हम एक आत्मा हैं और प्रभु की बनाई सबसे उच्च योनि पर स्थापित हैं | ब्रह्म हमसे यह चाहते हैं कि हम अपने कर्मों की निर्जरा कर अपने शुद्ध रूप में आ जाएं यानी मनुष्य रूप में मोक्ष पा लें | बस यही जीवन की सबसे बड़ी परेशानी है । हर मनुष्य अध्यात्म की बात तो करता है लेकिन चलता धर्म के रास्ते पर है । हमें यह ध्यान रखना होगा की धर्म का रास्ता कभी प्रभु की तरफ़ नहीं ले जाता । आप अगर इस जन्म में ब्रह्म को पाना चाहते हैं तो आध्यात्मिक रास्ते पर चलना होगा ।
धार्मिक क्रियाएं जैसे मंदिर, गिरजाघर या मस्जिद जाना या पूजा पाठ, भजन कीर्तन इत्यादि कभी भगवान के पास नहीं ले जाते | पूरे भारतीय इतिहास में एक भी ऐसा example नहीं है कि मनुष्य धर्म के रीति रिवाज़ों पर चला और उसे ब्रह्म का साक्षात्कार हो गया | ब्रह्म का साक्षात्कार सिर्फ़ और सिर्फ़ अध्यात्म के रास्ते पर चलकर हो सकता है | हमें ध्यान में उतरना ही होगा |
और ध्यान यानी चिंतन का रास्ता जैसे महर्षि रमण किया करते थे | मोक्ष के रास्ते पर जाना हमारी जरूरत ही नहीं मजबूरी है | यह शरीर हमारी आत्मा ने धारण किया है तो जीवन का लक्ष्य भी आध्यात्मिक ही होगा, एक ऐसा रास्ता जो हमेशा के लिए हमें जन्म मरण के चक्र से मुक्त कर देगा |
What is the main Purpose of Life? मानव जीवन का मकसद | Vijay Kumar Atma Jnani
