भगवान के घर देर है अंधेर नहीं पर देर क्यों ?

क्या आप 99 degree तक पानी गरम करके भांप बना सकते हैं – भांप तो 100 degrees पर ही बनेगी | हम असल जिंदगी में 98 degrees पर ही फल का इंतज़ार करने लगते हैं | अभी 99 फिर 100 तक इंतजार तो करें – अन्यथा देरी के लिए भगवान को कोसने लगेंगे | कर्म theory प्रधान है |   […]


भगवान भक्त को दुख क्यों देते है ?

भक्त कौन जो मंदिर जाकर पूजा इत्यादि करता है | या जो भजन कीर्तन में लीन है | या वो जो आश्रमों में जाकर अपने गुरु का सानिध्य करता है | या वो जो साल में 2~3 बार वैष्णो देवी जाकर मत्था टेकता है | या वो जो घर में मंदिर बनाकर सुबह शाम पूजा में बैठता है |   […]


क्या मरने के बाद आत्मा अध्यात्मिक प्रगति कर सकती है ?

ब्रह्म की तरह हर आत्मा भी दृष्टा की भांति काम करती है | कर्म हमेशा शरीर करता है, जो चेतना (आत्मा) ने धारण किया है | जब मनुष्य अध्यात्म में उतर ध्यान इत्यादि करता है तो आध्यात्मिक उन्नति होती है | अगर आत्मा स्वयं ही आध्यात्मिक प्रगति कर सकती तो उसे मनुष्य शरीर धारण करने की आवश्यकता ही क्या थी […]


क्या मरने के बाद आत्माएं भटकती हैं ?

हमें यह बात समूल जड़ से अपने अंदर से खत्म कर देनी चाहिए कि आत्माएं धरती पर मौजूद हैं या आ सकती हैं | आत्माएं जिनका खुद का ताप 1 करोड़ degrees Celsius से ज्यादा होता है वह कैसे धरती पर मौजूद हो सकती है ? एक आत्मा अगर धरती के नजदीक भी आ जाए तो पूरी धरती को जला […]


मजबूरन मुझे अपने कुलदेवता के मंदिर में पशु बलि देनी पड़ती है

कुछ भी धार्मिक क्रिया करने से पहले हमें यह सोचना चाहिए कि इसका अध्यात्मिक लाभ क्या होगा ? आज के समय में धार्मिक कर्मकांडो से भगवान के नजदीक नहीं पहुंच सकते तो उलझना ही क्यों | उल्टा पशु हत्या का पाप लगेगा ?   अध्यात्म पशु बलि की इजाज़त नहीं देता | अगर हम प्रभु को खुश करना चाहते हैं […]


भौतिक ज्ञान जहां समाप्त होता है वहां से अध्यात्म की शुरुआत होती है कैसे ?

जीवन में दोनों भौतिक ज्ञान और आध्यात्मिक ज्ञान की जरूरत होती है | हम हर समय जीवन भी तो दो जीते हैं | भौतिक ज्ञान की जरूरत पड़ती है रोटीरोजी कमाने के लिए और आध्यात्मिक ज्ञान की ब्रह्म की ओर बढ़ने के लिए |   IIT से civil engineering को रोटीरोजी का साधन बनाया और ब्रह्म की ओर बढ़ने के […]


आज विद्यालयों में ब्रह्मचर्य शिक्षा की जरूरत क्यों है ?

ब्रह्मचर्य का ज्ञान विद्यालयों में निष्पादित नहीं किया जा सकता | यह तो एक गहन विषय है जिसकी जानकारी सिर्फ और सिर्फ गुरुकुलों में दी जा सकती है | आजकल चल रहे गुरुकुल नहीं – आने वाले समय के गुरुकुल जो 200 साल पुरानी परंपरा पर आधारित होंगे | ब्रह्मचर्य की विद्या कोई किताबी ज्ञान नहीं – यह तो हमेशा […]


मेरी बुद्धि बच्चे की तरह है अपनी बुद्धि को कैसे बढ़ाऊ ?

अगर हम मानसिक तौर पर कमजोर हैं तो हमे तीन कार्य करने होंगे – पहला हमे जितना हो सके सत्य के रास्ते पर चलना होगा | ऐसा करने से अंदर से दृढ़ता आती है | दूसरा हमें physical ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा | ऐसा करने से हमारे अंदर अमृत इकट्ठा होगा जिसे हम कुण्डलिनी में ऊर्ध्व कर सकेंगे | […]


क्यों न खुद को बढ़िया इंसान बना लें एक बुरा आदमी तो कम होगा ?

धरती पर अगर हर इंसान अच्छा सोचने लगे तो दुनिया ही बदल जायेगी | तो हमे अपना लोटा तो दूध का ही डालना चाहिए | जब एक राजा ने मुनादी करवाई की राजमहल के बाहर जो खाली तालाब है उसमे सब एक एक लोटा दूध का डालेंगे | आश्चर्य की बात जब सब ने डाल दिया तो राजा ने देखा […]


हम अपनी जीवन रूपी गाड़ी के अच्छे चालक – सारथी कैसे बने?

हम अपनी गाड़ी के अच्छे ड्राइवर तभी बन सकते हैं जब हम महाभारत महाकाव्य के अर्जुन के character को समझ लेंगे | आज के समय में अर्जुन और कोई नहीं हम खुद हैं | हर इंसान इस धरती पर अर्जुन है | आखिरकार अर्जुन है कौन ? हर इंसान जो अध्यात्म का सहारा लेकर तत्वज्ञान प्राप्त करना चाहता है वह […]


कैसे पता करें हम अगले जन्म में क्या बनेंगे ?

इस जन्म के कर्म तय करेंगे कि आत्मा अगला शरीर कहां लेगी, कैसा लेगी ? हम तो बस एक जन्म के लिए हैं | मृत्यु को प्राप्त होते ही खेल खत्म | अगर हमारी आत्मा अगला शरीर यूरोप के किसी Christian परिवार में लेती है तो हमें क्या ? जानकर हमें क्या मिलेगा ?   इस जन्म में जो हमें […]


क्या जन्म के समय मृत्यु का समय पूर्व निश्चित होता है ?

जब हम पैदा होते हैं तो मृत्यु कब होगी यह fixed है | जैसे जैसे हम जीवन में आगे बढ़ते हैं और कर्म करते हैं तो net कर्मफल change होता है | उस आधार पर मृत्यु का समय भी थोड़ा चेंज होगा ही – शायद कुछ seconds या minutes | जिस तरह accounts की balance sheet आगे बढ़ती है उसी […]


इंसान मरने के बाद कहां जाता है ?

जैसे ही इंसान की मृत्यु हुई खेल खत्म – एक ही जीवन मिला था मृत्यु के साथ खत्म हो गया | अगला जीवन तो आत्मा धरेगी – किस जगह लेगी, किस घर में लेगी वह निर्भर होगा मृत्यु के समय के कर्मफल पर | हमारा उस नए शरीर से कुछ लेना देना नहीं |   हमे यह बात ध्यान रखनी […]


आत्मा का वजन कितना होता है ?

पूरे ब्रह्मांड की सभी आत्माएं प्रलय के बाद अस्थ अंगुष्ठ (आधे अंगूठे के आकार) में आ जाती हैं | लेकिन आत्माओं की तादाद इतनी है कि उनका वज़न ज़ीरो ही मानना पड़ेगा |   पूरे ब्रह्मांड में आत्माएं कई महशंख के बराबर हैं | 1 महाशंख = 100,00,00,00,00,00,00,00,00 | तो सोचिए आत्मा का वजन कितना होगा ?   Difference between […]


कोई भी व्यक्ति जन्म से अंधा जन्म से लंगड़ा जन्म से बहरा क्यों होता है ?

हर इंसान के हर पल के कर्मों का हिसाब karmic index के बहिखाते में अंकित हो जाता है | अगर कोई इंसान जन्म से अंधा है तो शास्त्रानुसार उसने पिछले जन्मों में अपनी आंखों का गलत इस्तेमाल किया होगा कि इस जन्म में उसे बुरे कर्मों का सिला मिला | यहां कोई भ्रांति नहीं है – ऐसा ही होता है […]


मरने के बाद दिमाग राख हो जाता है फिर पिछले जन्म का अगले जन्म में याद कैसे रहता है ?

हम जो भी बोलते हैं कहते हैं वह मानसिक तरंगों में परिवर्तित हो ब्रह्माण्ड में घूमता रहता है | एक भी विचार – एक भी वाणी स्वतः नष्ट नहीं होती | इसलिए कहा जाता है अच्छा बोले क्योंकि वह शब्द तरंगे बन वातावरण में हमेशा मौजूद रहते हैं | हमारे मुंह से निकला एक भी अपशब्द खत्म नहीं होता – […]


क्या पिछले जन्म के बारे में जाना जा सकता है ?

अगर पिछले जन्म के रिश्तों का इस जन्म से कुछ गहरा नाता है जो सभी के लिए जानना आवश्यक है तो भगवान ऐसे हालात खुद ही पैदा कर देते हैं कि हमें सब कुछ स्वतः ही मालूम चल जाए |   मैं जब 5 वर्ष का था तो एक घटना घटी | 7 वर्ष की आयु तक भगवान ने मुझे […]


क्या जीवन में ज्ञान मार्ग पर चलना जरूरी है ?

भौतिक जीवन में रोटीरोजी कमाने के लिए ज्ञान उतना जरूरी नहीं – बिना ज्ञान के भी इंसान अपना और परिवार का गुजारा चला सकता है – अनुभव के आधार पर | लेकिन अगर हम जानना चाहें जीवन के छिपे रहस्यों के बारे में – तो ज्ञानमार्ग पर चलना ही होगा | ऐसा क्यों ?   आम इंसान का मस्तिस्क सिर्फ […]


क्या आप पुनर्जन्म या स्वर्ग नरक को मानते हैं ?

पुनर्जन्म, स्वर्ग और नरक आध्यात्मिक जीवन के विभिन्न पहलू हैं | अध्यात्म का मूल है कि आत्मा बार बार कर्मों की निर्जरा के लिए मानव शरीर धारण करती है – इसी को हम पुनर्जन्म कहते हैं जबकि पुनर्जन्म किसी का भी नहीं होता |   इंसान की मृत्यु के बाद आत्मा तुरंत नया शरीर धारण करती है | अगर पूरे […]


क्या पिछले जन्म के कर्मों का भुगतान इस जन्म में भी करना पड़ता है ?

अपने वर्तमान जीवन में अभी तक जो भी मिला, जिस भी इंसान से मुलाक़ात हुई – उसके पीछे पिछले जन्मों का कर्मबंधन है | रिश्ता जड़ से तभी खत्म होता है जब कर्म की निर्जरा हो जाए – अन्यथा वह रिश्ता आगे भी चलता रहेगा, न जाने कितने जीवन तक ?   रही कर्मों की बात – संचित कर्मफल किसी […]


क्या कर्म का फल अगले जन्म में भी मिलता है ?

हमारा मृत्यु के समय कार्मिक balance अगर +29 है तो हमारी आत्मा जो नया शरीर लेगी उसका पैदा होने के वक़्त से ही कार्मिक balance +29 रहेगा | वर्तमान जीवन में हमने कुछ कार्य किए और +2 कर्मफल अर्जित किया तो हमारा वर्तमान में कार्मिक balance हो गया +31 |   जीवन में जो भी कर्मफल अर्जित करेंगे (+) या […]


ब्रह्मांड शुरू होने से पहले आत्माएं कहाँ थीं ?

नया ब्रह्माण्ड शुरू होने से कुछ समय पहले सारी आत्माएं पुराने ब्रह्माण्ड में व्याप्त थी | नया ब्रह्माण्ड शुरू होने का मतलब है पुराने ब्रह्माण्ड की समाप्ति | और यह समाप्ति होती है प्रलय के द्वारा | जब प्रलय आ जाती है तो पूरा ब्रह्माण्ड सिमटने लगता है और अंततः अस्थ अंगुष्ठ (आधे अंगूठे) के आकार में आ जाता है […]


क्या मरने के बाद फिर कहीं और मिलेंगे ?

नहीं, यह हमारा पहला और आखिरी जन्म है | हम मनुष्य एक ही जीवन के लिए आते हैं | अगला शरीर तो हमारी आत्मा धारण करेगी, हम नहीं | इस जन्म में दो इंसान पति पत्नी हैं लेकिन अगले किसी जन्म में जब उन्हीं दोनों आत्माओं की मुलाकात होती है तो हो सकता है एक दादा हो और दूसरा एक […]


सिद्ध गुरु तक कैसे पहुंचें ?

आज भगवान कृष्ण आकर हमारे साथ घर में रहने लगें और साल भर रहें – तो जानते हैं क्या होगा ? प्रभो धन्य भाग हमारे जो आप हमारे घर पधारे – प्रभु हम तो धन्य हो गए – प्रभु न जाने किस जन्म में कौन से अच्छे कर्म किए होंगे जो आप हमारे घर पधारे इत्यादि | ज्ञान की एक […]


कर्म के जाल को कैसे तोड़ें ?

भगवद गीता में कृष्णानुसार कर्म को कर्म के द्वारा ही नष्ट किया जा सकता है | जब हम किसी भी कर्म को निष्काम भाव से करेंगे और कर्मफल की चिंता नहीं करेंगे तो कर्मों की निर्जरा शुरू हो जायेगी और कर्म हमें बांधेंगे नहीं | धीरे धीरे कर्मबंधन कम होने शुरू हो जायेंगे |लेकिन क्या इतना ही काफी होगा ? […]


निष्काम कर्म आज के दौर में कितना सम्भव है ?

निष्काम कर्म यानि कर्म तो करेंगे लेकिन कर्मफल के पीछे नहीं भागेंगे | कोई भी युग हो, कैसा भी समय – निष्काम भाव से काम तो हमेशा ही किया जा सकता है – बस जुनून होना जरूरी है | अगर ठान लिया इसी जीवन में तत्वज्ञान प्राप्त करना है तो कोई है/ या कोई कारण है जो हमें ऐसा करने […]


आज के समय आत्मज्ञान कैसे प्राप्त करें ?

आत्मज्ञान किसी भी समय, किसी भी युग में प्राप्त किया जा सकता है बस अपने अंदर सामर्थ होना चाहिए | भारत में 99.99% लोग जो आत्मज्ञान पाना चाहते हैं, लगभग सभी ने कोई न कोई गुरु बना रखा है | उनकी आत्मज्ञान पाने की आस तो वैसे ही zero हो गई | आत्मज्ञान के रास्ते पर गुरु का क्या काम […]


आत्मबोध कैसे करें श्रीमद्भगवद्गीता के संदर्भ में ?

महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाकाव्य महाभारत में कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया गीतोपदेश एक बहुत ही सार्थक बात से हमारा परिचय कराता है | कृष्ण कहते हैं – अगर तत्वज्ञानी बनना चाहते हो/ अगर मुझ तक पहुंचना चाहते हो तो सत्य का मार्ग पकड़ अपने हृदय से आती आवाज़ को सुनो – यह आवाज़ और किसी की नहीं बल्कि […]


रोज उठना तैयार होना कमाने जाना खाना और सो जाना | क्या यही असली जिंदगी है ?

जब मैं 5 वर्ष का था और भगवान ने मेरी जिंदगी बख्श दी तो मेरे अंदर ये प्रश्न उठा कि यह जीना मरना क्या होता है | लगभग 6 वर्ष की उम्र में बेहद जिज्ञासा उत्पन्न हो गई भगवान को जानने की – सोचा उन्हीं से पूछ लूंगा | अब न जाने भगवान कब मिलेंगे तो घर के सभी बुजुर्गो […]


क्या भारत 2047 से पहले विकसित देश बन सकता है ?

विकसित होने की परिभाषा क्या है ? गगनचुंबी इमारतें, अपनी हैसियत से 20 गुना ज्यादा छापे गए dollars, हर स्त्री के दसियों boyfriend और हर मर्द की बीसियों girlfriend – क्या यही सबूत है विकसित होने का ? यह धन दौलत किस काम की जब आपके देश में संस्कार नहीं ? काफी विदेशी स्त्रियां और मर्द भारतीयों की तरह पवित्र […]