Monthly Archives: April 2024


भगवद्गीता में भगवान का यह कहने का अर्थ क्या है कि आरम्भ में समस्त प्राणी अव्यक्त हैं बीच में व्यक्त रहते है और मरने के बाद अव्यक्त हो जाते हैं ?

भगवद गीता अनुसार हम मूलतः आत्मा हैं जिसने कर्म करने के लिए शरीर धारण किया है | तो व्यक्त होने से पूर्व आत्मा अव्यक्त ही तो थी | शरीर धारण करते ही वह व्यक्त हो जाती है और जिस दिन इंसान अध्यात्म की राह पर चलकर मुक्ति पा लेता है, वह फिर एक शुद्ध आत्मा बन अव्यक्त रूप धारण कर […]


कलियुग के राक्षस कौन होंगे जिनका विनाश किया जाएगा ?

आज के समय में एक नहीं, हजारों नहीं लाखों दुर्योधन आपको आम जनता को परेशान करते मिल जाएंगे | हम असामाजिक तत्व की बात नहीं कर रहे – हम उन पढ़े लिखे लोगों की बात कर रहें हैं जो अपनी मैं से प्रेरित होकर सीधे सच्चे लोगों को तंग करते हैं – मेमने की खाल में छिपे भेड़िए | पार्किंग […]


कुछ इंसान सब कुछ करने के बाद भी असफल क्यों रहते हैं ?

इस जन्म में आपने जो परिश्रम किया और उसका जो कर्मफल उत्पन्न हुआ – उसके निमित्त जो आपको मिलना था वो मिला लेकिन झोले में दुख ही हाथ आया | ऐसा क्यों ?   आपने जो कर्म किया मान लीजिए उसका कर्मफल जो आपको मिलना है वह karmic index अनुसार +2 है | लेकिन उसी समय आपका प्रारब्ध संचित कर्मफल […]


यदि हम इच्छाओं का अंत कर दें तो प्रभु प्राप्ति में बाधा नहीं रहेगी ?

कर्मों की पूर्ण निर्जरा करने के लिए सिर्फ पांचों इन्द्रियों पर पूर्ण कंट्रोल काफी नहीं लेकिन हां – पांचों इंद्रियों पर control आ गया तो मन पर भी आ ही जाएगा | मन पर पूर्ण कंट्रोल आते ही ऐसी स्थिति तक पहुंचना है जब हमारे अंदर न तो एक भी विचार आए और न अंदर से बाहर जाए और शून्य […]


मैं संन्यास लेना चाहता हूँ घरवाले नहीं मान रहे कैसे मनाऊं ?

आज के कलियुग में अगर सन्यासी बनकर रहना है तो घर में रहकर क्यों नहीं ? सिद्धार्थ गौतम ने भी कोशिश की थी – घर भी छोड़कर चले गए और 39 सालों तक भटकने पर भी कुछ नहीं मिला | थककर बोधि वृक्ष के नीचे बैठकर 68 साल की उम्र में 12 वर्ष की गहन तपस्या की | तब जाकर […]


आजकल शुगर की बीमारी क्यों आम है ?

शुगर होने के मेन कारण 2 हैं – यह genetic बीमारी है, माता पिता से आ सकती है | दूसरा वैज्ञानिक प्रगति | पिछले कुछ सालों में टीवी, मोबाइल जैसे गैजेट्स आने के कारण घर बैठे सब काम हो जाते हैं | पहले घर पर मेहमान आते थे तो दौड़ कर बर्फ लाते थे कि मेहमान की शिकंजी बन सके […]


क्या योगा करने से पूर्ण परमेश्वर की प्राप्ति संभव है ?

योगा नाम का शब्द हिंदी या संस्कृति की वर्णावली में नहीं | शब्द है योग – हिंदी में 2 योग 2 = 4, 2 जमा 2 = 4 | आत्मा की ब्रह्म से मिलने की चेष्टा को योग कहते हैं | अगर भगवान से मिलना है तो 12 वर्ष के ध्यान और ब्रह्मचर्य में उतरना होगा | पूर्ण परमेश्वर की […]


अकाल मृत्यु क्यों होती है मृत्यु के बाद आत्मा कहाँ जाती है ?

जब बच्चा पैदा होता है वह मृत्यु का समय भी लिखवा कर लाता है | suppose उम्र 62 साल लिखी है | अगर accidental death 60 की उम्र में हो गई (कारण कोई भी हो सकता है – मूलतः कोई छिपा negative प्रारब्ध कर्मफल होगा जो अचानक फलित हो गया और मृत्यु हो गई) तो अगला शरीर आत्मा सिर्फ 2 […]


धरती माता के पति कौन हैं ?

धरती को हम माता कहते हैं, आज से नहीं वेदों के समय से और पिता परमेश्वर कहते हैं भगवान यानि ब्रह्म को | ऐसे कैसे ? प्रलय के बाद की स्थिति को देखते हैं | पूरा ब्रह्माण्ड सिमट कर original form में आ गया है यानी अस्थ अंगुष्ठ | इसी आधे अंगूठे के आकार के दिव्य शक्तिपुंज को हम ब्रह्म […]


मनुष्य को धर्म और अध्यात्म नहीं कामुकता जल्दी प्रभावित करती है

अगर सेक्स में attraction नहीं होता तो गृहस्थ कैसे चलता | ब्रह्म ने ये क्रिया इसी तरह से रची कि दोनों एक दूसरे से बंधे रहें | अब सेक्सुअल genes में यह तो नहीं लिखा कि इसके साथ प्यार कर सकते हो, इसके साथ नहीं | साथ में मनुष्यों को विवेक दे दिया आत्मसंयम के लिए | लेकिन मनुष्य पशु […]


आत्मा और प्राण मेँ क्या सम्बन्ध है दोनोँ ही चेतना हैँ ?

आत्मा प्राण का कारक होती है | आत्मा ने धरती पर शरीर धारण किया | लेकिन उसमें जान कौन फूंकेगा ? जब मां के गर्भ में बच्चा आता है तो उसका ह्रदय कुछ दिनों बाद धड़कना शुरू होता है | सही समय पर आत्मा जो सूर्य के गर्भ में विद्यमान है remote control से हृदय को ON कर देती है […]


क्या आध्यात्म विज्ञान से विपरीत है ?

इंसान धरती पर हमेशा दो जिंदगी एक साथ जीता है | जब छोटा है स्कूल जाता है फिर कॉलेज और उसे विज्ञान की समझ आ जाती है | अपने को भौतिक जीवन में आगे बढ़ाने के लिए विज्ञान की जरूरत पड़ती है और कम शब्दों में कहा जाए तो रोटी रोज़ी कमाने के लिए |   इसके विपरित बचपन से […]


आत्मा को मुक्ति कैसे मिलती है ?

आत्मा अपने जीवन में ज्यादा से ज्यादा 84 लाख शरीर धारण करती है जिसमें 73 लाख योनियों का सफर निम्न कोटियों में गुजर जाता है – जैसे कीट पतंगों, पेड़ पौधों और पशु पक्षी | मनुष्य रूप में 11 लाख योनियों का सफर निमित्त है |   मनुष्य रूप में आने के बाद जब मनुष्य अध्यात्म/ ध्यान में उतर 84 […]


महावीर को मोक्ष मिला था या नहीं ?

जैन धर्म के 24 वे तीर्थंकर महावीर ने अध्यात्म की आखिरी 12 वर्ष की तपस्या 30 वर्ष की आयु में शुरू की और 42 में कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया | उसके बाद ब्रह्म को बोले – जो प्राप्त किया है वह सोसायटी को वापस देकर जाऊंगा, अभी तुरन्त शरीर त्याग मोक्ष नहीं लूंगा |   महावीर ने 30 वर्षों तक […]


किसका जप करने से मानव जन्म के बंधन से मुक्त हो सकता है ?

किसी भी तरह का जप करने से भगवान के नजदीक नहीं पहुंचा जा सकता | जप की अध्यात्म में कोई जगह नहीं | माला जपने से क्या भगवान मिलेंगे या कर्मों की निर्जरा होगी – बिल्कुल नहीं | अक्सर देखने में आता है जो लोग घंटों मंदिरों में माला इत्यादि जपने में व्यस्त रहते हैं उनका अहंकार चरम पर होता […]


क्या मानव मृत्यु के बाद फिर जन्म लेता है ?

जब मानव शरीर की मृत्यु हो जाती है तो भारतीय विधि अनुसार मृत शरीर को जला दिया जाता है | जलाया उसी को जाता है जिसका पुनर्जन्म नहीं | भारतीय शास्त्रानुसार शरीर तो आत्मा ने धारण किया था | वह शरीर सिर्फ एक जीवन के लिए था | हां, मृत्यु के बाद आत्मा नया शरीर धारण करेगी अगर मैचिंग पैरेंट्स […]


मरने के बाद मनुष्य का क्या होता है ?

हर मनुष्य का जीवन सिर्फ और सिर्फ एक योनि के लिए होता है | जैसे ही हम मृत्यु को प्राप्त होंगे, धरती पर हमारा खेल खत्म | चूंकि शरीर आत्मा ने धारण किया है, मृत्यु के बाद वह तुरंत नया शरीर धारण कर लेगी | अगर मैचिंग पैरेंट्स धरती पर उपलब्ध नहीं हैं तो उस समय के लिए जब तक […]


आध्यात्मिक व्यक्ति निडर क्यों होते हैं ?

ज्यादातर लोग अध्यात्म में उतरने से डरते हैं – क्यों ? अनजान डगर पर कोई नहीं जाना चाहता | फिर फल की इच्छा भी नहीं करनी – बस चलते जाना है | हर आध्यात्मिक साधक को अध्यात्म का अंदरूनी सफर खुद ही तय करना होता है | मुझे अच्छी तरह याद है जब कुण्डलिनी जागृत होना शुरू होती है तो […]


अध्यात्म जीवन की बुनियाद है या जीवन का हिस्सा ?

अध्यात्म मानव जीवन की बुनियाद भी है और हिस्सा भी – वह कैसे ? अध्यात्म जीवन की बुनियाद है क्योंकि हम एक शरीर नहीं बल्कि एक आत्मा हैं | आत्मा के कहे रास्ते पर चलना हर इंसान का धर्म भी है और फ़र्ज़ भी | मनुष्य चाहे या न चाहे एक दिन तो अध्यात्मिक होना ही पड़ेगा – क्योंकि आत्मा […]


क्या साठ साल की उम्र में पैदल चार धाम की यात्रा उचित है ?

फिजूल के धार्मिक उन्मादो में वक़्त और ऊर्जा जाया करने से बेहतर है हम अध्यात्म/ ध्यान में जितना भी उतर सके – कहीं बेहतर होगा | इंसान पूरी जिंदगी रोज़ मंदिर जाने में व्यतीत कर देता है लेकिन अंततः मिलता क्या है – कुछ नहीं ? आत्मा जीवन में तभी आगे बढ़ेगी जब इंसान कर्मों की निर्जरा करेगा |   […]


अगर मरना ही नियति है तो पैदा क्यों हुए ?

सिर्फ मरना ही नहीं बल्कि दोबारा जन्म भी नियति है और यह क्रम तब तक चलता रहेगा जब तक आत्मा में अशुद्धियों का लेशमात्र भी अंश बाकी है | जैसे ही आत्मा पूर्ण शुद्धि पा लेती है वह इस जन्म और मृत्यु के चक्रव्यूह से हमेशा के लिए मुक्त हो जाती है |   आत्मा न तो पैदा होती है […]


कैसे पता चले यह हमारा अंतिम जन्म है ?

जब हम महावीर, बुद्ध, आदि शंकराचार्य, रामकृष्ण परमहंस या महर्षि रमण बनने के नजदीक होंगे तो स्वामी विवेकानंद का लेवल तो पार करेंगे ही | क्या तब भी हमें या तमाम दुनिया को यह ज्ञात नहीं होगा कि आपका आध्यात्मिक लेवल क्या है ?   अन्तिम जन्म यानी 84 लाखवी योनि, या कहें तत्वज्ञानी बनने ही वाले हैं | अन्तिम […]


इंसान मरने के बाद क्या ले जाता है ?

इंसान एक जिंदगी के लिए आता है – मरने के बाद कुछ नहीं ले जाता | जब इंसान की मृत्यु होती है तो जो भी कर्मफल का balance है वह आत्मा के साथ अगले जन्म तक जाता है | यह कर्मफल का closing balance ही तो है जिसके आधार पर यह तय होता है आत्मा अगला शरीर कहां (जगह, घर) […]


मृत्यु के बाद आत्मा कितने दिन परिवार के साथ रहती है ?

आत्मा हर तरह के बंधन से स्वतंत्र सूर्य के गर्भ में स्थित है | उसका न कभी कोई परिवार था, न आगे होगा | परिवार तो उस जीव, शरीर का था जो आत्मा ने धारण किया था | और जीव (मनुष्य) की मृत्यु के साथ वह रिश्ता भी खत्म | भगवद गीता में कृष्ण स्पष्ट कहते हैं हर आत्मा स्वतंत्र […]


मौत के समय क्या बोलने से मनुष्य मुक्त हो जाता है ?

मौत के समय तो छोड़ो – पूरे जीवन मनुष्य कोई भी मंत्र जीवन के हर पल बोलता रहे तो भी कुछ प्राप्त नहीं होगा | ऐसा करने से कर्मों की निर्जरा तो हुई नहीं – तो मुक्ति का क्या मतलब ? भोग योनि में व्यस्त रहकर इंसान सब कुछ चाहता है बिना परिश्रम किए |   पूरा जीवन फालतू के […]


ज्ञानी की मृत्यु और आम इंसान की मृत्यु में फर्क है?

एक आध्यात्मिक पुरुष और एक आम आदमी की मृत्यु में फर्क होता है | आम इंसान जो धार्मिक प्रपंचों में लीन रहकर जीवन में कुछ पुण्य तो कमाता नहीं, तो अगले जीवन में क्या लेकर जायेगा ? धार्मिक अनुष्ठानों में लगे रहने से पुण्य अर्जित नहीं होता ?   इसके विपरीत एक आध्यात्मिक साधक हर समय पुण्य कर्म में लग, […]


मनुष्य का आत्मा स्वर्ग या नर्क आता जाता है पशु पक्षी का आत्मा कहाँ जाता है ?

आत्मा किसी की भी हो (मनुष्य या पशु पक्षी) कहीं नहीं जाती – वह तो पहले से ही सूर्य के गर्भ में विद्यमान है | मनुष्य हो या पशु पक्षी – सभी की आत्माएं सूर्य से ही remote control से हृदय को संचालित करती हैं |   जब इंसान या पशु पक्षी की मृत्यु होती है तो आत्मा तुरंत नया […]


मनुष्य बार-बार जन्म लेकर संसार में आता है फिर यह क्यों कहा जाता है जिन्दगी न मिलेगी दोबारा ?

मनुष्य बार बार जन्म नहीं लेता | मनुष्य शरीर तो आत्मा धारण करती है | मान लीजिए – इस जन्म में हम क्षत्रिय परिवार में भारत में पैदा हुए | तो हमारे लिए यह पहला और आखिरी जन्म है | हमें जो कुछ करना है – अगर आध्यात्मिक रास्ते पर चलकर ब्रह्म को पाना है तो सब इसी जन्म में […]


शूद्र और बौद्ध हिन्दू देवी देवताओं और ग्रंथों की बुराई क्यों करते हैं ?

शूद्रों को ब्राह्मण समाज ने कभी ढंग से जीने नहीं दिया – इस कुएं से पानी नहीं भर सकते, न पी सकते और कुएं से 100 फीट के नजदीक नहीं आ सकते ? ऐसी बातें आज से 100 साल पहले खूब प्रचलन में थीं | अगर शूद्र वर्ण में पैदा हुए तो कोई गुनाह नहीं किया ? ब्रह्म की दृष्टि […]


सृष्टि का नियंत्रक कौन है ?

पूरी सृष्टि का नियंत्रक तो ब्रह्म ही है – ब्रह्माण्ड का रचयिता | लेकिन जब से सृष्टि बनी है ब्रह्म ने खुद के हाथ में कुछ नहीं रखा | सारी जिम्मेदारी सौंप दी धर्म और कर्म को | जैसा कर्म करोगे वैसा फल मिलेगा – तकदीर का मालिक भगवान नहीं, हम खुद हैं | ब्रह्म ने will power और विवेक […]