मुझे जीवन में बहुत दुखी मिले पति की तरफ से – बच्चे भी नहीं है – पिछले कौन से कर्म होंगे जो इतना दुख मिल रहा है भगवान की सेवा के बाद भी ?

दुख की परिभाषा क्या है ? जब हम evolve होते हैं, जीवन में आगे बढ़ते हैं, विकसित होते हैं तो जीवन में सुख और दुख दोनों मिलेंगे | यह प्रभु का नियम है |   जब एक लोहार कोई औजार बनाता है तो पहले उस लोहे की छड़ को गर्म करता है और फिर पीट कर आकार में लाता है […]


पूरा दिन योग ध्यान करने का मन करे तो क्या करें ?

योग अलग से नहीं किया जाता, योग तो सिर्फ भगवान से होता है | हिंदी में २ योग २ बराबर ४ | आत्मा की परमात्मा से मिलने की चेष्टा को योग कहते हैं | ध्यान करने का तरीका इस दुनिया में ८०० करोड़ लोगों में कितने जानते होंगे ? शायद १ या २ | जिस साधक को सही ध्यान करना […]


क्या ब्रह्म साकार हो सकता है ?

ब्रह्माण्ड में व्याप्त सभी आत्माएं अपने शुद्ध रूप में अस्थ अंगुष्ठ (आधे अंगूठे) का आकार लेती हैं | इसी आधे अंगूठे के आकार को हम ब्रह्म पुकारते हैं | ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के समय सभी आत्माएं पूरे फैलते ब्रह्माण्ड में बिखर जाती हैं | ऐसी ही कुछ आत्माओं का गुच्छा सूर्य के गर्भ में स्थित है | धरती पर जितने […]


आध्यात्म व ईश्वर को गहराई से समझने वाले कम क्यों बोलते हैं ?

जब महावीर को केवल्यज्ञान प्राप्त हुआ तो उन्होंने सोचा जो प्राप्त किया है वह वापस देना चाहिए | उनकी वाणी को ग्रहण करने वाला एक भी इंसान धरती पर मौजूद नहीं था | उन्होंने मौन धारण कर लिया | लगभग १ १/२ वर्ष बाद जब गौतम गणी नामक गणधर उनके पास आया तो महावीर की वाणी खिली और उन्होंने देशना […]


किसी महिला की नसबंदी हुई तो वह आध्यात्मिक क्षेत्र में अपनी शक्ति को मूलाधार चक्र से उपर उठा सकती है ?

महिला हो या पुरुष ! नसबंदी के बाद आध्यात्मिक क्रिया में कोई फर्क नहीं पड़ता | नसबंदी द्वारा प्रजनन की क्रिया का अवरोध होता है न कि इंसान का physical development | मूलाधार में जो भी शक्ति विद्यमान है उसे ऊपर कभी भी उठाया जा सकता है | बस कुछ मंत्र आदि की जानकारी होनी चाहिए जिनकी मदद से हम […]


विज्ञान और आध्यात्मिक ज्ञान में क्या अंतर है ?

भौतिक जीवन को भलीभांति जीने के लिए विज्ञान की आवश्यकता होती है | यह रोटी रोज़ी कमाने का साधन भी बनता है | अध्यात्म उस बिंदु से शुरू होता है जहां विज्ञान का अंत होता है | अध्यात्म और विज्ञान का आपस में कोई तालमेल नहीं |   विज्ञान हर क्षेत्र में प्रमाण मांगता है जबकि अध्यात्म ब्रह्म के प्रति […]


जीवन का सार क्या है ?

हम एक आत्मा हैं और प्रभु की बनाई सबसे उच्च योनि पर स्थापित हैं | ब्रह्म हमसे यह चाहते हैं कि हम अपने कर्मों की निर्जरा कर अपने शुद्ध रूप में आ जाएं यानी मनुष्य रूप में मोक्ष पा लें | बस यही जीवन की सबसे बड़ी परेशानी है । हर मनुष्य अध्यात्म की बात तो करता है लेकिन चलता […]


यौन शक्ति बढ़ाने के लिये क्या करना चाहिए ?

यौन शक्ति को असीमित level तक बढ़ाने में ब्रह्मचर्य कितना सहायक है पूरा पढ़िए |   मैंने ५ वर्ष की आयु में अध्यात्म की सीढ़ी पकड़ ली थी | में भगवान की खोज में जाना चाहता था | ८ १/२ वर्ष की आयु में मैंने finally ब्रह्म से बात होने के बाद उनके पीछे जाने का तय किया | मालूम […]


मेरा मस्तक हिमालय है कभी झुक नहीं सकता सागर चरण धोता है मलिन हो नहीं सकता मैं सोने की चिड़िया हूँ पीतल बन नहीं सकता मेरा नाम भारत है

भारत सोने की चिड़िया ही नहीं था अपितु पूरे विश्व की सभी प्रथाओं, धर्मो, संप्रदायों का भी पूर्व है | भारत का गौरवशाली इतिहास १०८०० वर्ष पुराना है | उसमे US के २४७ साल, UK ३११ साल के क्या मायने ? दूसरों को developing, under- developed कह देने से क्या हकीकत बदल जाएगी | भारत की अखंडता को चूर चूर […]


संसार में सच्चा ओर पूर्ण गुरु कौन है ?

अध्यात्म के क्षेत्र में सच्चा और पूर्ण गुरु सिर्फ और सिर्फ वह हो सकता है जिसने ब्रह्म को देखा हो, जाना हो और तत्वज्ञानी बन गया हो | रामकृष्ण परमहंस और महर्षि रमण दोनों पूर्ण गुरु थे | रामकृष्ण परमहंस १८८६ में और महर्षि रमण १९५० में अपना शरीर त्याग चुके हैं | आज के समय में सबसे अच्छा साधन […]


जिंदगी का सबसे कठिन काम क्या है?

अपनी मैं पर कंट्रोल स्थापित करना | आज के समय चाहे आप 2 साल के बच्चे को देख लें (उसके हाथ से TV का रिमोट, या मोबाइल गेम लेने की कोशिश करके देखें) या किसी भी नौजवान अथवा वयस्क को, सभी के साथ समस्या यह है, हम अपनी इच्छाओं पर अंकुश लगाने को तैयार नहीं | मैं ही हमेशा अपनी […]


एक मरते हुए आदमी के साथ क्या होता है – क्या उसे यमराज लेने आते हैं ?

क्या आपने कभी बच्चे को रोबोटिक टॉय से खेलते देखा है | जब बच्चा वह टॉय unpack करता है तो वह चालू हालत में नहीं होता | पहले उसमे batteries डाली जाती हैं, फिर रिमोट कंट्रोल से बच्चा उस टॉय को सब जगह घुमाता फिरता है | यह जो remote control है मानव शरीर का, यह सदा आत्मा के हाथ […]


व्यक्तिगत विकास की खोज में आत्म-चिंतन क्या भूमिका निभाता है ?

आत्मचिंतन जिसे महर्षि रमण ने self enquiry का नाम दिया है बेहद ही कारगर और अचूक साधन है इसी जन्म में प्रभु तक पहुंचने का | व्यक्तिगत विकास की पराकाष्ठा क्या है – कि हम स्वाध्याय के रास्ते कर्मो की निर्जरा करते हुए ब्रह्म का साक्षात्कार करने में सफल हो जाएं | ध्यान रहे – कर्मो की निर्जरा करने के […]


जब ध्यान का प्रयास किया मन भटकने लगता है – क्या करें ?

ब्रह्म ने – ध्यान में उतरकर, ब्रह्म तक पहुंचने के लिए १ करोड़ वर्ष की अवधि दी है, मनुष्य रूप में ११ लाख योनियों का लंबा सफर | ध्यान करते वक़्त मन तो भटकेगा ही, हम यह उम्मीद तो नहीं कर सकते पहली attempt में सफल हो जाएंगे |   रामकृष्ण परमहंस एक ही योनि में रामकृष्ण परमहंस बन ब्रह्म […]


जिंदगी जीने में कठिनाई कब आती है – इस कठिनाई से कैसे बचें ?

जीवन में अगर ब्राह्म कठिनाइयां आती हैं तो हर इंसान उनसे लड़ सकता है लेकिन अगर अपने ही दुख देने पर उतर आए तो असहाय महसूस करते हैं | इस अवस्था में कोई करे भी तो क्या ? आपके अपने बेटा बेटी, पत्नी या पति, दादा दादी, नाना नानी, मामा मामी या ससुराल के लोग जब जुल्म करने पर उतारू […]


क्या अध्यात्मिकता में धर्म व संस्कृति का महत्व है ?

अध्यात्म के रास्ते पर कौन चलता है, वे साधक जो एक ऐसी संस्कृति से आए हों जो धर्म पर आधारित है जैसे भरतवंशी | अध्यात्म के मूल से क्या पाश्चात्य जगत परिचित है ? बिल्कुल नहीं, वे तो आत्मा होती है, इसे भी नकारते हैं |   पूरे विश्व में, धरती माता के ऊपर सिर्फ और सिर्फ भारत ही ऐसा […]


कहते हैं कोई इनसान perfect नहीं – क्या यह सच है ?

Perfect हों जाएं तो महावीर, रामकृष्ण परमहंस या महर्षि रमण आदि नामों से पुकारे जाएंगे | अध्यात्म में perfection उस दिन आता है जब ब्रह्म से साक्षात्कार होता है, उससे पहले नहीं | ब्रह्म से साक्षात्कार तभी होता है जब हम कर्मों की पूर्ण निर्जरा कर लेते हैं |   मनुष्य क्या, अपने ब्रह्मांडीय सफर में हर आत्मा अशुद्धियों से […]


क्या स्कूल में धार्मिक शिक्षा होनी चाहिए ?

स्कूलों में धार्मिक नहीं आध्यात्मिक शिक्षा का प्रावधान होना चाहिए जैसा पहले गुरुकुल में होता था | आध्यात्मिक शिक्षा पद्धति शुरू करने से पहले हमें अपनी गुरुकुल शिक्षा प्रणाली शुरू करनी होगी | सिर्फ एक ऋषि ही आध्यात्मिक शिक्षा प्रदान कर सकता है, आजकल के अध्यापक नहीं जिन्हें अध्यात्म के बारे में रत्ती भर भी नहीं मालूम |   २०३२ […]


कुत्ते की आत्मा और शेर की आत्मा में क्या अन्तर है ?

इस जन्म में हम पिछले जन्म में मृत्यु के समय के कार्मिक शेष के आधार पर पुरुष पैदा हुए | हो सकता है अगला शरीर जो हमारी आत्मा ले वह स्त्री का हो | इस जन्म में ब्राह्मण कुल में जन्म लिया, अगले में क्षत्रिय पैदा हों | इसी प्रकार जो आत्मा कुत्ते का शरीर धारण कर रही है, हो […]


क्या श्री कृष्ण ही भगवान है ?

भगवान कृष्ण तो महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाकाव्य महाभारत के एक पात्र हैं | और सही मायने में हमारे हृदयस्थल में स्थित आत्मा हैं | गीताप्रेस की कुछ टीकाओं में चित्र मिलते हैं जहां हर जीव चाहे वह मनुष्य हो या पशु पक्षी, सभी के हृदयस्थल पर भगवान कृष्ण को चिन्हित किया गया है | यह क्या दर्शाता है कि […]


योग की परम अवस्था क्या होती है ?

योग की परम स्थिति होती है जब एक साधक आध्यामिक सफर में तत्वज्ञान प्राप्त कर जन्म और मृत्यु के चक्रव्यूह से हमेशा के लिए मुक्त हो, ८४ लाखवी योनि में पहुंच जाता है और अंततः भगवान का साक्षात्कार करने में सफल हो जाता है |   ब्रह्म से योग करने का मतलब भी यही होता है, आत्मा की परमात्मा से […]


व्यक्ति को कब हर कार्य से मुक्त हो जाना चाहिए ?

अध्यात्म के रास्ते पर मनु ने ४ वर्णाश्रम की व्यवस्था बनाई है और आम साधक इसी भ्रम में रहता भी है कि ५० के पार वानप्रस्थ आश्रम शुरू हो जाता है और ७५ के बाद संन्यास | जब तक इंसान ७५ की देहलीज पर पहुंचता है, काम करते करते इतना थक चुका होता है कि अध्यात्म में जाने की इच्छाशक्ति […]


अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा सूचकांक 2024 में भारत की रैंक क्या है ?

क्या UN, US, UK और Europe या अन्य किसी संस्था में इतना दम है भारतवर्ष को आंक सके | भारत हमेशा से पूरी दुनिया में no १ था, है और हमेशा रहेगा | हर क्षेत्र में no १ | हम गीता को पढ़ते नहीं हैं, हम उसे २४ घंटे जीते हैं | भारत का इतिहास १०८०० साल पुराना है और […]


मरने के बाद आत्मा कब भटकती है ?

सभी आत्माएं हमेशा से सूर्य के गर्भ में विद्यमान हैं | आत्मा एक चेतना, चेतन तत्व है जो एक करोड़ degrees centigrade से ज्यादा ताप उत्पन्न करती हैं | या यूं कहें कि आत्मा को रहने के लिए १ करोड़ degrees से ज्यादा temperature की जरूरत पड़ती है, जो उसे सूर्य के गर्भ में ही मिलता है |   सूर्य […]


जिंदगी जीने का सबसे अच्छा तरीका क्या हो सकता है ?

ज़िन्दगी जीने के लिए (पास करने के लिए नहीं) २ बाते जरूरी हैं –   १. हमारा जीवन का लक्ष्य कच्ची उम्र से ही fixed होना चाहिए | ज्यादातर लोगों का यह मानना है कि छोटी उम्र में goal कैसे स्थापित करें | वह तो मां बाप करेंगे और करते भी हैं | छोटे बच्चे को क्या मालूम कि बड़े […]


पूर्व जन्म के कर्म इस जन्म में क्यों मिलते है – क्या पूर्व के अच्छे फल इस जन्म में मिलते है ?

कर्म बाकी हैं तभी तो आत्मा को एक और शरीर धारण करना पड़ता है | अगर इंसान आध्यात्मिक होकर कर्मों की पूर्ण निर्जरा कर ले तो आत्मा पूर्ण शुद्धि प्राप्त कर लेगी | एक शुद्ध हुई आत्मा को शरीर की कोई आवश्यकता नहीं | आत्मा तो शरीर धारण ही तब तक करती है जब तक उसे अशुद्धियों ने जकड़ रखा […]


आत्मा और अंहकार में क्या अंतर है ?

आत्मा ने शरीर धारण किया लेकिन खुद दृष्टा भाव में स्थित रहती है | तो शरीर यानि जीव काम क्यों करेगा ? इसलिए ब्रह्म ने शरीर को अहं (अहंकार) से युक्त किया | अहंकार में डूबा इंसान न जाने कहां कहां भागता रहता है, स्थिर नहीं रहता | अध्यात्म के रास्ते पर चलने के लिए सबसे जरूरी है हम अपने […]


आत्मा किस प्रकार जीव को जीवित रखती है ?

हर आत्मा सूर्य के गर्भ में रहकर मनुष्य को वहीं से remote control से चलाती है | जब बच्चा गर्भ में आता है तो remote switch ON कर देती है और बच्चे का दिल धड़कने लगता है | उसके बाद कर्म theory हमारी जिंदगी govern करती है | जैसा कर्म करेंगे उतने दिन जिएंगे | नशे की लत पड़ जाए […]


क्या एक आत्मा दूसरी आत्मा से बात कर सकती है ?

एक आत्मा को दूसरी आत्मा से बात करने की इजाजत नहीं दी ब्रह्म ने | क्यों ? जब आत्मा दृष्टा की भांति काम करती है तो interaction कैसा और किसलिए ? Interaction करने की वजह भी तो होनी चाहिए | जब आत्मा एक शरीर manifest करती है तो कारण अपने आप उत्पन्न हो जाता है | मूलतः देखा जाए आवाज़ […]


क्या वास्तविक जीवन में आपने कभी आलौकिक शक्तियों का अनुभव किया है?

क्या आप निम्नलिखित शक्तियों को अलौकिक मानते हैं –   १. गुडाकेश हो जाना – ८ घंटे की नींद ३ मिनट में पूरी   २. भगवद गीता और उपनिषदों में निहित ज्ञान ABCD हो जाना   ३. ८४ लाखवी योनि में स्थापित हो जाना हमेशा के लिए   ४. भूख पर असीमित control पा लेना (महीने में २ रोटी)   […]