Yearly Archives: 2024


जानवर मनुष्य से कम बीमार क्यों होते हैं ?

इंसान नेचरोपैथी से दूर होता गया और उसकी जगह ले ली एलोपैथिक डॉक्टर्स ने | लेकिन पशु पक्षियों के पास कौन डॉक्टर है ? अगर खुद को स्वस्थ नहीं रखेंगे तो काम नहीं चलेगा | आप ने देखा होगा आवेश में आकर जब कभी दो जानवर भिड़ जाते हैं – अंततः दोनों ही घायल होकर मारे जाते हैं |   […]


शादी के कुछ सालों बाद सन्यासी की तरह रहने को ब्रह्मचर्य कह सकते हैं ?

सन्यासी ब्रह्मचारी हो जरूरी तो नहीं | ब्रह्मचारी सन्यासी हो यह भी जरूरी नहीं | जीवन के किसी भी मोड़ पर कोई भी इंसान ब्रह्मचर्य पालन की दुनिया में कदम रख सकता है | अगर शादी के बाद हम 12 साल के अखंड ब्रह्मचर्य में उतरना चाहते हैं तो पत्नी की इजाज़त अनिवार्य है | आप बुद्ध वाली गलती दोहरा […]


कर्म करना हमारे हाथ में है या सब कुछ वही कर रहा है ?

जब से ब्रह्मांड उत्पन्न हुआ और सारी आत्माएं पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त हो गईं- यह ब्रह्मांड सिर्फ और सिर्फ धर्म और कर्म theory पर आधारित है | जैसा करोगे वैसा फल मिलेगा | ब्रह्म ने हर मनुष्य को will power और विवेक से सुशोभित किया है जिसके बूते पर वह अपना सांसारिक जीवन आराम से जी/ काट सके |   […]


क्या सब कुछ छोड़ पहाड़ पर जाने से आध्यात्म जीवन में उतर आता है ?

सब कुछ छोड़ कर हजारों नहीं लाखों लोग जो हरिद्वार,ऋषिकेश, बनारस, काशी, उज्जैन और नासिक इत्यादि जगहों पर बस गए हैं इस उम्मीद में कि आध्यात्मिक प्रगति होगी – 100% गलत हैं | आध्यात्मिक प्रगति तो दूर, अपनों को बीच मझदार में छोड़ जो यह लोग भाग चले आए हैं – उस पाप से कैसे मुक्त होंगे ? कर्मों की […]


अपने आध्यात्मिक अनुभव किसी को नहीं बताने चाहिए क्या यह सत्य है ?

अपने आध्यात्मिक जीवन के सत्य जिस किसी को भी आप बताएंगे – वह आपको मूर्ख से ज्यादा कुछ नहीं समझेगा | जिस इंसान का लक्ष्य अध्यात्म नहीं – उसे कुछ बताकर आप अमूल्य समय नष्ट कर रहे हैं | भगवद गीता में कृष्ण कहते भी हैं कि अयोग्य पात्र को कभी भी गीता ज्ञान नहीं बांटिए |   आज के […]


किसी आधुनिक संत के बारे में बता सकते हैं जिन्होंने अवश्य ही मुक्ति पाई ?

इस धरती पर महर्षि रमण अभी तक आख़िरी संत हुए जिन्होंने आत्मज्ञान प्राप्त कर मोक्ष लिया (निर्वाण नहीं) ! महर्षि रमण ने 1950 में शरीर छोड़ा और जन्म और मृत्यु के बंधन को काटकर हमेशा के लिए शुद्ध आत्मा बन गए | हम महर्षि रमण की बताई हुई किसी भी बात का अवलोकन करें – उसमें तत्व के अलावा और […]


कर्म प्रधान होता है या धर्म प्रधान होता है ?

धर्म और कर्म दोनों ब्रह्म द्वारा रचित वो विधियां हैं जिनका इस्तेमाल कर इंसान जीवन में आगे बढ़ता है | धर्म हर जीव में (सभी 84 लाख योनियों में) जन्म से मौजूद रहता है | यह धर्म ही है जो मनुष्य को पशु बनने से/ मरने मारने से रोकता है | अगर जीव के अंदर धर्म न हो तो ब्रह्माण्ड […]


ध्यान क्यों भटक जाता है ?

हम सड़क पर जा रहे हों और अचानक हमें अर्धनग्न अवस्था में एक बहुत ही सुन्दर हेरोइन/ स्त्री दिखे तो हमारा ध्यान नहीं भटकेगा ? अगर हम स्वामी विवेकानन्द या महर्षि रमण जैसे व्यक्तित्व के धनी हैं तो कभी नहीं लेकिन आम आदमी की क्या बिसात ? इसीलिए अध्यात्म में पांचों इन्द्रियों पर संपूर्ण कंट्रोल स्थापित करने की बात कही […]


छोटे लक्ष्य निर्धारित करना और प्राप्त करना क्या सही है?

आप mount everest पर चढ़ना चाहते हैं तो क्या बिना तैयारी के चढ़ना शुरू कर देंगे ? पहले प्लेन ग्राउंड पर लंबा चलने की practice करेंगे | जब सफल हो जाएंगे तो गांव की छोटी सी पहाड़ी पर चढ़ने उतरने की प्रैक्टिस करेंगे | फिर रोज़ कई बार चढ़ेंगे और उतरेंगे | उसके बाद उससे ऊंची पहाड़ी चढ़ेंगे उतरेंगे | […]


आत्मा किस प्रकार प्रकाशित होती है ?

आत्मा प्रकाशित होने से मतलब है आत्मा का अपने पूर्ण शुद्ध रूप में वापस आ जाना | जब साधक अध्यात्म में उतर ज्ञान के प्रकाश के द्वारा अज्ञान के अन्धकार को काट उजाले की ओर बढ़ता है तो हम कह सकते हैं आत्मा धीरे धीरे प्रकाशित हो रही है | अगर हमने घर में बल्ब के ऊपर ऐसा स्विच लगा […]


बुरे कर्म करने वाले लोग जल्दी उन्नति क्यों करते हैं ?

झूठ, चापलूसी, जी हजूरी करने वाले लोगों की उन्नति जल्दी तो होती है लेकिन कितने समय के लिए | भौतिक जीवन की उन्नति क्या मायने रखती है ? बिल गेट्स मृत्यु के बाद जीवन फिर nursery से शुरू करेंगे – क्या फायदा हुआ इस जीवन की मेहनत का अगर अगले जीवन में कुछ जा न सका ?   बुरे इंसान […]


किन कर्मों से भगवत प्राप्ति होती है ?

भगवत प्राप्ति के लिए हमें कर्म इस प्रकार करने होंगे की सिर्फ पुण्य कर्मफल ही मिले | इसके बाद स्थिति आएगी कि हम कर्मफल से भी दूर हो जाएं | जब शरीर आत्मा ने धारण किया है तो कर्मफल हमेशा आत्मा का हुआ |   कर्मों की निर्जरा करने के लिए हमें कर्मों में निष्काम भाव से उतरना होगा | […]


सच्चा सत्संग क्या होता है कैसे होता है ?

बचपन में जब सत्संग करने की इच्छा होती तो कोशिश करता मेरे जैसा सोचने वालों का साथ मिल जाए तो बैठ कर आध्यात्मिक चर्चा कर सकूं | कोई नहीं मिला | मैं पूर्ण सत्य के मार्ग पर चलता था और औरों से भी यही उम्मीद रखता था |   सत्संग का मतलब तो यही है – सत्य की राह पर […]


अगर हरेक के अन्दर परमात्मा है तो जीवों की इतनी दुर्गति क्यों हो रही है ?

परमात्मा हमारे अंदर अंश रूप में मौजूद है – आत्मा स्वरूप | अपने ब्रह्मांडीय सफर में आत्मा ने अपने अंदर अशुद्धियां ले लीं तभी तो उसे जीव रूप धारण करना पड़ता है | जब जीव पुण्य कर्म करता है तो अशुद्धियां कम होती जाती हैं | अब जीव हर समय तो पुण्य कर्म करेगा नहीं, पाप कर्म भी करेगा, तो […]


क्या आध्यात्मिक गुरु संस्कार की कमी को दूर कर सकते हैं ?

संस्कार शब्द समाज की देन नहीं है – यह प्रथा गुरुकुल की देन है | जब बालक गुरुकुल में भर्ती हो गया तो वह गुरुकुल के संरक्षण में बड़ा होता है | वह 10~12 वर्षों के लिए गुरुकुल से बंध जाता है | अब बाहर उचित प्रशिक्षण के बाद ही निकलेगा – विभिन्न कलाओं में पारंगत | गुरुकुल में रहकर […]


क्या कुंडलिनी शक्ति मृत्यु के बाद सक्रिय रहती है ?

जैसे जैसे कुण्डलिनी जागृत होती है उसी अनुपात में हमारा बंद पड़ा मस्तिष्क खुलने लगता है | suppose इस जन्म के समय हमारा मस्तिष्क 2% activated था | अध्यात्म में उतरने के कारण मृत्यु के समय हमारा मस्तिष्क 9% एक्टिव हो गया | अब आत्मा जो भी अगला मनुष्य शरीर धारण करेगी उसका मस्तिष्क जन्म से 9% activated होगा | […]


ईश्वर एक ही है तो इतने धर्म क्यों बने ?

कहा जाता है अगर हम बरगद/ पीपल के पेड़ की उत्पत्ति को देख लें तो विभिन्न धर्मों/ मतों की उत्पत्ति का कारण समझ आएगा | जब एक पेड़ उगता है तो पहले एक single तना होता है | धीरे धीरे उसमे शाखाएं उत्पन्न होनी शुरू होती हैं |   धर्म के पेड़ में पहले धर्म आया जिसे हम सनातन धर्म […]


जितना शांत रहोगे सफल हो जाओगे सहमत हो ?

Silence – शांत रहना अपने आप में एक बेहतरीन कला है | अंतर्मुखी होकर साधक अपने अंदर 12 साल की ध्यान की साधना में आराम से उतर सकता है | अंतर्मुखी साधक को बाहर का कोलाहल कभी परेशान नहीं करता | जो साधक जितना शांत है उतना तेजी से तरक्की करता है | कारण – पूरी शक्ति एक ही goal […]


नाकारात्मक बातें मनुष्य को अपनी ओर क्यों खींचती है ?

आम मनुष्य पांचों इंद्रियों और मन के वशीभूत हो काम करता है | यही इंद्रियों इंसान को विभिन्न विषयों की ओर लालायित करती हैं | हम पशु योनि से मनुष्य योनि में आएं है | Negative कार्यों की ओर मन पहले जाता है क्योंकि इससे हमारी मैं (अहम) को संतुष्टि मिलती/ दिखाई देती है | जब तक हम आध्यात्मिक नहीं […]


सनातन धर्म में महिलाओं का क्या स्थान है ?

जब से सभी आत्माएं प्रभु के घर से निकली वे वापस शुद्ध होकर ब्रह्मलीन होना चाहती हैं | ब्रह्माण्ड में घूमती आत्माओं को घर मिलता है धरती मां पर और आत्माओं का 84 लाख योनियों का सफर शुरू हो जाता है | अगर धरती मां जैसे ग्रहों का अस्तित्व नहीं हो तो आत्मा शुद्धता कैसे प्राप्त करेंगी ?   सनातन […]


सनातन धर्म का सबसे बड़ा दुश्मन कौन है ?

आज के समय सनातन धर्म का सबसे बड़ा दुश्मन है जिसे Global deep state का नाम दिया गया है – दुनिया की लगभग 300 families जो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को control करती हैं | कोई मरे या जिए, कोई देश खत्म हो जाए – हर हालत में उन्हें सिर्फ अपने profit से सरोकार होता है | सोशल मीडिया में […]


समुद्र मंथन का अभिप्राय तथा इसके पीछे का दर्शन क्या है ?

जब से मानव सभ्यता अस्तित्व में आयी है ब्रह्म ने श्रुति के द्वारा ऋषियों को समुद्र मंथन की गाथा दी | भारतीय दर्शन शास्त्र कहते हैं मनुष्य के जीवन का लक्ष्य है जन्म और मृत्यु से आत्मा को हमेशा के लिए मुक्त कर देना | इसके लिए मनुष्य को तत्वज्ञान और फिर मोक्ष प्राप्त करना होगा | यह संभव हो […]


क्या सनातन धर्म सभी धर्मों का मूल है ?

भारतीय परिवेश में हिन्दू और जैन – दोनों धाराओं को धर्म/ मत नहीं माना जाता – बल्कि a way of life (जीवन जीने का एक माध्यम) मानते हैं – एक ऐसा साधन जिसके सही पालन से मोक्ष की स्थिति तक पहुंचा जा सकता है | आज के समय में धर्म को ही religion कहने लगे हैं और इस परिभाषा से […]


क्या महाभारत महाकाव्य का एक ही रचयिता था ?

अगर हम किसी भी IIT या institute का अवलोकन करें तो देखेंगे कि काफी सारे professors होते हैं और उन्हीं में से एक professor को director बना दिया जाता है | जब भी IIT में कोई खास काम होता है तो डायरेक्टर का नाम उस कीर्ति में अवश्य आता है | भले ही director का directly उसमे कोई योगदान न […]


ब्रह्मचर्य गृहस्थ संन्यास तथा वानप्रस्थ इन चार आश्रमों में कौन सर्वश्रेष्ठ है ?

मनुष्य शरीर में पैरों, शरीर, हाथों, कान, आंखों में कौन सर्वश्रेष्ठ है ? उत्तर होगा सभी | सभी आश्रम जीवन की अलग अलग अवस्थाएं हैं | जीवन के शुरू के 25 वर्ष माता पिता की देखरेख में गुजरते हैं – ब्रह्मचर्य आश्रम | यह वह समय है जब हम अपने को शिक्षित करते है आने वाले समय के लिए | […]


ब्रह्मज्ञान और आत्मज्ञान क्या गंभीर लोगों की धरोहर है ?

आत्मज्ञान/ ब्रह्मज्ञान प्राप्त करना है तो serious तो होना ही पड़ेगा | एक लाख नोबेल पुरस्कार स्वामी विवेकानंद के चरणों में समर्पित कर दें तो भी स्वामी के लिए उनकी कीमत zero ही रहेगी ? आत्मज्ञान ब्रह्मज्ञान भौतिक ज्ञान से हटकर है – भौतिक ज्ञान जिसका मूल उद्देश्य होता है रोटी रोज़ी कमाना |   कोई भी इंसान कितना भी […]


आत्मज्ञान सिर्फ लॉजिक है पर बहुत कम लोग आत्मज्ञान प्राप्त कर पाते हैं ?

यह बात सही है कि आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए logic के रास्ते पर चलना होता है | चिंतन में हमें logic के द्वारा सत्य तक पहुंचना है | सत्य हर हाल में एक ही है विकल्प कई हो सकते हैं | सत्य/ logic की राह पकड़ हमें भगवद गीता के श्लोकों में छिपे तत्व/ मर्म तक पहुंचना है | […]


अच्छे आध्यात्मिक अनुभव क्या पूर्व जन्म की साधना का फल हैं ?

हम इस जन्म में अध्यात्म के रास्ते पर जायेंगे कि नहीं यह पूर्व जन्म के निचोड़ (मृत्यु के समय का कर्मफल) पर निर्भर करता है | इस जन्म में हमें क्या क्या आध्यात्मिक अनुभव होंगे यह निर्भर करता है हमारे पूर्व जन्मों के संचित कर्मफल और वर्तमान जीवन के कर्मफल के आधार पर |   एक accountant की balance sheet […]


अध्यात्म का व्यावहारिक जीवन में क्या उपयोग है ?

व्यवहारिक जीवन में अध्यात्म का directly कुछ लेना देना नही | आम इंसान को जिसका गोल आध्यात्मिक नहीं – कभी भी अध्यात्म में उतरने की कोशिश नहीं करनी चाहिए | अध्यात्म में उतरने की कोशिश का मतलब है – मोह खत्म कर लेना | अध्यात्म में उतरने की चाह घर के सामंजस्य को, आनंदमय वातावरण को छिन्न भिन्न कर देगी […]


क्या सनातन धर्म सबसे बेहतर धर्म है ?

सनातन – ऐसा धर्म सो हमेशा से विद्यमान है – चाहे उसे हिन्दू धर्म कह लो या सनातन धर्म – या भारतीयों के द्वारा पालन किए जाने वाला धर्म – सनातन धर्म की विरासत 10,800 साल पुरानी है | इन्हीं 10800 सालों में वेद आए, इश्वाकु वंश आया (राम का समय), उपनिषद आए और अंततः महर्षि वेदव्यास द्वारा प्रतिपादित महाभारत […]