कोई दूधमुहे बच्चे को छोड़ मर कर स्वर्ग पहुंचा तो क्या उसकी आत्मा को शांति मिलेगी ?

हर इंसान एक जीवन के लिए आता है और मृत्यु के बाद हमेशा के लिए गायब | कौन बच्चा, किसका बच्चा, जो रिश्ता था वह तभी तक था जब तक शरीर है | शरीर छूटा, रिश्ता खत्म | आत्मा को मनुष्य के रोने धोने से क्या लेना – आत्मा एक दिव्य शक्ति है जिसका खुद का ताप 1 करोड़ degrees […]


लोगों का ध्यान अध्यात्म की तरफ कब जाता है ?

लोगों का ध्यान अध्यात्म की तरफ कभी नहीं जाता | क्यों ? अध्यात्म का मार्ग इंसान, वर्तमान जीवन के कर्मों के कारण नहीं पकड़ता – सब पीछे से आता है, पिछले जन्म के मृत्यु के समय के कार्मिक फल से | महावीर, बुद्ध, आदि शंकराचार्य, रामकृष्ण परमहंस और महर्षि रमण ने आध्यात्मिक शुरुआत जल्दी शुरू कर दी थी | क्या […]


भगवद गीता में परम गोपनीय ज्ञान क्या है ?

भगवद गीता में परम तो छोड़िए गोपनीय ज्ञान कुछ भी नहीं – सब खुली किताब है | सब से छोटी टीका गीताप्रेस, गोरखपुर की Rs. 5/= में, जिसमें 700 मूल श्लोक हैं मिलती है | कितने लोग ज्ञान पा गए ? जो साधक सत्य का मार्ग पकड़ ले – गीता सार उसके सामने ख़ुद-ब-ख़ुद आ जाएगा | हम हृदय से […]


कर्म कितने प्रकार के होते हैं उनमें श्रेष्ठ कर्म कौन सा है ?

हमे शाब्दिक अर्थों या प्रकार पर कभी नहीं जाना चाहिए ? जो कर्म आध्यात्मिक journey में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है वह है निष्काम कर्मयोग | अपनी मैं (अहंकार) को नस्ट करने के लिए, अपने मोह को खत्म करने के लिए हमें कर्म निष्काम भाव से करने होंगे | फल क्योंकि हमेशा आत्मा का होता है न कि शरीर (मनुष्य) का, […]


कलियुग की वर्तमान आयु कितनी है ?

धरती पर समय का जो मापदंड है वह निर्धारित होता है कर्म से | जैसा 800 करोड़ लोगों का कर्म होगा उसी अनुसार कालचक्र घूमेगा | किसी भी युग की आयु पूरी धरती पर रह रहे लोगों के कर्म तय करते हैं | अगर हम बारीकी से आंखें खोल कर देखें, तो कलियुग का अंत समय निकट है | वैसे […]


कलियुग के अंत में क्या होगा ?

कलियुग का अंत यानि महाभारत और फिर सतयुग का आरंभ | अभी हम संधिकाल/ घोर कलियुग से गुजर रहे हैं और chattam chatta (वर्तमान की महाभारत) का समय नजदीक है शायद 2026 में WW3 की शुरुआत | जब अराजकता अपने चरम पर हो और अधर्म का बोलबाला तो भारतीय दर्शन शास्त्र एक अवतार के आने की दस्तक देता है | […]


हमारा जन्म और मृत्यु कौन निर्धारित करता है ?

जन्म है तो मृत्यु है और मृत्यु होगी तो जन्म भी होगा – यह शाश्वत नियम है | आत्मा शरीर धारण करती है तो जीव का जन्म होता है | मनुष्य एक जीव है यानि उसमे चेतन है | हम पिछले जन्म में मनुष्य थे | मृत्यु के समय जो हमारा karmic balance था उसके आधार पर आत्मा को नया […]


जीव और आत्मा की उत्पत्ति कौन करता है मोक्ष होने पर दोनों का विलीन कहां होता है ?

जब आत्मा जो एक चेतन तत्व है शरीर धारण करती है उसे जीव कहते है | अगर पशु योनि है तो शरीर पशु पक्षी का और मनुष्य योनि है तो हम मनुष्य पैदा होते हैं | आत्मा शाश्वत है ब्रह्म का अंश है, अनादि है | आत्मा स्वयं दृष्टा की भांति काम करती है तो शुद्धि प्राप्त करने के लिए, […]


ब्रह्मचर्य नाश से मस्तिष्क कमजोर हो गया है ब्रह्मचर्य पालन करता हूँ कौनसी आयुर्वेदिक दवा लेनी चाहिए ?

Masturbation ( हस्तमैथुन), porn देखने से, या स्वप्नदोष (nightfall) से कितनी भी हानि शरीर को हो जाए, सही ब्रह्मचर्य के पालन से हम न सिर्फ अपने शरीर को दोबारा हष्ट पुष्ट बना सकते हैं बल्कि पहले स्वामी विवेकानंद और फिर रामकृष्ण परमहंस बन हमेशा के लिए जीवन और मृत्यु के चक्रव्यूह से मुक्त हो सकते हैं |   Experience से […]


हम अवचेतन मन से काम कैसे करवा सकते हैं ?

रात को सोते समय बिस्तर पर लेटे हुए जब हम शवासन की मुद्रा में ध्यान/ चिंतन में उतरते हैं तो शुरु शुरू में नींद घेर लेती है और सो जाते हैं | धीरे धीरे अभ्यास के बाद हम चिंतन में उतरने लगते हैं | एक समय ऐसा भी आ जाता है जब हम सुप्तावस्था में पहुंच जाते हैं | हमें […]


सामान्य गृहस्थ जीवन जीते हुए मोक्ष की प्राप्ति कैसे की जा सकती है ?

आध्यात्मिक जीवन बेहद कठिनाई भरा होता है – पूरा हरा भरा परिवार टूट जाएगा/ बिखर जाएगा | महावीर के साथ यही हुआ और रामकृष्ण परमहंस के साथ भी | रामकृष्ण परमहंस से शादी के बाद मां शारदा हमेशा बेहद परेशान रहीं | अध्यात्म की राह गृहस्थ को बहुत सोच समझकर पकड़नी चाहिए | कुछ भी कर लें, जब मोह निरस्त […]


श्रद्धा और विश्वास एक जैसे भाव लगते हैं फिर एक दूसरे से भिन्न कैसे हैं ?

श्रद्धा या कहें आस्था एक दिन में नहीं आती/ बनती | छोटे से बच्चे का मां के ऊपर विश्वास से कहीं ऊपर आस्था होती है | उसे पूर्ण विश्वास होता है कुछ भी हो जाए, कैसे भी आपदा आए, मां उसे बचा लेगी | यही एक सच्चे साधक का ब्रह्म में पूर्ण विश्वास (आस्था) होता है कि वे उसका साथ […]


नर्क में आत्मा को गर्म तेल की कढ़ाई में डाला जाता है यातनाएं दी जाती है लेकिन गीता अनुसार आत्मा को ना ही काटा या जलाया जा सकता है ?

पुराणों में/ धार्मिक पुस्तकों में न जाने क्या क्या पढ़ने को मिलेगा | इसीलिए अध्यात्म की राह पर चलते साधक को एक भी पुराण एक बार भी नहीं पढ़ना चाहिए | जब तक 37 वर्ष की आयु में ब्रह्म से साक्षात्कार हुआ, मैंने एक भी पुराण को हाथ भी नहीं लगाया | घर में सभी पुराण गीताप्रेस, गोरखपुर के रखे […]


यदि भगवान सर्वव्यापी है तो क्या नरक में भी है ?

भगवान कण कण में व्याप्त हैं, भगवान सर्वव्यापी हैं से हमारा तात्पर्य क्या है – ब्रह्म (परमात्मा) ब्रह्माण्ड में उपस्थित सभी आत्माओं के शुद्ध रूप में संगठित स्वरूप को कहते हैं | ब्रह्माण्ड उत्पन्न होते समय सारी आत्माएं पूरे ब्रह्माण्ड में बिखर गई तो कहावत बन गई – भगवान कण कण में व्याप्त हैं | ब्रह्माण्ड फैलता जा रहा है […]


महाभारत महाकाव्य वास्तविक है या काल्पनिक ?

महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाकाव्य महाभारत भारतीय दर्शन शास्त्रों का एक मूल ग्रंथ है | इस ग्रंथ के प्रतिपादन के पीछे गूढ़ रहस्य है |   जब वेदों और उपनिषदों का ज्ञान आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा था तो महर्षि वेदव्यास ने महाभारत महाकाव्य की रचना के द्वारा कृष्ण अर्जुन संवाद के रूप में (भगवद गीता के रूप […]


सुखी जीवन यानि ज़रूरतमंद लोगों की मदद करना या अपने बारे में सोचना ?

सुखी जीवन के मायने क्या हैं यह महावीर से बेहतर कोई नहीं जानता | महावीर कहा करते थे – प्रवचन बाद में देना पहले कैवल्य ज्ञान तो प्राप्त कर लो | आज 800 करोड़ लोगों में एक भी कैवल्य ज्ञानी नहीं लेकिन ज्ञान बाटने वाले लाखों नहीं करोड़ों |   इस बात का मतलब क्या हुआ – जरूरतमंद लोगों की […]


क्या आपको कोई किताब अथवा कुछ भी पढ़कर संपूर्ण आत्मज्ञान हुआ ?

अगर किताबी ज्ञान से आत्मज्ञान मिल जाता तो प्रभु को 11 लाख मनुष्य योनियां बनाने की जरूरत ही क्या थी ? फिर तो बच्चा पैदा होता बड़े होकर अ आ इ ई सीखता और सीधे भगवद गीता के 700 श्लोकों की पढ़ाई | 25 की उम्र आने तक काम पूरा और मोक्ष हो जाता |   यह बात 100% तय […]


क्या आध्यात्मिकता हारे हुए लोगों के लिए है ?

अध्यात्म हारे हुए नहीं, मन से जीते हुए लोगों की कहानी है | मन से जीता हुआ यानि – जिसे ब्रह्म पर 100% आस्था (श्रद्धा) है और खुद पर भी 100% विश्वास कि मैं अध्यात्म के रास्ते पर चलकर एक दिन ब्रह्म को पा लूंगा – ब्रह्मलीन हो जाऊंगा |   Right Age to start a Spiritual Journey | आध्यात्मिक […]


मानव जीवन का मूल उद्देश्य क्या होना चाहिए ?

मानव जीवन का मूल उद्देश्य मानव नहीं तय करता, वह तो बस एक कपड़े के समान है जो आत्मा ने धारण किया है | अपने ब्रह्मांडीय सफर में आत्मा maximum 11 lakh मनुष्य शरीर धारण करेगी | इस बीच कभी भी मनुष्य अध्यात्म की राह पकड़, ध्यान में उतर – खुद को 84 लाखवी योनि में ला सकता है | […]


जन्म मरण क्या है ?

जन्म और मरण वह आध्यात्मिक क्रिया है जिसके द्वारा आत्मा धरती पर एक के बाद एक स्वरूप बदलती है | अपने जीवनकाल में आत्माएं 84 लाख योनियों के फेर से गुजरती हैं | सबसे पहला शरीर धारण करती है अमीबा का | जब इस जीव की आयु पूरी हो जाती है तो मृत्यु को प्राप्त होता है | फिर आत्मा […]


हम अहंकार के बिना क्यों नहीं रह सकते ?

मनुष्य शरीर आत्मा ने धारण किया है | खुद दृष्टा की भांति काम करती है और सारे काम करवाती है मनुष्य रूप से | कैसे ? सिर्फ मैं (अहंकार) के कारण | अगर अहंकार न हो तो हर मनुष्य बिल्कुल भी कर्म नहीं करेगा, अकर्मण्य होकर मुश्किल से 25 की आयु में ही चल बसेगा | जीवन पूरी तरह नीरस […]


क्या आत्मज्ञान ही सर्व श्रेष्ठ ज्ञान है ?

सभी धार्मिक/ आध्यात्मिक शास्त्रों का एक ही निचोड़ है – जल्दी से जल्दी आत्मज्ञान/ तत्वज्ञान प्राप्त कर मोक्ष ले लेना | आत्मज्ञान यानि आत्मा का ज्ञान | जिस दिन मनुष्य कर्मों की पूर्ण निर्जरा करके अपने असली वजूद को जान लेता है कि वह जन्म मृत्यु के चक्रव्यूह में फंसा जीव नहीं बल्कि एक अजर अमर आत्मा है तो खेल […]


आत्मज्ञानी और ब्रह्मज्ञानी में क्या फर्क है ?

आत्मा चूंकि ब्रह्म का ही एक सूक्ष्म अंश है – आत्मज्ञान और ब्रह्मज्ञान एक ही बात को दर्शातें हैं | जब प्रलय होती है तो पूरे ब्रह्माण्ड में क्या बचता है – सिर्फ और सिर्फ सारी आत्माएं अपने पूर्ण शुद्ध रूप में | इन्हीं शुद्ध आत्माओं के गुच्छे को, जिसका आकार सिर्फ अस्थ अंगुष्ठ (आधे अंगूठे के बराबर) होता है […]


भगवद गीता में कृष्ण कहते हैं कर्म करो फल की चिंता मत करो लेकिन बिना फल आदमी कर्म क्यों करेगा ?

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बिना फल की इच्छा के कोई काम नहीं करता | लेकिन अध्यात्म में जब तक हम निष्काम कर्मयोग में नहीं उतरेंगे, कर्मों की निर्जरा नहीं होगी और आध्यात्मिक प्रगति शून्य रहेगी | अध्यात्म में हमें कर्मबंधन से बचना है – वह संभव होता है जब हम कर्म निष्काम भावना से करें |   अध्यात्म में फल […]


अपनी मानसिक क्षमता बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए ?

मानसिक (mental) क्षमता बढ़ाने के दो तरीके हैं – फिजिकल ब्रह्मचर्य और मानसिक ब्रह्मचर्य | Physical ब्रह्मचर्य द्वारा हम अपने मूलाधार में इकट्ठी होती दिव्य सेक्सुअल ऊर्जा को कुण्डलिनी की ओर प्रेषित करते हैं | ऐसा करने से हमारे मस्तिष्क के बंद पड़े हिस्से में हरकत होने लगती है – वह खुलने लगता है | फिजिकल ब्रह्मचर्य से मानसिक क्षमता […]


क्या भगवान का शुकराना करते हैं दिन में कई बार क्या उसके फायदे हैं ?

यह मनुष्य शरीर आत्मा ने धारण किया है और आत्मा भगवान (ब्रह्म) का अंश है तो ब्रह्म के प्रति कृतज्ञता तो होनी चाहिए | ऐसा करने से विचारों की शुद्धता बरकरार रहती है | भगवान के प्रति अगर कृतज्ञता का भाव हमेशा बना रहता है तो संभव है किसी दिन उसकी खास कृपा हो जाए और हमारे पुण्य प्रारब्ध कर्म […]


क्या भगवान की पूजा पाठ करना आध्यात्मिकता है आध्यात्मिक व्यक्ति कैसे होते हैं ?

भगवान के लिए पूजा इत्यादि में लगे रहना धर्म का पर्यायवाची बन गया है | जो धार्मिक है उसे (religious) कर्मकांडी कहने लगे हैं | लेकिन धार्मिक लोगों का ब्रह्म से दूर दूर का नाता नहीं – क्योंकि आज के समय में पूजापाठ, कर्मकांडो में लगे लोग भगवान के जरा भी नजदीक नहीं | ब्रह्म ब्राह्म वस्तुओं में नहीं – […]


मानव के पास दोनों शक्तियों शारीरिक तथा मानसिक में कौन सी श्रेष्ठ हैं ?

जब एक साधक योगासन द्वारा अपने शरीर को स्वस्थ, हृष्ट पुष्ट रखता है तो उसे शारीरिक शक्ति में नहीं गिना जाता | शारीरिक शक्ति तो हमेशा professional के पास होती है – जैसे swimming करने वाला अपनी शारीरिक शक्ति को swimming की तरफ मोड़ देता है | पहलवान पहलवानी की ओर और बॉक्सर बॉक्सिंग की ओर |   मानसिक शक्ति […]


गुरु होना जरूरी है या नहीं बिना गुरु दान पुण्य कर सकते हैं ?

जीवन में जिस किसी से भी थोड़ा बहुत सीखने को मिले तो उस पल में वो हमारा गुरु है | लेकिन अध्यात्म की राह में permanent गुरु उसे ही बनाना चाहिए जो तत्वज्ञानी हो | धरती पर आखिरी तत्वज्ञानी थे महर्षि रमण जो 1950 में शरीर त्याग गए | अध्यात्म में जिसने गुरु बना लिया वह permanent फेल है – […]


किसी भी गुरु की शरण में मुक्ति संभव है या नहीं ?

अगर महावीर, बुद्ध, आदि शंकराचार्य, रामकृष्ण परमहंस या महर्षि रमण जैसा तत्वज्ञानी पुरुष आपका गुरु बनने को तैयार हो तो हम गुरु बना सकते हैं अन्यथा नहीं | अध्यात्म में गुरु की आवश्यकता नहीं – न ही महावीर, बुद्ध, आदि शंकराचार्य, रामकृष्ण परमहंस या महर्षि रमण का कोई गुरु रहा या था |   मुक्ति मिलती है जब हम 12 […]