह भी ज्यादा लगने लगेगा | […]


गुरुद्वारे मस्जिद चर्च में नहीं सिर्फ मंदिरों में VIP दर्शन है क्या इसे खत्म नहीं किया जाना चाहिए ?

आज के समय में धार्मिक अनुष्ठानों में लगा इंसान भगवान के लिए ज्यादा नहीं, खुद के लिए सब कुछ करता है | ताली एक हाथ से नहीं बजती | दोनों – आम जनता और पुजारी इस गलत प्रथा के लिए जिम्मेदार हैं | अमीर व्यक्ति के पास हमेशा समय की कमी रहती है | उसे ज्यादा पैसे देकर VIP दर्शन […]


मनुष्य ब्रह्मांड के सबसे ऊंचे स्थान पर बैठ जाए तो क्या सोचेगा ?

मनुष्य के लिए पूरे ब्रह्मांड में अभी तक सबसे उंचा स्थल माउंट एवरेस्ट है – जहां तक मनुष्य की पहुंच है | माउंट एवरेस्ट पर बैठा इंसान एक ही बात सोचता है – कब photoshoot खत्म हो और नीचे उतरना शुरू करें |   एक पहुंचा हुआ सन्यासी भी अगर माउंट एवरेस्ट पर चढ़ जाए तो ध्यान में नहीं उतरेगा […]


मंदिर में VIP दर्शन लूटने का नया तरीका ?

अध्यात्म की यही तो खूबी है – अध्यात्म की दृष्टि में सभी अज्ञानी – कोई अमीर गरीब लूला लंगड़ा बेईमान लूटखोर इत्यादि नहीं – सिर्फ और सिर्फ अज्ञानी | अध्यात्म कहता है जिस दिन आंखों से अज्ञान का पर्दा हट गया खेल खत्म – वहीं इंसान ज्ञानी कहलाएगा |   कलियुग में लोग गलत नहीं करेंगे तो कलियुग कैसा ? […]


त्रिमूर्ति में कौन से तीन देवता शामिल हैं ?

अध्यात्म देवी देवताओं के व्यापक संसार में दखल नहीं देता – क्योंकि वे यथार्थ पर based नहीं है | आध्यात्मिक जगत में देवी देवता सिर्फ ब्रह्म की विभूतियों के तौर पर स्थित हैं | यही स्थिति त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) की भी है |   जैसे एक स्त्री एक ही घर में मां भी है, बेटी भी, पत्नी […]


घर में लक्ष्मी जी का स्थाई निवास कैसे हो ?

अध्यात्म की दृष्टि में पैसा सिर्फ एक पूरक का काम करता है – रोटी रोज़ी और अन्य जरूरत की वस्तुओं के लिए | हर आध्यात्मिक साधक ब्रह्म से एक चीज मांगता है – कि लक्ष्मीजी की इतनी कृपा बनी रहे घर में basic necessities की कभी कमी न हो | इसके अलावा अध्यात्म कर्म को पूरी शिद्दत के साथ करने […]


इंसान के मरने के बाद दोबारा जन्म क्यों होता है ?

हमारी आत्मा अपने एक जीवन में 11 लाख मनुष्य योनियों के फेर से गुजरती है | वह तब तक शरीर धारण करती रहेगी जब तक पूर्णतया शुद्धि न पा जाए | मनुष्य खुद पैदा नहीं होता | यह मनुष्य शरीर तो हमारी आत्मा ने धारण किया है जो सूर्य के गर्भ में बैठी है | वहीं से हमारे हृदय को […]


जो परिवर्तित हो सत्य नहीं इस मायावी बुद्धि के पार सत्य तक कैसे जा सकते हैं ?

सत्य के मार्ग पर चलना कठिन तो है असंभव नहीं | 5 वर्ष की आयु में मालूम नहीं था सत्य क्या होता है लेकिन भगवान को ढूंढने निकल पड़ा | दूसरी कक्षा में मास्टरजी ने किसी बात पर दंड दिया और कहा ये पंक्तियां 500 लिख कर लाना | पंक्तियां थी – सच बराबर तप नहीं – झूठ बोलना पाप […]


सुकून और खुशी में क्या अंतर है ?

खुशी ब्राह्म होती है, कुछ देर बाद गायब हो जाएगी | अध्यात्म की राह पकड़ जब हम निष्काम भाव से कर्म करते हैं और कर्मों की निर्जरा होती है तो सुकून मिलता है – आंतरिक खुशी | सुकून तभी मिलता है जब कोई चीज़ जड़ से हासिल हो | जैसे – हम किसी प्रश्न का उत्तर बहुत समय से चिंतन […]