Yearly Archives: 2024


हमें हर स्थिति में सत्य का साथ देना चाहिए चाहे मृत्यु ही क्यों न आ जाए ?

सत्य का साथ देने का सीधा मतलब है ब्रह्म हमारी support में हमारे साथ खड़े हैं | हर क्षण हर पल | जब ब्रह्म का साथ हो तो मृत्यु किसकी ? जो सत्य के साथ दृढ़ता के साथ खड़े हैं उनका आमतौर पर बाल भी बांका नहीं होता |   भगत सिंह सत्य के साथ खड़ा था, ब्रिटिश शासन से […]


जो मर जाता है मृत्यु के बाद उसके साथ क्या जाता है ?

मनुष्य का शरीर एक माध्यम है आत्मा के लिए जो स्वयं को शुद्ध करना चाहती है | अध्यात्म कहता है इंसान को हमेशा पुण्य कार्यों में लिप्त रहना चाहिए जिससे कर्मफल अच्छा मिले | मृत्यु के समय हमारा जो कार्मिक शेष है वह decide करता है आत्मा को अगले जीवन में क्या शरीर मिलेगा | कार्मिक शेष positive है तो […]


क्या भगवान हमारी हर गलती पर नजर रखते हैं ?

भगवान नहीं उनका रचित सुपर कार्मिक कंप्यूटर जो हमारे हर कर्म का हिसाब रखता है | भारतीय दर्शन शास्त्र कहते हैं भगवान दृष्टा की भांति काम करता है | सारी जिम्मेदारी कर्म theory की है | जो डालोगे वहीं बाहर निकलेगा, इसी principle पर कंप्यूटर काम करता है, अपना कुछ नया पैदा नहीं करता wysiwyg |   चौराहे पर लगे […]


आत्मा परिवार से दूर पुनर्जन्म लेना चाहती है तो आत्मा की इच्छा को प्राथमिकता मिलती है या नहीं ?

आत्मा अगला शरीर कहां धारण करेगी यह आत्मा decide नहीं करती | आत्मा सिर्फ शरीर धारण करती है, बाकी सब जीव का, जो शरीर उसने धारण किया है |   हिटलर के कारण लाखों यहूदियों की मृत्यु हो गई | किसका दोष है | हिटलर की आत्मा का ? नहीं | जब हिटलर यह दुष्ट काम कर रहा था तो […]


मृत्यु के कुछ समय पहले इंसान पागलों जैसी हरकत क्यों करने लगता है ?

ज्यादातर इंसान मृत्यु के समय यह समझ जाते जीवन व्यर्थ जीया | अगले जीवन में ले जाने लायक कुछ भी नहीं | भौतिक उन्नति सब बेकार, वह तो साथ नहीं जा रही |   जो साथ जा सकता था वो किया नहीं | जो भी आध्यात्मिक उन्नति होती है वह ही साथ जाती है | इस जन्म में हम टीचर […]


अपनी आत्मा को कब और किस प्रकार महसूस किया जा सकता है ?

अपनी आत्मा को हम न कभी देख सकेंगे न महसूस कर सकेंगे | अध्यात्म का रास्ता लेकर हम एक शुद्ध आत्मा जरूर बन सकते हैं यानी जन्म और मरण के चक्रव्यूह से हमेशा के लिए मुक्त | आत्मा ने मनुष्य शरीर धारण ही इसलिए किया है कि वह हमेशा के लिए शुद्धावस्था में आ जाए |   अध्यात्म यानी योग, […]


कर्म फल आदमी कब और किस प्रकार भुगतता है ?

कर्मफल हमेशा आत्मा का होता है न कि शरीर का जो आत्मा ने धारण किया है | भगवद गीता में भगवान कृष्ण स्पष्ट कहते हैं, कर्म करो, फल की चिंता मत करो | क्यों ? क्योंकि फल automatically आत्मा तक पहुंच जाता है |   कृष्ण यह भी कहते हैं कर्म निष्काम भाव से करो | इससे क्या होगा ? […]


क्या बिना कर्म जीवन संभव है ?

क्या हम सांस लिए बिना रह सकते हैं ? एक पल भी नहीं | सांस लेना भी एक क्रिया है जो कर्म के अंदर आती है | जब से ब्रह्मांड बना है कर्म साथ साथ चलता है | बिना कर्म के evolution कैसा ? हम जीवन में आगे कैसे बढ़ेगे ?   पूरा ब्रह्माण्ड दो चीजों पर आधारित है evolve […]


क्या कोई ऐसा गुरु है जो जीते जी परमात्मा के दर्शन करा सके ?

भारतीय दर्शन के इतिहास में ऐसे गुरु दो ही हुए हैं जिनके अंदर सामर्थ था अपने सामर्थ शिष्य को ब्रह्म के दर्शन कराने का | पहले ऋषि Yajnavalkya जिन्होंने सबसे बड़े उपनिषद बृहदारण्यक की रचना की | उनके दो शिष्य हुए | राजा जनक (सीता के पिता) और उनकी दूसरी पत्नी Maitreyi. दोनों शिष्यों ने ऋषि Yajnavalkya के सानिध्य में […]


गीता को पढ़ना चाहिए या जो गीता में बताया है उसके अनुसार चलना चाहिए ?

क्या गीता पढ़ी जा सकती है ? मुझे कितनी ही email आती हैं कि गीता कई बार पढ़ ली लेकिन समझ कुछ नहीं आया |   अगर हमारा जीवन का लक्ष्य आध्यात्मिक उन्नति है तो हमे ध्यान करना चाहिए चिंतन के द्वारा | ध्यान की प्रक्रिया में जब हम गीता के श्लोकों में निहित ज्ञान को जानने की कोशिश करेंगे […]


मनुष्य का धरती में जन्म लेने का क्या कारण हो सकता है ?

ब्रह्म ने अपने आप को प्रस्फुटित किया big bang के द्वारा और ब्रह्मांड existence में आ गया | सारी आत्माएं पूरे ब्रह्मांड में बिखर गई | अपने ब्रह्मांडीय सफर में आत्माओं ने अपने अंदर अशुद्धियां ले ली | जैसे ही धरती मां जैसे planet evolve हुए, आत्माओं ने धरती पर शरीर धारण करना शुरू कर दिया | और आत्माओं की […]


पूजापाठ के बजाय क्या कर्मों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए ?

आज से लगभग ८००० साल पहले मनुष्यों को पूजापाठ और यज्ञ इत्यादि की जरूरत होती थी | जब से भगवद गीता का ज्ञान मानव धर्म को मिला है पूजापाठ आदि की जरूरत ही नहीं | क्यों ?   आज के समय में आध्यात्मिक सफर ज्ञान योग के द्वारा संभव है भक्ति योग के माध्यम से नहीं | रामकृष्ण परमहंस ने […]


पूरा सत्य समझना हर किसी कूंए के मेंढक के लिए संभव नहीं ?

गलत | Evolution के process में कोई छोटा नहीं | क्या हम अपने से छोटों को हीन दृष्टि से देखते हैं ? अगर मैं १२ वी कक्षा में पहुंच गया, इसका मतलब यह तो नहीं हमारे ३ ~ ४ थी क्लास में पढ़ते छोटे भाई बहन तिरस्कार के भागी हैं |   खुद ब्रह्म ने मनुष्य रूप में ११ लाख […]


कर्म भूमि क्या है ?

कर्मभूमि शब्द धरती मां के लिए इस्तेमाल होता है | ब्रह्माण्ड बनने के बाद जब आत्माएं ब्रह्माण्ड में फैलती जा रही थी तो उन्हें एक कर्मभूमि की जरूरत थी जहां वे शरीर धारण कर अपने अंदर की अशुद्धियों को जड़ से खत्म कर सकें |   आत्मा खुद कर्म कर नहीं सकती | कर्म करने के लिए उन्हें एक शरीर […]


क्या ज्योतिष विद्या को मानते हैं या केवल कर्म करने में विश्वास करते हैं ?

ज्योतिष विद्या एक balance sheet की तरह काम करती है | जो आपका कार्मिक शेष है उसी के अनुसार आने वाले समय की दस्तक के बारे में आपको ज्ञान प्रदान करती है | जो कर्म आपने आज तक किए उन्हीं को basis बनाकर ज्योतिष गणना की जाती है | तो कर्म तो मूल हुए | कर्म नहीं करेंगे तो जीवन […]


कर्म फल क्या हैं – क्या कर्मफल को बदला जा सकता हैं ?

जब मनुष्य कोई भी कर्म करता है तो फल (पारिश्रमिक) उत्पन्न होगा और अपने वक़्त पर ही मिलेगा | फल कब और कैसे मिलेगा यह मनुष्य के हाथ में नहीं | फल हमेशा मालिक का होता है यानि आत्मा का | लेकिन मनुष्य कर्म में उलझता है फल के लालच में |   मनुष्य का फ़र्ज़ है कर्म करना | […]


जब कर्म समाप्त हो जाता है तो क्या होता है ?

अगर कर्म zero शून्य हो जाएं यानी कर्मों की पूर्ण निर्जरा हो जाए तो जानते हैं क्या होगा – साधक उसी समय रामकृष्ण परमहंस या महर्षि रमण बन जन्म और मृत्यु के चक्रव्यूह से हमेशा के लिए मुक्त हो जाता है | जब से ब्रह्मांड बना है कर्म theory प्रधान है | आत्मा शरीर धारण करती है कर्मों की निर्जरा […]


जब कोई ध्यान करता है तो क्या होता है ?

जिस साधक को ध्यान शब्द का मतलब समझ आ जाए, यह तय है वह इसी जन्म में रामकृष्ण परमहंस बनने में कामयाब हो जाएगा | रामकृष्ण परमहंस अपना शरीर १८८६ में त्याग कर चले गए, उसके बाद महर्षि रमण १९५० में चले गए, लगभग १५० साल गुजर गए, दूसरा रामकृष्ण परमहंस या महर्षि रमण कहां है ? स्वामी विवेकानंद ने […]


ज़िन्दगी में किये कर्मो का फल कब मिलता है ?

कर्मफल मनुष्य के हाथ में नहीं | कर्मफल आत्मा की बपौती है | ब्रह्म के बनाए नियमानुसार कर्मफल हमें तुरंत, ४ दिन बाद, ६ महीने बाद, २ साल बाद या फिर ६ योनि बाद भी मिल सकता है | ऐसा नियम ब्रह्म ने इसलिए स्थापित किया कि होशियार मनुष्य उसे manipulate न कर ले | अगर हमें पहले से मालूम […]


ईश्वर एक है या अनेक हैं यह कैसे सिद्ध हो सकता है ?

ईश्वर, भगवान या कहो परमात्मा, ब्रह्म जिसने पूरा ब्रह्माण्ड रचाया, वह है तो एक ही | कैसे ? हम उस अवस्था में चलते हैं जब पुराना ब्रह्माण्ड सिमट रहा है यानि प्रलय हो गई है | तो कुछ ही समय में पूरा ब्रह्माण्ड सिमट कर अस्थ अंगुष्ठ (यानि आधे अंगूठे के आकार में) आ जाता है |   यह आधा […]


वेद किस प्रकार जीवन संदेश देते हैं ?

राम के समय में वेद, लेकिन कृष्ण के भगवद गीता के संदेश के बाद किसी भी साधक को वेदों में उलझने की जरूरत नहीं | मनुष्य रूप में मोक्ष की प्राप्ति तक जिस ज्ञान की हमे जरूरत पड़ेगी वह गीता में उपलब्ध है | वेदों में, उपनिषदों में या भगवद गीता में वो क्या चीज़ है जिसको पाना हर साधक […]


नाईट फॉल से छुटकारा कैसे पाएं ?

Nightfall जिसे स्वप्नदोष भी कहते हैं क्यों होता है अगर यह मालूम चल जाए तो उसका समाधान भी निकल आएगा | Nightfall, masturbation ऐसी क्रियाएं हैं जिनमें कोई भी दोष नहीं | क्यों ? सब कुछ ब्रह्म ने बनाया है, कोई कारण तो होगा। |   १२ साल की ब्रह्मचर्य की तपस्चर्या का जो वीडियो नीचे दे रहा हूं, अगर […]


क्या हाथ की लकीरों से कुछ होता है क्योंकि किस्मत तो उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते ?

दाएं हाथ की लकीरें represent करती हैं हमारा present जीवन | हमारा कार्मिक लेखा जोखा दाहिने हाथ में होता है | बाएं हाथ की लकीरें मनुष्य रूप में ११ लाख में से जितनी भी योनियों के दौर से हम गुज़र चुके हैं वह सब represent करती है | अगर हम आज ७३ लाख ५२४ वी योनि पर स्थित हैं तो […]


जैन तीर्थंकर महावीर ने क्या चमत्कार दिखाए थे ?

महावीर के पास जब एक व्यक्ति हाथों में कुछ लिए आया जो उसने कपड़े से ढक रखा था तो महावीर ने दूर से ही कहा, वापस जाओ , मेरे पास मत आओ | महावीर उस व्यक्ति को देखकर ही सब जान गए थे कि वह क्या कहेगा, उसके आने का अभिप्राय |   वह व्यक्ति अपने मृत बच्चे को लेकर […]


जब पुराने जन्म के कर्म से ये जीवन मिलता है तो पहला जन्म हमें किस कर्म से मिला था ?

जब आत्मा पहली बार मनुष्य शरीर धारण करती है यानि ७३००००१ योनि तो वह सीधे पशु योनि से मनुष्य योनि में आती है | जैन धर्म में आप देखेंगे कि महावीर की मूर्ति के नीचे एक शेर दिखाया जाता है | माना जाता है कि महावीर सीधे शेर की योनि से आए थे | ऐसा संभव तो नहीं क्योंकि मनुष्य […]


क्या आत्मा ही परमात्मा है ?

Suppose एक १००० pieces की puzzle है तो puzzle का एक piece एक आत्मा, और completed puzzle परमात्मा यानी ब्रह्म | ब्रह्माण्ड में जितनी भी आत्माएं हैं जब वो ८४ लाखवी योनि में पहुंच जाती हैं यानि पूर्ण शुद्धि प्राप्त कर लेती हैं तो वह अस्थ अंगुष्ठ (आधे अंगूठे) का आकार लेती हैं |आत्माओं के इसी गुच्छे को ब्रह्म परमात्मा […]


जानवरों के लिए ईश्वर जन्म-मरण स्वर्ग-नर्क की क्या महत्वता है ?

पशु योनि भोग योनि है | पशु योनि में प्रभु, स्वर्ग नरक की कोई कल्पना नहीं | हां जन्म मरण तो वह भी देखते हैं और भुगतते हैं लेकिन उनके पास और चारा भी क्या है | जैसे ही आत्मा पशु योनि छोड़ मनुष्य योनि में आती है तो ईश्वर, जन्म मृत्यु का चक्र और स्वर्ग नरक की कल्पना, सब […]


योग वसिष्ठ में महाप्रलय में सबका मोक्ष बिना यतन हो जाता है – रामसुखदास कहते है अगर कारण शरीर से मोह न छूटे तो नहीं होता ?

योग वशिष्ठ एक प्रामाणिक ग्रंथ है जबकि रामसुखदास जी को तत्वज्ञान प्राप्त नहीं हुआ, उनके रामकृष्ण परमहंस के level पर पहुंचने में अभी वक्त है, शायद अगले जन्म में अपना आध्यात्मिक सफर पूरा कर महर्षि रमण के level पर पहुंच जाएं | उनकी गीता के ऊपर टीका स्पष्ट संकेत देती है | जो योग वशिष्ठ में लिखा है पूर्ण सत्य […]


ध्यान का प्रथम स्तर क्या है ?

अगर आप ध्यान की सही प्रक्रिया को जानते हैं तो यह समझते देर नहीं लगेगी कि ध्यान में कोई स्तर नहीं होते | ध्यान की आवश्यकता होती है जब हम अध्यात्म के रास्ते पर चलकर ब्रह्म तक पहुंचना चाहते हैं, उससे आत्मसाक्षात्कार करना चाहते हैं |   ध्यान यानि अपने अंदर आते हजारों लाखों विचारों को जड़ से खत्म कर […]


चाहे कितना भी सच से दूर भाग लें – एक दिन सच का सामना करना ही पड़ेगा

ऐसा इसलिए होता है कि असलियत में हम कुछ हैं ही नहीं, मात्र एक साधन आत्मा के लिए, जिसने हमें, इस शरीर को धारण किया है स्वयं को शुद्ध अवस्था में लाने के लिए |   इंसान जब अध्यात्म की राह नहीं पकड़ता और टालता रहता है तो अंततः आत्मा हस्तक्षेप करती है और हमें असलियत से आगाह करवाती है […]