विवेक कब जागृत होता है ?
जब हम सत्य की राह पर चलते हैं तभी हमारा विवेक जागृत होता है अन्यथा नहीं | झूठा इंसान कभी विवेक का इस्तेमाल नहीं कर पाता | Power of Absolute Truth | अध्यात्म में सत्य का महत्व | Vijay Kumar Atma Jnani
जब हम सत्य की राह पर चलते हैं तभी हमारा विवेक जागृत होता है अन्यथा नहीं | झूठा इंसान कभी विवेक का इस्तेमाल नहीं कर पाता | Power of Absolute Truth | अध्यात्म में सत्य का महत्व | Vijay Kumar Atma Jnani
ब्रह्म ज्ञान को प्राप्त कर लेना मतलब परमात्मा ब्रह्म को पा लेना हमेशा हमेशा के लिए | यह संभव हो पाता है जब एक साधक चिंतन के माध्यम से ध्यान में उतरकर और ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए अध्यात्म के शीर्ष पर पहुंच जाता है यानी ८४ लाखवी योनि, तब हम एक तत्वज्ञानी बन जन्म और मृत्यु के बंधन से […]
व्यापार में भगवान ब्रह्म को १० प्रतिशत का साझीदार बनाने के दो फायदे हैं | १. जब व्यापार में ब्रह्म साझीदार हैं तो हम व्यापार में लेन देन में कभी गड़बड़ नहीं करेंगे | २. जब १० प्रतिशत हिस्सा ब्रह्म को समर्पित है तो हम हमेशा कोशिश करेंगे कि जो लोग गरीब परिस्थिति में हैं उनकी मदद करें […]
मृत्यु के बाद आत्मा तुरंत एक नया शरीर धारण करती है अगर उसे मैचिंग पैरेंट्स मिल जाएं | अगर नहीं तो आत्मा स्वर्ग या नरक में वास करती है | स्वर्ग में अगर मरते वक़्त कार्मिक शेष पुण्य है और नरक अगर पाप | इस शीतनिष्क्रियता अवस्था से आत्मा उसी क्षण मुक्त हो जाती है जब धरती पर मैचिंग पैरेंट्स […]
आज के समय में वेदों के ज्ञान की आवश्यकता बिल्कुल भी नही | अगर हम भगवद गीता में निहित ७०० श्लोकों का मर्म समझ लें तो काफी होगा इस जन्म में रामकृष्ण परमहंस के लेवल तक पहुंचने के लिए | गीता हमें मोक्ष द्वार तक पहुंचा देगी | What spiritual books should i read | कौनसी आध्यात्मिक पुस्तकें पढ़े […]
पहले वेद आए फिर बाइबल कुरान इत्यादि | अगर हम धर्म की परिभाषा समझ लें तो सब समझ आएगा | What is the true Meaning of Dharma? धर्म का सही अर्थ क्या है? Vijay Kumar Atma Jnani
जब से सृष्टि बनी है धर्म तभी से मौजूद है | धर्म हमारे साथ जन्म के समय से मौजूद है | What is the true Meaning of Dharma? धर्म का सही अर्थ क्या है? Vijay Kumar Atma Jnani
भगवान की खोज, स्वयं को ८४ लाखवी योनि में स्थापित कर लेना ही जीवन का लक्ष्य है | What is the main Purpose of Life? मानव जीवन का मकसद | Vijay Kumar Atma Jnani
मैं बचपन से सत्य के मार्ग पर चला | में सही हूं या गलत मालूम नहीं था | हिंदी के अध्यापक ने जब पहली बार यह कन्फर्म किया कि मैं सही रास्ते पर हूं तो ज़िन्दगी की राह ही बदल गई और मेरी ब्रह्म के प्रति जिज्ञासा और बढ़ गई | Power of Absolute Truth | अध्यात्म में सत्य […]
अगर हम मां से ही बंधे रहेंगे तो पूर्ण विकसित कैसे होंगे | बचपन में मां फिर स्कूल में शिक्षक और शिक्षा के रास्ते पर मैं बढ़ चला | धीरे धीरे ज्ञात हुआ हमारी खुद की आत्मा से बड़ा कोई शिक्षक नहीं | सत्य के मार्ग पर चलते हुए मैंने हृदय के अंदर से आती हुई आत्मा की आवाज़ […]
भारतीय दर्शन में ध्यान में उतरने का रास्ता एक ही है चिंतन के माध्यम से, जिसे इंग्लिश में contemplation कहते हैं | महर्षि रमण ने इसे सेल्फ इंक्वायरी कहा है | Dhyan kaise karein | ध्यान करने की सही विधि | Vijay Kumar Atma Jnani
जब हम ध्यान में होते हैं तो कर्मो की निर्जरा करते हैं यानी नेगेटिव कर्मो को काटते हैं | जब हमारे अंदर नेगेटिविटी कम होती है तो वह हमेशा झटके देती है | और नेगेटिविटी कम होने का मतलब है हम ज्यादा पॉजिटिव शुद्ध हो रहे हैं तो हमें अच्छा लगता है | 12 years Tapasya | 12 साल […]
जब हम ध्यान में उतरते हैं तो आत्मा के लेवल पर चले जाते हैं | जब हम आत्मा के लेवल पर पहुंच जाते हैं तो फिजिकल शरीर धीरे धीरे शिथिल होने लगता है और अंततः नींद हमें घेर लेती है | काफी अभ्यास के बाद जब हमें अहसास हो जाता है कि हम एक आत्मा है न कि शरीर तो […]
जब जीवन में एक स्थापित लक्ष्य नहीं होता, तो किसी भी विषय में एकाग्र होना बेहद मुश्किल हो जाता है | जीवन का एक गोल तय करो और फिर उसे पूरा करने में पूरी शक्ति लगा दो | What is the main Purpose of Life? मानव जीवन का मकसद | Vijay Kumar Atma Jnani
ध्यान में जब हम पूरी तरह डूब जाते हैं तो अपनी आत्मा और प्रभु ब्रह्म के बेहद नजदीक होते हैं | हमें जो छूने की कोशिश कर रहा है वह और कोई नहीं बल्कि हमारी अपनी आत्मा है जो हमसे कुछ कहना चाहती है | सत्य के मार्ग पर चलते हुए मैंने अपनी आत्मा की आवाज को कभी अनसुना नहीं […]
आध्यात्मिक सफर में मैं हमेशा शवासन की मुद्रा में सोता था | शवासन की मुद्रा में लेट कर मैं गहन चिंतन में डूब जाता था | कब चिंतन खत्म हो गया, कब नींद आ गई पता ही नहीं चलता था | जब सुबह आंख खुलती थी तो यह अहसास होता था कि रात भर कृष्ण से बात भी होती रही […]
भगवद गीता के ७०० श्लोकों में ज्ञान के अलावा और कुछ भी नहीं | भगवद गीता के श्लोकों में निहित ज्ञान सिर्फ चिंतन के माध्यम से ग्रहण किया जा सकता है | गीता ज्ञान की जरूरत पड़ती है आत्मा के अंदर निहित अज्ञान को खत्म करने के लिए | हमें अपने मस्तिष्क में कुछ भरना नहीं है बल्कि उसके अंदर […]
हमे ज्ञान की जरूरत पड़ती है अपने मस्तिष्क में निहित अज्ञान के अन्धकार को मिटाने के लिए | ज्ञान की अति नहीं होती | जब हमारा जीवन में कोई लक्ष्य नहीं होता तो हम सोशल मीडिया के ब्रह्मजाल में फंसकर फालतू इंफॉर्मेशन खंगालने में अपना अमूल्य समय नष्ट कर देते हैं | ५ वर्ष की उम्र में भगवान की खोज […]
भौतिक जीवन में मनुष्य किसी भी कारण से अर्जित ज्ञान भूल सकता है, खो सकता है लेकिन अध्यात्म में जो ज्ञान हम एक बार अर्जित कर लें वह हमारे साथ हमेशा रहता है | किसी भी कारण से गुम अथवा कम नहीं होता | भौतिक जीवन में हम जो सीखें, वह मृत्यु के साथ खत्म हो जाता है | अगले […]
मैंने बचपन में ही महसूस कर लिया था कि रामकृष्ण परमहंस जैसा ब्रह्मज्ञानी १०० ~ १५० सालों में आ ही जाता है | उनके बाद महर्षि रमण १९५० में गए | मैं जैन कुल में पैदा हुआ | महावीर को गए २६०० साल से ज्यादा हो गए, नई चौबीसी शुरू ही नहीं हुई | कुछ तो गड़बड़ है | मैंने […]
मैं ६ १/२ वर्ष का था जब मैंने यह तय किया कि भगवान कौन होते हैं यह खोजूंगा | जब मैं ८ वर्ष का था तो ब्रह्म ने पूछा, क्या हुआ, तू तो भगवान के पीछे आना चाहता था, कहां रह गया | कुछ देर के लिए मैं सिंहर गया जैसे कोई चोरी पकड़ी गई | कुछ सोच कर कहा […]
हमें कभी नहीं भूलना चाहिए कि हम इस एक जीवन के मालिक हैं | मृत्यु के बाद हमारी आत्मा क्या शरीर लेगी मालूम नहीं | बेहतरी इसी में है हम इसी जीवन में कुछ आध्यात्मिक भी कर लें | नहीं तो जो इस जीवन में किया सब बर्बाद | अगले जीवन में आत्मा फिर नर्सरी क्लास से जीवन शुरू करेगी […]
आध्यात्मिक सफर में बहुत लोगों से पूछा, बहुत दिनों से कह रहे हो, आध्यात्मिक सफर पर चलूंगा, कब शुरू करोगे ? ज्यादातर सभी का उत्तर था शायद अगले जन्म में संभव होगा | शास्त्र कहते भी हैं ११ लाख मनुष्य योनियां है तो जल्दी क्या है | हम यह भूल जाते हैं कि शरीर हमारी आत्मा ने धारण किया […]
अगर हम धर्म की परिभाषा को देखें तो हमें विभिन्न धर्मों, वर्णों का मनु का बनाया सिस्टम समझ में आएगा | What is the true Meaning of Dharma? धर्म का सही अर्थ क्या है? Vijay Kumar Atma Jnani
भगवान ब्रह्म तो एक ही हैं, चाहे परमात्मा, परमेश्वर, ईश्वर, भगवान, इष्ट, नारायण कुछ भी कह लो, मान लो | भगवान पर विश्वास, नहीं उससे कहीं ज्यादा | जब मैं ५ वर्ष का था एक ऐसी घटना घट गई मेरी भगवान पर आस्था १०० प्रतिशत हो गई | मालूम नहीं भगवान कौन होते हैं, कभी देखा नहीं लेकिन श्रृद्धा […]
काम क्रोध अहंकार लोभ और मोह पर पूर्ण कंट्रोल पाने के लिए हमें अध्यात्म का रास्ता लेना होगा | आध्यात्मिक साधक लोभ का परित्याग तो जल्दी ही करना सीख लेता है | न लेकर आए थे न लेकर जाएंगे, यह अहसास लोभ से मुक्ति दिलाता है | काम और क्रोध पर कंट्रोल ब्रह्मचर्य पालन करते हुए होता है | […]
अपनी खुद की आत्मा से ! मैं ५ वर्ष की उम्र से सत्य के साथ चला | चाहता भी तो झूठ नहीं बोल पाता था | इस कारण मैं हृदय से आती आत्मा की आवाज को भलीभांति सुन सकता था | आध्यात्मिक जीवन के हर पल में आत्मा की यह सुंदर आवाज़ मुझे गाइड करती चली गई | जब […]
सत्य का मार्ग पकड़ कर अगर हम हृदय से आती खुद की आत्मा की आवाज़ सुन सकते हैं तो अन्दर से आती आत्मा की आवाज़ से बेहतर कुछ भी नहीं | मैंने ५ वर्ष की आयु से अन्दर से आती इस आत्मा की आवाज़ की गाइडेंस के बूते पर अपना आध्यात्मिक सफर ३७ वर्ष की आयु में पूरा कर लिया […]
तत्वज्ञानी बनने के बाद कुछ और ज्ञान पाने की आवश्यकता नहीं रहती | क्यों ? तत्वज्ञानी जीवन के अंतिम छोर तक पहुंच कर जन्म और मृत्यु के चक्रव्यूह से हमेशा के लिए मुक्त हो जाता है | जब आत्मा शुद्ध रूप में आ जाती है तो उसे अगला शरीर धारण करने की आवश्यकता ही नहीं रहती | तत्वज्ञान प्राप्त […]
अपने जीवन का कंट्रोल किसी और के हाथ में नहीं होना चाहिए | तुमने सिविल इंजीनियरिंग के लिए क्यों अप्लाई किया, माता पिता की इच्छा थी | गलत | हर इंसान के अंदर कोई न कोई खूबी होती है जिसमें वो दुनियां में अव्वल आ सकता है | मैं ५ वर्ष की आयु से भगवान की खोज में निकला […]