अध्यात्म


अध्यात्म में जाने से परिवार क्यों रोकता है ?

अध्यात्म यानि – वह अध्ययन जिसके द्वारा आत्मा को, खुद के तत्व स्वरूप को जाना जा सके | अगर हम अपने अंदर के सफर में (तप में) व्यस्त हो गए तो भारत में आम धारणा है कि व्यक्ति अपनी भौतिक जगत की जिम्मेदारियों से दूर भागने लगता है और अंततः वैराग्य में स्थापित हो सन्यासी बन जाता है |   […]


अध्यात्म जीवन से दूर ले जाता है क्या ?

अध्यात्म का आखरी लक्ष्य क्या है – मोक्ष प्राप्त करना, आत्मा का अपने शुद्ध रूप में वापस आ जाना | यह संभव हो पाता है जब मनुष्य पांचों इंद्रियों पर कंट्रोल स्थापित कर ले | पांचों इंद्रियों पर कंट्रोल स्थापित करने के लिए हमें अपनी मैं (यानि अहंकार) को निरस्त करना होता है | इसके लिए मोह पर control स्थापित […]


ईश्वर सर्वज्ञानी है परब्रह्म है – लोग उन्हें अध्यात्म से ही क्यों जोड़ते हैं ?

अध्यात्म यानि ऐसा अध्ययन जो साधक को आत्मा तक ले जाए/ स्वयं के असली स्वरूप का अध्ययन | आज के समय में ब्रह्म तक पहुंचने के लिए अध्यात्म ही एकमात्र सहारा है – दूसरे शब्दो में इंसान को ज्ञानयोग का रास्ता लेना होगा |   सिर्फ भक्तियोग या कर्मयोग से ब्रह्म तक नहीं पहुंचा जा सकता | ब्रह्म तक पहुंचने […]


किसी व्यक्ति के मन में गृहस्थ जीवन में वैराग्य का भाव क्यों पैदा होता है ?

वैराग्य का भाव जरूरी तो नहीं इस जन्म के कर्मों के कारण हो – मूलतः ऐसे भाव पिछले जन्म से जुड़े होते हैं | इस जन्म में हमारी शादी होगी भी या नहीं, या हम स्वामी विवेकानंद के रास्ते पर ब्रह्मचारी बन निकल जाएंगे – सब पहले से तय है |   वर्तमान योनि में किए कर्मों का भी फल […]


बहुत बेचैनी है अनन्त शांति का सागर कहाँ मिलेगा ?

जिस दिन सत्य का मार्ग पकड़ खुद के हृदय से आती कृष्ण (सारथी) की आवाज़ सुनना शुरू कर दोगे, लगेगा ब्रह्म सामने चारपाई पर बैठकर बात कर रहे हैं | चिर अनंत शांति ही नहीं अद्वितीय आनंद की अनुभूति भी होगी |   सत्य की राह पर कलियुग में चलने में दिक्कत तो आएगी लेकिन कुछ अच्छा पाने के लिए […]


भक्ति भाव और अध्यात्म निम्न स्तर पर पहुंच जाएं तो पुनर्स्थापित कैसे करें ?

जब भी कोई साधक या आम इंसान हतोत्साहित महसूस करता है तो इसके मुख्यतः दो कारण होते हें –   1. Negative विचारों का अतिक्रमण 2. ब्रह्मचर्य का पालन न करना   अगर हम ब्रह्मचर्य (फिजिकल) का पालन करेंगे तो बिखरी हुई शारीरिक ऊर्जा फिर से मूलाधार में एकत्रित हो आपको पुनः अपने पैरों पर खड़ा कर देगी | ब्रह्मचर्य […]


क्या आध्यात्मिक व्यक्ति स्वार्थी और चापलूस हो सकता है ?

कलियुग में हो सकता है अन्यथा नहीं | आजकल हर इंसान धार्मिक अनुष्ठानों में लगे रहने के बावजूद अगर पूछो तो कहेगा, अध्यात्म में लगा हूं | अध्यात्म का शाब्दिक अर्थ भी शायद समझा न पाए लेकिन सभी की तरह होड़ में पीछे क्यों रहे ?   मुझे अपने 63 वर्ष के आध्यात्मिक जीवन में पूरी दुनियां में अभी तक […]


आध्यात्मिकता के बिना जीवन मिथ्या अर्थहीन बेतुका है ?

मनुष्य के जीवन का आखिरी goal क्या है – ब्रह्मलीन होना | ब्रह्मलीन होने से हमारा मतलब क्या है ? क्या मनुष्य ब्रह्म से मिल जाएगा ?   ब्रह्मलीन यानि मनुष्य की कोशिश के कारण साधक 84 लाखवी योनि में पहुंच गया | अब आत्मा अपने शुद्ध रूप में वापस आ गई | शुद्ध आत्मा का आगे मनुष्य रूप धारण […]


भौतिकवादिता या आध्यात्मिकता – असली आनंद कहां है ?

आज के समय में हम महावीर, बुद्ध या महर्षि रमण को किस दृष्टि से देखते हैं – कौतूहल से या आनंदमय वाली स्थिति में ?   जो साधक आध्यात्मिक हैं, वह अच्छी तरह से समझते हैं आनंदमय होना कैसा लगता होगा | जब मुझे 1993 में ब्रह्म का 2 1/2 घंटे का साक्षात्कार हुआ, उस स्थिति को क्या में कभी […]


ज्ञान और पैसा किसको ज्यादा पूजा जाता है ?

जिसका पेट भरा है वह ज्ञान और पैसों – दोनों के पीछे भागता है | ऐसा इंसान जो अंदर से संतुष्ट है आध्यात्मिक सफर में उतर सकता है | उसका क्या जिसके घर में दो वक़्त की रोटी का इंतजाम नहीं ? छोटे छोटे बच्चे भूख से बिलबिला रहे हैं – ऐसा इंसान ज्ञान के पीछे भला क्या और क्यों […]


एक आध्यात्मिक व्यक्ति का समाज से क्या लेना देना ?

एक आध्यात्मिक साधक समाज से उतना ही बंधा है जितना कि कमल कीचड़ से लबालब तालाब से |   एक आध्यात्मिक साधक को समझना समाज की सामर्थ्य नहीं | बंधे न होने के बावजूद आध्यात्मिक साधक सब का भला चाहता है | बस यही खूबी है अध्यात्म की | साधक समाज को कुछ देकर ही जाएगा | एक तरफा रास्ता […]


जड़ और चेतन में क्या क्या आता है क्रम से बताएं ?

चेतन यानी जिसके अंदर जीवन है – जैसे कीट पतंगे, पेड़ पौधे, पशु पक्षी इत्यादि | धरती पर पहला जीवन अमीबा के रूप में होता है, यानि अमीबा भी एक चेतन जीव है | पहाड़, पत्थर इत्यादि सब जड़ पदार्थ हैं जिनमें जीवन नहीं |   जो यह मानते है कण कण में भगवान व्याप्त हैं वे शाब्दिक अर्थ को […]


मनुष्य जीवन में आध्यात्मिकता क्यों ज़रुरी है ?

ब्रह्म ने मनुष्यों को 11 लाख योनियों का सफर दिया है कि वे अध्यात्म के सफर में उतर एक शुद्ध आत्मा बन सकें | लेकिन एक बात ध्यान रहे – हम एक ही जीवन से बंधे हैं | मृत्यु के बाद हमारी आत्मा क्या शरीर लेगी, कहां लेगी, हमें नहीं मालूम |   अगर हम अध्यात्म की राह पर 12 […]


आध्यात्मिकता को विश्वास पर आधारित होना चाहिए या ज्ञान पर ?

अध्यात्म न तो विश्वास पर आधारित है न ज्ञान पर | अध्यात्म सीधे ब्रह्म से ताल्लुक रखता है इसलिए आस्था पर आधारित है | जिस इंसान की ब्रह्म में पूर्ण शतप्रतिशत आस्था नहीं वह अध्यात्म का सफर सफलतापूर्वक कर ही नहीं सकता | आस्था कोई छोटी चीज नहीं | भगवान में पूर्ण आस्था वहीं रख सकता है जो सत्य मार्ग […]


घर में लक्ष्मी जी का स्थाई निवास कैसे हो ?

अध्यात्म की दृष्टि में पैसा सिर्फ एक पूरक का काम करता है – रोटी रोज़ी और अन्य जरूरत की वस्तुओं के लिए | हर आध्यात्मिक साधक ब्रह्म से एक चीज मांगता है – कि लक्ष्मीजी की इतनी कृपा बनी रहे घर में basic necessities की कभी कमी न हो | इसके अलावा अध्यात्म कर्म को पूरी शिद्दत के साथ करने […]


सुकून और खुशी में क्या अंतर है ?

खुशी ब्राह्म होती है, कुछ देर बाद गायब हो जाएगी | अध्यात्म की राह पकड़ जब हम निष्काम भाव से कर्म करते हैं और कर्मों की निर्जरा होती है तो सुकून मिलता है – आंतरिक खुशी | सुकून तभी मिलता है जब कोई चीज़ जड़ से हासिल हो | जैसे – हम किसी प्रश्न का उत्तर बहुत समय से चिंतन […]


लोगों का ध्यान अध्यात्म की तरफ कब जाता है ?

लोगों का ध्यान अध्यात्म की तरफ कभी नहीं जाता | क्यों ? अध्यात्म का मार्ग इंसान, वर्तमान जीवन के कर्मों के कारण नहीं पकड़ता – सब पीछे से आता है, पिछले जन्म के मृत्यु के समय के कार्मिक फल से | महावीर, बुद्ध, आदि शंकराचार्य, रामकृष्ण परमहंस और महर्षि रमण ने आध्यात्मिक शुरुआत जल्दी शुरू कर दी थी | क्या […]


क्या आध्यात्मिकता हारे हुए लोगों के लिए है ?

अध्यात्म हारे हुए नहीं, मन से जीते हुए लोगों की कहानी है | मन से जीता हुआ यानि – जिसे ब्रह्म पर 100% आस्था (श्रद्धा) है और खुद पर भी 100% विश्वास कि मैं अध्यात्म के रास्ते पर चलकर एक दिन ब्रह्म को पा लूंगा – ब्रह्मलीन हो जाऊंगा |   Right Age to start a Spiritual Journey | आध्यात्मिक […]


जन्म मरण क्या है ?

जन्म और मरण वह आध्यात्मिक क्रिया है जिसके द्वारा आत्मा धरती पर एक के बाद एक स्वरूप बदलती है | अपने जीवनकाल में आत्माएं 84 लाख योनियों के फेर से गुजरती हैं | सबसे पहला शरीर धारण करती है अमीबा का | जब इस जीव की आयु पूरी हो जाती है तो मृत्यु को प्राप्त होता है | फिर आत्मा […]


हम अहंकार के बिना क्यों नहीं रह सकते ?

मनुष्य शरीर आत्मा ने धारण किया है | खुद दृष्टा की भांति काम करती है और सारे काम करवाती है मनुष्य रूप से | कैसे ? सिर्फ मैं (अहंकार) के कारण | अगर अहंकार न हो तो हर मनुष्य बिल्कुल भी कर्म नहीं करेगा, अकर्मण्य होकर मुश्किल से 25 की आयु में ही चल बसेगा | जीवन पूरी तरह नीरस […]


क्या भगवान का शुकराना करते हैं दिन में कई बार क्या उसके फायदे हैं ?

यह मनुष्य शरीर आत्मा ने धारण किया है और आत्मा भगवान (ब्रह्म) का अंश है तो ब्रह्म के प्रति कृतज्ञता तो होनी चाहिए | ऐसा करने से विचारों की शुद्धता बरकरार रहती है | भगवान के प्रति अगर कृतज्ञता का भाव हमेशा बना रहता है तो संभव है किसी दिन उसकी खास कृपा हो जाए और हमारे पुण्य प्रारब्ध कर्म […]


क्या भगवान की पूजा पाठ करना आध्यात्मिकता है आध्यात्मिक व्यक्ति कैसे होते हैं ?

भगवान के लिए पूजा इत्यादि में लगे रहना धर्म का पर्यायवाची बन गया है | जो धार्मिक है उसे (religious) कर्मकांडी कहने लगे हैं | लेकिन धार्मिक लोगों का ब्रह्म से दूर दूर का नाता नहीं – क्योंकि आज के समय में पूजापाठ, कर्मकांडो में लगे लोग भगवान के जरा भी नजदीक नहीं | ब्रह्म ब्राह्म वस्तुओं में नहीं – […]


किसी भी गुरु की शरण में मुक्ति संभव है या नहीं ?

अगर महावीर, बुद्ध, आदि शंकराचार्य, रामकृष्ण परमहंस या महर्षि रमण जैसा तत्वज्ञानी पुरुष आपका गुरु बनने को तैयार हो तो हम गुरु बना सकते हैं अन्यथा नहीं | अध्यात्म में गुरु की आवश्यकता नहीं – न ही महावीर, बुद्ध, आदि शंकराचार्य, रामकृष्ण परमहंस या महर्षि रमण का कोई गुरु रहा या था |   मुक्ति मिलती है जब हम 12 […]


ज्ञानी जन खुद के सर पर मुसीबत आ जाने पर क्या करते हैं ?

ज्ञानीजन कोई राह न मिले तो मुसीबत से खुद ही निबटने की कोशिश करते हैं और असफल हो जाएं तो दुनियां को राम राम | स्वामी विवेकानंद अपने 1893 के US Chicago tour में विश्व धर्म संसद में बहुत उम्मीदें लेकर गए थे लेकिन लौटे खाली हाथ | लौटने के बाद स्वामी विवेकानंद उस झटके को सह न सके और […]


जीवन को इसका अर्थ और उद्देश्य क्या देता है ?

मनुष्य रूप में आध्यात्मिक सफर में सारी प्रेरणा अंदर से आती है | हृदय में स्थित सारथी (कृष्ण) हर पल हमें अंदर से guide करते रहते हैं | हमारी आत्मा बताती है कि यह शरीर उसने अपनी शुद्धि के लिए लिया है और मनुष्य की जिम्मेदारी बनती है कि वह अपनी आत्मा को assist करे जिससे वह जल्दी से जल्दी […]


ईश्वरीय तत्व को कैसे अनुभव करें ?

ईश्वरीय तत्व को जीवन में पहली बार महसूस करने के लिए – सत्य की राह पर चलना आवश्यक ही नहीं 100% जरूरी है | मेरी पहली मुलाकात ब्रह्म से 5 वर्ष की आयु में हुई | typhoid से पीड़ित, सभी डॉक्टर कह कर चले गए – दुआएं करों, आज की रात गुजर गई तो ठीक अन्यथा सुबह तक ये बच्चा […]


जीवन के रहस्यों को हम कैसे जान सकते हैं ?

जीवन के रहस्य – भौतिक जगत के या आध्यात्मिक, दोनों को तत्व से जानने के लिए हमें सत्य की राह पकड़नी होगी | जब हम हृदय से सच्चे होते हैं तो हृदय में स्थित अपनी आत्मा की आवाज़ साफ सुन सकते हैं | बस यही आवाज़ समय समय पर विभिन्न रहस्यों के ऊपर से पर्दा उठा हमारा तत्व/ रहस्यों से […]


भगवान हमारे अंदर है तो गलती करने से क्यों नहीं रोकते ?

भगवान हमारे अंदर अंश रूप में, हमारे हृदय में सारथी (कृष्ण यानी हमारी आत्मा) के रूप में विद्यमान हैं | जब से हम पैदा हुए, हम अगर हृदय से आती आवाज़ को सुनना चाहेंगे – तो पाएंगे कि किसी भी गलत काम को करने / होने से पहले कृष्ण हमें सचेत करते हैं | जो साधक सत्य को अपनाएं हुए […]


ईश्वर सबकी क्यों नहीं सुनता है ?

ईश्वर उन्हीं की सुनता है जो सत्य मार्ग पर स्थित हैं या फिर सत्कर्म, पुण्यकर्म में व्यस्त रहते हैं | अगर आप सत्यवादी और सत्कर्मी दोनों हैं तो भगवान आपकी जरूर सुनेंगे | ज्यादातर लोग असत्य के मार्ग पर चलते हुए, पापकर्म में लगे रहकर उम्मीद करते हैं ब्रह्म उनकी सुने, क्या ऐसा संभव है ? कलियुग में कहीं भी […]


क्या सब कुछ छोड़ पहाड़ पर जाने से आध्यात्म जीवन में उतर आता है ?

सब कुछ छोड़ कर हजारों नहीं लाखों लोग जो हरिद्वार,ऋषिकेश, बनारस, काशी, उज्जैन और नासिक इत्यादि जगहों पर बस गए हैं इस उम्मीद में कि आध्यात्मिक प्रगति होगी – 100% गलत हैं | आध्यात्मिक प्रगति तो दूर, अपनों को बीच मझदार में छोड़ जो यह लोग भाग चले आए हैं – उस पाप से कैसे मुक्त होंगे ? कर्मों की […]