भगवान शिव को भोले क्यों कहते है ?

रामकृष्ण परमहंस जब तत्वज्ञानी होने की कगार पर थे तो कुत्ता जो रोटी छीन कर भाग रहा था, उसके पीछे घी का कड़छा लेकर भागते थे, यह चिल्लाते हुए कि रोटी तो चिपड़ दूं, सूखी हैं गला कट जायेगा | उन्हें कुत्ते में भी भगवान नजर आते थे | और कुत्ता यह सोचकर कि चोरी पकड़ी गई, कड़छे से मार […]


कोई केवल आध्यात्मिक हो सकता है क्योंकि भौतिकता के बिना आध्यात्मिक होना सम्भव नहीं ?

केवल आध्यात्मिक जैसी कोई चीज ब्रह्माण्ड में exist नहीं करती | अगर करती तो आत्मा को शरीर धारण करने की जरूरत ही क्यों होती ? एक आत्मा को अपने शुद्ध रूप में वापस आने के लिए कर्म करना ही होता है | और कर्म भौतिक शरीर ही करता है | आत्मा स्वयं तो दृष्टा की भांति रहती है |   […]


आत्मसाक्षात्कार कठिन क्यों होता हैं ?

आत्मसाक्षात्कार कठिन नहीं होता क्योंकि वह तो प्रभु देते हैं, जब भी मिलेगा ? कठिन है अध्यात्म की राह पर चलना | 63 साल के आध्यात्मिक सफर में पूरी दुनिया में मुझे आज तक 10 लोग नहीं मिले जो अध्यात्म शब्द का सही मतलब बता सकें, सफर तो बाद में ही करेंगे | कोई ध्यान में उतरना ही नहीं चाहता […]


आध्यात्मिकता में कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि आप शरीर नहीं हैं ?

हम आत्मा हैं शरीर नहीं हैं – इस बात को जानने के लिए महर्षि रमण ने एक experiment किया | वह तख्त पर शवासन की मुद्रा में लेट गए और और अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया, उस तरह से जैसे वह मृत हो | कुछ देर बाद उन्होंने देखा शरीर तो अभी भी चल रहा है | कोई चीज […]


राम जी को चौदह वर्ष का ही वनवास क्यों मिला था ?

सीता के पिता राजा जनक और राम के पिता राजा दशरथ दोनों बहुत गहरे दोस्त थे | दोनों ने बच्चों की शादी से पहले ही तय कर रखा था कि उचित समय आने पर कैकई से बात करके राम को 14 साल का वनवास दिला देंगे | कैकई राजा दशरथ के बहुत करीब थी और राजा दशरथ को भरोसा था […]


शिव जी को त्रिलोकी क्यों कहा जाता है ?

शिव कौन हुए – वह साधक जो 12 वर्ष की ध्यान और ब्रह्मचर्य की अखंड तपस्या पूरी कर तत्वज्ञानी हो गया जैसे रामकृष्ण परमहंस और महर्षि रमण इत्यादि | तत्वज्ञानी कौन – जिसे तीनों लोकों का ज्ञान हो गया हो – त्रिलोकी |   स्वर्ग क्या है, नर्क क्या है, हम धरती पर क्यों आते हैं, इन तीनों लोकों का […]


यदि इंसान को जन्म मरण के चक्र से मुक्त होना है तो क्या करना होगा ?

पूरी धरती पर किसी भी इंसान को, चाहे वह किसी भी धर्म, मत या संप्रदाय का हो – जन्म और मृत्यु के चक्रव्यूह से छुटकारा पाने के लिए अध्यात्म के सफर पर जाना होगा और 12 वर्षों की ध्यान और ब्रह्मचर्य की तपस्या पूरी करनी होगी | तभी साधक की कुण्डलिनी पूर्ण जागृत होगी, सातों चक्र खुलेंगे, सहस्त्रार खुलेगा और […]


सतयुग द्वापर त्रेता तो त्रेता युग द्वापर युग से पहले क्यों आया ?

सभी युगों को घड़ी की सुइयों के हिसाब से देखें | सुबह भोर हो गई – सतयुग चालू हो गया | दोपहर के 2 बजे के बाद सूर्य थोड़ा ढलने लगा और सतयुग खत्म और त्रेता युग चालू – अभी थोड़ी धूप बाकी है | काफी लोग धार्मिक प्रवृत्ति के हैं | शाम के 8 बजने को हैं अंधेरा छाने […]


ब्रह्मा की पूजा क्यों नहीं की जाती ?

ब्रह्म तो एक ही हैं – ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) उनकी विभूतियां हैं | ब्रह्मा को ब्रह्म का क्रिएटिव रूप मानते हैं, जिसने संसार रचा | हमारे रचने में ब्रह्मा का हाथ है – ऐसा माना जाता है | अब क्योंकि हम पैदा हो जाते हैं, इस धरती पर उत्पन्न हो जाते हैं तो ब्रह्मा की पूजा करके हमें […]


बाहर भटकने से अच्छा भीतर भटकने का अर्थ क्या है ?

बाहर भटकने से क्या मिलेगा – मंदिर या तीर्थ, भजन कीर्तन, सत्संग में जाने से भगवान नहीं मिलते | किसी भी ब्राह्म स्वरूप में भगवान नहीं हैं | ब्रह्म तो अंश स्वरूप (आत्मा के रूप में) अंदर हृदय में विद्यमान हैं | अगर हमें ब्रह्म प्राप्ति करनी है तो अंदर के सफर यानि अध्यात्म में उतरना ही पड़ेगा | अध्यात्म […]


नास्त्रेदमस ने कल्कि अवतार के बारे में क्या भविष्यवाणी की हैं ?

नास्त्रेदमस की निम्न क्वॉट्रेन देखें (quatrain Century 2 Quatrain 46) –   After great trouble for humanity, a greater one is prepared The Great Mover renews the ages: Rain, blood, milk, famine, steel and plague, Is the heavens fire seen, a long spark running.   यह क्वॉट्रेन सिर्फ और सिर्फ कल्कि अवतार के आने की कहानी बयान करती है – […]


कहाँ होगा कल्कि अवतार ?

कल्कि अवतार का अवतरण स्थल होगा उत्तराखंड जहां 5 नदियां मिलकर गंगाजी का उद्गम करती हैं | उत्तराखंड बेहद पावन और पवित्र भूमि है जहां कई संतों ने शरण पाई और अपने जीवन का काफी अमूल्य वक़्त बिताया | उनमें कुछ थे आदि शंकराचार्य, स्वामी विवेकानंद इत्यादि | चाणक्य का अंत समय बेहट में गुजरा जो UP में उत्तराखंड से […]


2 महीने ब्रह्मचर्य का पालन कैसे करें ?

2 महीने का ब्रह्मचर्य (physical) का पालन कर क्या प्राप्त करना चाहते हो – दो दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात | ब्रह्मचर्य एक ऐसी क्रिया है जो इंसान को समेटे रखती है | जीवन में इंसान अगर अंदर से टूटने लगे तो ब्रह्मचर्य इंसान को जीने का आयाम देती है , उसे अपने पैरों पर खड़े होने की क्षमता […]


भगवान को कैसे पा सकते हैं ?

जो भगवान को पाना चाहते हैं – उन लोगों से अगर यह पूछा जाए किसे पाना चाहते हो, भगवान कौन होते हैं तो मेरा विश्वास ही नहीं 200% मत है पूरी धरती पर एक इंसान नहीं मिलेगा जो इन प्रश्नों का उत्तर दे सके ? पाना सब चाहते हैं लेकिन क्या – नहीं मालूम |   मैं जब 5 वर्ष […]


क्या वृक्ष वनस्पति अनाज के पौधे में जीवात्मा होती है ?

हर आत्मा अपने जीवनकाल में ज्यादा से ज्यादा 84 लाख योनियों के सफर से गुजरती है | आखिरी 11 लाख योनियां मनुष्य रूप में हैं | 73 लाख निचली योनियों में सबसे पहले कीट पतंगों की योनि आती है | जब आत्मा हर तरह के कीट पतंगों का रूप धारण कर लेती है तो पेड़ पौधों की योनि में आती […]


कुछ आध्यात्मिक लोग अपनी यात्रा में अकेले क्यों चलते हैं ?

कुछ नहीं, हर सच्चा आध्यात्मिक साधक हमेशा अकेले ही चलेगा | कारण ? आध्यात्मिक सफर अंदरूनी सफर हैं आत्मा तक पहुंचने का जो हृदय में बैठी है | अध्यात्म में साधक ध्यान में उतरता है जो सिर्फ चिंतन के द्वारा हो सकता है | चिंतन करने के लिए भीड़ की आवश्यकता नहीं | समय समय पर जो प्रश्न उठेंगे उन […]


प्रतिदिन एक घंटा ध्यान करने से क्या होगा ?

ध्यान कभी भी घंटा या दो घंटा करने की रीत नहीं | सही ध्यान 24 घंटे round the clock चलते रहना चाहिए | अगर साधक तोड़ तोड़ कर ध्यान में उतरता है तो वह ध्यान नहीं | इस धरती पर इस समय एक भी सच्चा साधक नहीं जो सच्चे ध्यान में उतर सके ? ऐसा कैसे कह सकते हैं ? […]


क्यों अशरीरी सर्व शक्तिमान ईश्वर के बारे में भ्रांतियाँ हैं जबकि वे रचयिता हैं और कोई भी रूप लेकर दर्शन दे सकते हैं?

ब्रह्म सब कुछ कर सकते/ लेते हैं लेकिन प्रकट नहीं हो सकते | यह उनके लिए भी संभव नहीं | जब 37 वर्ष की आयु में 2 1/2 घंटे का साक्षात्कार हुआ तो उनसे बात तो ऐसे हो रही थी जैसे बगल में बैठे हों लेकिन सशरीर एक बार भी नहीं | इस जीवन में कितनी बार आए बातें करने/ […]


वह हजार सिर वाला नाग कौन है जिसके ऊपर भगवान विष्णु को आराम करते दर्शाया है ?

विष्णु ब्रह्म की विभूतियों में से एक हैं | उन्हें शेषनाग की शैया पर लेटे इसलिए दिखाया जाता है क्योंकि करने को अब कुछ बाकी नहीं | अध्यात्म में जब साधक 12 वर्ष की ध्यान कि अखंड तपस्या पूरी कर लेता है तो वह तत्वज्ञानी यानि शिव हो जाता है | समुद्र मंथन की गाथा के मर्म को समझेंगे तो […]


भगवद्गीता में भगवान का यह कहने का अर्थ क्या है कि आरम्भ में समस्त प्राणी अव्यक्त हैं बीच में व्यक्त रहते है और मरने के बाद अव्यक्त हो जाते हैं ?

भगवद गीता अनुसार हम मूलतः आत्मा हैं जिसने कर्म करने के लिए शरीर धारण किया है | तो व्यक्त होने से पूर्व आत्मा अव्यक्त ही तो थी | शरीर धारण करते ही वह व्यक्त हो जाती है और जिस दिन इंसान अध्यात्म की राह पर चलकर मुक्ति पा लेता है, वह फिर एक शुद्ध आत्मा बन अव्यक्त रूप धारण कर […]


कलियुग के राक्षस कौन होंगे जिनका विनाश किया जाएगा ?

आज के समय में एक नहीं, हजारों नहीं लाखों दुर्योधन आपको आम जनता को परेशान करते मिल जाएंगे | हम असामाजिक तत्व की बात नहीं कर रहे – हम उन पढ़े लिखे लोगों की बात कर रहें हैं जो अपनी मैं से प्रेरित होकर सीधे सच्चे लोगों को तंग करते हैं – मेमने की खाल में छिपे भेड़िए | पार्किंग […]


कुछ इंसान सब कुछ करने के बाद भी असफल क्यों रहते हैं ?

इस जन्म में आपने जो परिश्रम किया और उसका जो कर्मफल उत्पन्न हुआ – उसके निमित्त जो आपको मिलना था वो मिला लेकिन झोले में दुख ही हाथ आया | ऐसा क्यों ?   आपने जो कर्म किया मान लीजिए उसका कर्मफल जो आपको मिलना है वह karmic index अनुसार +2 है | लेकिन उसी समय आपका प्रारब्ध संचित कर्मफल […]


यदि हम इच्छाओं का अंत कर दें तो प्रभु प्राप्ति में बाधा नहीं रहेगी ?

कर्मों की पूर्ण निर्जरा करने के लिए सिर्फ पांचों इन्द्रियों पर पूर्ण कंट्रोल काफी नहीं लेकिन हां – पांचों इंद्रियों पर control आ गया तो मन पर भी आ ही जाएगा | मन पर पूर्ण कंट्रोल आते ही ऐसी स्थिति तक पहुंचना है जब हमारे अंदर न तो एक भी विचार आए और न अंदर से बाहर जाए और शून्य […]


मैं संन्यास लेना चाहता हूँ घरवाले नहीं मान रहे कैसे मनाऊं ?

आज के कलियुग में अगर सन्यासी बनकर रहना है तो घर में रहकर क्यों नहीं ? सिद्धार्थ गौतम ने भी कोशिश की थी – घर भी छोड़कर चले गए और 39 सालों तक भटकने पर भी कुछ नहीं मिला | थककर बोधि वृक्ष के नीचे बैठकर 68 साल की उम्र में 12 वर्ष की गहन तपस्या की | तब जाकर […]


आजकल शुगर की बीमारी क्यों आम है ?

शुगर होने के मेन कारण 2 हैं – यह genetic बीमारी है, माता पिता से आ सकती है | दूसरा वैज्ञानिक प्रगति | पिछले कुछ सालों में टीवी, मोबाइल जैसे गैजेट्स आने के कारण घर बैठे सब काम हो जाते हैं | पहले घर पर मेहमान आते थे तो दौड़ कर बर्फ लाते थे कि मेहमान की शिकंजी बन सके […]


क्या योगा करने से पूर्ण परमेश्वर की प्राप्ति संभव है ?

योगा नाम का शब्द हिंदी या संस्कृति की वर्णावली में नहीं | शब्द है योग – हिंदी में 2 योग 2 = 4, 2 जमा 2 = 4 | आत्मा की ब्रह्म से मिलने की चेष्टा को योग कहते हैं | अगर भगवान से मिलना है तो 12 वर्ष के ध्यान और ब्रह्मचर्य में उतरना होगा | पूर्ण परमेश्वर की […]


अकाल मृत्यु क्यों होती है मृत्यु के बाद आत्मा कहाँ जाती है ?

जब बच्चा पैदा होता है वह मृत्यु का समय भी लिखवा कर लाता है | suppose उम्र 62 साल लिखी है | अगर accidental death 60 की उम्र में हो गई (कारण कोई भी हो सकता है – मूलतः कोई छिपा negative प्रारब्ध कर्मफल होगा जो अचानक फलित हो गया और मृत्यु हो गई) तो अगला शरीर आत्मा सिर्फ 2 […]


धरती माता के पति कौन हैं ?

धरती को हम माता कहते हैं, आज से नहीं वेदों के समय से और पिता परमेश्वर कहते हैं भगवान यानि ब्रह्म को | ऐसे कैसे ? प्रलय के बाद की स्थिति को देखते हैं | पूरा ब्रह्माण्ड सिमट कर original form में आ गया है यानी अस्थ अंगुष्ठ | इसी आधे अंगूठे के आकार के दिव्य शक्तिपुंज को हम ब्रह्म […]


मनुष्य को धर्म और अध्यात्म नहीं कामुकता जल्दी प्रभावित करती है

अगर सेक्स में attraction नहीं होता तो गृहस्थ कैसे चलता | ब्रह्म ने ये क्रिया इसी तरह से रची कि दोनों एक दूसरे से बंधे रहें | अब सेक्सुअल genes में यह तो नहीं लिखा कि इसके साथ प्यार कर सकते हो, इसके साथ नहीं | साथ में मनुष्यों को विवेक दे दिया आत्मसंयम के लिए | लेकिन मनुष्य पशु […]


आत्मा और प्राण मेँ क्या सम्बन्ध है दोनोँ ही चेतना हैँ ?

आत्मा प्राण का कारक होती है | आत्मा ने धरती पर शरीर धारण किया | लेकिन उसमें जान कौन फूंकेगा ? जब मां के गर्भ में बच्चा आता है तो उसका ह्रदय कुछ दिनों बाद धड़कना शुरू होता है | सही समय पर आत्मा जो सूर्य के गर्भ में विद्यमान है remote control से हृदय को ON कर देती है […]