अर्जुन के गुरु कौन थे ?

अर्जुन महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाकाव्य महाभारत के एक पात्र हैं | अर्जुन के गुरु अर्जुन के हृदय में स्थित सारथी कृष्ण हैं (हमारी अपनी आत्मा) – जो हर समय हमें सही राह पर चलने की प्रेरणा देते रहते हैं | अगर कोई साधक इस गूढ़ तथ्य को जल्दी समझ ले तो आध्यात्मिक सफर आसान हो जाएगा |   मैं […]


क्या सच्चा गुरु मिलना मुश्किल है ?

सच्चा गुरु कौन – जिसे तत्वज्ञान प्राप्त हो गया हो जैसे महर्षि रमण | महर्षि रमण को गुजरे 74 साल हो गए – दूसरा महर्षि रमण क्यों नहीं आया ? महावीर कहते थे – जब तक कैवल्य ज्ञान ने हो जाए, देशना (discourse) मत देना | अधकचरा ज्ञान जो आजकाल के गुरु बांट रहे हैं उसे लेकर क्या करोगे ? […]


क्या भारतीय शिक्षा प्रणाली को बदल गुरुकुल शिक्षा पद्धति अपनानी चाहिए ?

भारतीय शिक्षा प्रणाली को बदलने का कार्य Narendra Modi government ने शुरू कर दिया है – बदलते बदलते समय लगेगा | जैसे ही आने वाले वर्ल्ड वार 3 के बाद कल्कि अवतार का आगमन होगा, गुरुकुल शिक्षा प्रणाली पूरी तरह अमल में आ चुकी होगी | गुरु शिष्य परंपरा का लौटना बेहद आवश्यक है |   2034 तक गुरुकुल शिक्षा […]


भाग्य क्या होता है कैसे बनता है क्या भाग्य को बनाने में सिर्फ कर्म का योगदान होता है ?

अब तक हमारी आत्मा ने जितने भी शरीर धारण किए उसका मृत्यु के समय जो karmic balance है, वह तय करता है हमारा अगला जीवन कहां और कैसे गुजरेगा | जैसे हमारे कर्म वैसा भाग्य हमें मिलेगा | हम नींबू के पेड़ पर आम की फसल की उम्मीद नहीं कर सकते | जो बोया वही काटेंगे | भाग्य एक ही […]


धर्म बनाने वाला इंसान लोगों को मारने वाला इंसान फिर धर्म की क्या जरूरत ?

धर्म वह नहीं जो लोग आजकल समझते हैं | आजकल लोग धर्म को ही religion (मत) का ही पर्यायवाची मानने लगे हैं | यह पूर्णतया गलत है | धर्म तो शास्वत है, जब से ब्रह्मांड बना है तब से मौजूद है | धर्म की परिभाषा, स्वयं ब्रह्म द्वारा दी हुई – your right to do what is just and right, […]


मंदिर में देवता या देवी की मूर्ति में पंडित जी प्राण प्रतिष्ठा करते हैं तो क्या मूर्ति में जान आ जाती है ?

जब भी किसी मंदिर में मूर्ति स्थापित कर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव किया जाता है उससे उस मूर्ति में भगवान नहीं आ जाते – हां, मनुष्यों का भगवान में विश्वास दोगुना चौगुना हो जाता है | उससे ज्यादा खुद में विश्वास बेहद बढ़ जाता है | यही नहीं सामंजस्य की भावना जो हर किसी के हृदय में घर कर जाती है […]


कोई आदमी गलत काम करता है और भगवान को भी मानता है तो क्या होगा ?

भगवान की बनाई हुई सृष्टि है | जब तक हम मनुष्य हैं – दोनों अच्छे और बुरे कर्मों में लिप्त रहेंगे | यही भगवान/ सृष्टि का नियम है | जिस दिन इंसान अध्यात्म में उतर महर्षि रमण बन जाता है उसे बुरे कर्मों में लिप्त होने की आवश्यकता ही नहीं रहती | कर्मों की पूर्ण निर्जरा कर वह स्वयं मानव […]


भगवान श्री कृष्ण में कैसे खोयें ?

भगवान श्रीकृष्ण में खोया नहीं जाता, उन्हें प्राप्त किया जाता है | अध्यात्म में जब हम ध्यान/ चिंतन में उतरते हैं तो हमें पहली बार अहसास होता है अर्जुन और कोई नहीं हम खुद हैं | सत्य के मार्ग पर चलकर अगर हम ध्यान से सुने तो हमे हृदय से आती कृष्ण (सारथी) की आवाज़ साफ सुनाई पड़ेगी |   […]


सबका मालिक एक प्रभु कौन है ?

सबके मालिक प्रभु को भारतीय शास्त्रों में ब्रह्म कहा गया है (ब्रह्मा नहीं), वही ब्रह्म जिसने पूरा ब्रह्माण्ड बनाया | हम (एक आत्मा) ब्रह्म के ही अंश हैं और यह बात हम 84 लाखवी योनि में पहुंचकर ही समझ सकते हैं | ब्रह्म तक पहुंचने के लिए ब्रह्म ने 11 लाख मनुष्य योनियां स्थापित की हैं | अध्यात्म की राह […]


अगर किसी की भलाई के लिए ईश्वर से कुछ मांगा जाए तो क्या ये हमारे पुण्य से कटेगा ?

जब हम किसी और की भलाई के लिए भगवान से कुछ मांगते हैं तो कुछ अंश अपने पुण्य कर्मफल से ब्रह्म को समर्पित करना ही होता है लेकिन अध्यात्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है – जब हम औरों का भला सोचते हैं तो हमें ब्रह्म से गुप्त अनुदान के रूप में बहुत कुछ मिलता रहता है | जब भी […]


पढ़ाई के लिए किस भगवान की पूजा करनी चाहिए ?

जब हम पढ़ाई करने बैंठे तो भगवान से निम्न प्रार्थना करनी चाहिए, हे प्रभु, मैं इस ‘subject‘ में थोड़ा कमजोर हूं, कृपा करें कि मैं अपनी समस्त शारीरिक और मानसिक ऊर्जा को ‘subject‘ को समझने में लगा सकूं | मुझे अर्जुन की तरह मछली कि आंख नहीं, बस आंख का केंद्र बिंदु नजर आए | जो एक बार एकाग्रता के […]


एक तत्वज्ञानी इस दुनिया को किस नजरिए से देखता है ?

एक तत्वज्ञानी की नजरों में पूरी दुनिया अज्ञानी है – अज्ञान की राह पर चलने वाली | चाहे कोई 10 लाख करोड़ की company का मालिक हो चाहे कोई गरीब, दोनों ही मृत्यु के बाद अगले जीवन में फिर से nursery से जीवन की शुरुआत करेंगे | इस जीवन के कमाए 10 लाख करोड़ गए पानी में |   अध्यात्म […]


महारथी अर्जुन और कोई नहीं बल्कि भगवान का ही अवतार था ?

महर्षि वेदव्यास के महाकाव्य महाभारत का अर्जुन और कोई नहीं बल्कि आप और हम हैं – एक आम इंसान | आध्यात्मिक सफर कैसे पूरा किया जाए – भगवद गीता हमें इतना ही बताती/ सीखाती है |   भगवद गीता उवाच के माध्यम से महर्षि वेदव्यास यह बताते हैं कि सारथी के रूप में हृदय में विद्यमान कृष्ण और कोई नहीं […]


जो इंसान बार बार जिंदगी में असफल होता है उसे क्या करना चाहिए ?

जो इंसान बार बार कोशिश के बावजूद जीवन में सफलता नहीं प्राप्त कर पा रहा, उसे चींटियों के झुंड को देखना चाहिए जो ऊपर की तरफ चढ़ रही हों | कुछ चींटियों को अपने वजन से कहीं ज्यादा वजन को ढोते हुए देखेंगे | सभी चींटियां एक ही बार में मंजिल तक नहीं पहुंचती | कुछ को बार बार मेहनत […]


ज्ञानी जन खुद के सर पर मुसीबत आ जाने पर क्या करते हैं ?

ज्ञानीजन कोई राह न मिले तो मुसीबत से खुद ही निबटने की कोशिश करते हैं और असफल हो जाएं तो दुनियां को राम राम | स्वामी विवेकानंद अपने 1893 के US Chicago tour में विश्व धर्म संसद में बहुत उम्मीदें लेकर गए थे लेकिन लौटे खाली हाथ | लौटने के बाद स्वामी विवेकानंद उस झटके को सह न सके और […]


क्या शरीर की अवहेलना कर के आत्मा को संवारा जा सकता है?

योगासन का शाब्दिक अर्थ क्या हुआ – ब्रह्म से योग (जुड़ने) के लिए आसन की आवश्यकता होती है | जब तक शरीर योगासन के द्वारा हृष्ट पुष्ट नहीं होगा, हम अध्यात्म में उतर ही नहीं पाएंगे | बीमार शरीर वैद्य हकीम की सोचेगा या अध्यात्म की ? इस जीवन में अगर हम आत्मज्ञानी बनना चाहते हैं तो, शरीर को स्वस्थ […]


जीवन को इसका अर्थ और उद्देश्य क्या देता है ?

मनुष्य रूप में आध्यात्मिक सफर में सारी प्रेरणा अंदर से आती है | हृदय में स्थित सारथी (कृष्ण) हर पल हमें अंदर से guide करते रहते हैं | हमारी आत्मा बताती है कि यह शरीर उसने अपनी शुद्धि के लिए लिया है और मनुष्य की जिम्मेदारी बनती है कि वह अपनी आत्मा को assist करे जिससे वह जल्दी से जल्दी […]


जीवन भोग विलास नहीं बल्कि सच्चे कर्मयोगी के लिए संघर्ष ही जीवन है ?

महाभारत महाकाव्य के रचयिता महर्षि वेदव्यास कहते हैं – हृदय में स्थित सारथी कृष्ण (हमारी अपनी आत्मा) हर समय अंदर से एक ही बात कहते हैं – हे अर्जुन, अब देरी न कर, शस्त्र उठा और धर्मयुद्ध शुरू कर | तो महर्षि वेदव्यास अनुसार धरती पर मौजूद हर इंसान अर्जुन है और उसका परम कर्तव्य है कर्मयोगी बनकर कर्मों की […]


संतो की ज्ञान भरी बातें कहाँ मिलेगी ?

संतों की वाणी या तो उनकी खुद की लिखी पुस्तकों में मिल जाएंगी या उन पर लिखी पुस्तकों में | महर्षि रमण ने हिंदी या संस्कृति में नहीं लिखा | तो अनुवादक के द्वारा त्रुटि की गुंजाइश तो है | अपने विवेक का इस्तेमाल कर हमें सत्य को असत्य से अलग करना होगा, तभी हम तथ्य तक पहुंच पाएंगे | […]


कोई भी शुभ कार्य करने से पहले कौन से भगवान की पूजा करना चाहिए ?

अगर हम हमेशा positive विचारों का अवलोकन/ आदान प्रदान करते हैं तो कभी भी जीवन में किसी प्रकार की पूजा की जरूरत नहीं | 5 वर्ष की आयु से अध्यात्म की राह पर चलने वाला मैं जीवन में कभी किसी पूजा पाठ में नहीं उलझा | अगर महसूस हुआ तो अन्दर से ब्रह्म से बात कर ली, और ब्रह्म से […]


ईश्वरीय तत्व को कैसे अनुभव करें ?

ईश्वरीय तत्व को जीवन में पहली बार महसूस करने के लिए – सत्य की राह पर चलना आवश्यक ही नहीं 100% जरूरी है | मेरी पहली मुलाकात ब्रह्म से 5 वर्ष की आयु में हुई | typhoid से पीड़ित, सभी डॉक्टर कह कर चले गए – दुआएं करों, आज की रात गुजर गई तो ठीक अन्यथा सुबह तक ये बच्चा […]


जीवन के रहस्यों को हम कैसे जान सकते हैं ?

जीवन के रहस्य – भौतिक जगत के या आध्यात्मिक, दोनों को तत्व से जानने के लिए हमें सत्य की राह पकड़नी होगी | जब हम हृदय से सच्चे होते हैं तो हृदय में स्थित अपनी आत्मा की आवाज़ साफ सुन सकते हैं | बस यही आवाज़ समय समय पर विभिन्न रहस्यों के ऊपर से पर्दा उठा हमारा तत्व/ रहस्यों से […]


क्या इस संसार की सभी आत्माएं परमात्मा का अंश है ?

इस ब्रह्माण्ड में व्याप्त सभी आत्माएं अपने शुद्ध रूप में आधा अंगूठे (अस्थ अंगुष्ठ) का आकार लेती हैं | इसी अस्थ अंगुष्ठ आकार के दिव्य पुंज को हम ब्रह्म (परमात्मा) कहते हैं | एक गेहूं का दाना, एक आत्मा – और ब्रह्माण्ड में व्याप्त पूरे गेहूं की ढेरी परमात्मा |   आत्मा सिर्फ परमात्मा का अंश ही नहीं, हम खुद […]


अगर कोई एक जन्म में अध्यात्म में थोड़ी प्रगति कर लेता है और मृत्यु को प्राप्त हो जाता है तो अगले जन्म में क्या फिर से पहली सीढ़ी से शुरुआत करनी होगी ?

अध्यात्म की यही सबसे बड़ी खूबी है कि जो भी उन्नति साधक इस जन्म में कर लेगा वह नष्ट नहीं होती, अगले जन्म में हम उसी level से शुरू करते हैं जिस level पर पिछले जन्म में मृत्यु के समय छोड़ा था | इसके विपरित बिल गेट्स को लीजिए, इस जन्म में लाखों करोड़ के मालिक, हो सकता है अगला […]


क्या गीता में भी मिलावट हुई है ?

भारतीय दर्शन शास्त्रों जैसे वेद, उपनिषद् और भगवद गीता – इन सभी में न तो आज और न आने वाले समय में किसी भी तरह की मिलावट की गुंजाइश है | वजह साफ है | जहां से सारे ब्रह्माण्ड का ज्ञान आता/ उत्पन्न होता है – एक तत्वदर्शी ऋषि सम्पूर्ण ज्ञान नष्ट होने की स्थिति में श्रुति द्वारा सारे ज्ञान […]


कुछ छात्र लक्ष्य के निकट पहुंच कर भी उस लक्ष्य से भटक क्यों जाते हैं ?

जीवन में भविष्य का ज्ञान किसी को भी नहीं | सिर्फ भौतिक जीवन में ही नहीं आध्यात्मिक सफर में भी ऐसा होता है कि स्टूडेंट/ साधक 99.90% तक पहुंच गया और 100% पर अपने लक्ष्य को पा जाएगा लेकिन निराशा के कारण 99.9% पर ही हाथ पैर छोड़ दिए, हार मान ली | अगर किसी बुजुर्ग से सलाह कर ली […]


आपके जीवन की सबसे पसंदीदा महिला कौन है ?

बचपन से न जाने क्यों मुझे धरती मां से अत्यधिक प्रेम है – हर नारी को इसी कारण मैं धरती मां की बेटी के रूप में देखता हूं | यह एक main वजह है कि मैं 12 वर्ष का अखंड physical ब्रह्मचर्य का पालन सही ढंग से कर पाया | जब हर स्त्री रूप को धरती मां की बेटी के […]


भगवान हमारे अंदर है तो गलती करने से क्यों नहीं रोकते ?

भगवान हमारे अंदर अंश रूप में, हमारे हृदय में सारथी (कृष्ण यानी हमारी आत्मा) के रूप में विद्यमान हैं | जब से हम पैदा हुए, हम अगर हृदय से आती आवाज़ को सुनना चाहेंगे – तो पाएंगे कि किसी भी गलत काम को करने / होने से पहले कृष्ण हमें सचेत करते हैं | जो साधक सत्य को अपनाएं हुए […]


ईश्वर सबकी क्यों नहीं सुनता है ?

ईश्वर उन्हीं की सुनता है जो सत्य मार्ग पर स्थित हैं या फिर सत्कर्म, पुण्यकर्म में व्यस्त रहते हैं | अगर आप सत्यवादी और सत्कर्मी दोनों हैं तो भगवान आपकी जरूर सुनेंगे | ज्यादातर लोग असत्य के मार्ग पर चलते हुए, पापकर्म में लगे रहकर उम्मीद करते हैं ब्रह्म उनकी सुने, क्या ऐसा संभव है ? कलियुग में कहीं भी […]


आत्मज्ञान उम्र की किस अवस्था से होता है ?

आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए परमात्मा ने मनुष्य रूप में 11 लाख योनियों का लंबा समय निर्धारित किया है (लगभग 1 करोड़ वर्ष की अवधि) | 5 वर्ष की आयु के बाद इंसान ब्रह्म की खोज में निकल सकता है | निर्धारण हमें करना है प्रभु को नहीं | मूलतः हम अध्यात्म में कब उतरेंगे – यह तय करता है […]