Monthly Archives: April 2024


कोई भी शुभ कार्य करने से पहले कौन से भगवान की पूजा करना चाहिए ?

अगर हम हमेशा positive विचारों का अवलोकन/ आदान प्रदान करते हैं तो कभी भी जीवन में किसी प्रकार की पूजा की जरूरत नहीं | 5 वर्ष की आयु से अध्यात्म की राह पर चलने वाला मैं जीवन में कभी किसी पूजा पाठ में नहीं उलझा | अगर महसूस हुआ तो अन्दर से ब्रह्म से बात कर ली, और ब्रह्म से […]


ईश्वरीय तत्व को कैसे अनुभव करें ?

ईश्वरीय तत्व को जीवन में पहली बार महसूस करने के लिए – सत्य की राह पर चलना आवश्यक ही नहीं 100% जरूरी है | मेरी पहली मुलाकात ब्रह्म से 5 वर्ष की आयु में हुई | typhoid से पीड़ित, सभी डॉक्टर कह कर चले गए – दुआएं करों, आज की रात गुजर गई तो ठीक अन्यथा सुबह तक ये बच्चा […]


जीवन के रहस्यों को हम कैसे जान सकते हैं ?

जीवन के रहस्य – भौतिक जगत के या आध्यात्मिक, दोनों को तत्व से जानने के लिए हमें सत्य की राह पकड़नी होगी | जब हम हृदय से सच्चे होते हैं तो हृदय में स्थित अपनी आत्मा की आवाज़ साफ सुन सकते हैं | बस यही आवाज़ समय समय पर विभिन्न रहस्यों के ऊपर से पर्दा उठा हमारा तत्व/ रहस्यों से […]


क्या इस संसार की सभी आत्माएं परमात्मा का अंश है ?

इस ब्रह्माण्ड में व्याप्त सभी आत्माएं अपने शुद्ध रूप में आधा अंगूठे (अस्थ अंगुष्ठ) का आकार लेती हैं | इसी अस्थ अंगुष्ठ आकार के दिव्य पुंज को हम ब्रह्म (परमात्मा) कहते हैं | एक गेहूं का दाना, एक आत्मा – और ब्रह्माण्ड में व्याप्त पूरे गेहूं की ढेरी परमात्मा |   आत्मा सिर्फ परमात्मा का अंश ही नहीं, हम खुद […]


अगर कोई एक जन्म में अध्यात्म में थोड़ी प्रगति कर लेता है और मृत्यु को प्राप्त हो जाता है तो अगले जन्म में क्या फिर से पहली सीढ़ी से शुरुआत करनी होगी ?

अध्यात्म की यही सबसे बड़ी खूबी है कि जो भी उन्नति साधक इस जन्म में कर लेगा वह नष्ट नहीं होती, अगले जन्म में हम उसी level से शुरू करते हैं जिस level पर पिछले जन्म में मृत्यु के समय छोड़ा था | इसके विपरित बिल गेट्स को लीजिए, इस जन्म में लाखों करोड़ के मालिक, हो सकता है अगला […]


क्या गीता में भी मिलावट हुई है ?

भारतीय दर्शन शास्त्रों जैसे वेद, उपनिषद् और भगवद गीता – इन सभी में न तो आज और न आने वाले समय में किसी भी तरह की मिलावट की गुंजाइश है | वजह साफ है | जहां से सारे ब्रह्माण्ड का ज्ञान आता/ उत्पन्न होता है – एक तत्वदर्शी ऋषि सम्पूर्ण ज्ञान नष्ट होने की स्थिति में श्रुति द्वारा सारे ज्ञान […]


कुछ छात्र लक्ष्य के निकट पहुंच कर भी उस लक्ष्य से भटक क्यों जाते हैं ?

जीवन में भविष्य का ज्ञान किसी को भी नहीं | सिर्फ भौतिक जीवन में ही नहीं आध्यात्मिक सफर में भी ऐसा होता है कि स्टूडेंट/ साधक 99.90% तक पहुंच गया और 100% पर अपने लक्ष्य को पा जाएगा लेकिन निराशा के कारण 99.9% पर ही हाथ पैर छोड़ दिए, हार मान ली | अगर किसी बुजुर्ग से सलाह कर ली […]


आपके जीवन की सबसे पसंदीदा महिला कौन है ?

बचपन से न जाने क्यों मुझे धरती मां से अत्यधिक प्रेम है – हर नारी को इसी कारण मैं धरती मां की बेटी के रूप में देखता हूं | यह एक main वजह है कि मैं 12 वर्ष का अखंड physical ब्रह्मचर्य का पालन सही ढंग से कर पाया | जब हर स्त्री रूप को धरती मां की बेटी के […]


भगवान हमारे अंदर है तो गलती करने से क्यों नहीं रोकते ?

भगवान हमारे अंदर अंश रूप में, हमारे हृदय में सारथी (कृष्ण यानी हमारी आत्मा) के रूप में विद्यमान हैं | जब से हम पैदा हुए, हम अगर हृदय से आती आवाज़ को सुनना चाहेंगे – तो पाएंगे कि किसी भी गलत काम को करने / होने से पहले कृष्ण हमें सचेत करते हैं | जो साधक सत्य को अपनाएं हुए […]


ईश्वर सबकी क्यों नहीं सुनता है ?

ईश्वर उन्हीं की सुनता है जो सत्य मार्ग पर स्थित हैं या फिर सत्कर्म, पुण्यकर्म में व्यस्त रहते हैं | अगर आप सत्यवादी और सत्कर्मी दोनों हैं तो भगवान आपकी जरूर सुनेंगे | ज्यादातर लोग असत्य के मार्ग पर चलते हुए, पापकर्म में लगे रहकर उम्मीद करते हैं ब्रह्म उनकी सुने, क्या ऐसा संभव है ? कलियुग में कहीं भी […]


आत्मज्ञान उम्र की किस अवस्था से होता है ?

आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए परमात्मा ने मनुष्य रूप में 11 लाख योनियों का लंबा समय निर्धारित किया है (लगभग 1 करोड़ वर्ष की अवधि) | 5 वर्ष की आयु के बाद इंसान ब्रह्म की खोज में निकल सकता है | निर्धारण हमें करना है प्रभु को नहीं | मूलतः हम अध्यात्म में कब उतरेंगे – यह तय करता है […]


आत्मज्ञान ज्यादातर पुरुषों को ही क्यों हुआ ?

स्त्रियों में मोह की भावना कूट कूट कर भरी होती है – यहां तक कि सड़क के किनारे किसी और का बच्चा अकेले रोते हुए देखा नहीं कि एक बार जाकर जरूर पूछेंगी – बेटा क्या हुआ, रो क्यों रहे हो, मां बाप कहां है ? क्या किसी पुरुष को ऐसा करते देखा है (बुजुर्गों की बात छोड़ दीजिए) ? […]


क्या आत्मज्ञान सर्वोपरि है ?

आत्मा ने मनुष्य शरीर धारण किया है कि वह जल्दी से जल्दी अपने original शुद्ध स्वरूप में वापस आ सके | जिस दिन आत्मा 84 लाखवी योनि में वापस आ जाएगी, उस स्थिति को आत्मज्ञान प्राप्त करना कहते हैं, उससे पहले नहीं | वह stage जब मनुष्य को स्वयं का सही ज्ञान होता है कि वह शरीर नहीं बल्कि एक […]


क्या सेक्स अध्यात्म और आत्मज्ञान के मार्ग में बाधा है ?

Physical ब्रह्मचर्य की प्रैक्टिस कैसे करेंगे अगर हमारी बाल्टी में छेद रहेगा ? जब तक मूलाधार में अमृत लबालब नहीं होगा कुण्डलिनी ऊर्ध्व नहीं होगी और चक्र नहीं खुलेंगे | अगर हम मूल्यवान अमृत (वीर्य) को यूं ही क्षणिक आनंद के लिए सेक्सुअल क्रियाओं में जाया कर देंगे तो पशु योनि और मनुष्यों में फर्क क्या रह जाएगा – दोनों […]


आत्मज्ञान होने पर कैसे पता चलेगा ?

जब इंसान महावीर, बुद्ध, आदि शंकराचार्य, रामकृष्ण परमहंस या महर्षि रमण बनेगा – उसे कैसे मालूम चलेगा कि वह आत्मज्ञानी हो गया ? जब हमारी कुण्डलिनी पूर्णतया जागृत होगी और चक्र खुलेंगे – हमें मालूम कैसे चलेगा आत्मज्ञान होने का ? जब हम 84 लाखवी योनि में स्थापित होंगे और भगवद गीता और उपनिषदों में निहित ज्ञान के स्वामी होंगे […]


जानवर मनुष्य से कम बीमार क्यों होते हैं ?

इंसान नेचरोपैथी से दूर होता गया और उसकी जगह ले ली एलोपैथिक डॉक्टर्स ने | लेकिन पशु पक्षियों के पास कौन डॉक्टर है ? अगर खुद को स्वस्थ नहीं रखेंगे तो काम नहीं चलेगा | आप ने देखा होगा आवेश में आकर जब कभी दो जानवर भिड़ जाते हैं – अंततः दोनों ही घायल होकर मारे जाते हैं |   […]


शादी के कुछ सालों बाद सन्यासी की तरह रहने को ब्रह्मचर्य कह सकते हैं ?

सन्यासी ब्रह्मचारी हो जरूरी तो नहीं | ब्रह्मचारी सन्यासी हो यह भी जरूरी नहीं | जीवन के किसी भी मोड़ पर कोई भी इंसान ब्रह्मचर्य पालन की दुनिया में कदम रख सकता है | अगर शादी के बाद हम 12 साल के अखंड ब्रह्मचर्य में उतरना चाहते हैं तो पत्नी की इजाज़त अनिवार्य है | आप बुद्ध वाली गलती दोहरा […]


कर्म करना हमारे हाथ में है या सब कुछ वही कर रहा है ?

जब से ब्रह्मांड उत्पन्न हुआ और सारी आत्माएं पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त हो गईं- यह ब्रह्मांड सिर्फ और सिर्फ धर्म और कर्म theory पर आधारित है | जैसा करोगे वैसा फल मिलेगा | ब्रह्म ने हर मनुष्य को will power और विवेक से सुशोभित किया है जिसके बूते पर वह अपना सांसारिक जीवन आराम से जी/ काट सके |   […]


क्या सब कुछ छोड़ पहाड़ पर जाने से आध्यात्म जीवन में उतर आता है ?

सब कुछ छोड़ कर हजारों नहीं लाखों लोग जो हरिद्वार,ऋषिकेश, बनारस, काशी, उज्जैन और नासिक इत्यादि जगहों पर बस गए हैं इस उम्मीद में कि आध्यात्मिक प्रगति होगी – 100% गलत हैं | आध्यात्मिक प्रगति तो दूर, अपनों को बीच मझदार में छोड़ जो यह लोग भाग चले आए हैं – उस पाप से कैसे मुक्त होंगे ? कर्मों की […]


अपने आध्यात्मिक अनुभव किसी को नहीं बताने चाहिए क्या यह सत्य है ?

अपने आध्यात्मिक जीवन के सत्य जिस किसी को भी आप बताएंगे – वह आपको मूर्ख से ज्यादा कुछ नहीं समझेगा | जिस इंसान का लक्ष्य अध्यात्म नहीं – उसे कुछ बताकर आप अमूल्य समय नष्ट कर रहे हैं | भगवद गीता में कृष्ण कहते भी हैं कि अयोग्य पात्र को कभी भी गीता ज्ञान नहीं बांटिए |   आज के […]


किसी आधुनिक संत के बारे में बता सकते हैं जिन्होंने अवश्य ही मुक्ति पाई ?

इस धरती पर महर्षि रमण अभी तक आख़िरी संत हुए जिन्होंने आत्मज्ञान प्राप्त कर मोक्ष लिया (निर्वाण नहीं) ! महर्षि रमण ने 1950 में शरीर छोड़ा और जन्म और मृत्यु के बंधन को काटकर हमेशा के लिए शुद्ध आत्मा बन गए | हम महर्षि रमण की बताई हुई किसी भी बात का अवलोकन करें – उसमें तत्व के अलावा और […]


कर्म प्रधान होता है या धर्म प्रधान होता है ?

धर्म और कर्म दोनों ब्रह्म द्वारा रचित वो विधियां हैं जिनका इस्तेमाल कर इंसान जीवन में आगे बढ़ता है | धर्म हर जीव में (सभी 84 लाख योनियों में) जन्म से मौजूद रहता है | यह धर्म ही है जो मनुष्य को पशु बनने से/ मरने मारने से रोकता है | अगर जीव के अंदर धर्म न हो तो ब्रह्माण्ड […]


ध्यान क्यों भटक जाता है ?

हम सड़क पर जा रहे हों और अचानक हमें अर्धनग्न अवस्था में एक बहुत ही सुन्दर हेरोइन/ स्त्री दिखे तो हमारा ध्यान नहीं भटकेगा ? अगर हम स्वामी विवेकानन्द या महर्षि रमण जैसे व्यक्तित्व के धनी हैं तो कभी नहीं लेकिन आम आदमी की क्या बिसात ? इसीलिए अध्यात्म में पांचों इन्द्रियों पर संपूर्ण कंट्रोल स्थापित करने की बात कही […]


छोटे लक्ष्य निर्धारित करना और प्राप्त करना क्या सही है?

आप mount everest पर चढ़ना चाहते हैं तो क्या बिना तैयारी के चढ़ना शुरू कर देंगे ? पहले प्लेन ग्राउंड पर लंबा चलने की practice करेंगे | जब सफल हो जाएंगे तो गांव की छोटी सी पहाड़ी पर चढ़ने उतरने की प्रैक्टिस करेंगे | फिर रोज़ कई बार चढ़ेंगे और उतरेंगे | उसके बाद उससे ऊंची पहाड़ी चढ़ेंगे उतरेंगे | […]


आत्मा किस प्रकार प्रकाशित होती है ?

आत्मा प्रकाशित होने से मतलब है आत्मा का अपने पूर्ण शुद्ध रूप में वापस आ जाना | जब साधक अध्यात्म में उतर ज्ञान के प्रकाश के द्वारा अज्ञान के अन्धकार को काट उजाले की ओर बढ़ता है तो हम कह सकते हैं आत्मा धीरे धीरे प्रकाशित हो रही है | अगर हमने घर में बल्ब के ऊपर ऐसा स्विच लगा […]


बुरे कर्म करने वाले लोग जल्दी उन्नति क्यों करते हैं ?

झूठ, चापलूसी, जी हजूरी करने वाले लोगों की उन्नति जल्दी तो होती है लेकिन कितने समय के लिए | भौतिक जीवन की उन्नति क्या मायने रखती है ? बिल गेट्स मृत्यु के बाद जीवन फिर nursery से शुरू करेंगे – क्या फायदा हुआ इस जीवन की मेहनत का अगर अगले जीवन में कुछ जा न सका ?   बुरे इंसान […]


किन कर्मों से भगवत प्राप्ति होती है ?

भगवत प्राप्ति के लिए हमें कर्म इस प्रकार करने होंगे की सिर्फ पुण्य कर्मफल ही मिले | इसके बाद स्थिति आएगी कि हम कर्मफल से भी दूर हो जाएं | जब शरीर आत्मा ने धारण किया है तो कर्मफल हमेशा आत्मा का हुआ |   कर्मों की निर्जरा करने के लिए हमें कर्मों में निष्काम भाव से उतरना होगा | […]


सच्चा सत्संग क्या होता है कैसे होता है ?

बचपन में जब सत्संग करने की इच्छा होती तो कोशिश करता मेरे जैसा सोचने वालों का साथ मिल जाए तो बैठ कर आध्यात्मिक चर्चा कर सकूं | कोई नहीं मिला | मैं पूर्ण सत्य के मार्ग पर चलता था और औरों से भी यही उम्मीद रखता था |   सत्संग का मतलब तो यही है – सत्य की राह पर […]


अगर हरेक के अन्दर परमात्मा है तो जीवों की इतनी दुर्गति क्यों हो रही है ?

परमात्मा हमारे अंदर अंश रूप में मौजूद है – आत्मा स्वरूप | अपने ब्रह्मांडीय सफर में आत्मा ने अपने अंदर अशुद्धियां ले लीं तभी तो उसे जीव रूप धारण करना पड़ता है | जब जीव पुण्य कर्म करता है तो अशुद्धियां कम होती जाती हैं | अब जीव हर समय तो पुण्य कर्म करेगा नहीं, पाप कर्म भी करेगा, तो […]


क्या आध्यात्मिक गुरु संस्कार की कमी को दूर कर सकते हैं ?

संस्कार शब्द समाज की देन नहीं है – यह प्रथा गुरुकुल की देन है | जब बालक गुरुकुल में भर्ती हो गया तो वह गुरुकुल के संरक्षण में बड़ा होता है | वह 10~12 वर्षों के लिए गुरुकुल से बंध जाता है | अब बाहर उचित प्रशिक्षण के बाद ही निकलेगा – विभिन्न कलाओं में पारंगत | गुरुकुल में रहकर […]