ईश्वरीय सत्ता का अनुभव कब और किस प्रकार होता है ?

ब्रह्म का एहसास सिर्फ अध्यात्म के रास्ते पर चलकर किया जा सकता है | जब साधक ध्यान में चिंतन के माध्यम से उतरता है तो धीरे धीरे आध्यात्मिक प्रगति होती है और अंततः साधक रामकृष्ण परमहंस बन ही जाता है |   Dhyan kaise karein | ध्यान करने की सही विधि | Vijay Kumar Atma Jnani


हमें अध्यात्मिक तथा मानसिक विकास के लिऐ क्या करना चाहिए ?

दोनों आध्यात्मिक और भौतिक उन्नति के लिए ब्रह्मचर्य का पालन आवश्यक है | अध्यात्म में ध्यान के सहारे उतरा जा सकता है | कुण्डलिनी जागरण के लिए ब्रह्मचर्य की आवश्यकता है | भौतिक जीवन में ब्रह्मचर्य के पालन से असीमित मानसिक प्रगति संभव है |   Dhyan kaise karein | ध्यान करने की सही विधि | Vijay Kumar Atma Jnani


महाभारत युद्ध का जिम्मेदार कौन है द्रोपदी कृष्ण कुंती या धृतराष्ट्र ?

महाभारत युद्ध के लिए सिर्फ और सिर्फ महर्षि वेदव्यास जिम्मेदार हैं | महाभारत महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित एक काव्य ग्रंथ है | शास्त्रों में निहित गूढ़ तथ्यों को समझाने के लिए उन्हें इस महाकाव्य की रचना करनी पड़ी |   महर्षि वेदव्यास और महाभारत महाकाव्य का आध्यात्मिक सच | Vijay Kumar Atma Jnani


पहाड़ों की कंदराओं में बैठकर तप करना सहज है किन्तु परिवार में रहकर धीरज बनाये रखना सबके वश में नहीं ?

मैंने खुद देखा है स्वामियों को पानी लेने की खातिर पहाड़ से ३~४ किलोमीटर उतरते हुए और फिर वापस चढ़ना | जीवन दोनों कठिन हैं | बिना कर्म किए किसी का गुजारा नहीं | और फिर जंगली जानवरों का डर, उनसे कौन बचाता है | सब खुद करना पड़ता है | मूल है निष्काम भावना से कर्म करना |   […]


हिंदू मुस्लिम सिख इसाई कौन सा धर्म सर्वश्रेष्ठ है ?

हिन्दू धर्म मूल है | जब वृक्ष उगता है तो नीचे जड़ और फिर तना यानी धर्म का तना, पेड़ | तने को काटो तो चार खाने यानी चार वेद आ गए और सनातन धर्म ने जड़ पकड़ ली | पेड़ में शाखाएं निकली | पहली शाखा जैन धर्म की, फिर बौद्ध धर्म की, फिर ईसाई धर्म और इस तरह […]


जब आत्मा तत्व और शरीर मिट्टी है तो हम कौन है ?

मनुष्य (जीव) का कर्तव्य है निष्काम कर्म करना, तभी आत्मा (चेतना) अपने शुद्ध स्वरूप को वापस पाएगी | शरीर स्वयं से कुछ नही कर सकता जब तक चेतना साथ न हो | चेतना (आत्मा) के बाहर निकलते ही शरीर मृत हो जाता है |   आत्मा स्वयं निष्क्रिय रहती है | उसे कर्म करने के लिए शरीर की आवश्यकता होती […]


शरीर में कोई कोशिका जीवित शरीर से बाहर आ जाती है तब वह आत्मा के बगैर होगी क्योंकि आत्मा तो शरीर के अंदर ही है ?

आत्मा वास्तव में शरीर में विद्यमान न होकर सूर्य के गर्भ में विद्यमान है | हर आत्मा सूर्य में स्थित रहकर रिमोट कंट्रोल से धरती पर हर जीव का संचालन करती है | ऐसा शास्त्र कहते हैं |   Where does Soul live in Human Body? शरीर में आत्मा कहाँ निवास करती है? Vijay Kumar Atma Jnani


क्या आप सनातन धर्म के बारे में सबसे अच्छी बात बता सकते हैं ?

सनातन धर्म यानी भारतीय दर्शन ही एकमात्र धर्म है जो इंसान को जीवन के आखिरी छोर तक पहुंचा सकता है यानी जन्म और मृत्यु के चक्रव्यूह से हमेशा के लिए छुटकारा |   What is Moksha in simple terms? मोक्ष क्या है? Vijay Kumar Atma Jnani


भगवान को कौन देख सकता है ?

भगवान (ब्रह्म) को देख तो कोई नहीं सकता लेकिन जिसे आत्मसाक्षात्कार हो गया हो वह हर पल बात कर सकता है |   What comes after Self Realization? आत्मसाक्षात्कार के बाद आत्मा कहां जाती है | Vijay Kumar


भगवान कृष्ण के महान शब्द कौन से हैं ?

कर्मों को निष्काम भाव से करो | ऐसा करने से कर्मों की पूर्ण निर्जरा हो जाएगी और मनुष्य जीवन के आखिरी छोर पर पहुंच अंततः मोक्ष ले लेगा |   Nishkama Karma Yoga | निष्काम कर्म योग का महत्व | Vijay Kumar Atma Jnani


हिंदू धर्म की सबसे बड़ी विशेषता क्या है ?

यह हिन्दू धर्म ही है जो हमें बताता है हम एक ही जीवन से नहीं बंधे | ११ लाख मनुष्य योनियों का लंबा सफर है | साधक सिर्फ और सिर्फ हिन्दू धर्म के शास्त्रों में निहित ज्ञान को प्राप्त कर जन्म मृत्यु के चक्रव्यूह से हमेशा के लिए मुक्त हो सकता है |   1.1 million manifestations in Human form? […]


सत्य को ईश्वर और ईश्वर को सत्य क्यों कहा जाता है ?

सत्य ब्रह्म को प्रतिपादित करता है | कैसे ? जब प्रलय होती है पूरा ब्रह्माण्ड सिमट कर आधे अंगूठे के आकार में आ जाता है | तो पूरा जगत भी मायावी है सत्य नहीं | आधे अंगूठे का आकार क्या है ? यह ब्रह्म हैं | यानी पूरे ब्रह्माण्ड की सारी आत्माएं अपने शुद्ध आकार में आधे अंगूठे का आकार […]


क्या भगवान श्री कृष्ण की फोटो दिखा सकते हैं ?

अगर आप अपने हृदय के अंदर झांक कर देख सकते हैं तो भगवान श्रीकृष्ण नजर आ जाएंगे | कृष्ण और कोई नहीं बल्कि हृदय में स्थित हमारी आत्मा है | इसी कारण उन्हें अर्जुन के रथ का सारथी कहा गया है |   अर्जुन के रथ और सारथी कृष्ण का रहस्य | Vijay Kumar… the Man who Realized God in […]


मरने के बाद इंसान की आत्मा 84,00,000 योनियों में भटकती है – आपका क्या दर्शन है ?

भारतीय शास्त्र कहते हैं मनुष्यों को ११ लाख योनियों के सफर से गुजरना पड़ता है | निष्काम कर्म योग में उलझकर हम यह सफर छोटा भी कर सकते हैं |   1.1 million manifestations in Human form? मनुष्य रूप में ११ लाख योनियों का सफर | Vijay Kumar


आत्मा का स्वभाव क्या है – पहले किसका सिमरन करे आत्मा या परमात्मा ?

भारतीय दर्शन शास्त्र कहते हैं कि हम एक आत्मा हैं न कि शरीर तो सिमरन प्रार्थना तो परमात्मा को समर्पित होगी |   Difference between Atman and Brahman | आत्मा परमात्मा में भेद | Vijay Kumar Atma Jnani


आत्मा अमर है फिर अमृत मंथन क्यों किया गया ?

आत्मा अनादि अमर है लेकिन अपने ब्रह्मांडीय सफर में अशुद्धियां ग्रहण कर लेती है | खुद शुद्ध हो नहीं सकती इसलिए शरीर धारण करती है | यह समुद्र मंथन ही है जिसको समझकर एक आध्यात्मिक साधक ध्यान में चिंतन के माध्यम से उतर जाता है और अंततः आत्मज्ञानी बन जन्म और मृत्यु के चक्रव्यूह से हमेशा के लिए बाहर निकल […]


सनातन धर्म में व्यक्तिगत आत्मा और सार्वभौमिक चेतना ब्रह्म के बीच संबंध की अवधारणा कैसे है?

अगर गेहूं का एक दाना आत्मा है तो पूरी ढेरी परमात्मा |   Difference between Atman and Brahman | आत्मा परमात्मा में भेद | Vijay Kumar Atma Jnani


मृत्यु के समय आत्मा शरीर से बाहर कैसे निकलती है ?

सारी आत्माएं हमेशा से सूर्य के गर्भ में स्थित हैं और रिमोट कंट्रोल से धरती पर स्थित शरीर को चलाती हैं | आत्माओं को रहने के लिए १ करोड़ डिग्री सेंटीग्रेड से ज्यादा तापमान की जरूरत पड़ती है |   Where does Soul live in Human Body? शरीर में आत्मा कहाँ निवास करती है? Vijay Kumar Atma Jnani


अध्यात्म में सबसे बड़ा लोचा क्या है ?

आध्यात्मिक सफर में सबसे बड़ी परेशानियां क्या हैं ?   १. जिसे प्राप्त करना है वो दिखता नहीं (परमात्मा) |   २. जिसको प्राप्त करना है वह भी खुद को देख नहीं पाता (हम अपनी आत्मा देख नहीं सकते) |   ३. जो रास्ता है वह अंदरूनी है, सबके लिए अलग | किसी को कुछ पता नहीं |   ४. […]


विवेक कब जागृत होता है ?

जब हम सत्य की राह पर चलते हैं तभी हमारा विवेक जागृत होता है अन्यथा नहीं | झूठा इंसान कभी विवेक का इस्तेमाल नहीं कर पाता |   Power of Absolute Truth | अध्यात्म में सत्य का महत्व | Vijay Kumar Atma Jnani


ब्रह्मज्ञान कैसे प्राप्त किया जा सकता है ?

ब्रह्म ज्ञान को प्राप्त कर लेना मतलब परमात्मा ब्रह्म को पा लेना हमेशा हमेशा के लिए | यह संभव हो पाता है जब एक साधक चिंतन के माध्यम से ध्यान में उतरकर और ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए अध्यात्म के शीर्ष पर पहुंच जाता है यानी ८४ लाखवी योनि, तब हम एक तत्वज्ञानी बन जन्म और मृत्यु के बंधन से […]


किसी संत ने कहा व्यापार में 10 प्रतिशत लाभ का साथी भगवान को बना लो ?

व्यापार में भगवान ब्रह्म को १० प्रतिशत का साझीदार बनाने के दो फायदे हैं |   १. जब व्यापार में ब्रह्म साझीदार हैं तो हम व्यापार में लेन देन में कभी गड़बड़ नहीं करेंगे |   २. जब १० प्रतिशत हिस्सा ब्रह्म को समर्पित है तो हम हमेशा कोशिश करेंगे कि जो लोग गरीब परिस्थिति में हैं उनकी मदद करें […]


आदमी मरने के बाद कहाँ जाता है ?

मृत्यु के बाद आत्मा तुरंत एक नया शरीर धारण करती है अगर उसे मैचिंग पैरेंट्स मिल जाएं | अगर नहीं तो आत्मा स्वर्ग या नरक में वास करती है | स्वर्ग में अगर मरते वक़्त कार्मिक शेष पुण्य है और नरक अगर पाप | इस शीतनिष्क्रियता अवस्था से आत्मा उसी क्षण मुक्त हो जाती है जब धरती पर मैचिंग पैरेंट्स […]


क्या वेदों के बिना मनुष्य का जीवन अधुरा है ?

आज के समय में वेदों के ज्ञान की आवश्यकता बिल्कुल भी नही | अगर हम भगवद गीता में निहित ७०० श्लोकों का मर्म समझ लें तो काफी होगा इस जन्म में रामकृष्ण परमहंस के लेवल तक पहुंचने के लिए | गीता हमें मोक्ष द्वार तक पहुंचा देगी |   What spiritual books should i read | कौनसी आध्यात्मिक पुस्तकें पढ़े […]