Monthly Archives: April 2024


कम उम्र में बच्चों के लिए क्या आध्यात्मिक शिक्षा आवश्यक है ?

अध्यात्म का सिर्फ मूल ही बच्चों को दिया जा सकता है – अध्यात्म क्या है, उसके रास्ते पर चलकर क्या उपलब्धि होती है | जब तक भारत में गुरुकुल शिक्षा प्रणाली वापस नहीं आएगी, बच्चों को आध्यात्मिक ज्ञान देना संभव नहीं | अध्यात्म कभी भी पढ़ाया नहीं जा सकता | वह तो अन्दर का सफर है – हृदय में स्थित […]


क्या अध्यात्मिक होना अति कठिन है ?

अध्यात्म एक अंदरुनी सफर है जो सिर्फ चिंतन के माध्यम से किया जा सकता है | 800 करोड़ लोगों में 10 लोग नहीं जो चिंतन में उतर पाते हैं – ऐसा क्या ? चिंतन में उतरकर 12 वर्ष की अखंड ध्यान और ब्रह्मचर्य की तपस्या अगर कोई पूरी कर ले तो वह महर्षि रमण के लेवल पर पहुंचकर जन्म मृत्यु […]


आप क्या बताना चाहते हैं कि लोग उसको पढ़कर जागरूक बनें ?

हर भारतीय को यह बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए कि अर्जुन और कोई नहीं वह खुद है | महर्षि वेदव्यास ने महाभारत महाकाव्य की रचना सिर्फ इसलिए की कि हर मनुष्य अध्यात्म में उतर मोक्ष प्राप्त कर सके | अध्यात्म के रास्ते पर कैसे चलें यह भगवद गीता में वर्णित है | लेकिन भगवद गीता पढ़े कौन और पढ़ भी […]


हिंदुस्तान को लेकर नास्त्रेदमस की कौन सी भविष्यवाणी सच होने वाली है ?

नास्त्रेदमस की निम्न क्वॉट्रेन देखें (quatrain Century 1 Quatrain 53) –   Alas, how we will see a great nation sorely troubled and the holy law in utter ruin. Christianity (governed) throughout by other laws, when a new source of gold and silver is discovered.   यह क्वॉट्रेन US के आने वाले परेशानी भरे दिनों की कहानी बयां करती है […]


नास्त्रेदमस ने अपनी भविष्यवाणी में जिस महापुरुष का जिक्र किया है वह कौन है ?

जिस महापुरुष को नास्त्रेदमस अपनी भविष्यवाणियों में Chyren (Selin) कहते हैं – वह और कोई नहीं बल्कि आने वाला कल्कि अवतार है जो भारत को अखंड भारत बनाने में सफल होगा और धर्म की पुनर्स्थापना करेगा | 64 कलाओं से युक्त कल्कि अवतार कोई भी ऐसा कार्य नहीं होगा जिसको करने में सक्षम नहीं होगा |   ऐसा सतयुग स्थापित […]


क्या सारे संसार में एक ही शासक बनने की भविष्यवाणी की गई है ?

भारतीय दर्शन शास्त्र directly तो नहीं लेकिन indirectly इस बात को बेहद सहजता से कहते है कि निष्कलंक 64 कलाओं से सुसज्जित कल्कि अवतार पूरी दुनिया का मुखिया होगा | world war 3 के बाद बचे 660 करोड़ लोगों में 400 करोड़ कल्कि के अनुयाई होंगे तो बचा क्या ?   भारत के एक छोटे से गांव में जन्मा कल्कि […]


क्या 50-55 की उम्र में 25-30 का जोश व जवानी पाई जा सकती है ?

ब्रह्मचर्य का सही पालन (जैसा वीडियो में समझाया है – 100 करोड़ के मंत्र के साथ) अगर शिद्दत के साथ करना शुरू कर दिया तो 16~18 की उम्र में बॉडी की जो position थी वैसी वापस मिल जायेगी | साथ में थोड़ा सुबह के वक़्त जॉगिंग जरूरी है या किसी भी तरह का व्यायाम |   22 वर्षों तक बुखार […]


भारत कब तक घूसमुक्त देश बन सकता है ?

भारत के 2034 तक अखंड भारत बनते ही भ्रष्टाचार हमेशा के लिए खत्म | 1/= की चोरी और सीधे फांसी | जुर्म साबित होते ही कोई कोर्ट नहीं, कोई सुनवाई नहीं – बस दंड का प्रावधान होगा | तृतीय विश्व युद्ध में 140 करोड़ लोगों की मृत्यु के पश्चात् इंसान का जीने का नजरिया ही बदल जायेगा | लोग सोने […]


इन्सान की जिंदगी में सबसे जरूरी क्या होता है ?

इंसानी जिंदगी में जीवन के लक्ष्य के बिना जीवन पास करने का कोई महत्व नहीं | जीवन तो पशु पक्षी भी गुजारते हैं | जीवन जीने के लिए बना है पास करने के लिए नहीं | 5 वर्ष की आयु में भगवान से पहली मुलाक़ात हुई | उनके पीछे जाने का तय किया | स्कूल जाने लगा लेकिन अंदर भगवान […]


क्या निराकार ब्रह्म श्री कृष्ण से सर्वोच्च है हम किसको माने ब्रह्म को या कृष्ण को ?

जब हम मोबाइल में गाने सुनते हैं तो क्या मोहम्मद रफी मोबाइल में बैठे हैं ? गाना कहीं से प्रसारित हो रहा है और हम तो बस अपने मोबाइल के receiver में ग्रहण कर रहे हैं | इस तरह जितने मोबाइल (यानी मनुष्य) उतने ही receiver (यानि मनुष्य का हृदय) | तो क्या बहुत सारे कृष्ण हैं जो अलग अलग […]


महादेव की तीसरी आंख कब खुलती है ?

अगर हम आध्यात्मिक दृष्टि से देखें – महादेव, शिव की उपाधि उस तत्वज्ञानी को दी जाती है जब वह पूर्ण कुण्डलिनी जागरण के बाद तीसरा नेत्र खोलने में कामयाब हो जाता है | तीसरा नेत्र यानि ज्ञान चक्षु – जब हम कर्मों की पूर्ण निर्जरा कर अपने मस्तिष्क को 100% एक्टिवेट कर लेते हैं तो हम reservoir of mind plus […]


भगवान शिव को भोले क्यों कहते है ?

रामकृष्ण परमहंस जब तत्वज्ञानी होने की कगार पर थे तो कुत्ता जो रोटी छीन कर भाग रहा था, उसके पीछे घी का कड़छा लेकर भागते थे, यह चिल्लाते हुए कि रोटी तो चिपड़ दूं, सूखी हैं गला कट जायेगा | उन्हें कुत्ते में भी भगवान नजर आते थे | और कुत्ता यह सोचकर कि चोरी पकड़ी गई, कड़छे से मार […]


कोई केवल आध्यात्मिक हो सकता है क्योंकि भौतिकता के बिना आध्यात्मिक होना सम्भव नहीं ?

केवल आध्यात्मिक जैसी कोई चीज ब्रह्माण्ड में exist नहीं करती | अगर करती तो आत्मा को शरीर धारण करने की जरूरत ही क्यों होती ? एक आत्मा को अपने शुद्ध रूप में वापस आने के लिए कर्म करना ही होता है | और कर्म भौतिक शरीर ही करता है | आत्मा स्वयं तो दृष्टा की भांति रहती है |   […]


आत्मसाक्षात्कार कठिन क्यों होता हैं ?

आत्मसाक्षात्कार कठिन नहीं होता क्योंकि वह तो प्रभु देते हैं, जब भी मिलेगा ? कठिन है अध्यात्म की राह पर चलना | 63 साल के आध्यात्मिक सफर में पूरी दुनिया में मुझे आज तक 10 लोग नहीं मिले जो अध्यात्म शब्द का सही मतलब बता सकें, सफर तो बाद में ही करेंगे | कोई ध्यान में उतरना ही नहीं चाहता […]


आध्यात्मिकता में कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि आप शरीर नहीं हैं ?

हम आत्मा हैं शरीर नहीं हैं – इस बात को जानने के लिए महर्षि रमण ने एक experiment किया | वह तख्त पर शवासन की मुद्रा में लेट गए और और अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया, उस तरह से जैसे वह मृत हो | कुछ देर बाद उन्होंने देखा शरीर तो अभी भी चल रहा है | कोई चीज […]


राम जी को चौदह वर्ष का ही वनवास क्यों मिला था ?

सीता के पिता राजा जनक और राम के पिता राजा दशरथ दोनों बहुत गहरे दोस्त थे | दोनों ने बच्चों की शादी से पहले ही तय कर रखा था कि उचित समय आने पर कैकई से बात करके राम को 14 साल का वनवास दिला देंगे | कैकई राजा दशरथ के बहुत करीब थी और राजा दशरथ को भरोसा था […]


शिव जी को त्रिलोकी क्यों कहा जाता है ?

शिव कौन हुए – वह साधक जो 12 वर्ष की ध्यान और ब्रह्मचर्य की अखंड तपस्या पूरी कर तत्वज्ञानी हो गया जैसे रामकृष्ण परमहंस और महर्षि रमण इत्यादि | तत्वज्ञानी कौन – जिसे तीनों लोकों का ज्ञान हो गया हो – त्रिलोकी |   स्वर्ग क्या है, नर्क क्या है, हम धरती पर क्यों आते हैं, इन तीनों लोकों का […]


यदि इंसान को जन्म मरण के चक्र से मुक्त होना है तो क्या करना होगा ?

पूरी धरती पर किसी भी इंसान को, चाहे वह किसी भी धर्म, मत या संप्रदाय का हो – जन्म और मृत्यु के चक्रव्यूह से छुटकारा पाने के लिए अध्यात्म के सफर पर जाना होगा और 12 वर्षों की ध्यान और ब्रह्मचर्य की तपस्या पूरी करनी होगी | तभी साधक की कुण्डलिनी पूर्ण जागृत होगी, सातों चक्र खुलेंगे, सहस्त्रार खुलेगा और […]


सतयुग द्वापर त्रेता तो त्रेता युग द्वापर युग से पहले क्यों आया ?

सभी युगों को घड़ी की सुइयों के हिसाब से देखें | सुबह भोर हो गई – सतयुग चालू हो गया | दोपहर के 2 बजे के बाद सूर्य थोड़ा ढलने लगा और सतयुग खत्म और त्रेता युग चालू – अभी थोड़ी धूप बाकी है | काफी लोग धार्मिक प्रवृत्ति के हैं | शाम के 8 बजने को हैं अंधेरा छाने […]


ब्रह्मा की पूजा क्यों नहीं की जाती ?

ब्रह्म तो एक ही हैं – ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) उनकी विभूतियां हैं | ब्रह्मा को ब्रह्म का क्रिएटिव रूप मानते हैं, जिसने संसार रचा | हमारे रचने में ब्रह्मा का हाथ है – ऐसा माना जाता है | अब क्योंकि हम पैदा हो जाते हैं, इस धरती पर उत्पन्न हो जाते हैं तो ब्रह्मा की पूजा करके हमें […]


बाहर भटकने से अच्छा भीतर भटकने का अर्थ क्या है ?

बाहर भटकने से क्या मिलेगा – मंदिर या तीर्थ, भजन कीर्तन, सत्संग में जाने से भगवान नहीं मिलते | किसी भी ब्राह्म स्वरूप में भगवान नहीं हैं | ब्रह्म तो अंश स्वरूप (आत्मा के रूप में) अंदर हृदय में विद्यमान हैं | अगर हमें ब्रह्म प्राप्ति करनी है तो अंदर के सफर यानि अध्यात्म में उतरना ही पड़ेगा | अध्यात्म […]


नास्त्रेदमस ने कल्कि अवतार के बारे में क्या भविष्यवाणी की हैं ?

नास्त्रेदमस की निम्न क्वॉट्रेन देखें (quatrain Century 2 Quatrain 46) –   After great trouble for humanity, a greater one is prepared The Great Mover renews the ages: Rain, blood, milk, famine, steel and plague, Is the heavens fire seen, a long spark running.   यह क्वॉट्रेन सिर्फ और सिर्फ कल्कि अवतार के आने की कहानी बयान करती है – […]


कहाँ होगा कल्कि अवतार ?

कल्कि अवतार का अवतरण स्थल होगा उत्तराखंड जहां 5 नदियां मिलकर गंगाजी का उद्गम करती हैं | उत्तराखंड बेहद पावन और पवित्र भूमि है जहां कई संतों ने शरण पाई और अपने जीवन का काफी अमूल्य वक़्त बिताया | उनमें कुछ थे आदि शंकराचार्य, स्वामी विवेकानंद इत्यादि | चाणक्य का अंत समय बेहट में गुजरा जो UP में उत्तराखंड से […]


2 महीने ब्रह्मचर्य का पालन कैसे करें ?

2 महीने का ब्रह्मचर्य (physical) का पालन कर क्या प्राप्त करना चाहते हो – दो दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात | ब्रह्मचर्य एक ऐसी क्रिया है जो इंसान को समेटे रखती है | जीवन में इंसान अगर अंदर से टूटने लगे तो ब्रह्मचर्य इंसान को जीने का आयाम देती है , उसे अपने पैरों पर खड़े होने की क्षमता […]


भगवान को कैसे पा सकते हैं ?

जो भगवान को पाना चाहते हैं – उन लोगों से अगर यह पूछा जाए किसे पाना चाहते हो, भगवान कौन होते हैं तो मेरा विश्वास ही नहीं 200% मत है पूरी धरती पर एक इंसान नहीं मिलेगा जो इन प्रश्नों का उत्तर दे सके ? पाना सब चाहते हैं लेकिन क्या – नहीं मालूम |   मैं जब 5 वर्ष […]


क्या वृक्ष वनस्पति अनाज के पौधे में जीवात्मा होती है ?

हर आत्मा अपने जीवनकाल में ज्यादा से ज्यादा 84 लाख योनियों के सफर से गुजरती है | आखिरी 11 लाख योनियां मनुष्य रूप में हैं | 73 लाख निचली योनियों में सबसे पहले कीट पतंगों की योनि आती है | जब आत्मा हर तरह के कीट पतंगों का रूप धारण कर लेती है तो पेड़ पौधों की योनि में आती […]


कुछ आध्यात्मिक लोग अपनी यात्रा में अकेले क्यों चलते हैं ?

कुछ नहीं, हर सच्चा आध्यात्मिक साधक हमेशा अकेले ही चलेगा | कारण ? आध्यात्मिक सफर अंदरूनी सफर हैं आत्मा तक पहुंचने का जो हृदय में बैठी है | अध्यात्म में साधक ध्यान में उतरता है जो सिर्फ चिंतन के द्वारा हो सकता है | चिंतन करने के लिए भीड़ की आवश्यकता नहीं | समय समय पर जो प्रश्न उठेंगे उन […]


प्रतिदिन एक घंटा ध्यान करने से क्या होगा ?

ध्यान कभी भी घंटा या दो घंटा करने की रीत नहीं | सही ध्यान 24 घंटे round the clock चलते रहना चाहिए | अगर साधक तोड़ तोड़ कर ध्यान में उतरता है तो वह ध्यान नहीं | इस धरती पर इस समय एक भी सच्चा साधक नहीं जो सच्चे ध्यान में उतर सके ? ऐसा कैसे कह सकते हैं ? […]


क्यों अशरीरी सर्व शक्तिमान ईश्वर के बारे में भ्रांतियाँ हैं जबकि वे रचयिता हैं और कोई भी रूप लेकर दर्शन दे सकते हैं?

ब्रह्म सब कुछ कर सकते/ लेते हैं लेकिन प्रकट नहीं हो सकते | यह उनके लिए भी संभव नहीं | जब 37 वर्ष की आयु में 2 1/2 घंटे का साक्षात्कार हुआ तो उनसे बात तो ऐसे हो रही थी जैसे बगल में बैठे हों लेकिन सशरीर एक बार भी नहीं | इस जीवन में कितनी बार आए बातें करने/ […]


वह हजार सिर वाला नाग कौन है जिसके ऊपर भगवान विष्णु को आराम करते दर्शाया है ?

विष्णु ब्रह्म की विभूतियों में से एक हैं | उन्हें शेषनाग की शैया पर लेटे इसलिए दिखाया जाता है क्योंकि करने को अब कुछ बाकी नहीं | अध्यात्म में जब साधक 12 वर्ष की ध्यान कि अखंड तपस्या पूरी कर लेता है तो वह तत्वज्ञानी यानि शिव हो जाता है | समुद्र मंथन की गाथा के मर्म को समझेंगे तो […]