भौतिक जीवन को भलीभांति जीने के लिए विज्ञान की आवश्यकता होती है | यह रोटी रोज़ी कमाने का साधन भी बनता है | अध्यात्म उस बिंदु से शुरू होता है जहां विज्ञान का अंत होता है | अध्यात्म और विज्ञान का आपस में कोई तालमेल नहीं |
विज्ञान हर क्षेत्र में प्रमाण मांगता है जबकि अध्यात्म ब्रह्म के प्रति पूर्ण श्रद्धा पर आधारित है | विज्ञान चाहे कितनी भी प्रगति कर ले लेकिन अध्यात्म की दहलीज को छू भी नहीं सकता | विज्ञान अध्यात्म को समझने में असमर्थ है और आगे भी रहेगा | विज्ञान सौरमंडल का भलीभांति अध्ययन तो कर सकता है लेकिन अंदर छिपे तत्त्व का नहीं |
God particle experiment में वैज्ञानिकों ने क्या हासिल कर लिया ? ब्रह्म को समझना वैज्ञानिकों का काम नहीं, उन्हें तो रामकृष्ण परमहंस ही समझ सकता है | वैज्ञानिक कहते हैं ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति एक singularity से हुई | लेकिन वे यह कभी नहीं समझ सकेंगे कि वह singularity और कोई नहीं बल्कि ब्रह्म खुद हैं अपने मूल स्वरूप में |
प्रलय के समय जब ब्रह्म अपने मूल स्वरूप में आते हैं तो अस्थ अंगुष्ठ (आधे अंगूठे) का आकार लेते हैं जिसे वैज्ञानिक singularity के नाम से पुकारते हैं |
What is a Pralaya in Hinduism? हिन्दू धर्म में प्रलय क्या होती है | Vijay Kumar Atma Jnani
