भगवद्गीता में भगवान का यह कहने का अर्थ क्या है कि आरम्भ में समस्त प्राणी अव्यक्त हैं बीच में व्यक्त रहते है और मरने के बाद अव्यक्त हो जाते हैं ?
भगवद गीता अनुसार हम मूलतः आत्मा हैं जिसने कर्म करने के लिए शरीर धारण किया है | तो व्यक्त होने से पूर्व आत्मा अव्यक्त ही तो थी | शरीर धारण करते ही वह व्यक्त हो जाती है और जिस दिन इंसान अध्यात्म की राह पर चलकर मुक्ति पा लेता है, वह फिर एक शुद्ध आत्मा बन अव्यक्त रूप धारण कर […]
