किन परिस्थितियों में व्यक्ति की मुलाकात उसकी अंतरात्मा से हो जाती है ?

हमारी अपनी अंतरात्मा से मुलाकात सिर्फ तभी होती है जब हम अध्यात्म के रास्ते पर चलते हैं अन्यथा कभी नहीं | आध्यात्मिक सफर में हमें पहली बार अहसास होता है कि हम एक आत्मा हैं न कि एक शरीर | आध्यात्मिक उत्सुकता हमें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है और जो इंसान जन्म और मृत्यु के चक्रव्यूह से छुटकारा […]


अपनी अंतरात्मा से जुड़ने का आध्यात्मिक तरीका क्या है ?

अगर हम अपनी अंतरात्मा से जुड़ना चाहते हैं तो हमें सिर्फ और सिर्फ सत्य का मार्ग पकड़ना होगा – एक बार भी झूठ का सहारा न लेने की पक्की कसम | जब से हमने जन्म लिया – एक भीनी सी आवाज़ हमें हृदय स्थल से आती महसूस होती है लेकिन हम आमतौर पर इस आवाज़ को अनसुना कर देते हैं […]


क्या अंतरात्मा की आवाज कभी गलत दिशा नहीं दिखाती ?

अंतरात्मा की आवाज यानी हृदय में विराजमान सारथी कृष्ण की आवाज़ एक बार भी गलत guidance नहीं देती है | जो सत्य पर स्थापित हो यानी हमारी अंतरात्मा की आवाज – वह कभी गलत दिशा की ओर नहीं ले जा सकती है | अंतरात्मा यानि प्रभु (ब्रह्म) का अंश गलत राह पर कैसे ले जा सकता है ?   हर […]


क्या आप ने अपनी अंतरात्मा से बात की है ?

क्या हम खुद से बात कर सकते हैं – नहीं तो अपनी खुद की अंतरात्मा से बात कैसे कर सकेंगे | आध्यात्मिक तौर पर हम खुद एक आत्मा ही हैं तो अपनी अंतरात्मा से बात का प्रश्न ही नहीं उठता ?   हमारी अंतरात्मा हृदय में स्थित सारथी कृष्ण हैं | हम उनकी आवाज़ तभी सुन सकते हैं जब हम […]


इंसानों के पास अंतरात्मा क्यों होती हैं – कोई प्रमाण कि जानवरों की भी अंतरात्मा होती है ?

अंतरात्मा तो सभी जीवों में होती है – चाहे वह अमीबा हो, कीट पतंगों की योनि, पेड़ पौधों की योनि या पशु पक्षियों की योनि | बिना चेतन (आत्मा के) कोई जीव जिंदा रह ही नहीं सकता | हमारी आत्मा ने यह शरीर धारण किया है तभी तो हमारा अस्तित्व है अन्यथा बिना चेतन तत्व हम सिर्फ पांच तत्वों से […]


कर्मयोगी क्या होता है ?

कर्मयोगी शब्द मूलतः उस साधक के लिए इस्तेमाल होता है जो हर कर्म को निष्काम भाव से करता है | निष्काम भाव यानि कर्म तो करना लेकिन कर्मफल के पीछे नहीं भागना | हर योगी को कर्मबंधन के चक्रव्यूह से बाहर निकलना होता है और वह यह तभी कर सकता है जब हर कार्य को निष्काम भाव से करे – […]


योगी और कर्मयोगी में क्या अंतर है ?

योगी शब्द एक साधक के लिए इस्तेमाल होता है जो ब्रह्म से हमेशा के लिए जुड़ना चाहता है | हर योगी के लिए आवश्यक है कि वह एक उच्च दर्जे का निष्काम कर्मयोगी भी हो | कर्म तो करने ही होंगे चाहे आध्यात्मिक हों या नहीं – अगर आध्यात्मिक हैं तो कर्म निष्काम भावना से करने होंगे | साधक सच्चा […]


कर्मयोगी में क्या गुण होने चाहिए जिससे वह वास्तव में कर्मयोगी कहलाए ?

एक सफल कर्मयोगी वह साधक होता है जो हर कर्म को निष्काम भावना से करे – जैसे राजा जनक, स्वामी विवेकानंद और JRD Tata. इन तीनों में राजा जनक तो गृहस्थ कर्मयोगी थे जबकि स्वामी विवेकानंद एक बाल ब्रह्मचारी सन्यासी और JRD Tata का अध्यात्म से कोई नाता न होते हुए भी वह एक उच्च दर्जे के कर्मयोगी थे | […]


जैन दर्शन के अनुसार योग और कषाय का कार्य क्या है ?

जैन धर्म नहीं अपितु हिन्दू धर्म के अनुसार कषाय को खत्म करने के लिए निष्काम कर्म योग का सहारा लेना पड़ता है | योग का मूल उद्देश्य कषाय से पूर्ण निवृत्ति होती है | तभी हम प्रभु से आत्मसाक्षात्कार कर सकते हैं |   Nishkama Karma Yoga | निष्काम कर्म योग का महत्व | Vijay Kumar Atma Jnani


जिनकी जीवन के बीच सफर में मृत्यु हो जाती है उन्हें सिद्धार्थ गौतम और महावीर स्वामी की तरह मुक्त होने का अवसर ही नहीं मिला ?

महावीर की स्थिति तक पहुंचने के लिए ब्रह्म ने मनुष्य रूप में ११ लाख योनियां दी है | जल्दी क्या है |   Are there 8.4 million species on Earth? चौरासी लाख योनियों का सच | Vijay Kumar Atma Jnani


महाभारत युद्ध में अभिमन्यु के ऊपर सभी कौरव एक एक कर युद्ध करते तो क्या अभिमन्यु की विजय होती ?

अभिमन्यु का चक्रव्यूह में घुसना मात्र सिंबॉलिक है, असली कारण जाने |   अभिमन्यु महाभारत युद्ध में चक्रव्यूह में फँस क्यों मारा गया, छिपा मर्म आध्यात्मिक परिपेक्ष में


अकेलेपन के नुक्सान क्या है ?

अकेलेपन का नुक़सान तो नहीं अपितु फायदे बहुत हैं | हो सकता है हम अंतर्मुखी बनकर आध्यात्मिक जीवन जीने लग जाएं अथवा भगवान महावीर के रास्ते पर निकल जाएं और आत्मज्ञान प्राप्त कर लें |   What is the real meaning of spirituality? अध्यात्म का वास्तविक अर्थ क्या है ? Vijay Kumar Atma Jnani


पुराण पर अब कोई टीवी सीरिअल क्यों नहीं बन रहे ?

पुराण वास्तव में धार्मिक ग्रंथ हैं जो किसी छिपे आध्यात्मिक मर्म को प्रतिपादित करते हैं | पुराणों पर धारावाहिक बनाना पाप है क्योंकि पुराण सिर्फ धार्मिक कहानियां हैं और सीरियल तो छिपे आध्यात्मिक मर्म पर बनना चाहिए जो किसी भी धार्मिक प्रोड्यूसर के बस में नहीं | रामायण और महाभारत तो महाकाव्य हैं जिन पर धारावाहिक बनाना एक उच्च कोटि […]


प्रलय की परिभाषा क्या है ?

जब पूरा ब्रह्माण्ड अपने आपको खुद मे समेट लेता है और ब्रह्म अपने असली स्वरूप में वापस आ जाते हैं उसे प्रलय कहते हैं |   What is a Pralaya in Hinduism? हिन्दू धर्म में प्रलय क्या होती है | Vijay Kumar Atma Jnani


महाभारत के होने का मुख्य कारण क्या था ?

जब अधर्म की अति हो जाए तब एक अवतार का आना आवश्यक हो जाता है | द्वापर युग में कृष्ण आए थे | अभी हम संधिकाल की अवस्था से गुजर रहे हैं | कुछ ही सालों में कल्कि अवतार का अवतरण होगा, एक नई महा महाभारत के साथ जिसमें 120 करोड़ लोगों की मौत निश्चित है | सतयुग के आने […]


गीता में किस बात का उपदेश दिया गया है ?

भगवद गीता में कृष्ण ने यह संदेश प्रतिपादित करने की कोशिश की है कि एक आम इंसान को जीवन कैसे जीना चाहिए | हमारा शरीर आत्मा ने धारण किया है स्वयं को शुद्ध करने के लिए | गीता के 700 श्लोकों का मर्म समझकर हम ब्रह्म का आत्मसाक्षात्कार कर सकते हैं | यही बात हमें समुद्र मंथन की गाथा भी […]


अभिमन्यु चक्रव्यूह के किस द्वार में फस गया था ?

किसी भी द्वार में नहीं | मनुष्य जीवन के चक्रव्यूह में तब तक फंसा रहेगा जब तक वह अपने आप को चौरासी लाखवी योनि में स्थापित नहीं कर लेता | अभिमन्यु की कहानी सिम्बोलिक है छिपे हुए आध्यात्मिक मर्म को समझाने के लिए | मुक्ति के द्वार तक पहुंचना ही हर प्राणी (अभिमन्यु) का लक्ष्य है |   अभिमन्यु महाभारत […]


महाभारत में अर्जुन कौन थे ?

महाभारत का अर्जुन धरती के हर मनुष्य को रिप्रेजेंट करता है | कैसे?   अर्जुन के रथ और सारथी कृष्ण का रहस्य | Vijay Kumar… the Man who Realized God in 1993 | Atma Jnani


चक्रव्यूह की रचना किसने की ?

चक्रव्यूह की रचना स्वयं ब्रह्म ने की थी | हम धरती को माया नगरी इसीलिए कहते है क्योंकि किसी भी मनुष्य को इस चक्रव्यूह से निकलने का रास्ता मालूम नहीं | धरती रूपी चक्रव्यूह से निकलने का एकमात्र रास्ता है अध्यात्म में उतारना | तभी हम मुक्ति के द्वार पर पहुँच सकते हैं और जन्म मरण के चक्रव्यूह से मुक्त […]


कितने वर्षों में भारतीय सभ्यता पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव से मुक्त हो सकती है ?

फ़िलहाल भारत संधि काल से गुज़र रहा है | एक संधि काल की समाप्ति वर्ल्ड वॉर से होती है | इस सम्भावित वर्ल्ड वॉर थ्री का 2030 तक अंत हो जाएगा उसके बाद 2032 तब सतयुग की स्थापना हो जाएगी | 2034 से भारत अखंड भारत बन जाएगा | 2034 तक पूरी दुनिया के समस्त देश भारत को नंबर वन […]


क्या मरने के बाद भी इसी दुनिया में रहेंगे ?

मृत्यु के बाद हमारा अस्तित्व ख़त्म हो जाता है | हमारा वर्तमान जीवन सिर्फ़ एक योनि के लिए है | मृत्यु के बाद हमारी आत्मा क्या रूप धारण करेंगी यह किसी को नहीं मालूम | आत्मा कार्मिक बैलेंस के अनुसार नया शरीर धारण करती है | मृत्यु के समय है अगर आत्मा को कार्मिक बैलेंस के अनुसार माता पिता नहीं […]


क्या सामान्य व्यक्ति सिद्धि प्राप्त कर सकता है ?

अध्यात्म के रास्ते पर चलता हुआ साधक हर प्रकार की सिद्धियां प्राप्त कर सकता है | अगर हम ब्रह्म के दर्शन करना चाहते हैं तो हमें सिद्धियों की चाहत छोड़नी होगी | ये सिद्धियां ही है जो हमें प्रभु से साक्षात्कार करने में आड़े आती है | सच्चा साधक कभी भी सिद्धियों के चक्कर में नहीं पड़ता, वह तो सिर्फ़ […]


ध्यान के माध्यम से ज्ञान की प्राप्ति कर सकते हैं ?

ध्यान के द्वारा चिंतन किया जा सकता है | यह चिंतन ही है जो हमें शास्त्रों में निहित ज्ञान तक पहुंचने में मदद करता है | ज्ञान सिर्फ माध्यम है आत्मा के अंदर निहित अंधकार को मिटाने के लिए | आत्मा स्वयं की शुद्धि खुद नहीं कर सकती उसे एक माध्यम की जरूरत पड़ती है | इसलिए वह शरीर धारण […]


मैं वेद पुराण उपनिषद रामायण महाभारत को हिन्दी में पढ़ना चाहता हूँ – किस प्रकाशन की अच्छी रहेंगी ?

अध्यात्म के रास्ते पर चलने के लिए आज के समय में हमें वेद पढ़ने की जरूरत नहीं है | चारो वेदों का निचोड़ भगवद गीता और उपनिषदों में निहित है | पुराण सिर्फ अंदर छिपे मर्म को समझाने के लिए हैं इसलिए उन्हें पड़ने से फायदा नहीं | रामायण आध्यात्मिक शास्त्र नहीं है | महाभारत काव्य का निचोड़ भगवद गीता […]


आप अपना गुरु किसे मानते हैं ?

पांच वर्ष की आयु से साक्षात ब्रह्म को गुरु माना और समझा | ब्रह्म से मेरा रिश्ता कैसा है यहां देखें –   How do you express Gratitude in words to God? भगवान की कृपा के प्रति कृतज्ञता | Vijay Kumar


24वें तीर्थंकर महावीर की शिक्षाएं प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव की शिक्षाओं से किस प्रकार अलग हैं – किस तीर्थंकर का मार्ग मोक्ष का मार्ग है – महावीर के बताए मार्ग पर कितने लोगों को मोक्ष प्राप्त हुआ है ?

जैन धर्म के पहले तीर्थंकर ऋषभदेव के समय मनुष्यता धीरे धीरे आगे बढ़ रही थी | पहले कुलकर आए जिन्होंने कृषि करना सीखा और सिखाया | तीर्थंकर ऋषभदेव को केवल्य ज्ञान तो प्राप्त हो गया लेकिन कोई भी जैन साधक उनकी वाणी को समझ नहीं सका | 23 तीर्थंकरों तक यही अवस्था रही | तीर्थंकर महावीर के आते ही उनकी […]


हिंदुओं का सबसे पुराना ग्रंथ वेद है तो जैनियों का सबसे पुराना ग्रंथ क्या है ?

जैन शास्त्रों के आगम शास्त्र षट्खण्डागम हैं जो ६ खंडों में हैं | समयसार भी एक मूल ग्रन्थ माना जाता है | यहां पर मेरा यह कहना है सभी शास्त्रों का मूल तो भगवद गीता में छिपा ज्ञान है |   मैं जैन हूं लेकिन भारतीय दर्शन को मूल क्यों मानता हूं | Vijay Kumar Atma Jnani


बुद्ध अपना गृहस्थ जीवन छोड़ क्यों चले गए थे ?

अपने अंदर उमड़ते आध्यात्मिक प्रश्नों के उत्तर जब सिद्धार्थ को गृहस्थ जीवन में नहीं मिले तो उन्होंने जंगल का रुख किया | जंगलों में रह कर भी जब उन्हें अपने आध्यात्मिक प्रश्नों के उत्तर नहीं मिले तो अंततः उन्होंने बोधी वृक्ष के नीचे अपनी तपस्या शुरू की जो १२ वर्ष तक चली | अंततः उन्हें कैवल्य ज्ञान निर्वाण प्राप्त हुआ […]